मेरठ: त्योहारी सीजन विशेषकर दीपावली (Diwali) के नजदीक आते ही अवैध रूप से पटाखे बनाने और भारी मुनाफा कमाने का काला खेल शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश की मेरठ पुलिस (Meerut Police) ने सतर्कता दिखाते हुए शहर को एक बड़े खतरे से बचा लिया है। मेरठ के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पुलिस की 10 से अधिक टीमों ने रातभर ताबड़तोड़ छापेमारी की और कई हजार किलोग्राम अवैध विस्फोटक और पटाखा बनाने की सामग्री बरामद की है।READ ALSO:-बिजनौर: महिला सशक्तिकरण कागजी आंकड़ों से निकले बाहर, धरातल पर दिखे असर! राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर का कड़ा संदेश
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इस हाई-प्रोफाइल मामले में गुरुवार को पुलिस ने दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर लिए हैं। अवैध पटाखों के इस कारोबार के तार शहर के जाने-माने नाम गौरव मोहन और उनके भाई वैभव मोहन से जुड़े पाए गए हैं, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस बड़ी कार्रवाई से पटाखा माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
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कैसे बिछाया गया था बारूद का जाल? (छापेमारी की इनसाइड स्टोरी)
\r\n\r\nबुधवार को मेरठ पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का भंडारण किया गया है। सूचना के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले देहलीगेट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लाला का बाजार स्थित एक गोदाम पर छापा मारा। यहां से पुलिस को बड़ी मात्रा में पटाखों में इस्तेमाल होने वाली मिश्रित सामग्री मिली। जांच में पता चला कि यह माल कथित तौर पर 'ग्रीन क्रैकर्स' (Green Crackers) बेचने वाले गौरव मोहन का है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गौरव मोहन को हिरासत में ले लिया।
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इस कार्रवाई के कुछ ही देर बाद पुलिस टीम ने एक और बड़ा ऑपरेशन चलाया। रेलवे रोड थाना क्षेत्र के केसरगंज दाल मंडी स्थित एक अन्य गोदाम पर दबिश दी गई। यह गोदाम गौरव के भाई वैभव मोहन का बताया गया। पुलिस ने यहां से भी भारी मात्रा में प्रतिबंधित और ज्वलनशील सामग्री बरामद की और वैभव मोहन को भी हिरासत में लेकर गोदाम को सील कर दिया।
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शहर से देहात तक पुलिस का कड़ा पहरा
\r\n\r\nपुलिस की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। देहलीगेट और रेलवे रोड के गोदामों के अलावा पुलिस टीमों ने रात में ही रोहटा क्षेत्र के एक गोदाम पर भी छापा मारा, जो गौरव मोहन का ही बताया जा रहा है। यहां पुलिस को बड़ी मात्रा में पहले से तैयार किए गए पटाखों का जखीरा बरामद हुआ।
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जिस प्रकार का विस्फोटक और कच्चा माल इन गोदामों से मिला है, वह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि इसका उपयोग सामान्य और अत्यधिक आवाज व प्रदूषण वाले पटाखे तैयार करने में किया जाना था। दीपावली से ठीक पहले इस खेप का पकड़ा जाना इस बात का प्रमाण है कि बड़े पैमाने पर अवैध पटाखों की सप्लाई की तैयारी थी।
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गोदामों से बरामद हुआ मौत का सामान (Chemicals Seized)
\r\n\r\nपुलिस और फोरेंसिक टीमों के होश तब उड़ गए जब उन्होंने गोदामों में रखे ड्रमों और बोरों की जांच की। इन ठिकानों से बेहद खतरनाक और ज्वलनशील रसायनों का जखीरा मिला है। बरामद की गई सामग्री में मुख्य रूप से शामिल हैं:
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- \r\n फ्यूज वायर (Fuse Wire)\r\n \r\n
- \r\n एल्यूमीनियम फ्लैक और एल्यूमिनियम पाउडर (Aluminum Powder)\r\n \r\n
- \r\n बीटा ब्लू (Beta Blue)\r\n \r\n
- \r\n मैग्नीशियम पाउडर (Magnesium Powder)\r\n \r\n
- \r\n बेरियम कार्बोनेट (Barium Carbonate - पटाखों में हरे रंग के लिए इस्तेमाल होने वाला अत्यधिक जहरीला रसायन)\r\n \r\n
