मेरठ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से नए राज्य के गठन की मांग ने जोर पकड़ लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक पृथक राज्य यानी 'पश्चिम प्रदेश' बनाने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब एक नया और आक्रामक रूप ले लिया है। क्रांति धरा मेरठ के ऐतिहासिक चैंबर ऑफ़ कॉमर्स में आयोजित 'पश्चिम प्रदेश निर्माण संयुक्त मोर्चा' के एक बेहद महत्वपूर्ण प्रतिनिधि सम्मेलन में इस बात का स्पष्ट ऐलान कर दिया गया है कि अब यह मांग केवल कागजों या ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सड़क से लेकर सदन तक एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील किया जाएगा। आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों की राजनीतिक सुगबुगाहट के बीच, विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और कर्मचारी संगठनों का एक मंच पर आना सत्ताधारी और विपक्षी, दोनों खेमों के राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने के लिए काफी है।Read also:-गाजियाबाद: एटीएस एडवांटेज सोसायटी में 23वीं मंजिल से गिरकर युवक की मौत, रहस्यमयी घटना से मचा हड़कंप
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एक मंच, अनेक संगठन: एकजुटता का ऐतिहासिक और अभूतपूर्व प्रदर्शन
\r\n\r\nइस प्रतिनिधि सम्मेलन की सबसे बड़ी और खास बात विभिन्न वर्गों, जातियों और पेशों से जुड़े संगठनों का एक साथ एक झंडे के नीचे आना रहा। यह इस बात का प्रमाण है कि पश्चिम प्रदेश की मांग अब किसी एक विशेष वर्ग की न होकर जन-जन की आवाज बन चुकी है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएसपी धरमबीर सिंह मलिक ने पूरी गरिमा और अनुशासन के साथ की, जबकि मंच का कुशल और ऊर्जावान संचालन हिमांशु सिंह द्वारा किया गया। इस महाधिवेशन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख और सबसे प्रभावशाली मंडलों—सहारनपुर, मेरठ तथा मुरादाबाद के पदाधिकारियों ने भारी संख्या में शिरकत की। सम्मेलन में जिन प्रमुख संगठनों ने आपसी मतभेद भुलाकर कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प लिया, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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- \r\n राष्ट्रीय खेल मोर्चा\r\n \r\n
- \r\n शोषित क्रांति दल\r\n \r\n
- \r\n अधिकारी कल्याण परिषद\r\n \r\n
- \r\n नव राज्य निर्माण संघ\r\n \r\n
- \r\n बार एसोसिएशन व हाई कोर्ट संघर्ष समिति\r\n \r\n
- \r\n विभिन्न किसान यूनियन और दर्जनों अन्य सामाजिक-राजनीतिक संगठन\r\n \r\n
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चुनावी बिसात और राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने की अचूक रणनीति
\r\n\r\nसम्मेलन का मुख्य फोकस आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर था। अलग राज्य की मांग कर रहे नेताओं को भली-भांति पता है कि चुनाव का समय ही वह वक्त होता है जब राजनीतिक दल जनता की मांगों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।
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पश्चिम प्रदेश निर्माण संयुक्त मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष सतपाल यादव ने अपने ओजस्वी संबोधन में इसी रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब वोट मांगने आने वाले राजनीतिक दलों को उनकी जवाबदेही और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकारों का अहसास कराया जाए। सतपाल यादव ने सम्मेलन में उपस्थित सभी सहयोगी संगठनों से पुरजोर अपील की कि वे आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों पर एक रणनीतिक और संगठित दबाव बनाएं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस दबाव को धरातल पर उतारने के लिए अगले दो महीनों के भीतर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों, कस्बों और गांवों में बड़े और व्यापक स्तर के जन-जागरण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लाखों की संख्या में आम जनता को जोड़ा जाएगा।
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आंदोलन का लेखा-जोखा और आगामी दिशा-निर्देश
\r\n\r\nकिसी भी आंदोलन की सफलता उसकी पारदर्शी कार्यप्रणाली पर निर्भर करती है। इसी कड़ी में, मोर्चे के केंद्रीय महासचिव कर्नल सुधीर चौधरी ने अब तक के आंदोलन का पूरा विस्तृत लेखा-जोखा सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि मोर्चे ने अब तक क्या खोया है, क्या पाया है और भविष्य की चुनौतियां क्या हैं। उन्होंने आंदोलन की आगामी और आक्रामक रणनीति की घोषणा करते हुए सभी पदाधिकारियों को उनके दायित्व सौंपे। अधिकारी कल्याण परिषद की तरफ से कर्नल सुधीर चौधरी के साथ ओमवीर सिंह वीरवाल और बाबूराम बालियान ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे यह संदेश गया कि पूर्व प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी भी इस मुहिम में पूरी तरह से सक्रिय हैं।
