खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में जनपद बिजनौर की पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसते हुए एक अहम कामयाबी हासिल की है। बिजनौर जिले के थाना नूरपुर पुलिस ने एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ जघन्य अपराध करने के मामले में त्वरित और प्रभावी कानूनी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश है कि महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अपराधियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।READ ALSO:-दिल्ली में फिर लौटी 'निर्भया' जैसी दहशत: खाली स्लीपर बस में 11वीं की छात्रा से दरिंदगी, 47 KM तक चलता रहा खौफनाक खेल

 

15 अगस्त को दर्ज हुआ था अपहरण का मुकदमा

नूरपुर थाने से जारी प्रेस नोट (दिनांक 31.08.2026) के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को हुई थी। स्वतंत्रता दिवस के दिन, जब पूरा देश जश्न मना रहा था, तब एक पिता अपनी लापता बेटी की गुहार लेकर पुलिस के पास पहुंचा था। वादी (लड़की के पिता) ने थाना नूरपुर में एक लिखित तहरीर दी थी। तहरीर में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग पुत्री को एक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ अगवा कर ले गया है।

 

पिता द्वारा दी गई तहरीर में आरोपी की पहचान संजय कुमार उर्फ दीपू के रूप में की गई थी। पुलिस को बताया गया कि आरोपी संजय कुमार उर्फ दीपू पुत्र घासीराम, ग्राम रामपुर विडार, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर का ही रहने वाला है। मामले की गंभीरता और अपहृता के नाबालिग होने के तथ्य को देखते हुए थाना नूरपुर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस ने बिना कोई देरी किए थाना नूरपुर पर मु0अ0सं0 285/2026 के तहत मामला दर्ज कर लिया। शुरुआत में यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) (अपहरण) के तहत पंजीकृत किया गया था।

 

सकुशल बरामदगी के लिए गठित की गई विशेष टीम

मुकदमा दर्ज होते ही थाना नूरपुर पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपहृता को जल्द से जल्द और सकुशल बरामद करने की थी। नाबालिग बच्चियों से जुड़े मामलों में शुरुआती समय बेहद संवेदनशील होता है। आला अधिकारियों के निर्देशानुसार, अपहृता की सकुशल बरामदगी एवं फरार आरोपी की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया।

 

पुलिस टीम ने सर्विलांस, मुखबिर तंत्र और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। जगह-जगह दबिश दी गई और आरोपी के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई। पुलिस का यह अभियान लगातार कई दिनों तक चलता रहा, जिसका सकारात्मक परिणाम अंततः 30 अगस्त को सामने आया।

 

30 अगस्त को सकुशल बरामद हुई अपहृता, धाराओं में हुई वृद्धि

कड़ी मशक्कत और लगातार चल रहे तलाशी अभियान के बाद, पुलिस टीम को 30 अगस्त 2026 को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। पुलिस ने अपहृता/पीड़िता को सकुशल बरामद कर लिया। लड़की के सही-सलामत मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली, लेकिन कानूनी प्रक्रिया का असली और अहम चरण अब शुरू होने वाला था।

 

बरामदगी के बाद पुलिस द्वारा विवेचनात्मक कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। नियमानुसार पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके बयान दर्ज कराए गए। पीड़िता ने अपने बयानों में अपने साथ हुए खौफनाक अपराध की सच्चाई पुलिस और प्रशासन के सामने रखी। विवेचनात्मक कार्यवाही एवं पीड़िता के आधिकारिक बयानों के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में गंभीर धाराओं का इजाफा किया। पूर्व में दर्ज अपहरण के मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) (दुष्कर्म) और बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 3/4 की वृद्धि की गई। यह इस बात का प्रमाण था कि मामला केवल अपहरण का नहीं था, बल्कि बच्ची के साथ गंभीर यौन शोषण भी किया गया था।

 

31 अगस्त को आरोपी संजय उर्फ दीपू गिरफ्तार

गंभीर धाराएं बढ़ने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी और भी अनिवार्य हो गई थी। पुलिस टीम आरोपी को दबोचने के लिए लगातार जाल बिछा रही थी। इसी क्रम में, 31 अगस्त 2026 को थाना नूरपुर पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए उपरोक्त मुकदमे में वांछित मुख्य अभियुक्त को धर दबोचा।

 

गिरफ्तार किए गए अभियुक्त की पहचान संजय कुमार उर्फ दीपू पुत्र घासीराम के रूप में पुष्ट हुई। आरोपी ग्राम रामपुर बिडार, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर का ही मूल निवासी है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।

 

गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम

इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले को सुलझाने, अपहृता को सकुशल वापस लाने और शातिर आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने में थाना नूरपुर की पुलिस टीम ने सराहनीय भूमिका निभाई। इस पुलिस टीम में निम्नलिखित अधिकारी और जवान शामिल रहे:

 

  • उ0नि0 (Sub-Inspector) श्री प्रमोद कुमार, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर।
  • का0 (Constable) 1874 नीरज कुमार, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर।
  • का0 (Constable) 3111 दीपक कुमार, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर।

 

इन पुलिसकर्मियों की तत्परता और अथक प्रयासों के चलते ही एक नाबालिग को न्याय मिलने का रास्ता साफ हो पाया है।

 

अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति

पॉक्सो (POCSO - Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामले समाज में बाल सुरक्षा की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं। बिजनौर पुलिस द्वारा इस मामले में दिखाई गई संवेदनशीलता और तत्परता यह साबित करती है कि प्रशासन ऐसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता) के प्रभावी होने के बाद त्वरित न्याय की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

 

इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों को सतर्क रहने का संदेश दिया है। बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और परिवार को भी अपने बच्चों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। फिलहाल, थाना नूरपुर पुलिस इस पूरे प्रकरण में अन्य आवश्यक कानूनी कार्यवाही (जैसे चार्जशीट दाखिल करना आदि) में जुटी हुई है, ताकि अदालत के माध्यम से आरोपी संजय कुमार को उसके किए की कड़ी सजा मिल सके।
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