गाजियाबाद नाहल गांव आतंकी साजिश: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के करीब और मसूरी थाने से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गाजियाबाद नाहल गांव (Ghaziabad Nahal village) इन दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। पुलिस, यूपी एटीएस (UP ATS) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक संयुक्त और बेहद गोपनीय ऑपरेशन में इस गांव से पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' (Jaish-e-Mohammed) से जुड़े एक बड़े और खतरनाक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है।READ ALSO:-नजीबाबाद में तूफान और बारिश का कहर: गन्ने के क्रेशर में सो रहे मजदूर पर गिरा मलबा, मौके पर मौत; परिजनों में मचा कोहराम
बीते 12 मार्च को सुरक्षा एजेंसियों ने इस संवेदनशील गांव में छापेमारी कर 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन आतंकियों का मुख्य निशाना डासना मंदिर के प्रमुख और श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी थे। इस आतंकी मॉड्यूल का सरगना कोई और नहीं, बल्कि इसी गांव का रहने वाला सावेज है, जिसने कट्टरपंथ की अंधी राह पर चलकर अपना नाम ही 'सावेज उर्फ जिहादी' रख लिया था। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि कैसे गाजियाबाद नाहल गांव के भीतर यह आतंकी साजिश रची जा रही थी, कैसे युवाओं का 'ब्रेनवॉश' किया जा रहा था, और इस गांव का पुराना आपराधिक इतिहास क्या रहा है।
गाजियाबाद नाहल गांव: कैसे रची जा रही थी आतंक की यह गहरी साजिश?
गाजियाबाद नाहल गांव कोई सामान्य गांव नहीं है। करीब 34 हजार की मुस्लिम आबादी वाला यह क्षेत्र गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों का सबसे संवेदनशील और चर्चा का विषय बना रहने वाला गांव माना जाता है। इसी गांव की संकरी गलियों में भारत के खिलाफ एक बड़ी और खूनी साजिश का ताना-बाना बुना जा रहा था।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों की गहन जांच में यह बात सामने आई है कि सावेज उर्फ जिहादी ने अपने ही गांव के कई भटके हुए युवाओं को मिलाकर एक स्लीपर सेल (Sleeper Cell) तैयार कर लिया था। इस मॉड्यूल में सावेज के अलावा जुनैद, फरदीन, इकराम, फजरू और जावेद शामिल हैं। जांच एजेंसियों ने इन सभी के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और इन्हें जेल भेज दिया गया है।
इस ग्रुप का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगे भड़काना और प्रमुख हिंदू नेताओं की 'टारगेट किलिंग' (Targeted Killing) करना था। सावेज ने एक वॉट्सऐप (WhatsApp) और सिग्नल (Signal) ऐप ग्रुप बनाया हुआ था। वह इस ग्रुप का एडमिन था और लगातार प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग वीडियो, भड़काऊ तकरीरें और देश-विरोधी लिंक शेयर करता था। उसका सीधा मकसद अपने साथियों को देश के खिलाफ भड़काना और उन्हें 'जिहाद' के झूठे रास्ते पर ले जाना था।
निशाने पर क्यों थे यति नरसिंहानंद गिरी?
एटीएस और इंटेलिजेंस की पूछताछ के दौरान इन गिरफ्तार आतंकियों ने जो खुलासे किए हैं, वह रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। इन कट्टरपंथियों के मुख्य निशाने पर दो प्रमुख हिंदूवादी नेता थे, जिनमें सबसे पहला नाम श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के प्रमुख यति नरसिंहानंद गिरी का था।
हत्या की प्लानिंग का कारण: आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे यति नरसिंहानंद गिरी की हत्या इसलिए करना चाहते थे क्योंकि वह लगातार एक विशेष समुदाय (मुसलमानों) के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ बयान देते रहते हैं। ज्ञात हो कि यति नरसिंहानंद के विवादित बयानों को लेकर पहले भी कई बार भारी हंगामा हो चुका है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग दो साल पहले जब एक समुदाय विशेष की हजारों की उग्र भीड़ ने डासना मंदिर को घेर लिया था, तब पुलिस प्रशासन को यति नरसिंहानंद गिरी को सुरक्षित निकालने के लिए 15 दिनों तक एक अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर रखना पड़ा था।
आतंकी मॉड्यूल का मानना था कि अगर वे यति नरसिंहानंद की हत्या करने में सफल हो जाते हैं, तो पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) और दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठेंगे, जो उनके पाकिस्तानी आकाओं का मुख्य एजेंडा था।
सावेज उर्फ 'जिहादी': प्रोफाइल और उसका विदेशी कनेक्शन
