भारत में रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद जरूरी और अहम खबर है। पिछले कुछ समय से गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, कम गैस तौलने और चोरी की मिल रही लगातार शिकायतों को देखते हुए तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। अब देश भर में LPG DAC सिस्टम (Delivery Authentication Code) को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए और सुरक्षित नियम के तहत अब बिना इस विशेष कोड के किसी भी ग्राहक को घरेलू गैस सिलेंडर नहीं सौंपा जाएगा। सरकार का यह कदम पूरी वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने और सब्सिडी वाले सिलेंडरों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।READ ALSO:- गंगा एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरने का समय आ गया: 14 जून से कटेगा टोल, जानिए मेरठ से प्रयागराज तक का पूरा खर्च और कड़े नियम!
LPG DAC सिस्टम मूल रूप से एक डिजिटल सुरक्षा प्रणाली है, जो बिल्कुल किसी बैंक लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले OTP (वन-टाइम पासवर्ड) की तरह काम करती है। यह 4-अंकों का एक सुरक्षित कोड होता है। जब कोई उपभोक्ता अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से गैस एजेंसी में सिलेंडर रिफिल करने के लिए बुकिंग करता है, तो बुकिंग कंफर्म होने के तुरंत बाद यह 4 अंकों का कोड एसएमएस (SMS), व्हाट्सएप (WhatsApp) या ईमेल के माध्यम से उपभोक्ता को भेज दिया जाता है।
इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुक किया गया गैस सिलेंडर केवल और केवल उसी सही ग्राहक तक पहुंचे जिसने उसकी बुकिंग की है। पुराने सिस्टम में अक्सर यह होता था कि डिलीवरी बॉय किसी अन्य व्यक्ति को सिलेंडर दे देते थे और बुकिंग करने वाले ग्राहक को लंबा इंतजार करना पड़ता था। LPG DAC सिस्टम ने इस मानवीय लापरवाही और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से लगाम लगा दी है।
अनिवार्यता: डिलीवरी बॉय को कोड बताना हुआ जरूरी
अब नियम बेहद सख्त कर दिए गए हैं। जब गैस एजेंसी का डिलीवरी बॉय आपके घर पर गैस सिलेंडर लेकर आता है, तो आपको वह 4-अंकों का LPG DAC सिस्टम कोड उसे अनिवार्य रूप से बताना होता है। डिलीवरी बॉय उस कोड को अपनी कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप या डिवाइस में दर्ज करता है। जब कोड सिस्टम से मैच (Verify) हो जाता है, तभी डिलीवरी की प्रक्रिया को पूर्ण (Complete) माना जाता है और डिलीवरी बॉय आपको सिलेंडर सौंपता है। यदि आप कोड नहीं बता पाते हैं, तो डिलीवरी सिस्टम में पेंडिंग ही रहती है।
LPG DAC सिस्टम लागू करने के बड़े फायदे
इस डिजिटल प्रमाणीकरण प्रणाली को देश में बड़े पैमाने पर लागू किया जा चुका है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग 92% से अधिक LPG ग्राहकों (जिसमें इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के उपभोक्ता शामिल हैं) को इस LPG DAC सिस्टम के तहत कवर किया जा चुका है। इसके कई दूरगामी और बड़े फायदे सामने आ रहे हैं:
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कालाबाजारी पर रोक: सबसे बड़ा फायदा यह है कि घरेलू उपयोग (14.2 किलो) के लिए बुक किए गए सब्सिडी वाले सिलेंडरों का व्यावसायिक (कमर्शियल) स्थानों जैसे होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट में होने वाला अवैध इस्तेमाल पूरी तरह से रुक गया है।
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चोरी और हेराफेरी खत्म: कई बार रास्ते में सिलेंडरों से गैस निकालने (Pilferage) की शिकायतें आती थीं। अब चूंकि डिलीवरी की पूरी ट्रैकिंग हो रही है और वह कोड से जुड़ी है, इसलिए इस तरह की घटनाओं में भारी कमी आई है।
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गलत बिलिंग से छुटकारा: पहले कई बार ग्राहकों के नाम पर फर्जी बुकिंग कर ली जाती थी। LPG DAC सिस्टम के कारण अब कोई भी फर्जी बुकिंग या गलत व्यक्ति के नाम पर डिलीवरी संभव नहीं है।
अगर मैसेज में DAC न मिले तो क्या करें?
