लखनऊ (9 अप्रैल): भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 'जनगणना 2027' (Census 2027) को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से 'एक्टिव मोड' में आ गई है। प्रदेश सरकार और भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय ने इस बार की जनगणना को ऐतिहासिक, पूरी तरह से डिजिटल और त्रुटिरहित बनाने के लिए कमर कस ली है। इस महा-अभियान को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारने के लिए पूरे प्रदेश में करीब 5.5 लाख प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) की एक विशाल फौज मैदान में उतारी जा रही है।READ ALSO:-मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई से भड़के व्यापारी, 9 अप्रैल को 'मेरठ बंद' का बड़ा ऐलान, 665 संगठनों का मिला समर्थन
इस बार की जनगणना कई मायनों में बेहद खास और आधुनिक होने जा रही है। सबसे बड़ी क्रांति यह है कि देश के इतिहास में पहली बार आम नागरिकों को 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) की सुविधा मिलने जा रही है। यानी अब आपको सरकारी कर्मचारियों के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा; आप एक वेब पोर्टल के माध्यम से खुद ही अपने परिवार का पूरा विवरण दर्ज कर सकेंगे।
बुधवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में इस महा-अभियान की रूपरेखा और समय-सीमा (Timeline) तय कर दी गई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यूपी में यह महा-जनगणना कैसे, कब और किन चरणों में पूरी होगी।
10 अप्रैल की डेडलाइन: तैयार होगा 5.5 लाख कर्मचारियों का 'डिजिटल डेटाबेस'
जनगणना जैसा विशाल कार्य बिना एक मजबूत मैनपावर के संभव नहीं है। मुख्य सचिव ने सभी मंडलायुक्तों (Commissioners) और जिलाधिकारियों (DMs) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सख्त निर्देश दिए हैं कि इस महा-अभियान में शामिल होने वाले लगभग 5.5 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती जल्द से जल्द पूरी की जाए।
प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है कि 10 अप्रैल तक इन सभी कर्मचारियों का पूरी तरह से सत्यापित (Verified) और अद्यतन 'डिजिटल डेटाबेस' तैयार कर लिया जाए। इस डेटाबेस के आधार पर ही कर्मचारियों की ड्यूटी और उनके कार्यक्षेत्र का निर्धारण किया जाएगा।
16 अप्रैल से शुरू होगा 'ट्रेनिंग का महा-दौर'
चूंकि इस बार की जनगणना कागजों पर नहीं, बल्कि मोबाइल ऐप और टैबलेट (Digital Census) के जरिए होनी है, इसलिए कर्मचारियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना बेहद जरूरी है।
फील्ड में तैनाती से ठीक पहले इन सभी 5.5 लाख कर्मचारियों को अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण (Training) दिया जाएगा। यह विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम 16 अप्रैल से शुरू होकर 7 मई तक चलेगा। इस दौरान कर्मचारियों को ऐप का इस्तेमाल करने, जियो-टैगिंग (Geo-tagging) करने, डेटा को सर्वर पर सुरक्षित अपलोड करने और नागरिकों से सही तरीके से संवाद स्थापित करने की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
7 मई से 21 मई तक खुलेगा 'स्व-गणना पोर्टल' (Self-Enumeration)
डिजिटल इंडिया की दिशा में जनगणना का यह कदम सबसे क्रांतिकारी माना जा रहा है। जो लोग टेक-सैवी (Tech-savvy) हैं या जिनके पास नौकरी/व्यवसाय के कारण दिन में घर पर रहने का समय नहीं होता, उनके लिए सरकार 'स्व-गणना पोर्टल' लेकर आ रही है।
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कैसे करेगा काम: यह पोर्टल 7 मई से 21 मई तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। इस अवधि के दौरान प्रदेश का कोई भी नागरिक अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के जरिए इस पोर्टल पर लॉग-इन करके अपने घर और परिवार के सदस्यों का पूरा विवरण खुद भर सकेगा।
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क्या है फायदा: इससे न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि डेटा में स्पेलिंग या अन्य त्रुटियों की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो जाएगी।
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भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी अधिकारियों से विशेष अपील की है कि इस 'स्व-गणना' सुविधा को एक जन-आंदोलन बनाया जाए। इसके लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान (Awareness Campaign) चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दो चरणों में पूरी होगी महा-जनगणना: जानिए पूरा शेड्यूल
समीक्षा बैठक के दौरान जनगणना निदेशक शीतल वर्मा ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन (प्रस्तुति) के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया और इसकी समय-सीमा की जानकारी सभी आला अफसरों के साथ साझा की। यह पूरी जनगणना दो मुख्य चरणों (Phases) में संपन्न होगी:
पहला चरण: मकान सूचीकरण और गणना (House Listing & Housing Census)
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अवधि: 22 मई से 20 जून (लगभग एक महीना)
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क्या होगा इसमें: इस चरण में व्यक्तियों की नहीं, बल्कि इमारतों और मकानों की गिनती की जाएगी। मकान किस सामग्री से बना है, उसमें पीने के पानी, शौचालय और बिजली की क्या सुविधा है, और मकान आवासीय है या व्यावसायिक—इन सभी बातों का विस्तृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
दूसरा चरण: जनसंख्या की गणना (Population Enumeration)
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अवधि: 9 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक
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क्या होगा इसमें: यह सबसे मुख्य चरण है। इसमें प्रत्येक परिवार के सदस्यों की गिनती, उनकी उम्र, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति और मातृभाषा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
जियो-टैगिंग और मलिन बस्तियों पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनगणना में 'सटीकता' (Accuracy) सर्वोपरि है।
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शहरी और मलिन बस्तियां: विशेष रूप से घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों, झुग्गी-झोपड़ियों (Slums) और अधिक गतिशील (Migrant) जनसंख्या वाले इलाकों में बेहद सावधानी और सटीकता के साथ गणना कराई जाए ताकि कोई भी व्यक्ति छूट न पाए।
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जियो-टैगिंग: मकान सूचीकरण और गणना ब्लॉकों की सीमाएं (Boundaries) बिल्कुल स्पष्ट और त्रुटिरहित होनी चाहिए। इसके लिए तकनीकी सहायकों की भर्ती जल्द पूरी करने को कहा गया है ताकि पूरे प्रदेश में मकानों की सटीक 'जियो-टैगिंग' और 'सीमांकन' (Demarcation) का कार्य मजबूती से किया जा सके।
नीतियों के लिए 'बैकबोन' बनेगा यह डेटा
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा, प्रमुख सचिव (सामान्य प्रशासन) मनीष चौहान और सचिव अभिषेक प्रकाश सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध राज्य के लिए जनगणना 2027 केवल आंकड़ों का खेल नहीं है। यह आने वाले दशक (2027-2037) के लिए प्रदेश की विकास योजनाओं, संसाधनों के आवंटन, रोजगार सृजन और कल्याणकारी नीतियों की 'रीढ़ की हड्डी' (Backbone) साबित होगी। पूर्ण रूप से डिजिटल होने के कारण इस बार के आंकड़े न केवल तेजी से प्रोसेस होंगे, बल्कि वे पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय भी होंगे। अब जिम्मेदारी आम नागरिकों की भी है कि वे 7 मई से शुरू हो रहे 'स्व-गणना पोर्टल' का बढ़-चढ़कर उपयोग करें और इस राष्ट्रीय यज्ञ में अपनी आहुति दें।
(उत्तर प्रदेश जनगणना 2027, सरकारी योजनाओं और राज्य की हर बड़ी खबर के सबसे तेज और सटीक अपडेट्स के लिए 'खबरीलाल' न्यूज़ के साथ लगातार जुड़े रहें।)