इस पूरे आतंकी नेटवर्क का मास्टरमाइंड सावेज उर्फ जिहादी गाजियाबाद नाहल गांव की एक बेहद छोटी और तंग गली में रहता है। मुख्य सड़क से करीब 1500 मीटर पैदल चलने के बाद उसका घर आता है। जब मीडिया की टीमें और पुलिस वहां पहुंची, तो उसके घर के हालात और पड़ोसियों की प्रतिक्रियाएं हैरान करने वाली थीं।
हैरान करने वाला पारिवारिक बैकग्राउंड: सावेज का पारिवारिक बैकग्राउंड किसी भी तरह से ऐसा नहीं है कि कोई उसे मजबूरी का मारा हुआ कह सके। जानकारी के मुताबिक, सावेज के एक चाचा अमेरिका (USA) में सेटल हैं, जबकि रिश्ते के एक अन्य चाचा भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि वे लोग अब गांव नहीं आते हैं और उनका सावेज से कोई वास्ता नहीं है। जब 12 मार्च को एटीएस और पुलिस की संयुक्त टीम ने दबिश दी, तो सावेज की मां और परिवार के अन्य सभी सदस्य रातों-रात घर पर ताला जड़कर भाग गए।
जैश में शामिल होने की थी जिद: जांच एजेंसियों की पूछताछ में सावेज ने कबूल किया है कि वह भारत में कोई छोटी-मोटी घटना नहीं करना चाहता था; उसका अंतिम लक्ष्य सीमा पार जाकर सीधे 'जैश-ए-मोहम्मद' आतंकी संगठन में शामिल होना था। सावेज के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में पुलिस को खूंखार आतंकी और जैश के सरगना मसूद अजहर (Masood Azhar) के कई वीडियो और इस्लामिक कट्टरपंथी तस्वीरें मिली हैं। इसके अलावा, वह 'फरहतुल्लाह गोरी' नेटवर्क और पाकिस्तानी यूट्यूबर्स के जहरीले वीडियो से भी प्रेरित था।
आरोपियों के वॉट्सऐप चैट्स में पुलिस को कुछ बेहद संवेदनशील मैसेज मिले हैं। वह आपस में चैट करते थे- "हमनें बाबरी भी खो दी, हम कुछ नहीं कर सके और अब वहां मंदिर भी बनकर तैयार हो गया।" इस तरह के भड़काऊ संदेशों के जरिए सावेज गांव के कम उम्र के युवाओं के दिमाग में नफरत का बीज बो रहा था।
शिक्षित युवा और आतंकवाद का कॉकटेल
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि गिरफ्तार किए गए सभी 6 आरोपी कोई अनपढ़ या दिहाड़ी मजदूर नहीं हैं। सावेज, जुनैद, फरदीन, इकराम, फजरू और जावेद—इन सभी के घर गाजियाबाद नाहल गांव में 400 मीटर के दायरे में स्थित हैं। (छठा आरोपी जावेद फिलहाल मसूरी कस्बे में रह रहा था)।
वकील और लॉ का छात्र बने आतंकी: गांव वालों ने बताया कि जेल गया आरोपी इकराम पेशे से एक वकील (Lawyer) है और उसके दूसरे भाई भी शहर में रहकर अच्छी पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, दूसरा आरोपी जुनैद वकालत (LLB) की पढ़ाई कर रहा है। शिक्षा के मंदिर से निकलकर आतंकवाद की अंधी सुरंग में जाने की इनकी कहानी ने खुफिया एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया है।
यह साफ दर्शाता है कि आज के दौर में कट्टरपंथ और आतंकवाद का जहर सिर्फ अशिक्षा या गरीबी की उपज नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Digital Platforms) के जरिए पढ़े-लिखे युवाओं को भी बड़ी आसानी से 'स्लीपर सेल' का हिस्सा बनाया जा रहा है। हालिया खुफिया इनपुट से यह भी पता चला है कि आरोपी इकराम अली की मां का कथित तौर पर बांग्लादेशी कनेक्शन है, जिसकी जांच अब आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) कर रहा है।
ग्राउंड जीरो: गाजियाबाद नाहल गांव में खौफ और सन्नाटा
जब मीडिया की टीम गाजियाबाद नाहल गांव की जमीनी हकीकत जानने पहुंची, तो वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण और खौफजदा नजर आया। 12 मार्च की पुलिस कार्रवाई के बाद से गांव के लगभग 50 से अधिक युवक रातों-रात गायब हो चुके हैं। कई घरों के बाहर बड़े-बड़े ताले लटके हुए हैं।
"यहां तो रात में पुलिस भी दबिश नहीं देती..." गांव की संकरी गलियों में कैमरे के सामने कोई भी ग्रामीण बात करने को तैयार नहीं है। आस-पड़ोस के लोगों ने मीडिया को देखकर साफ लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "मीडिया से आए हो? यहां तो रात में पुलिस भी दबिश नहीं देती… कोई वीडियो या फोटो मत बनाना।" यह एक वाक्य ही गांव की संवेदनशीलता और वहां पनप रहे खौफ को बयान करने के लिए काफी है।
सावेज के साथ रहने वाले लोगों के बारे में नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया: "सावेज कई बार यहां से निकलता था। उसके बाद वह मस्जिद और मदरसे भी जाता था। ज्यादातर समय उसके साथ कई युवक रहते थे, लेकिन वह किससे क्या बात करता था, यह किसी को नहीं पता। जब पुलिस ने इन लोगों को उठाया, तो कई घरों में पुलिस के डर से ताले लटक गए। हमने तो फोटो और वीडियो न्यूज में देखे तब जाकर पता चला कि ये लोग आतंकी संगठनों को लाइक करते थे। अब इसमें कितनी सच्चाई है, इस बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता।"
