टीवी एक्टर आशीष कपूर, जिनकी कहानी इंस्टाग्राम पर एक दोस्ती से शुरू हुई थी, अब एक खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई है। रेप के आरोपों में घिरे आशीष को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब एक्टर तीन हफ्ते तक पुलिस से बचते हुए पुणे में छिपे थे। पुलिस का कहना है कि उन्होंने मामले के कई अहम सुराग और सबूत जुटा लिए हैं।READ ALSO:-घरेलू वेज थाली में लौटे पुराने दाम, घर के बजट को मिली राहत: महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए आई खुशखबरी!
इंस्टाग्राम से शुरू हुई कहानी और बदलता आरोप
पुलिस के अनुसार, आशीष कपूर और पीड़िता की जान-पहचान इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। जल्द ही दोस्ती गहरी हुई और वे एक पार्टी में साथ गए। लेकिन 11 अगस्त को इस कहानी में एक डरावना मोड़ आ गया। पीड़िता ने पहले पुलिस में आशीष, उनके एक दोस्त और दो अज्ञात लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में उसने अपना बयान बदल दिया और कहा कि सिर्फ आशीष कपूर ने ही उसके साथ रेप किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना का वीडियो बनाया गया था और उसका फोन भी छीन लिया गया था, लेकिन पुलिस को अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है।
सीसीटीवी फुटेज और दोस्तों ने खोली पोल
पुलिस के लिए यह मामला सुलझाना एक चुनौती था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयान ने मामले की गुत्थी सुलझा दी। फुटेज से पता चला कि पार्टी के दौरान आशीष और महिला एक साथ वॉशरूम में गए थे। जब दोनों काफी देर तक बाहर नहीं आए, तो आशीष के दोस्त और अन्य मेहमानों ने दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया। सबसे अहम बात यह है कि आशीष के दोस्त की पत्नी ने ही पुलिस को फोन कर मदद मांगी थी। इस सबूत के आधार पर, पुलिस ने गैंगरेप की धारा को हटाकर केवल रेप के आरोप में जांच आगे बढ़ाई है।
फरार आरोपी की तलाश और निर्णायक सबूत
घटना के बाद आशीष कपूर दिल्ली से फरार हो गए थे। पुलिस ने तीन हफ्ते तक उनकी तलाश की और आखिर में उन्हें 4 सितंबर को पुणे से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने एम्स में उनका मेडिकल पोटेंसी टेस्ट कराया। पुलिस इस रिपोर्ट को मामले का सबसे महत्वपूर्ण सबूत मान रही है और उनका मानना है कि यह रिपोर्ट आशीष कपूर के खिलाफ निर्णायक साबित होगी। अब, आशीष न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस इस केस को मजबूत बनाने के लिए सभी सबूतों को इकट्ठा कर रही है।