[मेरठ, 05 फरवरी 2026] — उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) की बसें अक्सर 'यमराज का वाहन' कही जाती हैं, और मेरठ में हुई हालिया घटना ने इस कड़वे सच पर एक बार फिर मुहर लगा दी है। शहर के सबसे व्यस्त भैंसाली बस अड्डे के पास जो हुआ, वह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की मृत्यु और प्रशासनिक लापरवाही का एक जीता-जागता सबूत है।
आज (05 फरवरी) सोशल मीडिया और पुलिस जांच में सामने आए 1 मिनट 8 सेकेंड के एक सीसीटीवी फुटेज ने देखने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। दृश्य इतना भयावह है कि कमजोर दिल वाले इसे देख भी नहीं सकते। एक युवक बस के भारी-भरकम पहिये के नीचे कुचला जा चुका है, उसकी सांसें उखड़ रही हैं, लेकिन ड्राइवर को इसकी खबर तक नहीं है—वह इत्मीनान से बस रोककर सवारियां चढ़ा रहा है।READ ALSO:-मेरठ विशेष: सेंट्रल मार्केट के ताबूत में सुप्रीम कोर्ट की 'आखिरी कील' — राजनीति, वादे और आश्वासन सब फेल, अब सिर्फ 'चमत्कार' बचा सकता है बाजार!
यह घटना 31 जनवरी की दोपहर की है, लेकिन आज वीडियो सामने आने के बाद इसने प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

1 मिनट 8 सेकेंड का खौफनाक मंजर: वीडियो का 'फ्रेम-दर-फ्रेम' विश्लेषण
सीसीटीवी फुटेज किसी भी अपराध या हादसे का सबसे बड़ा गवाह होता है। इस मामले में भी फुटेज ने उस सच को उजागर किया है जो शायद बयानों में दब जाता। आइए समझते हैं कि उस 1 मिनट में आखिर हुआ क्या:
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00:00 - 00:10 सेकेंड: वीडियो की शुरुआत में सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित भैंसाली बस अड्डे के बाहर दिल्ली रोड पर खासी चहल-पहल दिखती है। पल्लवपुरम के धंजू गांव का रहने वाला 32 वर्षीय भाग सिंह सड़क के किनारे (शायद थका हुआ या किसी इंतजार में) बैठा हुआ दिखाई देता है। वह शांत बैठा है, उसे अंदाजा भी नहीं कि अगले ही पल क्या होने वाला है।
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00:11 - 00:20 सेकेंड: कौशांबी डिपो की एक रोडवेज बस अड्डे से बाहर निकलती है। बस की गति बहुत तेज नहीं है, लेकिन चालक का ध्यान शायद सड़क के नीचे बैठे व्यक्ति पर नहीं है। बस मुड़ती है और उसका अगला बायां पहिया सीधा बैठे हुए भाग सिंह के ऊपर चढ़ जाता है।
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00:21 - 00:40 सेकेंड: यह वीडियो का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा है। पहिया चढ़ने के बाद बस रुकती है। लेकिन ड्राइवर ने बस इसलिए नहीं रोकी क्योंकि उसे हादसे का अहसास हुआ, बल्कि इसलिए रोकी ताकि वह और सवारियां बैठा सके। बस का पहिया युवक के शरीर को कुचल चुका था, लेकिन चालक अलीम अंसारी अपनी सीट से उतरता है, बिल्कुल सामान्य भाव से, और सवारियों को चढ़ने का इशारा करता है।
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00:41 - 01:08 सेकेंड: आसपास के दुकानदारों और राहगीरों की नजर बस के नीचे पड़ती है। वे चीखते-चिल्लाते बस की तरफ भागते हैं। वीडियो में अफरातफरी मचती है। लोग बस के नीचे झांकते हैं और खून से लथपथ भाग सिंह को देखते हैं। तब जाकर ड्राइवर और कंडक्टर को स्थिति की गंभीरता का पता चलता है।
यह फुटेज यह सवाल खड़ा करता है कि क्या रोडवेज चालकों को "ब्लाइंड स्पॉट" (Blind Spot) की ट्रेनिंग नहीं दी जाती? एक भारी वाहन के ठीक नीचे या बगल में बैठे व्यक्ति को देख न पाना एक तकनीकी चूक हो सकती है, लेकिन हादसे के बाद भी गाड़ी का संचालन जारी रखना घोर लापरवाही है।
