शकील अहमद
बिजनौर (नूरपुर): उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। पश्चिमी यूपी का अहम जिला बिजनौर और उसकी हॉट सीट 'नूरपुर विधानसभा' (Noorpur Assembly) इन दिनों सियासी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन राजनीतिक दलों के संभावित दावेदारों ने अभी से जनता की नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर और युवा संभावित प्रत्याशी इं. कवीश राणा (Er. Kavish Rana) ने नूरपुर में अपना जनसंपर्क अभियान बेहद तेज कर दिया है।Read also:-पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर होगी भारी बढ़ोतरी? कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, तेल कंपनियों को भारी घाटा, आम जनता पर मंडराया महंगाई का खतरा!
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लगातार गांवों, कस्बों और चौपालों तक पहुंच रहे कवीश राणा न सिर्फ सत्ताधारी पार्टी की जनकल्याणकारी नीतियों का बखान कर रहे हैं, बल्कि नूरपुर के सर्वांगीण विकास को लेकर अपना एक स्पष्ट और पारदर्शी ब्लूप्रिंट भी जनता के सामने रख रहे हैं। उनकी इस सक्रियता ने जहां एक ओर भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है।
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एक शिक्षित और युवा चेहरे की बढ़ती लोकप्रियता

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राजनीति में अक्सर पारंपरिक चेहरों का बोलबाला रहता है, लेकिन नूरपुर की जनता के बीच इं. कवीश राणा एक 'पढ़े-लिखे, विजनरी और युवा' विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आने के कारण उनका समस्याओं को देखने और सुलझाने का नजरिया बेहद तकनीकी और व्यावहारिक है। वह केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर समस्या के जड़ तक जाकर उसके स्थायी समाधान की बात कर रहे हैं।
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जनसंपर्क अभियान के दौरान, कवीश राणा का काफिला जहां भी पहुंचता है, वहां युवाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ जुट रही है। वह बड़े मंचों से भाषण देने के बजाय ज़मीनी स्तर पर लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। 'चाय पर चर्चा' हो या गांवों की 'नुक्कड़ चौपाल', उनका सीधा और सरल संवाद लोगों के दिलों में जगह बना रहा है।
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क्या है कवीश राणा का 'विजन नूरपुर'? (प्राथमिकताएं और वादे)

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यदि नूरपुर की जनता और पार्टी नेतृत्व उन्हें 2027 में मौका देती है, तो कवीश राणा ने अपनी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट कर दी हैं। उनके जनसंपर्क संवाद में मुख्य रूप से 5 स्तंभों पर जोर दिया जा रहा है:
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    गन्ना किसानों का सम्मान और कृषि विकास: बिजनौर जिला गन्ने की बेल्ट है और किसान यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कवीश राणा का स्पष्ट मानना है कि किसानों की खुशहाली के बिना क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। उनका विजन गन्ना किसानों का शत-प्रतिशत और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित कराना है। इसके अलावा, वह सिंचाई के लिए आधुनिक जल प्रबंधन, आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान और किसानों को उन्नत खेती के लिए जागरूक करने जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।
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    युवाओं के लिए रोजगार और खेलकूद: आज का युवा सिर्फ खोखले वादे नहीं चाहता, उसे रोजगार और अवसर चाहिए। इं. कवीश राणा अपनी बैठकों में लगातार स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा (ITI/Polytechnic) के अवसर बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इसके साथ ही, ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए अत्याधुनिक खेल मैदानों व मिनी स्टेडियम के निर्माण को वह अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रखते हैं।
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    मजबूत बुनियादी ढांचा (सड़क, जल निकासी और बिजली): नूरपुर विधानसभा के कई ग्रामीण इलाके आज भी खस्ताहाल सड़कों और जलभराव (ड्रेनेज) की समस्या से जूझ रहे हैं। कवीश राणा का कहना है कि कनेक्टिविटी ही विकास का पहला रास्ता है। उनका लक्ष्य विधानसभा की हर मुख्य और संपर्क मार्ग को गड्ढामुक्त और सुदृढ़ बनाना है। साथ ही, बरसात के दिनों में होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए एक मास्टर ड्रेनेज प्लान लागू करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
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    बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। संभावित भाजपा प्रत्याशी का संकल्प है कि नूरपुर के प्राथमिक (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को हाई-टेक बनाया जाए। वहां डॉक्टरों की 24 घंटे उपलब्धता, महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को सुलभ बनाना उनके विजन का अहम हिस्सा है।
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    महिला सुरक्षा और स्वावलंबन: डबल इंजन सरकार की नीतियों के अनुरूप, कवीश राणा भी आधी आबादी के उत्थान की बात कर रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उनके लिए एक सुरक्षित व भयमुक्त माहौल तैयार करना उनके चुनावी संवाद का मुख्य बिंदु है।
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क्या कहता है स्थानीय समीकरण?

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नूरपुर विधानसभा सीट का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। यह सीट कभी किसी एक पार्टी का गढ़ नहीं रही, बल्कि जनता ने हमेशा काम और लहर के आधार पर अपना नेता चुना है। ऐसे में 2027 के महासमर से पहले कवीश राणा की यह 'ग्राउंड जीरो' वाली रणनीति मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा यदि किसी युवा और बेदाग छवि वाले नेता पर दांव लगाती है, तो नूरपुर में चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं। समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए यह सीट हमेशा से अहम रही है, लेकिन कवीश राणा द्वारा जिस तरह से हर वर्ग (विशेषकर युवाओं और किसानों) को साधा जा रहा है, उसने विपक्ष को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।
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कवीश राणा का बेबाक वक्तव्य

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अपने जनसंपर्क अभियानों के दौरान जनता को संबोधित करते हुए कवीश राणा स्पष्ट शब्दों में कहते हैं, "नूरपुर विधानसभा क्षेत्र का सर्वांगीण विकास ही मेरा एकमात्र और मुख्य संकल्प है। मैं यहां सिर्फ राजनीति करने नहीं, बल्कि जनसेवा के माध्यम से बदलाव लाने आया हूं। भारतीय जनता पार्टी और आदरणीय योगी जी-मोदी जी की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और आपकी हर स्थानीय समस्या का मजबूती से समाधान निकालना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।"
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आगे की राह

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जैसे-जैसे 2027 का चुनाव नजदीक आएगा, नूरपुर में राजनीतिक गर्मी और भी परवान चढ़ेगी। टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी के भीतर भी कई चेहरे आमने-सामने होंगे, लेकिन जिस आक्रामकता, ऊर्जा और सुव्यवस्थित तरीके से इं. कवीश राणा ने अपना जनसंपर्क अभियान शुरू किया है, उसने उन्हें रेस में काफी आगे खड़ा कर दिया है।
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अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नूरपुर की देवतुल्य जनता कवीश राणा के इस विकास मॉडल और उनके विजन को आने वाले समय में कितना आत्मसात करती है। बहरहाल, उनके इस तूफानी जनसंपर्क ने विधानसभा की फिजाओं में एक नए बदलाव की उम्मीद जरूर जगा दी है।
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