खबरीलाल टीम
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के अंतर्गत आने वाले 14 जनपदों में इन दिनों बिजली व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है। यह बदलाव है PVVNL स्मार्ट मीटर (PVVNL Smart Meter) को अपनाना। स्मार्ट मीटर समय की व्यवस्था है और अब इसका समय पूरी तरह से आ चुका है। पीवीवीएनएल के अंतर्गत आने वाले जनपदों में लगभग 80 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिस पर युद्ध स्तर पर तेजी से काम किया जा रहा है। हालांकि, किसी भी नई तकनीक के आने पर शुरुआत में कुछ भ्रांतियां और तकनीकी दिक्कतें सामने आती हैं। पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश और कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा था।READ ALSO:-सीडीओ बिजनौर रणविजय सिंह ने नूरपुर ब्लॉक का किया औचक निरीक्षण: अभिलेख मिले दुरुस्त, मिर्जापुर ढीकली और फीना गौशाला में गोवंश की व्यवस्थाओं का किया सत्यापन

 

इसी स्थिति को स्पष्ट करने और उपभोक्ताओं के बीच फैले दुष्प्रचार को खत्म करने के लिए सोमवार को मेरठ स्थित 'ऊर्जा भवन' में एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता बुलाई गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक (MD) रवीश गुप्ता ने खुद कमान संभाली और PVVNL स्मार्ट मीटर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी भ्रांति को दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता अगर समय से अपने मीटर को रिचार्ज करता रहेगा, तो उसे भविष्य में कभी भी अघोषित बिजली कटौती या गलत बिलिंग जैसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

 

इस विस्तृत समाचार रिपोर्ट में हम PVVNL स्मार्ट मीटर के इर्द-गिर्द उठे पूरे विवाद, एमडी रवीश गुप्ता द्वारा स्पष्ट किए गए नए नियमों (विशेषकर 3 दिन के ग्रेस पीरियड), विभिन्न 11 जोनों में मीटर लगने की स्थिति, और स्मार्ट ग्रिड तकनीक के भविष्य का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

 

पहले एक नजर डालते हैं पूरे मामले पर: क्यों हुआ हंगामा?

किसी भी समस्या के समाधान को समझने से पहले उस समस्या की जड़ को समझना आवश्यक है। दरअसल, पश्चिमी यूपी के कई जिलों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम जोरों पर चल रहा है। लेकिन, पिछले 15 दिनों से जगह-जगह भारी हंगामे की खबरें आ रही थीं।

 

उपभोक्ताओं और व्यापारियों का आक्रोश: कई शहरों में नाराज उपभोक्ताओं ने स्थानीय बिजली घरों का घेराव करना शुरू कर दिया था। उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा और मुख्य आरोप यह था कि जैसे ही उनके स्मार्ट मीटर का बैलेंस 'माइनस' (Negative) में जाता है, उनकी बिजली तुरंत काट दी जाती है। इससे भी बड़ी परेशानी यह बताई गई कि बिल का भुगतान (Recharge) करने के 8 से 10 घंटे बाद तक भी बिजली सप्लाई रिस्टोर (Restore) नहीं हो रही थी।

 

पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप: कई इलाकों में तो हालात इतने खराब हो गए कि आक्रोशित भीड़ को शांत करने के लिए पुलिस प्रशासन को मौके पर पहुंचना पड़ा। व्यापारियों के एक बड़े वर्ग ने इस पूरी व्यवस्था का कड़ा विरोध कर दिया और चीफ इंजीनियर (Chief Engineer) के दफ्तर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। व्यापारियों का तर्क था कि अचानक बिजली कटने से उनके व्यापार और प्रतिष्ठानों के संचालन पर गहरा असर पड़ रहा है। इस अफरा-तफरी और विरोध प्रदर्शनों ने शासन और प्रशासन दोनों की नींद उड़ा दी थी।

 

एमडी रवीश गुप्ता ने खुद संभाली कमान: क्या कहा पत्रकार वार्ता में?

पश्चिमी यूपी के कई जिलों में लगातार हो रही इन घटनाओं की गूंज अंततः राज्य की राजधानी लखनऊ तक जा पहुंची। शासन स्तर से मिले निर्देशों और उपभोक्ताओं के बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए, सोमवार को खुद प्रबंध निदेशक (MD) पीवीवीएनएल रवीश गुप्ता को मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

 

मेरठ के ऊर्जा भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में एमडी रवीश गुप्ता ने बेहद सधे हुए शब्दों में कहा कि PVVNL स्मार्ट मीटर को लेकर एक सोची-समझी रणनीति के तहत दुष्प्रचार (Negative Propaganda) किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। यह नई स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिहाज से बेहद कारगर, पारदर्शी और फायदेमंद है।

 