कौन था भाग सिंह? एक लापरवाही ने उजाड़ दिया परिवार
मृतक की पहचान भाग सिंह (32 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मेरठ के पल्लवपुरम थाना क्षेत्र के धंजू गांव का निवासी था। 32 वर्ष की आयु किसी भी व्यक्ति के जीवन का वह दौर होता है जब उस पर परिवार की सबसे अधिक जिम्मेदारियां होती हैं।
भाग सिंह उस दिन किसी काम से शहर आया था। वह बस अड्डे के पास क्यों बैठा था, यह अभी जांच का विषय है, लेकिन सड़क किनारे बैठना उसकी मौत का कारण बन जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। घटना के बाद जब स्थानीय लोगों और पुलिस ने उसे बस के नीचे से निकाला, तब तक उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन शरीर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। उसे आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उसे 'ब्रॉट डेड' (Brought Dead) घोषित कर दिया।
धंजू गांव में जैसे ही भाग सिंह की मौत की खबर पहुंची, कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बस चालक के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह हादसा नहीं, हत्या है। अगर ड्राइवर ने थोड़ा भी ध्यान दिया होता, तो आज भाग सिंह जिंदा होता।
आरोपी ड्राइवर और बस की स्थिति: जांच में क्या मिला?
हादसे के तुरंत बाद जो हुआ, वह और भी शर्मनाक है। जैसे ही भीड़ जुटी और लोगों ने शोर मचाया, आरोपी ड्राइवर अलीम अंसारी ने स्थिति को भांप लिया। बजाय इसके कि वह घायल की मदद करता या पुलिस का इंतजार करता, वह मौका पाकर बस छोड़कर फरार हो गया।
पुलिसिया कार्यवाही:
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केस दर्ज: परिजनों की लिखित शिकायत (तहरीर) के आधार पर सदर बाजार थाने में आरोपी चालक अलीम अंसारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं (लापरवाही से मौत, हिट एंड रन) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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बस सीज: पुलिस ने दुर्घटना करने वाली कौशांबी डिपो की बस को कब्जे में लेकर सीज कर दिया है। बस अभी थाने में खड़ी है।
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ड्राइवर की तलाश: पुलिस की एक टीम अलीम अंसारी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
विभागीय जांच (Departmental Inquiry): रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) संदीप कुमार नायक ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विभागीय जांच के आदेश दिए थे।
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जांच रिपोर्ट: विभागीय जांच पूरी हो चुकी है। इसमें प्रथम दृष्टया चालक की लापरवाही मानी गई है। रिपोर्ट कौशांबी डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (ARM) को भेज दी गई है ताकि चालक पर विभागीय कार्यवाही (निलंबन या बर्खास्तगी) की जा सके।
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कागजात सही मिले: जांच में एक तकनीकी पहलू यह भी सामने आया कि बस की फिटनेस (Fitness Certificate) और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस (DL) वैध थे। यानी, गलती मशीन की नहीं, इंसान की थी।
'ब्लाइंड स्पॉट' का जानलेवा सच: क्यों होती हैं ऐसी घटनाएं?
