खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का सबसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र, मेरठ की सेंट्रल मार्केट (Central Market Meerut), इन दिनों एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई 6 हफ्ते की समय सीमा जैसे-जैसे समाप्त होने की ओर बढ़ रही है, व्यापारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के आरोप में ध्वस्तीकरण के साये में जी रहे दुकानदार अब अपने जीवनभर की कमाई और प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए हर संभव जतन कर रहे हैं। सेक्टर 2 के व्यापारियों ने तो अब एक अनोखा तरीका अपनाया है—दुकानों के शटर हटाकर घर जैसे गेट लगाना—ताकि प्रशासन की कार्रवाई से बचा जा सके।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ के बीच 'परिवहन क्रांति': नमो भारत और मेरठ मेट्रो का महा-शिड्यूल जारी, जानिए आपके स्टेशन पर कितने बजे आएगी पहली ट्रेन

 

मेरठ की सेंट्रल मार्केट: ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए शटर की जगह गेट

मेरठ की सेंट्रल मार्केट के सेक्टर 2 में इन दिनों नजारा बदला-बदला सा है। यहां के दुकानदारों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि वे अपनी दुकानों के लोहे के भारी-भरकम शटर हटा देंगे। (Internal link to related article: मेरठ में अवैध निर्माण पर प्रशासन सख्त) व्यापारियों का मानना है कि यदि वे शटर हटाकर वहां सामान्य घरों में लगने वाले गेट लगा लेते हैं, तो उनके प्रतिष्ठान 'व्यावसायिक' के बजाय 'आवासीय' श्रेणी में दिखाई देंगे।

 

व्यापारियों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश मुख्य रूप से आवासीय परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों (Commercial activities in residential areas) को रोकने और अवैध निर्माण को गिराने का है। ऐसे में, यदि भवन का स्वरूप आवासीय जैसा दिखेगा, तो शायद मेरठ की सेंट्रल मार्केट में चलने वाला प्रशासन का बुलडोजर रुक जाए। इसके साथ ही, कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों के भीतर चल रही कमर्शियल एक्टिविटीज को बंद कर दिया है और वहां घरेलू सामान रखना शुरू कर दिया है ताकि यह साबित किया जा सके कि परिसर का उपयोग केवल रहने के लिए हो रहा है।

 

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और 6 हफ्ते की मोहलत

इस पूरे विवाद की जड़ सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश है, जिसमें कोर्ट ने मेरठ आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार लगाई थी। (External link: Supreme Court of India Official Site) अदालत ने स्पष्ट किया था कि 27 जनवरी 2026 से 6 सप्ताह के भीतर सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर उसकी रिपोर्ट पेश की जाए।

 

महत्वपूर्ण तिथि
घटनाक्रम
27 जनवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश
15 फरवरी 2026
व्यापारियों द्वारा महापंचायत और बाजार बंद का आह्वान
फरवरी 2026 (अंतिम सप्ताह)
सेक्टर 2 में शटर हटाकर गेट लगाने की शुरुआत
मार्च 2026 (प्रथम सप्ताह)
कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की समय सीमा

 

अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आवासीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन कर बाजार बनाए गए हैं, जिससे नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है। मेरठ की सेंट्रल मार्केट का यह मामला पिछले कई दशकों से कानूनी पेचीदगियों में फंसा था, लेकिन अब मामला अंतिम चरण में पहुंच गया है।

 

मुख्यमंत्री से नहीं मिला समय, जनप्रतिनिधियों से भी निराशा

व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की हर मुमकिन कोशिश की है। उन्होंने स्थानीय विधायकों और सांसदों के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का समय मांगा था। व्यापारियों की मंशा थी कि सरकार 'शमन योजना' (Compounding Scheme) के तहत कुछ राहत प्रदान करे। हालांकि, अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय से उन्हें मिलने का समय नहीं मिल सका है।

 

इतना ही नहीं, व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर कमिश्नरी कार्यालय तक मार्च निकालने की भी कोशिश की थी, लेकिन पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें बीच में ही रोक दिया। इस प्रशासनिक रुख से व्यापारियों में नाराजगी और हताशा साफ देखी जा रही है।

 

आस्था का सहारा: सुंदरकांड और पंचायत

जब शासन और प्रशासन से राहत की कोई किरण दिखाई नहीं दी, तो मेरठ की सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने भगवान की शरण ली। पिछले दिनों व्यापारियों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ कराया और ईश्वर से प्रार्थना की कि उनके रोजगार पर आए इस संकट को टाल दिया जाए।

 

इससे पहले व्यापारियों ने कई दौर की पंचायतें भी कीं। इन पंचायतों में यह तय किया गया था कि कोई भी व्यापारी स्वेच्छा से अपनी दुकान नहीं तोड़ेगा। लेकिन जैसे-जैसे कोर्ट की डेडलाइन नजदीक आ रही है, एकता की जगह अब व्यक्तिगत स्तर पर बचाव के तरीके खोजे जा रहे हैं।

 

क्या गेट लगाने से बचेगा अवैध निर्माण?

विशेषज्ञों और कानूनविदों का मानना है कि केवल शटर हटाकर गेट लगाने से कानूनी स्थिति नहीं बदलेगी। आवास विकास परिषद के रिकॉर्ड में जो भूखंड आवासीय दर्ज हैं और जहां मानचित्र के विपरीत निर्माण हुआ है, वे सभी राडार पर हैं। हालांकि, व्यापारी इस उम्मीद में हैं कि गेट लगाने से वे तकनीकी तौर पर इसे 'आवासीय' घोषित करवा सकेंगे और भविष्य में किसी नई नीति के आने तक समय ले पाएंगे।

 

मेरठ की सेंट्रल मार्केट में इस समय भय और अनिश्चितता का माहौल है। व्यापारियों द्वारा शटर हटाकर गेट लगाना उनकी बेबसी और अपने आशियाने व आजीविका को बचाने की आखिरी कोशिश को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या व्यापारियों का यह 'गेट वाला फॉर्मूला' काम आएगा या बुलडोजर अपनी राह चलेगा, यह आने वाले कुछ दिन साफ कर देंगे। (Internal link to related article: उत्तर प्रदेश शहरी विकास नीति 2026)

 

मेरठ की प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट के व्यापारी सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश से बचने के लिए अब दुकानों के शटर हटाकर घरेलू गेट लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री से मिलने का समय न मिलने और प्रशासनिक सख्ती के बीच, व्यापारियों ने इसे अपना अंतिम रक्षा कवच माना है।
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