खबरीलाल टीम
खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले से एक बेहद झकझोर देने वाली और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और आपराधिक मानसिकता का एक खौफनाक उदाहरण किरतपुर (Kiratpur) थाना क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां एक 20 साल के युवक ने अपनी हवस मिटाने के लिए मात्र 3 साल के एक अबोध और मासूम बच्चे को अपना शिकार बना लिया।READ ALSO:-मौसम का 'डबल रोल': 13 राज्यों में तूफानी बारिश और 60kmph की आंधी का खौफ, यूपी-बिहार में 42°C के पार पहुंचा पारा, भयंकर लू की चेतावनी!

 

आरोपी ने एक सुनियोजित तरीके से मासूम को 'टॉफी' (Candy) देने का लालच दिया और उसे बहला-फुसलाकर एक एकांत स्थान पर ले गया, जहां उसने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है, वहीं पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश का माहौल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है और आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

 

कैसे रची गई हैवानियत की साजिश: टॉफी के बहाने मौत का खेल

प्राप्त जानकारी और पुलिस में दर्ज की गई शिकायत (FIR) के मुताबिक, यह पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना किरतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 'आलमपुर गंगा' (Alampur Ganga) गांव की है।

 

पीड़ित परिवार का 3 वर्षीय मासूम बच्चा अपने घर के बाहर या गली में खेल रहा था। इसी दौरान गांव का ही रहने वाला 20 वर्षीय आरोपी युवक 'लक्की सिंह' वहां पहुंच गया। लक्की सिंह ने बच्चे के भोलेपन का फायदा उठाया। उसने मासूम को अपने पास बुलाया और उसे टॉफी दिलाने का लालच दिया। 3 साल का बच्चा, जो दुनिया की बुराइयों और इस दरिंदे के नापाक इरादों से बिल्कुल अनजान था, टॉफी के लालच में खुशी-खुशी उसके साथ चल पड़ा।

 

आरोपी युवक बच्चे को गांव के ही एक सुनसान और एकांत इलाके में ले गया, जहां किसी की आवाजाही नहीं थी। वहां ले जाकर इस दरिंदे ने उस 3 साल के मासूम के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म (कुकर्म) जैसी घिनौनी और अमानवीय वारदात को अंजाम दिया।

 

मासूम की चीखें और बच्चों की सूझबूझ से टला और बड़ा अनर्थ

दरिंदगी के दौरान जब मासूम दर्द से तड़पने लगा, तो उसकी तेज और दर्दनाक चीखें निकलने लगीं। उस 3 साल के बच्चे की चीखें इतनी तेज थीं कि वह उस एकांत जगह से बाहर तक पहुंच गईं।

 

गनीमत यह रही कि उसी समय वहां से कुछ दूरी पर गांव के ही कुछ अन्य बच्चे खेल रहे थे या वहां से गुजर रहे थे। जब उन बच्चों ने उस छोटे से मासूम के रोने और चीखने की आवाज सुनी, तो वे तुरंत आवाज की दिशा में भागते हुए उस एकांत जगह पर पहुंच गए।

 

जब वे बच्चे मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने आरोपी लक्की सिंह को बच्चे के साथ हैवानियत करते हुए देख लिया। बच्चों को अचानक वहां आता देख और खुद को घिरता हुआ पाकर आरोपी लक्की सिंह बुरी तरह घबरा गया। वह मासूम को उसी हालत में रोता-बिलखता छोड़कर मौके से भाग खड़ा हुआ। अगर वे बच्चे समय पर वहां नहीं पहुंचते, तो शायद यह दरिंदा मासूम की जान भी ले सकता था।

 

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, थाने में दी गई नामजद तहरीर

चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे बच्चों ने तुरंत मासूम को संभाला और दौड़ते हुए उसके घर पहुंचे। बच्चों ने मासूम के परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।

 

जब परिजनों ने अपने 3 साल के लाडले की यह दर्दनाक हालत देखी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर में कोहराम मच गया और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बिना कोई समय गंवाए मासूम को गोद में उठाया और सीधे किरतपुर थाने (Kiratpur Police Station) का रुख किया।

 

