आज के डिजिटल युग में आधार कार्ड (Aadhaar Card) हर भारतीय नागरिक की सबसे महत्वपूर्ण पहचान बन चुका है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर बैंक खाता खुलवाने और बच्चों के स्कूल में दाखिले तक, हर जगह आधार अनिवार्य है। लेकिन आधार में नाम, पता या जन्मतिथि (Date of Birth) गलत होने पर लोगों को इसे सुधारने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर लंबी-लंबी कतारें और बार-बार चक्कर लगाने की मजबूरी अब बीते दिनों की बात होने जा रही है। उत्तर प्रदेश के निवासियों को बड़ी राहत देते हुए, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक नई, पारदर्शी और पूरी तरह से डिजिटल व्यवस्था लागू की है। लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार ने इस नई प्रणाली की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अब अधिकांश समस्याओं का समाधान फोन और ऑनलाइन माध्यम से ही संभव हो सकेगा।READ ALSO:-मेरठ में बुलडोजर एक्शन: केसरगंज में जिला पंचायत की जमीन पर बनी अवैध दुकानों को किया गया जमींदोज, बिल्डर ने किया स्टे ऑर्डर का दावा
हेल्पलाइन 1947 और ईमेल से दर्ज होगी शिकायत
उप महानिदेशक प्रशांत कुमार के मुताबिक, यूआईडीएआई का मुख्य उद्देश्य आम जनता की परेशानियों को कम करना और सेवाओं को सुलभ बनाना है। यदि किसी भी व्यक्ति को आधार अपडेट (Aadhaar Update), डेमोग्राफिक बदलाव या बायोमेट्रिक से संबंधित कोई भी परेशानी है, तो उसे सीधे क्षेत्रीय कार्यालय भागने की आवश्यकता नहीं है।
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टोल-फ्री हेल्पलाइन: नागरिक सीधे 1947 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं। यह एक समर्पित कॉल सेंटर है जो कई भाषाओं में सहायता प्रदान करता है।
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ई-मेल सपोर्ट: इसके अलावा, लोग अपनी पूरी समस्या लिखकर HELPUIDAI पर ई-मेल के माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग का पहला प्रयास यही रहता है कि व्यक्ति की समस्या का समाधान फोन या ई-मेल के माध्यम से ही कर दिया जाए ताकि उन्हें भौतिक रूप से कहीं जाना ही न पड़े।
QR कोड स्कैन कर घर बैठे मिलेगा अपॉइंटमेंट
यदि किसी नागरिक की समस्या तकनीकी रूप से जटिल है और उसका समाधान केवल फोन या ई-मेल से नहीं हो पाता है, तो इसके लिए एक बेहद आधुनिक 'अपॉइंटमेंट प्रणाली' विकसित की गई है। ऐसे मामलों में कॉल सेंटर की ओर से नागरिक के मोबाइल पर एक विशिष्ट 'आईडी' (ID) जनरेट की जाती है। इस आईडी और लिंक के माध्यम से व्यक्ति क्यूआर कोड (QR Code) को स्कैन कर सकता है और घर बैठे ही क्षेत्रीय कार्यालय आने के लिए अपना अपॉइंटमेंट बुक कर सकता है। इस व्यवस्था ने दलालों और बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
10 दिन पहले तय होगी तारीख और समय
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लोगों को 10 दिन पहले ही समय (Time Slot) और तारीख आवंटित कर दी जाती है। नागरिक को यह पहले से पता होता है कि उन्हें लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय में किस दिन पहुंचना है और किस विशिष्ट अधिकारी से मिलना है। पुरानी व्यवस्था की कमियां: इससे पहले की व्यवस्था में बड़ी संख्या में लोग बिना किसी पूर्व सूचना या अपॉइंटमेंट के दूर-दराज के जिलों से कार्यालय पहुंच जाते थे। भारी भीड़ होने के कारण न तो उनकी समस्याएं हल हो पाती थीं और न ही वे संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर पाते थे। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। अब नई अपॉइंटमेंट प्रणाली लागू होने से लोगों को काफी राहत मिली है।
सुरक्षा और सत्यापन के कड़े इंतजाम
कार्यालय परिसर में प्रवेश प्रक्रिया को भी बेहद सुव्यवस्थित किया गया है। प्रशांत कुमार ने बताया कि जिन लोगों ने अपॉइंटमेंट लिया है, वे कार्यालय परिसर के 100 मीटर के दायरे में रहकर भी अपना आवंटित स्लॉट कन्फर्म कर सकते हैं। जब नागरिक कार्यालय पहुंचता है, तो सबसे पहले मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा उनके अपॉइंटमेंट लेटर और संबंधित अधिकारी के विवरण का सत्यापन (Verification) किया जाता है। इसके बाद, संबंधित व्यक्ति को अधिकारी के कक्ष के बाहर प्रतीक्षा करनी होती है। डिजिटल डिस्प्ले या पुकारे जाने के बाद ही उन्हें अंदर भेजा जाता है, जिससे कार्यालय के अंदर अनावश्यक भीड़ जमा नहीं होती है।
80 से 90 प्रतिशत मामले 'जन्मतिथि संशोधन' (DoB Limit Cross) के
