अनिल कुमार शर्मा, विशेष संवाददाता | खबरीलाल मीडिया
\r\n\r\nधामपुर (बिजनौर)। बिजनौर जिले के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगर धामपुर स्थित राजपूताना रिसोर्ट में 'युवा नेक्सस' सम्मेलन का अत्यंत भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतों और राज्यों से आए सैकड़ों ऊर्जावान युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सही मार्गदर्शन प्रदान करना था।
\r\n\r\nसम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रचार टोली के वरिष्ठ प्रचारक तथा नागपुर से पधारे मुकुल कांतिकार (द्वितीय) ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। अपने ओजस्वी, विचारोत्तेजक एवं सारगर्भित संबोधन से उन्होंने सभागार में मौजूद संपूर्ण युवा समूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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'रील बनाने में समय न गंवाएं, राष्ट्र निर्माण का संकल्प लें'
\r\n\r\nआज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया के प्रभाव पर बोलते हुए मुख्य वक्ता मुकुल कांतिकार ने युवाओं को वास्तविक जीवन के धरातल पर उतरकर कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने सीधे तौर पर युवाओं का आह्वान करते हुए कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"आज का युवा सोशल मीडिया पर महज छोटी-छोटी वीडियो या रील बनाने तक सीमित न रहे। युवाओं को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। रील बनाने के बजाय राष्ट्र निर्माण की सोच विकसित करें। भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी युवा शक्ति किस दिशा में अपनी ऊर्जा लगा रही है।"\r\n
उन्होंने कहा कि जब तक देश का युवा राष्ट्रहित को अपने व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर नहीं रखेगा, तब तक एक सशक्त और समृद्ध भारत की कल्पना अधूरी रहेगी।
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'परंपरा में रहना ही सबसे बड़ी आधुनिकता है'
\r\n\r\nपश्चिमी संस्कृति के अंधे अनुकरण पर कड़ा प्रहार करते हुए मुकुल कांतिकार ने भारतीय जीवन शैली और परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अक्सर आधुनिकता के नाम पर युवा अपनी प्राचीन परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं, जो कि एक भ्रामक सोच है।
\r\n\r\nउन्होंने स्पष्ट किया:
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- \r\n भारतीय संस्कृति की महानता: हमारी भारतीय सनातन परंपराएं वैज्ञानिकता और जीवन के गहरे मूल्यों पर आधारित हैं।\r\n \r\n
- \r\n सच्ची आधुनिकता: अपनी समृद्ध परंपराओं और संस्कारों का पालन करते हुए आगे बढ़ना ही वास्तव में सबसे बड़ी और सच्ची आधुनिकता है।\r\n \r\n
- \r\n संस्कार और चरित्र निर्माण: युवाओं को अपने पूर्वजों के उच्च आदर्शों, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक मूल्यों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।\r\n \r\n
स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और अर्थव्यवस्था को मजबूती का आह्वान
\r\n\r\nदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए मुख्य वक्ता ने 'स्वदेशी' के मंत्र पर विशेष बल दिया। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं और अपने ही देश में निर्मित उत्पादों का उपयोग करने की आदत डालें।
\r\n\r\nउन्होंने कहा कि जब देश का प्रत्येक नागरिक और विशेषकर युवा वर्ग स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देगा, तो इससे न केवल स्थानीय उद्योग-धंधों और कारीगरों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था भी विश्व स्तर पर अत्यधिक मजबूत और सुदृढ़ होगी। स्वदेशी अपनाना भी देशभक्ति का ही एक महान रूप है।
\r\n\r\nस्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा
\r\n\r\nअपने संबोधन के अंतिम चरण में मुकुल कांतिकार ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके विचारों और ओजस्वी संदेशों को अपने आचरण में उतारने का जोरदार आह्वान किया।
\r\n\r\nउन्होंने याद दिलाया कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति माना था और 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए' का संदेश दिया था। उन्होंने उपस्थित संपूर्ण युवा शक्ति को संगठित होकर राष्ट्र पुननिर्माण, समाज सेवा और देश की संप्रभुता की रक्षा में पूरी निष्ठा के साथ समर्पित रहने का संकल्प दिलाया।
\r\n\r\nकार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा दूर-दराज के प्रांतों से आए सभी युवा प्रतिनिधियों तथा सम्मानित अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति के नारों और भारत माता की जयघोष से गुंजायमान रहा।