उन्होंने मीडिया के माध्यम से जनता को संदेश देते हुए कहा, "उपभोक्ता अगर इस तकनीक को सही से समझ लें और अपने मोबाइल फोन की तरह इसे रिचार्ज करने की आदत डाल लें, तो उनके लिए इससे बेहतर कोई दूसरा विकल्प (Option) नहीं हो सकता। इससे न केवल उन्हें बिजली दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि वे अपनी बिजली की खपत को खुद मॉनिटर कर सकेंगे।"

 

PVVNL स्मार्ट मीटर: बैलेंस को 'जीरो' या नेगेटिव में न जाने दें

पत्रकार वार्ता का सबसे अहम बिंदु उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कार्यप्रणाली के बारे में जागरूक करना था। प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने विस्तार से समझाया कि PVVNL स्मार्ट मीटर एक-एक यूनिट का सटीक हिसाब रखता है।

 

पारदर्शिता और नियंत्रण: आमतौर पर पुरानी पोस्ट-पेड (Post-paid) मीटर व्यवस्था में उपभोक्ताओं को इस बात का हिसाब रखने में भारी दिक्कत होती थी कि उन्होंने महीने भर में कितनी बिजली खर्च की है। कई बार महीने के अंत में भारी-भरकम बिल आने पर उन्हें 'बिल शॉक' (Bill Shock) लगता था। लेकिन स्मार्ट मीटर में यह पूरी व्यवस्था शीशे की तरह पारदर्शी (Transparent) है। उपभोक्ता अपने मोबाइल ऐप के जरिए रोज देख सकते हैं कि उन्होंने आज कितनी यूनिट बिजली जलाई है और उनके खाते में कितना बैलेंस बचा है।

 

अबाधित आपूर्ति के लिए शर्त: एमडी ने स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता अपने मीटर को समय रहते रिचार्ज करते रहें और निर्बाध (Uninterrupted) बिजली आपूर्ति का लाभ लेते रहें। उन्हें केवल एक ही सावधानी बरतनी है—अपने मीटर के बैलेंस को कभी भी शून्य (Zero) या 'नेगेटिव' (Negative) में नहीं जाने देना है। ठीक वैसे ही जैसे हम अपने मोबाइल फोन का प्रीपेड बैलेंस खत्म होने से पहले ही उसे रिचार्ज कर लेते हैं।

 

डिस्कनेक्शन के नए नियम: 3 दिन का मिलेगा समय (Grace Period)

स्मार्ट मीटर को लेकर सबसे बड़ा डर बिजली कटने का था। इसी डर को दूर करते हुए एमडी रवीश गुप्ता ने एक बहुत बड़ा और राहत भरा ऐलान किया। उन्होंने डिस्कनेक्शन (Disconnection) की प्रक्रिया और नियमों को स्पष्ट करते हुए जो जानकारी दी, उससे लाखों उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है।

 

3 दिन का 'नेगेटिव' ग्रेस पीरियड: प्रबंध निदेशक ने कहा कि अगर किसी कारणवश उपभोक्ता रिचार्ज नहीं कर पाता है और उसके स्मार्ट मीटर का बैलेंस 'नेगेटिव' (Negative) में चला जाता है, तो उसकी बिजली तुरंत नहीं काटी जाएगी। नियमों के अनुसार, अगर किसी स्मार्ट मीटर का बैलेंस लगातार 3 दिन तक नेगेटिव में रहता है, तो ही वह कनेक्शन डिस्कनेक्ट (Disconnect) होगा।

 

अलर्ट और मैसेजिंग सिस्टम: इस 3 दिन की 'ग्रेस पीरियड' अवधि में उपभोक्ता को अंधकार में नहीं रखा जाएगा। बिजली विभाग (Department) के सिस्टम द्वारा उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर लगातार रिमाइंडर और अलर्ट मैसेज (SMS Alerts) भेजे जाते रहेंगे। इसका उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता स्थिति की गंभीरता को समझे और बिजली कटने (समस्या बढ़ने) से पहले ही अपना मीटर रिचार्ज करा ले।

 

सरकारी छुट्टियों (Gazetted Holidays) पर नहीं कटेगी बिजली: इस पत्रकार वार्ता में एक और बेहद महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता के अधिकारों से जुड़ी है। एमडी ने बताया कि सबसे खास बात यह है कि किसी भी राष्ट्रीय अवकाश या राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) वाले दिन किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन डिस्कनेक्ट नहीं किया जाता है। यदि आपका बैलेंस शून्य भी हो गया है और उस दिन कोई बड़ा त्योहार या सरकारी छुट्टी है, तो आपकी बिजली चालू रहेगी।

 