आधार क्षेत्रीय कार्यालयों में आने वाली समस्याओं की प्रकृति के बारे में बात करते हुए प्रशांत कुमार ने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि रोजाना उत्तर प्रदेश भर से सैकड़ों लोग आधार से जुड़ी अपनी शिकायतें लेकर आते हैं। इनमें से करीब 80 से 90 प्रतिशत लोग सिर्फ अपनी जन्मतिथि (Date of Birth) अपडेट कराने आते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि आधार में जन्मतिथि बदलने की एक निर्धारित सीमा (Limit) होती है। जब लोग उस सीमा को पार कर जाते हैं (Limit Cross Case), तो उन्हें विशेष प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे मामलों में यूआईडीएआई अत्यधिक सतर्कता बरतता है। दस्तावेजों की गहन जांच, फोरेंसिक स्तर की चेकिंग और कड़े सत्यापन के बाद ही जन्मतिथि में संशोधन की कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा, नाम की स्पेलिंग (Spelling Mistakes) में त्रुटियों से संबंधित शिकायतें भी बड़ी संख्या में आती हैं।
आधार एक 'रैंडम और नॉन-इंटेलिजेंट नंबर' है
आधार की सुरक्षा और गोपनीयता पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए प्रशांत कुमार ने इसकी तकनीकी प्रकृति को समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार एक "रैंडम और नॉन-इंटेलिजेंट नंबर" (Random and Non-Intelligent Number) है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस 12 अंकों के नंबर को देखकर किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। नंबर के अंकों से यह पता नहीं चल सकता कि व्यक्ति पुरुष है या महिला, वह किस जाति का है, किस धर्म का है या किस राज्य का निवासी है। यह केवल और केवल एक डिजिटल पहचान (Digital Identity) है, जिसके जरिए व्यक्ति अपनी उंगलियों के निशान (Fingerprints) और आंखों की पुतली (Iris) के माध्यम से अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करता है।
वोटर आईडी (Voter ID) से आधार की तुलना
अक्सर कई क्षेत्रों में यह भ्रम पैदा होता है कि वहां वोटरों की संख्या कम है, लेकिन आधार कार्ड धारकों की संख्या अधिक है। इस संशय को दूर करते हुए उप महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि वोटर आईडी केवल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्क नागरिकों के लिए बनाया जाता है। इसके विपरीत, आधार कार्ड एक नवजात शिशु (नवजात बच्चे) से लेकर वृद्ध व्यक्ति तक, हर किसी का बनाया जाता है। इसलिए किसी भी जनसंख्या वाले क्षेत्र में आधार कार्ड धारकों की संख्या का वोटरों से ज्यादा होना एक सामान्य और स्वाभाविक बात है।
बिना हार्ड कॉपी के भी सुरक्षित है पहचान
कई बार लोगों का आधार कार्ड खो जाता है और उन्हें लगता है कि उनकी पहचान खत्म हो गई है। यूआईडीएआई ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास आधार कार्ड की मूल हार्ड कॉपी (Physical Card) नहीं है, तब भी चिंता की कोई बात नहीं है। व्यक्ति अपने आधार नंबर, लिंक किए गए मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी (OTP), या फिर सीधे बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) स्कैनिंग के माध्यम से अपना ई-आधार (e-Aadhaar) कभी भी और कहीं भी डाउनलोड कर सकता है।
प्राकृतिक आपदाओं में UIDAI के विशेष कैंप
यूआईडीएआई केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में जनता के दरवाजे तक भी पहुंचता है। प्रशांत कुमार ने बताया कि प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूकंप) या भीषण आग जैसी दुखद घटनाओं में जब लोगों के सभी दस्तावेज नष्ट हो जाते हैं, तब यूआईडीएआई विशेष राहत कैंप भी लगाता है। विकासनगर आग की घटना का उदाहरण: उन्होंने लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां भीषण आग लगने से कई झुग्गी-झोपड़ियां पूरी तरह से जल कर खाक हो गई थीं। पीड़ितों के सभी सरकारी कागज जल गए थे। इसके बाद लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से मौके पर ही एक विशेष कैंप लगाया गया। वहां लोगों के फिंगरप्रिंट लेकर डेटाबेस से मिलान किया गया और उन्हें तुरंत उनके आधार कार्ड दोबारा प्रिंट करके उपलब्ध कराए गए। इस मानवीय अभियान में विभाग को भारी सफलता मिली और पीड़ितों को सरकारी राहत राशि प्राप्त करने में बहुत मदद मिली।
नियूआईडीएआई की यह नई ऑनलाइन और क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के लिए 'ईज़ ऑफ लिविंग' (Ease of Living) को बढ़ावा देगी। अब बिचौलियों के चंगुल से बचकर आम नागरिक सीधे तकनीक का इस्तेमाल कर अपनी आधार संबंधी समस्याओं का समाधान घर बैठे कर सकेंगे।