क्या सिर्फ 'दोस्ती' की सजा भुगत रहे हैं पढ़े-लिखे युवक? गांव के कुछ लोगों के मन में पुलिस की थ्योरी को लेकर शंका भी है। पड़ोसियों का कहना है कि इकराम पेशे से वकील है और जुनैद वकालत पढ़ रहा है। स्थानीय लोगों को लगता है कि ये युवक सावेज उर्फ जिहादी से अपनी 'दोस्ती' के चक्कर में पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं। उनका तर्क है कि पुलिस को सिर्फ सावेज का मोबाइल फोन बरामद हुआ है, जिससे देश-विरोधी मैसेज भेजे जा रहे थे। हालांकि, पुलिस के पास मौजूद डिजिटल फुटप्रिंट्स, सिग्नल ऐप की चैट्स और UAPA के तहत की गई कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि इन सभी की भूमिका एक गहरी साजिश का हिस्सा थी।
नाहल गांव का पुराना और काला आपराधिक इतिहास
गाजियाबाद नाहल गांव का विवादों से पुराना नाता रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का खुद मानना है कि यह गांव लंबे समय से बदनाम रहा है और हर 6 महीने में यहां कोई नया आपराधिक कांड जुड़ जाता है। इस गांव में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से पहले भी कई गंभीर आपराधिक वारदातें हो चुकी हैं।
नोएडा के सिपाही की निर्मम हत्या: दुकानदार ने मीडिया से बात करते हुए उस खौफनाक घटना का भी जिक्र किया जो पिछले साल (मई 2025 में) इसी गांव में घटी थी। गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) की पुलिस जब एक चोरी के आरोपी को पकड़ने के लिए गाजियाबाद नाहल गांव में दबिश देने आई थी, तो गांव की भीड़ ने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर दिया था। इस हिंसक हमले में नोएडा के एक जांबाज सिपाही सौरभ देसवाल की गोली लगने से दर्दनाक मौत हो गई थी।
सिपाही की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने गांव में ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। कई दिनों तक पूरा नाहल गांव पुलिस छावनी में तब्दील रहा था। उस वक्त पुलिस ने गांव के बदमाशों की पूरी कुंडली खंगाली थी, जिसमें चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि इस अकेले गांव में 50 से ज्यादा 'हिस्ट्रीशीटर' (History-sheeters) मौजूद हैं। पुलिस की उसी कड़ी कार्रवाई का डर आज भी गांव वालों के जहन में है। हर ग्रामीण इस बात से डरा हुआ है कि कहीं उसके बेटे का नाम भी इस नए 'आतंकी कांड' में न आ जाए, इसीलिए कोई भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
आगे की जांच और सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती
फिलहाल, सभी 6 आरोपी सलाखों के पीछे हैं और एटीएस (ATS) व आईबी (IB) की टीमें उनसे लगातार पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना है।
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फंडिंग का पता लगाना: यह पता लगाना बाकी है कि इन युवाओं को हथियार खरीदने और संगठन चलाने के लिए पाकिस्तान या खाड़ी देशों से 'टेरर फंडिंग' (Terror Funding) तो नहीं की जा रही थी?
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फरार 50 युवाओं की तलाश: गांव से जो 50 युवक गायब हुए हैं, क्या वे सिर्फ पुलिस के डर से भागे हैं, या वे भी सावेज के इस स्लीपर सेल का हिस्सा थे?
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डिजिटल नेटवर्क को ध्वस्त करना: डार्क वेब (Dark Web) और एन्क्रिप्टेड ऐप्स (Encrypted Apps) के जरिए चल रहे इस 'डिजिटल आतंक' के नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना पुलिस के लिए एक बड़ा टास्क है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति के तहत गाजियाबाद पुलिस और एटीएस पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। डासना मंदिर की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है और पूरे इलाके में पीएसी (PAC) तैनात है।
गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला 'नाहल गांव' इन दिनों देश-विरोधी गतिविधियों का केंद्र बनने के कारण सुर्खियों में है। यूपी एटीएस और पुलिस के ज्वाइंट ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 6 संदिग्धों (जिनमें एक वकील और एक लॉ स्टूडेंट भी शामिल है) को गिरफ्तार किया गया है। मॉड्यूल का मास्टरमाइंड सावेज उर्फ 'जिहादी' था, जो हिंदूवादी नेता यति नरसिंहानंद की हत्या कर सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश रच रहा था। यह गांव पहले भी एक पुलिस सिपाही की हत्या और 50 से अधिक हिस्ट्रीशीटरों की मौजूदगी के कारण बदनाम रहा है। फिलहाल, सभी आरोपियों पर UAPA के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है और गांव में भारी पुलिस बल तैनात है।