खबरीलाल टीम
उत्तरकाशी (Uttarakhand News): देवभूमि उत्तराखंड अपनी असीम प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे हिमालयी पर्वतों और रोमांचक ट्रेकिंग रूट्स के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक और एडवेंचर के शौकीन इन वादियों का रुख करते हैं। लेकिन कभी-कभी ये खूबसूरत वादियां किसी गहरे रहस्य और खौफनाक त्रासदी का गवाह भी बन जाती हैं। ताजा और बेहद हैरान कर देने वाला मामला उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध 'दयारा बुग्याल ट्रेक' (Dayara Bugyal Trek) से सामने आया है। यहां ट्रेकिंग का लुत्फ उठाने आई एक 23 वर्षीय MBA की छात्रा रहस्यमयी परिस्थितियों में अचानक लापता हो गई है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी छात्रा का कोई सुराग नहीं लग सका है, जिसके बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।READ ALSO:-यूपी में मौसम का मिजाज बिगड़ा: 38 शहरों में भयंकर आंधी-तूफान का अलर्ट, लखनऊ से लेकर बिजनौर तक झमाझम बारिश; जानिए कब आएगा मानसून

 

रायथल गांव से शुरू हुआ था रोमांच का सफर, CCTV में कैद हुए आखिरी पल

लापता छात्रा की पहचान 23 वर्षीय बबीता पांडे के रूप में हुई है, जो प्रबंधन (MBA) की पढ़ाई कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बबीता अपने दो अन्य दोस्तों के साथ हिमालय की गोद में ट्रेकिंग का रोमांच महसूस करने के लिए उत्तरकाशी पहुंची थी। इस दल ने 28 मई को उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक स्थित रायथल गांव में अपना बेस बनाया था।

 

रायथल गांव दयारा बुग्याल ट्रेक का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि बबीता और उसके दोस्त 28 मई की रात इसी गांव के एक होमस्टे में रुके थे। पुलिस ने गांव के अहम स्थानों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी खंगाले हैं, जिसमें बबीता और उसके दोस्त स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं। यह उनके सफर के शुरुआती और खुशनुमा पल थे, लेकिन किसी को नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है। अगले दिन उन्होंने रायथल से दयारा बुग्याल के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू की, लेकिन सफर के बीच में ही, एक कैंप के पास से बबीता अचानक गायब हो गई।

 

कैसे हवा में गायब हो गई बबीता? ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
बबीता पांडे के लापता होने की यह घटना किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म जैसी प्रतीत हो रही है। आखिर एक लड़की अपने दोस्तों और गाइड के साथ चलते-चलते अचानक कैसे गायब हो सकती है? इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा शक की सुई उस ट्रेकिंग एजेंसी पर घूम रही है, जिसके जरिए यह यात्रा आयोजित की गई थी।

 

पुलिस और प्रशासन की प्रारंभिक जांच में ट्रेकिंग एजेंसी की कई गंभीर लापरवाहियां उजागर हुई हैं। सबसे बड़ा और हैरान करने वाला सवाल यह है कि जब बबीता ट्रेक से लापता हुई, तो एजेंसी के गाइड और स्टाफ ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन, वन विभाग या पुलिस को क्यों नहीं दी? सूचना देने में की गई इस देरी ने बबीता की जान को और भी ज्यादा जोखिम में डाल दिया है। इसके अलावा, ऐसे भी गंभीर आरोप लग रहे हैं कि ट्रेकिंग एजेंसी ने पैसे बचाने या अधिक रोमांच के नाम पर पर्यटकों को तय और सुरक्षित रास्तों के बजाय प्रतिबंधित और बेहद खतरनाक रास्तों पर ले जाने का जोखिम उठाया।

 

पुलिस का सख्त एक्शन: स्थानीय गाइड और एजेंसी मैनेजर हिरासत में

मामले की संवेदनशीलता और एजेंसी की घोर लापरवाही को देखते हुए पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की है। उत्तरकाशी पुलिस ने ट्रेकिंग दल के साथ मौजूद स्थानीय गाइड और पूरी यात्रा का प्रबंधन देखने वाले एजेंसी के मैनेजर को तत्काल प्रभाव से हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों द्वारा बंद कमरे में इन दोनों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना वाले दिन वास्तव में क्या हुआ था। बबीता किस रास्ते से भटकी? क्या उसके साथ कोई हादसा हुआ या कोई अन्य अनहोनी?

