खबरीलाल टीम
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस ऐतिहासिक और संवेदनशील कदम के बाद, 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) ने आगामी 5 सितंबर को दिल्ली में होने वाले अपने प्रस्तावित विशाल मार्च को वापस लेने (स्थगित करने) का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से उन हजारों छात्रों और युवाओं को बड़ी कानूनी राहत मिली है जो पिछले कुछ समय से मामलों के कानूनी पंजों में फंसे हुए थे।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में मौत का हाईवे! NH-58 पर अज्ञात वाहन ने पूर्व प्रधान को रौंदा, इलाज से पहले मौत—CCTV से खुलेगा राज

 

केंद्र सरकार के आश्वासन पर आया अदालत का आदेश सुप्रीम कोर्ट का यह महत्वपूर्ण आदेश केंद्र सरकार के उस सकारात्मक रुख और आश्वासन के बाद आया है, जिसमें सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को अवगत कराया था कि सरकार 20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस ले लेगी। साथ ही, सरकार की ओर से यह भी भरोसा दिया गया है कि भविष्य में इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को लेकर कोई भी नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास और सकारात्मक बातचीत की सराहना करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया में एक अच्छा कदम बताया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोनों पक्षों ने बहुत ही सकारात्मक रुख अपनाया है और अंततः न्याय की जीत हुई है।

 

गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वालों को नहीं मिलेगी छूट हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है, लेकिन असामाजिक तत्वों या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इसमें छूट नहीं दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान शामिल कुल 2,873 लोगों में से कुछ खास मामलों में एक विशिष्ट एफआईआर पर आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है। जिन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी गई है, उनका पुराना गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। अदालत ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से इस बिंदु पर पूरी स्पष्टता रखी है।

 

CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का मार्च सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले और सरकार के सकारात्मक आश्वासन के बाद, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने आधिकारिक रूप से जानकारी दी कि संगठन ने 5 सितंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को वापस लेने का निर्णय लिया है। CJP ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच, दोनों पक्षों के वकीलों और न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि अदालत के इस आदेश का समय पर और पूरी सख्ती से पालन किया जाएगा, जिससे किसी भी छात्र को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

पीड़ित परिवारों के मुआवजे के लिए तीन महीने की समयसीमा इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी (NEET-UG 2026) परीक्षा के रद्द होने और पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं के बाद मानसिक तनाव या अन्य कारणों से आत्महत्या करने वाले अभागे छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी कड़े निर्देश दिए हैं।

 

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के अपने वादे पर पूरी तरह कायम है। हालांकि, इस आर्थिक सहायता को वितरित करने और उसके सही तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए शासन स्तर पर थोड़ा वक्त चाहिए, जिसके लिए उन्होंने तीन महीने का समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि निर्धारित तीन महीने के भीतर मुआवजे की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके।
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