- \r\n टाइटेनियम पाउडर (Titanium Powder)\r\n \r\n
- \r\n चारकोल के बड़े-बड़े ड्रम और बोरे\r\n \r\n
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पुलिस की फोरेंसिक टीम ने गुरुवार को इन सभी ज्वलनशील सामग्रियों के नमूने जुटा लिए हैं और इन्हें जांच के लिए लैब भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह मिश्रण कितना हानिकारक और मारक क्षमता वाला है, इसकी सटीक जानकारी लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेगी। फिलहाल एहतियात के तौर पर सारा माल सील कर दिया गया है।
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गौरव-वैभव मोहन पर गिरी कानून की गाज
\r\n\r\nगुरुवार को पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सख्त कानूनी कदम उठाते हुए विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act) के तहत दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर लिए हैं।
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- \r\n पहला मुकदमा देहलीगेट थाने में दर्ज किया गया है, जिसका मुख्य आरोपी गौरव मोहन को बनाया गया है।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा मुकदमा रेलवे रोड थाने में दर्ज हुआ है, जिसमें केसरगंज दाल मंडी वाले गोदाम के संचालक वैभव मोहन को नामजद किया गया है।\r\n \r\n
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पुलिस अब गौरव मोहन के 'ग्रीन क्रैकर्स' के दावों और उनके पुराने लाइसेंसों की भी बारीकी से जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल जिसका पुलिस जवाब ढूंढ रही है, वह यह है कि इतनी भारी मात्रा में यह प्रतिबंधित रसायनों की खेप मेरठ तक कैसे और कहां से पहुंची? इसकी पूरी सप्लाई चेन को खंगाला जा रहा है।
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NGT और सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद जारी है काला खेल
\r\n\r\nगौरतलब है कि बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में ही दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र में पटाखों की बिक्री, भंडारण और निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इसी आदेश के अनुपालन में मेरठ जनपद में भी 42 पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे।
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बावजूद इसके, हर साल दीपावली के आसपास मेरठ में अवैध पटाखों का कारोबार सिर उठाने लगता है। अमूमन पुलिस ऐन मौके पर कार्रवाई करती है, जिससे पहले ही काफी माल बाजार में खप चुका होता है। लेकिन इस बार पुलिस ने समय रहते सतर्कता बरती और एक बड़ी खेप को बाजार में पहुंचने से पहले ही रोक लिया।
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क्या बोले एसपी सिटी?
\r\n\r\nइस पूरी कार्रवाई और पुलिस की आगे की रणनीति पर मेरठ के एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:
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\r\n\r\n\r\n"शहर के अलग-अलग गोदामों से विस्फोटक बरामद होने के मामले में गौरव और वैभव मोहन के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के अंतर्गत मुकदमे दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस की टीमें माल की सप्लाई चेन और अन्य कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहनता से छानबीन कर रही हैं। शुक्रवार को दोनों आरोपियों को पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। जिले में किसी भी रूप में अवैध पटाखों का निर्माण या भंडारण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"\r\n
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इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन के सामने यह चुनौती खड़ी कर दी है कि प्रतिबंधों के बावजूद शहर के बीचों-बीच विस्फोटक कैसे पहुंच रहा है। फिलहाल, मेरठ पुलिस की रडार पर शहर के कई अन्य संदिग्ध गोदाम भी हैं, जिन पर जल्द ही कार्रवाई देखने को मिल सकती है।