खबरीलाल डेस्क
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर बसा ऐतिहासिक शहर सहारनपुर इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में है। कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित एक पुरानी और विवादित मस्जिद पर प्रशासन का बुलडोजर चलने के बाद से ही राज्य का सियासी पारा गर्म था। लेकिन अब इस मामले में एक ऐसा नया पहलू सामने आया है जिसने इतिहास प्रेमियों और प्रशासनिक अधिकारियों दोनों को चौंका दिया है। मस्जिद का मलबा साफ होने के बाद जमीन के भीतर से एक प्राचीन कुआं प्रकट हुआ है, जिसके बाद से कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।READ ALSO:-मेरठ में परवान चढ़ रहा फिटनेस का जुनून: ‘मेरठ माइल्स क्लब’ के धावक 10 किमी से लेकर 42 किलोमीटर तक की फुल मैराथन के लिए तैयार
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मलबे से निकला 20 फीट गहरा कुआं: क्या है पूरा मामला?

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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर वर्षों पुरानी एक मस्जिद का ढांचा मौजूद था, जिसे प्रशासन द्वारा अवैध घोषित किया गया था। कानूनी लड़ाइयों और अदालती आदेशों के बाद जब इस मस्जिद के ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त (Demolish) कर दिया गया, तो वहां भारी मलबा इकट्ठा हो गया था।
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जब जेसीबी और मजदूरों की मदद से इस मलबे को हटाने और उस जमीन को समतल करने का काम शुरू हुआ, तो जमीन की सतह पर एक कुएं का मुहाना दिखाई दिया। जब उसकी गहराई मापी गई, तो वह लगभग 20 फीट गहरा निकला। अचानक इतने पुराने प्रशासनिक परिसर के बीचों-बीच कुआं मिलने से वहां मौजूद अधिकारी भी हैरान रह गए। सुरक्षा की दृष्टि से फिलहाल प्रशासन ने इस कुएं के खुले हिस्से को ढक दिया है, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो सके।
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कुएं के इतिहास को लेकर उठ रहे हैं अनसुलझे सवाल

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इस 20 फीट गहरे कुएं के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और इतिहास के जानकारों के मन में कई बड़े सवाल उठ खड़े हुए हैं:
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    किसने और कब बनवाया था? इस कुएं के निर्माण की सटीक तिथि या कालखंड (Era) के बारे में फिलहाल किसी के पास कोई आधिकारिक दस्तावेज या जानकारी नहीं है। क्या यह मुगल काल का है, ब्रिटिशकालीन है या उससे भी प्राचीन है?
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    मस्जिद इसके ऊपर कैसे बनी? क्या पहले से यहां कोई कुआं या ऐतिहासिक जलस्रोत मौजूद था, जिसके ऊपर बाद में यह धार्मिक ढांचा खड़ा कर दिया गया था?
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सहारनपुर सदर के एसडीएम सुबोध कुमार, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि प्रशासन को इस बात की जानकारी थी कि यह मस्जिद एक कुएं के ऊपर बनी हुई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों के पास इस कुएं के मूल उद्गम (Origin) या इसके निर्माण की सटीक तारीख के बारे में अभी कोई ठोस दस्तावेज या जानकारी उपलब्ध नहीं है। प्रशासन अब इस पूरे मामले की वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जांच कराने की तैयारी कर रहा है।
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कानूनी विवाद और अदालत का फैसला: क्यों गिराई गई थी मस्जिद?

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इस पूरे प्रकरण की कानूनी पृष्ठभूमि साल 2025 से जुड़ी हुई है। जब बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और यह जनहित याचिका/शिकायत दर्ज कराई कि कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी यह मस्जिद पूरी तरह से अवैध (Illegal Structure) है और इसे सरकारी जमीन से हटाया जाना चाहिए।
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इस मामले में लंबी सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को इस मस्जिद के खिलाफ फैसला सुनाते हुए इसे गिराए जाने का आदेश पारित किया था।
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सिटी मजिस्ट्रेट के इस आदेश के खिलाफ मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी ने हार नहीं मानी और तुरंत जिला सत्र न्यायालय (District Court) में इस फैसले को चुनौती दी। जिला अदालत में लगभग डेढ़ महीने तक दोनों पक्षों के वकीलों के बीच मैराथन सुनवाई चली। अंततः, जिला न्यायाधीश ने निचली अदालत (सिटी मजिस्ट्रेट) के आदेश को पूरी तरह से बरकरार रखा और मामले में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया, जिससे मस्जिद के ध्वस्तीकरण का रास्ता साफ हो गया।
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कड़ी सुरक्षा और पीएसी की तैनाती के बीच हुई कार्रवाई

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चूंकि मामला एक धार्मिक स्थल से जुड़ा हुआ था और सहारनपुर संवेदनशील जिलों की श्रेणी में आता है, इसलिए प्रशासन ने इस कार्रवाई से पहले सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए थे।
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ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए मौके पर पीएसी (PAC) की पांच बटालियन और भारी मात्रा में सिविल पुलिस बल को तैनात किया गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस के आला अधिकारी मुस्तैद थे। प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई, लेकिन इसके राजनीतिक और सामाजिक दूरगामी परिणाम देखने को मिले।
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सियासत गरमाई: विपक्षी दलों के निशाने पर सरकार

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कलेक्ट्रेट परिसर की इस मस्जिद के गिराए जाने और अब वहां कुआं मिलने की घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों ने इस पूरी कार्रवाई को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखे हमले किए हैं।
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    नजरबंद की गईं सांसद: समाजवादी पार्टी की एक प्रमुख सांसद को इस पूरी घटना के मद्देनजर उनके घर पर ही नजरबंद (House Arrest) कर दिया गया था, ताकि वह मौके पर न पहुंच सकें।
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    अखिलेश यादव का हमला: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रशासन के इस कदम की तीव्र शब्दों में आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बदले की भावना से और राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
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अब आगे क्या? ASI खंगालेगी कुएं का इतिहास

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चूंकि मलबे के नीचे से निकले इस कुएं ने एक नया पुरातात्विक और ऐतिहासिक सवाल खड़ा कर दिया है, इसलिए प्रशासन अब मामले को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहता।
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सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रशासन इस प्राचीन कुएं के इतिहास, इसकी वास्तुकला (Architecture) और इसके निर्माण काल का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India - ASI) की तकनीकी टीम को पत्र लिखने या आमंत्रित करने पर विचार कर रहा है। एएसआई की वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह कुआं कितना पुराना है और इसके भूगर्भिक अवशेष क्या कहते हैं।
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फिलहाल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर का यह इलाका लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एएसआई की जांच में इस कुएं को लेकर कौन से बड़े खुलासे सामने आते हैं।
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