81 लाख का लक्ष्य: 14 लाख उपभोक्ता उठा रहे हैं लाभ
ऊर्जा भवन में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में पीवीवीएनएल के निदेशक (वाणिज्य/Commercial) संजय जैन भी मौजूद रहे। उन्होंने PVVNL स्मार्ट मीटर परियोजना के आंकड़ों और भविष्य के लक्ष्यों पर प्रकाश डाला।

 

निदेशक संजय जैन ने बताया कि पीवीवीएनएल (पश्चिमांचल डिस्कॉम) के अंतर्गत आने वाले सभी 14 जनपदों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। विभाग का लक्ष्य पश्चिमी यूपी के लगभग 81 लाख उपभोक्ताओं के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में यह आधुनिक मीटर लगाना है।

 

उन्होंने बताया कि अभी तक (मार्च 2026 तक) लगभग 14 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं और वे इसका लाभ उठा रहे हैं। संजय जैन ने बताया कि "यह मीटर लगने के बाद उपभोक्ता पूरी तरह से सशक्त (Empowered) हो जाता है। वह अपने स्मार्टफोन पर यूपीपीसीएल (UPPCL) या संबंधित कंपनी का आधिकारिक ऐप डाउनलोड करके एक-एक यूनिट का लाइव हिसाब रख सकता है। वह देख सकता है कि घर का कौन सा उपकरण ज्यादा बिजली खींच रहा है और इस प्रकार वह ऊर्जा की बचत भी कर सकता है।"

 

स्मार्ट व्यवस्था पर किया जा रहा है तेजी से काम: क्या होंगे फायदे?

बिजली विभाग केवल मीटरों को स्मार्ट नहीं कर रहा है, बल्कि वह अपनी पूरी वितरण प्रणाली (Distribution System) को स्मार्ट ग्रिड (Smart Grid) में तब्दील कर रहा है।

 

निदेशक संजय जैन ने बताया कि दुनिया के कई विकसित देशों और भारत के अन्य स्मार्ट शहरों में बिजली की व्यवस्था पूरी तरह 'स्मार्ट' हो चुकी है। वहां अगर लाइन में कोई फॉल्ट (Fault) होता है, तो कर्मचारियों को गश्त लगाकर उसे ढूंढना नहीं पड़ता। स्मार्ट मीटर और स्मार्ट ग्रिड तकनीक के जरिए कंट्रोल रूम में बैठे-बैठे कुछ ही मिनटों में उस फॉल्ट (खराबी) की सटीक लोकेशन का पता लगा लिया जाता है और उसे तुरंत निस्तारित (Resolve) कर दिया जाता है।

 

पीवीवीएनएल का भविष्य: पीवीवीएनएल भी अपनी पुरानी और पारंपरिक व्यवस्थाओं को तेजी से स्मार्ट करने जा रहा है, जिसमें यह PVVNL स्मार्ट मीटर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके लागू होने से निम्नलिखित फायदे होंगे:

 

  1. सटीक बिलिंग: मीटर रीडिंग लेने के लिए किसी लाइनमैन या मीटर रीडर को घर-घर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिल में मानवीय गलतियों (Human Errors) की गुंजाइश शून्य हो जाएगी।
  2. बिजली चोरी पर लगाम: स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ करना लगभग असंभव है। यदि कोई ऐसा प्रयास करता है, तो तुरंत सर्वर पर अलार्म बज जाएगा।
  3. शिकायतों का त्वरित निस्तारण: शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी। बिलिंग से जुड़ी शिकायतें अपने आप खत्म हो जाएंगी क्योंकि उपभोक्ता उतना ही भुगतान करेगा जितनी वह बिजली खर्च करेगा।

 

11 जोन में PVVNL स्मार्ट मीटर लगने की स्थिति (विस्तृत आंकड़े)

पत्रकार वार्ता के अंत में पीवीवीएनएल प्रशासन ने पारदर्शिता अपनाते हुए मीडिया के सामने अपने 11 जोनों के आंकड़े भी रखे। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि किस जिले में PVVNL स्मार्ट मीटर लगाने का काम कितनी तेजी से चल रहा है।

 

आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमांचल डिस्कॉम के अंतर्गत अब तक कुल 14,95,812 (लगभग 15 लाख) उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इसका जोन-वार (Zone-wise) विस्तृत विवरण इस प्रकार है:

 

