UP Detention Center: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Govt) ने प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों पर नकेल कसने की तैयारी पूरी कर ली है। रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया के बीच, अब उनके रहने के लिए बनाए जाने वाले 'डिटेंशन सेंटर' (Detention Center) का खाका भी तैयार हो गया है।READ ALSO:-यूपी को नए साल का बड़ा तोहफा: गंगा एक्सप्रेस-वे तैयार, मेरठ से प्रयागराज का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में; PM मोदी मकर संक्रांति पर कर सकते हैं उद्घाटन
पश्चिम यूपी के कमिश्नर ने सरकार को एक मॉडल भेजा है, जिसे गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही जमीन पर उतारा जाएगा। यह डिटेंशन सेंटर किसी सामान्य जेल से बिल्कुल अलग और आधुनिक तकनीक से लैस होगा। इसमें सुरक्षा से लेकर रहने की क्षमता तक, हर चीज का विशेष ध्यान रखा गया है।
एक साथ 15 हजार लोगों को रखने की क्षमता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम उत्तर प्रदेश (Western UP) के लिए प्रस्तावित इस मॉडल में डिटेंशन सेंटर की क्षमता काफी विशाल रखी गई है। इस सेंटर में एक साथ 15,000 लोगों को रखने की व्यवस्था होगी।
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परिसर: पुरुष और महिलाओं को एक ही विशाल कैंपस में रखा जाएगा।
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सेग्रीगेशन: हालांकि, कैंपस एक होगा, लेकिन महिलाओं और पुरुषों के लिए ब्लॉक और सुविधाएं पूरी तरह अलग-अलग होंगी ताकि सुरक्षा और निजता बनी रहे।
हॉलीवुड फिल्मों जैसी होगी सिक्योरिटी (Hi-Tech Security)
UP Detention Center की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार कोई कोताही नहीं बरतना चाहती। यहां की सुरक्षा जेल से भी ज्यादा हाईटेक होगी।
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बायोमेट्रिक एंट्री: सेंटर में आने-जाने के लिए चाबी या कार्ड नहीं, बल्कि इंसान की पहचान ही उसकी चाबी होगी। एंट्री और एग्जिट के लिए 'थंब इंप्रेशन' (Thumb Impression) और 'फेस रिकॉग्निशन' (Face Recognition) सिस्टम लगाया जाएगा।
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कंट्रोल रूम: एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। जब तक यहां से 'ग्रीन सिग्नल' नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी गेट नहीं खुलेगा।
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CCTV निगरानी: चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों का जाल होगा, जिसकी मॉनिटरिंग 24 घंटे की जाएगी।
ट्रिपल लेयर सुरक्षा और केंद्रीय बल
इस डिटेंशन सेंटर की सुरक्षा का जिम्मा राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Security Forces) को सौंपने की सिफारिश की गई है। मॉडल के अनुसार:
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50 जवानों की तैनाती: सेंटर में केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 50 जवानों की परमानेंट नियुक्ति की जाएगी।
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त्रिस्तरीय सुरक्षा (Triple Layer Security): सुरक्षा घेरा तीन स्तरों का होगा, जिसे भेदना नामुमकिन होगा। बाहरी दीवार, आंतरिक परिसर और बैरक के पास अलग-अलग सुरक्षा चक्र होंगे।
सीएम योगी का स्पष्ट आदेश: हर मंडल में बने सेंटर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के हर मंडल (Division) में डिटेंशन सेंटर बनाए जाएं। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए पहले चरण में जमीन की तलाश और लोकेशन फाइनल करने का काम चल रहा है।
हाल ही में सरकार ने 17 नगर निकायों को निर्देश जारी कर अपने-अपने क्षेत्रों में रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की सूची बनाने को कहा था। अधिकारियों ने संदिग्धों का डेटा खंगालना शुरू कर दिया है।
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दस्तावेजों की जांच: आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी की गहनता से जांच की जा रही है।
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सत्यापन: अगर किसी के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाते हैं, तो उसकी रिपोर्ट तुरंत कमिश्नर ऑफिस को भेजी जाएगी।
CMO करेगा सीधी निगरानी
इस पूरे ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से की जाएगी। अधिकारियों को एक तय समय सीमा (Deadline) दी गई है, जिसके भीतर उन्हें संदिग्धों की पहचान कर उन्हें डिटेंशन सेंटर तक पहुंचाने की रूपरेखा तैयार करनी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार अवैध घुसपैठ को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। प्रस्तावित UP Detention Center का यह मॉडल बताता है कि सरकार न केवल अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर रही है, बल्कि उन्हें एक व्यवस्थित और सुरक्षित माहौल में रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में पश्चिम यूपी में इस मॉडल पर काम शुरू होने की उम्मीद है।