 

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने और पर्यटकों की जान जोखिम में डालने के आरोप में ट्रेकिंग एजेंसी का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

150 से अधिक जवानों का महा-तलाशी अभियान (Massive Search Operation)

समय बीतने के साथ ही बबीता पांडे के सुरक्षित वापस लौटने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन ने हार नहीं मानी है। उत्तराखंड पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), भारतीय सेना, वन विभाग और स्थानीय आपदा प्रबंधन के कर्मियों को मिलाकर एक विशाल संयुक्त रेस्क्यू टीम का गठन किया गया है।

 

वर्तमान में 150 से अधिक प्रशिक्षित और जांबाज जवान दयारा बुग्याल के चप्पे-चप्पे को छान रहे हैं। हिमालय की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगल, खड़ी खाइयां और खराब मौसम इस तलाशी अभियान में भारी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। आसमान से हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों से लैस ड्रोन और सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से उन गहरी खाइयों और अगम्य क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है, जहां इंसानों का पहुंचना लगभग नामुमकिन है। खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की विशेष टीमें भी बबीता के आखिरी लोकेशन के आधार पर सुराग ढूंढने में लगी हुई हैं।

 

उत्तराखंड सरकार हुई सख्त: ट्रेकिंग के लिए लागू किए नए और कड़े दिशा-निर्देश

इस दर्दनाक और रहस्यमयी घटना ने उत्तराखंड सरकार और पर्यटन विभाग की आंखें खोल दी हैं। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही ट्रेकिंग दुर्घटनाओं और एजेंसियों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से नए और बेहद सख्त दिशा-निर्देश (Strict Trekking Guidelines) लागू कर दिए हैं:

 

  1. GPS ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य: अब उत्तराखंड के किसी भी हिमालयी क्षेत्र में ट्रेकिंग पर जाने वाले प्रत्येक ट्रेकर और दल के पास 'GPS ट्रैकिंग डिवाइस' होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे आपातकालीन स्थिति में ट्रेकर्स की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा और रेस्क्यू ऑपरेशन में लगने वाला बेशकीमती समय बचेगा।
  2. रजिस्टर्ड और प्रमाणित गाइड: किसी भी पर्यटक या दल को बिना प्रमाणित और पर्यटन विभाग में पंजीकृत (Registered) गाइड के साहसिक ट्रेक पर जाने की अनुमति नहीं होगी।
  3. स्थानीय प्रशासन को पूर्व सूचना: किसी भी ट्रेक को शुरू करने से पहले ट्रेकिंग एजेंसी को स्थानीय पुलिस चौकी, वन विभाग और पर्यटन कार्यालय में दल के सभी सदस्यों की पूरी जानकारी (नाम, उम्र, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट) जमा करानी होगी।
  4. प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश पर पूर्ण रोक: वन विभाग द्वारा चिह्नित खतरनाक और प्रतिबंधित मार्गों (Restricted Routes) पर किसी भी स्थिति में पर्यटकों को ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। नियम तोड़ने वाली एजेंसियों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

दयारा बुग्याल का भूगोल और ट्रेकर्स के लिए खतरे

समुद्र तल से लगभग 10,000 से 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल अपनी मखमली घास के मैदानों और हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। हालांकि यह ट्रेक देखने में जितना खूबसूरत है, भौगोलिक रूप से उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। यहां का मौसम पल भर में बदल जाता है। अचानक आने वाला घना कोहरा, बारिश और बर्फीली हवाएं अच्छे-अच्छे ट्रेकर्स को रास्ता भटका सकती हैं। ऐसे में बिना सही जानकारी, उचित उपकरणों और अनुभवी गाइड के इस क्षेत्र में प्रवेश करना सीधे तौर पर मौत को दावत देने के समान है।

 

बबीता पांडे के लापता होने की घटना उन सभी पर्यटकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो एडवेंचर के नाम पर पहाड़ों की ताकत और मौसम की अनिश्चितता को कम आंकते हैं। फिलहाल, पूरा देश और बबीता का परिवार उसकी सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहा है। सभी की निगाहें उन 150 जवानों पर टिकी हैं, जो अपनी जान की परवाह किए बिना उस लापता बेटी को वापस लाने के लिए हिमालय के सीने को चीरकर आगे बढ़ रहे हैं।
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