कई बार नेटवर्क की समस्या या तकनीकी खराबी के कारण ग्राहकों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर LPG DAC सिस्टम का एसएमएस प्राप्त नहीं होता है। ऐसी स्थिति में घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। तेल कंपनियों ने इसके लिए कई विकल्प दिए हैं:
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आधिकारिक ऐप का उपयोग: यदि आपको कोड नहीं मिला है, तो आप अपनी गैस एजेंसी के आधिकारिक ऐप (जैसे इंडियन ऑयल के ग्राहकों के लिए 'IndianOil One' या भारत गैस के लिए 'Hello BPCL') को अपने स्मार्टफोन में खोल सकते हैं। ऐप के अंदर 'रिफिल हिस्ट्री' (Refill History) या 'बुकिंग स्टेटस' के सेक्शन में आपको अपना जनरेट हुआ 4-अंकों का डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड आसानी से मिल जाएगा।
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री-जनरेट (Re-generate) का विकल्प: यदि आप स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करते हैं, तो जब डिलीवरी बॉय आपके घर आए, तो आप उससे अनुरोध कर सकते हैं कि वह अपने डिवाइस से आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर कोड को फिर से जेनरेट (Resend) कर दे। कुछ ही सेकंड में आपको नया एसएमएस मिल जाएगा।
सुरक्षा चेतावनी: धोखाधड़ी और साइबर ठगी से बचें
डिजिटल प्रणाली के इस दौर में साइबर ठग भी काफी सक्रिय हो गए हैं। इसलिए LPG DAC सिस्टम का उपयोग करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना अत्यंत आवश्यक है:
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गैस कंपनियां या उनकी एजेंसियां कभी भी आपको फोन कॉल करके यह कोड नहीं मांगती हैं।
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व्हाट्सएप या एसएमएस पर आए किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
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सुरक्षा की दृष्टि से यह 4-अंकों का कोड केवल और केवल तभी साझा करें जब अधिकृत डिलीवरी बॉय सिलेंडर लेकर आपके दरवाजे पर सामने खड़ा हो। इसे किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ फोन पर शेयर करना आपके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
1 मई 2026 से लागू हुए गैस बुकिंग के अन्य नए नियम
LPG DAC सिस्टम के अलावा, मई 2026 से गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कुछ और महत्वपूर्ण नियम भी लागू किए गए हैं। सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग के बीच एक निश्चित समय सीमा तय कर दी है।
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शहरी क्षेत्रों के ग्राहकों को अब दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर (Gap) रखना होगा।
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वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर 45 दिन तक हो सकता है।
यदि कोई उपभोक्ता इस समय सीमा से पहले गैस बुक करने का प्रयास करता है, तो सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से उस बुकिंग को ब्लॉक कर देगा। साथ ही, उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) को भी अनिवार्य कर दिया गया है।
कुल मिलाकर, LPG DAC सिस्टम (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) भारतीय रसोई गैस वितरण प्रणाली में एक क्रांतिकारी और बेहद जरूरी सुधार है। शुरुआत में कुछ ग्राहकों को मोबाइल नंबर अपडेट न होने के कारण यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल लग सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह उपभोक्ताओं के अधिकारों को सुरक्षित करने और देश के संसाधनों की चोरी रोकने के लिए एक बेहतरीन तकनीकी कदम है। सभी LPG उपभोक्ताओं को यह सलाह दी जाती है कि वे तुरंत अपनी गैस एजेंसी में जाकर अपना वर्तमान और सक्रिय मोबाइल नंबर अपडेट करा लें, ताकि भविष्य में उन्हें गैस सिलेंडर की सुरक्षित और समय पर डिलीवरी प्राप्त करने में कोई भी असुविधा न हो।
देश में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और चोरी रोकने के लिए तेल कंपनियों ने 'LPG DAC सिस्टम' (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत ग्राहकों को गैस बुकिंग के बाद 4 अंकों का एक सुरक्षित OTP मिलता है, जिसे डिलीवरी बॉय को बताने के बाद ही गैस सिलेंडर प्राप्त होता है। भारत के 92% से अधिक उपभोक्ता इस प्रणाली से जुड़ चुके हैं। यदि एसएमएस नहीं मिलता है, तो इसे कंपनी के आधिकारिक ऐप से निकाला जा सकता है या डिलीवरी बॉय से दोबारा मंगवाया जा सकता है। साइबर सुरक्षा को देखते हुए ग्राहकों को यह कोड केवल सिलेंडर लेते समय सामने खड़े डिलीवरी बॉय को ही देने की सलाह दी गई है।