  1. मुरादाबाद जोन (Moradabad Zone): यह जोन स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में सबसे आगे चल रहा है। यहां अब तक 3,46,946 उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगवा चुके हैं।
  2. मुजफ्फरनगर जोन (Muzaffarnagar Zone): इस कृषि प्रधान जिले में भी तेजी से काम हुआ है और 1,91,917 मीटर लग चुके हैं।
  3. गजरौला जोन (Gajraula Zone): गजरौला और आसपास के क्षेत्रों में 1,59,722 घरों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है।
  4. सहारनपुर जोन (Saharanpur Zone): इस सीमावर्ती जिले में अब तक 1,59,595 उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर को अपना लिया है।
  5. बुलंदशहर जोन (Bulandshahr Zone): बुलंदशहर में 1,33,431 स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक स्थापित किए गए हैं।
  6. मेरठ जोन-1 (Meerut Zone-1): पीवीवीएनएल के मुख्यालय वाले इस जोन में 1,09,982 उपभोक्ताओं के यहां काम पूरा हो चुका है।
  7. मेरठ जोन-2 (Meerut Zone-2): मेरठ के दूसरे भाग में 1,09,342 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
  8. गाजियाबाद जोन-1 (Ghaziabad Zone-1): एनसीआर के इस महत्वपूर्ण जोन में 88,176 मीटर लग चुके हैं।
  9. गाजियाबाद जोन-3 (Ghaziabad Zone-3): यहां 85,692 उपभोक्ताओं को नई तकनीक से जोड़ा गया है।
  10. गाजियाबाद जोन-2 (Ghaziabad Zone-2): इस क्षेत्र में 69,027 स्मार्ट मीटर इंस्टॉल किए गए हैं।
  11. नोएडा जोन (Noida Zone): हाई-टेक शहर नोएडा में फिलहाल 41,982 मीटर लगाए गए हैं (यहां पहले से ही कई सोसाइटियों में प्राइवेट प्रीपेड सिस्टम लागू है)।

 

इन आंकड़ों को देखकर यह स्पष्ट होता है कि पीवीवीएनएल अपने 81 लाख के विशाल लक्ष्य की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में इसकी भारी सफलता यह दर्शाती है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता भी इस नई तकनीक को स्वीकार कर रहे हैं।

 

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बातें और टिप्स (Consumer Guidelines)

चूंकि यह व्यवस्था नई है, इसलिए उपभोक्ताओं को कुछ सावधानियां बरतने और कुछ नई चीजें सीखने की आवश्यकता है। PVVNL स्मार्ट मीटर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

 

  • आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें: अपने स्मार्टफोन (Android या iOS) पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) का आधिकारिक स्मार्ट कंज्यूमर ऐप (Smart Consumer App) डाउनलोड करें। इसे अपने खाता संख्या (Account Number) और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लिंक करें।
  • बैलेंस पर नजर रखें: हर दिन सुबह या शाम को एक बार अपना ऐप खोलकर चेक करें कि आपके मीटर में कितने रुपये का बैलेंस शेष है और पिछले 24 घंटों में कितनी यूनिट बिजली खर्च हुई है।
  • अलर्ट्स को इग्नोर न करें: यदि आपके मोबाइल पर बिजली विभाग की तरफ से बैलेंस कम होने का SMS आता है, तो उसे गंभीरता से लें और तुरंत रिचार्ज करें।
  • ऑनलाइन रिचार्ज की सुविधा: आप यूपीआई (UPI), क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए आसानी से कभी भी और कहीं से भी अपने मीटर को रिचार्ज कर सकते हैं। इसके लिए आपको बिजली घर की लाइन में लगने की कोई आवश्यकता नहीं है।

 

निष्कर्ष के तौर पर, मेरठ में बुलाई गई इस अहम पत्रकार वार्ता ने PVVNL स्मार्ट मीटर को लेकर फैले संशय और विवादों पर काफी हद तक विराम लगा दिया है। एमडी रवीश गुप्ता द्वारा स्पष्ट किया गया '3 दिन का ग्रेस पीरियड' और 'गजेटेड हॉलिडे' का नियम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है।

 

यह समझना जरूरी है कि स्मार्ट मीटर केवल बिजली विभाग की राजस्व वसूली का साधन नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं को उनके बिजली खर्च पर पूर्ण नियंत्रण देने का एक पारदर्शी टूल (Tool) है। शुरुआत में 15 दिनों तक चले हंगामे और धरने-प्रदर्शनों का मुख्य कारण जागरूकता की कमी और तकनीक को समझने में हुई देरी थी। जैसे-जैसे लोग इस 'प्रीपेड' जीवनशैली के अभ्यस्त होंगे—ठीक वैसे ही जैसे हम मोबाइल रिचार्ज और डीटीएच (DTH) रिचार्ज के अभ्यस्त हो चुके हैं—वैसे-वैसे ये सभी भ्रांतियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी। पीवीवीएनएल द्वारा 14 लाख से अधिक मीटर सफलतापूर्वक लगाना इस बात का प्रमाण है कि 81 लाख का लक्ष्य दूर जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। उपभोक्ताओं को बस अपना बैलेंस जीरो होने से बचाना है और उत्तर प्रदेश की इस स्मार्ट विद्युत क्रांति का निर्बाध आनंद लेना है।
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