मेरठ के भैंसाली बस अड्डे पर हुई यह घटना पहली नहीं है। भारी वाहनों, विशेषकर बसों और ट्रकों के साथ "ब्लाइंड स्पॉट" (वह क्षेत्र जो ड्राइवर को शीशे या सामने से नहीं दिखता) एक बड़ी समस्या है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बस के बिल्कुल सामने नीचे की तरफ और बाएं टायर के पास का हिस्सा ड्राइवर की सीट से अक्सर दिखाई नहीं देता।
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गलती किसकी? तकनीकी रूप से भाग सिंह का बस के बिल्कुल करीब नीचे बैठना खतरनाक था। लेकिन, एक प्रशिक्षित कमर्शियल ड्राइवर (Heavy Vehicle Driver) से यह अपेक्षा की जाती है कि वह गाड़ी आगे बढ़ाने से पहले अपने चारों ओर (360 डिग्री) नजर दौड़ाए।
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भीड़भाड़ और अतिक्रमण: भैंसाली बस अड्डे के बाहर दिल्ली रोड पर हमेशा अतिक्रमण और भीड़ रहती है। खोमचे वाले, ऑटो रिक्शा और यात्रियों की आपाधापी में ड्राइवरों को गाड़ी निकालना मुश्किल होता है। ऐसे में थोड़ी सी भी चूक जानलेवा साबित होती है।
सवाल सिस्टम पर: फिटनेस सर्टिफिकेट ही काफी है?
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि "बस की फिटनेस वैध थी।" लेकिन क्या ड्राइवर की "मानसिक फिटनेस" वैध थी? 1 मिनट 8 सेकेंड का वीडियो दिखाता है कि ड्राइवर का ध्यान ड्राइविंग पर पूरी तरह केंद्रित नहीं था। अगर उसने गाड़ी बढ़ाने से पहले अपने 'लेफ्ट मिरर' (Left Mirror) या सामने के 'ब्लाइंड व्यू मिरर' (Blind View Mirror) में देखा होता, तो उसे सड़क पर बैठा युवक दिख जाता।
क्या रोडवेज बसों में सेंसर की जरूरत है? आधुनिक दौर में कई निजी बसों में प्रॉक्सिमिटी सेंसर (Proximity Sensors) लगे होते हैं जो गाड़ी के करीब कोई वस्तु होने पर बीप करते हैं। यूपी रोडवेज की खस्ताहाल बसों में ऐसी तकनीक का अभाव भी हादसों का बड़ा कारण है।
प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी: "वह चीख भी नहीं पाया"
घटनास्थल पर मौजूद एक दुकानदार, जिन्होंने सबसे पहले शोर मचाया था, ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
"लड़का (भाग सिंह) काफी देर से वहां बैठा था। बस वाले ने हॉर्न भी नहीं दिया और गाड़ी घुमा दी। हमें लगा कि बस निकल जाएगी, लेकिन अचानक बस का बायां हिस्सा ऊपर उठा और फिर धप्प से नीचे आया। हम समझ गए कि कोई नीचे आ गया है। हम चिल्लाए 'रोको-रोको', लेकिन ड्राइवर ने बस रोकी और गेट खोलकर सवारी चढ़ाने लगा। उसे पता ही नहीं था कि उसने किसी की जान ले ली है। जब हमने उसे बताया, तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया और वह भीड़ का फायदा उठाकर भाग गया।"
अब आगे क्या? प्रशासन की जिम्मेदारी
इस घटना के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है। सिर्फ मुआवजा देने या ड्राइवर को जेल भेजने से समस्या हल नहीं होगी।
तत्काल आवश्यक कदम:
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बस अड्डों पर सख्ती: भैंसाली बस अड्डे के बाहर बैठने या लेटने वालों को हटाने के लिए पुलिस पिकेट की व्यवस्था होनी चाहिए।
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ड्राइवरों की काउंसलिंग: ड्राइवरों को नियमित रूप से 'डिफेंसिव ड्राइविंग' (Defensive Driving) और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
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ब्लाइंड स्पॉट मिरर: सभी रोडवेज बसों के सामने और बाईं ओर एक्स्ट्रा मिरर अनिवार्य किए जाने चाहिए।
31 जनवरी की दोपहर भाग सिंह के लिए काल बनकर आई। उसका परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है। यह सीसीटीवी फुटेज एक सबूत भी है और एक सबक भी। यह चेतावनी है उन राहगीरों के लिए जो सड़क को सुरक्षित मानकर बैठ जाते हैं, और उन ड्राइवरों के लिए जो स्टीयरिंग थामते ही अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं। पुलिस कब तक आरोपी अलीम अंसारी को गिरफ्तार कर पाती है और रोडवेज विभाग उस पर क्या कार्यवाही करता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।