पिता ने रोते हुए पुलिस को पूरी आपबीती बताई और आरोपी लक्की सिंह के खिलाफ थाने में नामजद लिखित तहरीर (Complaint) दी। एक 3 साल के बच्चे के साथ हुई इस दरिंदगी की खबर सुनते ही पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया।

 

पुलिस का त्वरित एक्शन: पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज, आरोपी गिरफ्तार

किरतपुर थाना प्रभारी (SHO) ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए एक पल की भी देरी नहीं की। पुलिस ने तुरंत पिता की तहरीर के आधार पर आरोपी लक्की सिंह के खिलाफ सुसंगत और बेहद सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

 

इन धाराओं में हुई कार्रवाई: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अप्राकृतिक दुष्कर्म की धाराओं के साथ-साथ 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस' (POCSO Act - पॉक्सो एक्ट) की अत्यंत सख्त धाराओं के तहत केस (FIR) दर्ज किया है।

 

मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस की कई टीमों का गठन किया गया और आरोपी की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। पुलिस की इस मुस्तैदी का नतीजा यह रहा कि घटना के कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी लक्की सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे सीधे जेल (Jail) भेज दिया गया है।

 

वहीं, पुलिस ने पीड़ित मासूम को मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) और इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया है, जहां डॉक्टरों की टीम बच्चे की निगरानी कर रही है।
आलमपुर गंगा गांव में भारी आक्रोश: फांसी की सजा की मांग

 

इस हृदयविदारक घटना की खबर जैसे ही आलमपुर गंगा गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैली, लोगों में भारी गुस्सा और उबाल आ गया। ग्रामीण इस घटना से स्तब्ध हैं कि उनके ही बीच रहने वाला एक 20 साल का युवक इतनी गिरी हुई और जानवरों जैसी हरकत कैसे कर सकता है।

 

लोगों का कहना है कि आरोपी ने एक ऐसे बच्चे को अपना शिकार बनाया है, जो ठीक से बोल भी नहीं सकता। गांव के लोगों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-track Court) में कराई जाए और दरिंदे लक्की सिंह को फांसी या उम्रकैद जैसी सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि समाज में ऐसे विकृत मानसिकता वाले लोगों के लिए एक कड़ा संदेश जाए। सुरक्षा के लिहाज से गांव में पुलिस की गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि कोई तनाव पैदा न हो।

 

समाज के लिए कड़ा सबक: कैसे रखें अपने बच्चों को सुरक्षित?

बिजनौर की यह घटना पूरे समाज और विशेषकर छोटे बच्चों के माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा और कड़वा सबक है। आज के समय में जब अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, तो बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

 

खबरीलाल की विशेष अपील और सुझाव:

  1. अकेला न छोड़ें: 3 या 4 साल जैसे छोटे बच्चों को कभी भी घर के बाहर या गली में अकेला न खेलने दें। उन पर हमेशा किसी न किसी बड़े की नजर होनी चाहिए।
  2. लालच से बचना सिखाएं: बच्चों को बचपन से ही यह सिखाएं कि वे किसी भी अजनबी या यहां तक कि परिचित व्यक्ति से भी कोई खाने-पीने की चीज (टॉफी, चॉकलेट, बिस्किट) या खिलौना न लें।
  3. 'गुड टच और बैड टच' (Good Touch & Bad Touch): मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि 3-4 साल की उम्र से ही बच्चों को आसान भाषा में अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच का फर्क समझाना शुरू कर देना चाहिए। उन्हें बताएं कि उनके शरीर के निजी अंगों को माता-पिता या डॉक्टर (वो भी माता-पिता की मौजूदगी में) के अलावा कोई और नहीं छू सकता।
  4. खुलकर बात करें: बच्चों के साथ एक ऐसा दोस्ताना माहौल बनाएं कि अगर कोई उनके साथ गलत व्यवहार करने की कोशिश करे, तो वे तुरंत आकर आपको बता सकें।

 

बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराध हमारी सामाजिक व्यवस्था पर एक बड़ा कलंक हैं। पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन एक जागरूक नागरिक और जिम्मेदार माता-पिता के रूप में हमें भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। बिजनौर पुलिस की त्वरित कार्रवाई इस मामले में एक सकारात्मक पहलू है, और उम्मीद है कि मासूम को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा।
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