लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन कई बार ये शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक खौफनाक और हिंसक मोड़ ले लेते हैं। देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर हमेशा से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने का एक प्रमुख केंद्र रहा है। लेकिन 20 जुलाई को यहां जो दृश्य देखने को मिला, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित किया गया एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। स्थिति तब बेकाबू हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन की तरफ कूच (Parliament March) करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जो तीखी झड़प हुई, उसमें पैलेट गन (Pellet Gun) के इस्तेमाल के दावों ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।READ ALSO:-अगस्त में ग्राहकों को लग सकता है झटका! पूरे 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, घर से निकलने से पहले यहां चेक कर लें छुट्टियों की पूरी लिस्ट
संसद मार्च, पुलिस से झड़प और पैलेट गन चलने का खौफनाक दावा
20 जुलाई की सुबह से ही जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता भारी संख्या में जुटने लगे थे। शुरुआत में सब कुछ शांतिपूर्ण था। नारेबाजी और भाषणों का दौर चल रहा था। लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, भीड़ का आक्रोश बढ़ने लगा। दोपहर के समय, नेतृत्व के आह्वान पर भीड़ ने अचानक संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया।
संसद मार्ग पर पहले से ही भारी पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच सीधी झड़प हो गई। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस की जवाबी कार्रवाई को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला और चिंताजनक दावा यह किया जा रहा है कि भीड़ को रोकने के लिए तैनात सुरक्षा बलों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। सूत्रों और कई मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह बात सामने आई है कि आरएएफ (RAF) के जवानों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन से लगभग 7 राउंड फायरिंग की। हालांकि, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर अब तक इन दावों का पूरी तरह से खंडन किया है।
इरशाद मंसूरी समेत कई घायल: आंखों की रोशनी जाने का मंडरा रहा खतरा
सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से घायल हुए प्रदर्शनकारियों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। इन तस्वीरों में प्रदर्शनकारियों के शरीर और चेहरों पर अनगिनत छर्रों के गहरे निशान देखे जा सकते हैं।
सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए इरशाद मंसूरी की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इरशाद मंसूरी के चेहरे और आंख के बेहद करीब पैलेट गन के छर्रे लगे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी आंख में गंभीर चोट आई है और उनकी आंखों की रोशनी जाने का भी बड़ा खतरा बना हुआ है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर दो अन्य प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जो पैलेट गन के छर्रों से बुरी तरह घायल हुए हैं। उनके शरीर पर गहरे और दर्दनाक जख्म स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
आखिर क्या होती है पैलेट गन? (What is a Pellet Gun?)
पैलेट गन को लेकर देश में मचे इस भारी बवाल के बीच यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर यह बंदूक क्या है और यह कैसे काम करती है। पैलेट गन असल में एक 'एयर पावर्ड वेपन' (Air-Powered Weapon) यानी हवा के दबाव से चलने वाला हथियार है। इसमें आम बंदूकों की तरह गोलियां (Bullets) नहीं होतीं, बल्कि छोटे-छोटे छर्रे या प्रोजेक्टाइल फायर किए जाते हैं, जिन्हें 'पेलेट्स' (Pellets) कहा जाता है।
जब पैलेट गन से फायर किया जाता है, तो एक ही झटके में सैकड़ों की संख्या में ये छोटे-छोटे छर्रे तेज गति से बाहर निकलते हैं और एक बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं। यही कारण है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इसे एक प्रभावी हथियार माना जाता है। भारत में इसका इतिहास विवादों से भरा रहा है। सबसे पहले यह बंदूक जम्मू-कश्मीर में उग्र प्रदर्शनकारियों और पत्थरबाजों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल करने को लेकर सुर्खियों में आई थी। इसके बाद आखिरी बार किसान आंदोलन (Farmers Protest) के दौरान भी इसके इस्तेमाल की अफवाहें उड़ी थीं, हालांकि तब भी सुरक्षाबलों ने ऐसे किसी भी दावे को सिरे से खारिज कर दिया था।
कितने प्रकार की होती हैं पैलेट गन्स? (Types of Pellet Guns)
सुरक्षा बलों और आम लोगों के पास मुख्य रूप से तीन तरह की पैलेट गन्स होती हैं, जिनका उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों और उद्देश्यों के लिए किया जाता है:
-
एयर पिस्टल पैलेट गन (Air Pistol Pellet Gun): इस तरह की पैलेट बंदूकें आकार में छोटी और आम हैंडगन (रिवॉल्वर या पिस्टल) जैसी होती हैं। ये स्प्रिंग, प्रेशर्ड गैस (Compressed Gas) या CO2 के दबाव से काम करती हैं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से टारगेट प्रैक्टिस या ट्रेनिंग के दौरान किया जाता है।
-
एयर राइफल (Air Rifle): इस तरह की पैलेट गन लंबी बैरल (नली) वाली होती है, जिससे दूर से सटीक निशाना लगाना आसान हो जाता है। इन बंदूकों का इस्तेमाल आमतौर पर छोटे जानवरों के शिकार (Small Game Hunting) और शूटिंग स्पोर्ट्स (निशानेबाजी प्रतियोगिताओं) के लिए किया जाता है।
-
क्राउड-कंट्रोल शॉटगन (Crowd-Control Shotgun): धरना प्रदर्शन और दंगा नियंत्रण के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल होने वाली इस तरह की पैलेट गन्स 12 गेज के पंप-एक्शन वेपन (12-Gauge Pump-Action Weapon) होते हैं। इनमें ऐसे कार्ट्रिज (Cartridge) लगते हैं, जिनके अंदर सैकड़ों छोटे-छोटे धातु या रबर के पेलेट (छर्रे) भरे होते हैं। जब भीड़ बेकाबू हो जाती है, तो उसे नियंत्रित करने और तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बल इन्हीं पंप-एक्शन शॉटगन का इस्तेमाल करते हैं।
कितनी खतरनाक होती हैं पैलेट गन्स?
तकनीकी रूप से पैलेट गन को 'नॉन-लीथल वेपन' (गैर-घातक हथियार) की श्रेणी में रखा जाता है। पैलेट गन के इतिहास में अब तक इस बंदूक से सीधे तौर पर किसी की मौत होने की सूचना तो दुर्लभ है, लेकिन इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। इसके परिणाम बेहद खौफनाक हो सकते हैं।
जब पैलेट गन से फायर किया जाता है, तो इसके छोटे छर्रे शरीर की त्वचा को चीरते हुए मांस में गहराई तक घुस जाते हैं, जिससे काफी गहरे जख्म हो जाते हैं। सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब ये छर्रे चेहरे या आंखों पर लगते हैं। जम्मू-कश्मीर में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं जहां पैलेट गन के कारण युवाओं की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन में इरशाद मंसूरी के साथ भी ठीक ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है।
फिलहाल, पुलिस इन तमाम दावों का खंडन कर रही है और घटना की विस्तृत जांच का आश्वासन दिया गया है। लोकतंत्र में शांति बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन भीड़ नियंत्रण के तरीकों को लेकर एक बार फिर देश में नई बहस छिड़ गई है।