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विधानसभा का पुराना प्रस्ताव: यूपी को 4 राज्यों में बांटने की गूंज
\r\n\r\nइस सम्मेलन में आंदोलन को वैधानिक और संवैधानिक आधार देने पर भी गहन चर्चा हुई। शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने अपने तार्किक और धारदार भाषण में उत्तर प्रदेश विधानसभा के उस ऐतिहासिक पन्ने को पलटा जिसे अक्सर राजनीतिक दल भूल जाना चाहते हैं। उन्होंने विधानसभा में पूर्व में पास किए गए उस प्रस्ताव का प्रमुखता से जिक्र किया, जिसमें उत्तर प्रदेश के विशाल आकार और प्रशासनिक कठिनाइयों को देखते हुए इसे 4 छोटे राज्यों (पश्चिम प्रदेश, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पूर्वांचल) में बांटने की बात कही गई थी। रविकांत ने केंद्र और राज्य सरकार से पुरजोर मांग की कि लोकतंत्र और विधानसभा की गरिमा का सम्मान करते हुए उस प्रस्ताव को अविलंब लागू किया जाए ताकि पश्चिमी यूपी का समुचित विकास हो सके।
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न्यायिक संघर्ष: हाई कोर्ट बेंच और वकीलों का खुला समर्थन
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक अन्य सबसे पुरानी और ज्वलंत मांग यहां इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक बेंच की स्थापना करना है, जो सीधे तौर पर अलग राज्य की मांग से जुड़ती है। इस आंदोलन को कानूनी और बौद्धिक मजबूती प्रदान करते हुए, मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केपी शर्मा ने सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी वकीलों और बार एसोसिएशनों की तरफ से मोर्चे को पूर्ण और सक्रिय सहयोग का आश्वासन दिया। न्यायपालिका से जुड़े लोगों के इस खुले समर्थन ने मोर्चे के नेताओं और कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।
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खिलाड़ियों, किसानों और युवाओं का बढ़ता कारवां
\r\n\r\nराज्य निर्माण का यह आंदोलन अब चौपालों से निकलकर खेल के मैदानों और खेतों तक पहुँच गया है। कार्यक्रम में पश्चिमी यूपी की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले 'किसानों' की नुमाइंदगी कर रही विभिन्न किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं दूसरी ओर, युवाओं और खिलाड़ियों की आवाज बुलंद करते हुए राष्ट्रीय खेल मोर्चा की तरफ से डी.एस.पी. जगराज सिंह और शिव कौशिक ने मंच साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी यूपी के युवा और खिलाड़ी देश के लिए सबसे ज्यादा मेडल लाते हैं, लेकिन संसाधनों और अलग खेल नीति के अभाव में वे पिछड़ रहे हैं, जिसका समाधान केवल 'पश्चिम प्रदेश' के निर्माण में ही है। इसके साथ ही, नव राज्य निर्माण संघ की तरफ से कमलेश झा ने राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने और उच्च स्तर पर तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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नोएडा कार्यालय में मंथन और आगे की राह
\r\n\r\nसम्मेलन की सफलता केवल मेरठ तक सीमित नहीं रही। कार्यक्रम के समापन के पश्चात भी बैठकों का दौर जारी रहा। कई गणमान्य पदाधिकारियों ने मोर्चा के दिल्ली-एनसीआर के रणनीतिक केंद्र यानी नोएडा कार्यालय का दौरा किया। वहां पहुंचकर उन्होंने आंदोलन को धार देने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए और अपने-अपने संघों की पूरी शक्ति और संसाधन मोर्चे को समर्पित करने का दृढ़ संकल्प लिया।
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मेरठ के चैंबर ऑफ़ कॉमर्स में संपन्न हुआ यह प्रतिनिधि सम्मेलन इस बात का स्पष्ट और अकाट्य संकेत है कि 'पश्चिम प्रदेश' की मांग अब एक निर्णायक और आक्रामक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सभी संगठनों ने अपने छोटे-मोटे आपसी मतभेदों को दरकिनार कर जिस तरह एकजुटता का परिचय दिया है, उससे मोर्चे को एक अपार शक्ति मिली है। यदि सम्मेलन में तय की गई यह रूपरेखा जमीन पर इसी तरह ईमानदारी से लागू होती रही, तो कोई संदेह नहीं कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में 'पश्चिम प्रदेश' का मुद्दा सभी राजनीतिक दलों के लिए एक ऐसी बड़ी चुनौती बन जाएगा, जिसे नजरअंदाज करना उनके लिए राजनीतिक आत्महत्या के समान होगा। जल्द से जल्द नए प्रदेश के निर्माण के लिए यह एकजुटता मील का पत्थर साबित होगी।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट 'पश्चिम प्रदेश निर्माण संयुक्त मोर्चा' द्वारा आयोजित प्रतिनिधि सम्मेलन में दिए गए वक्तव्यों, प्रेस विज्ञप्तियों और वहां मौजूद विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। न्यूज़ पोर्टल या लेखक किसी भी राजनीतिक दल, अलग राज्य की मांग या संगठन का व्यक्तिगत रूप से न तो समर्थन करता है और न ही विरोध। इस लेख का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों की निष्पक्ष और विस्तृत जानकारी पाठकों तक पहुंचाना है।