खबरीलाल टीम
खगोल विज्ञान (Astronomy) और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक बेहद ऐतिहासिक और क्रांतिकारी क्षण दस्तक देने वाला है। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) अपनी अगली पीढ़ी की सबसे उन्नत अंतरिक्ष वेधशाला— 'नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप' (Nancy Grace Roman Space Telescope) को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है।READ ALSO:-मेरठ में प्रदूषण के खिलाफ बड़ा कदम: 'परिवर्तन योजना' के तहत पुराने व्यावसायिक वाहन स्क्रैप कराने पर मिलेगा टैक्स में 100% भारी डिस्काउंट!

 

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (गोरखपुर) के प्रख्यात खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस मिशन की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड को देखने के हमारे नजरिए को हमेशा के लिए बदल देगा। क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं? डार्क मैटर (Dark Matter) क्या है? इन तमाम अनसुलझे सवालों के जवाब यह अत्याधुनिक वेधशाला ढूंढ कर लाएगी। आइए, इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी, इसके उपकरणों और इसकी अद्भुत क्षमताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

प्रक्षेपण की तारीख, समय और लाइव स्ट्रीमिंग (Launch Details & Live Stream)

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से इस टेलीस्कोप की उड़ान की अंतिम तैयारियां जोरों पर हैं।

 

  • लॉन्च की तारीख: 30 अगस्त 2026 (रविवार)
  • लॉन्च का समय (IST): भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे (अमेरिकी समय सुबह 7:26 बजे EDT)।
  • रॉकेट (Launch Vehicle): स्पेसएक्स का फाल्कन हेवी रॉकेट (SpaceX Falcon Heavy)।
  • लाइव कवरेज: इस ऐतिहासिक पल का सीधा प्रसारण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:50 बजे से नासा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और वेबसाइट (nasa.gov/live) पर देखा जा सकेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने लॉन्च के लिए अनुकूल मौसम की 60% संभावना जताई है।

 

हबल की तुलना में 100 गुना अधिक ताकतवर (100x Bigger Field of View)

रोमन स्पेस टेलीस्कोप को अक्सर महान 'हबल स्पेस टेलीस्कोप' का आधुनिक और उन्नत रूप माना जाता है। हालांकि इसका प्राथमिक दर्पण (Primary Mirror) 7.9 फीट (2.4 मीटर) व्यास का है—जो बिल्कुल हबल के आकार का ही है—लेकिन तकनीक में हुए भारी सुधारों के कारण रोमन का दर्पण हबल के दर्पण के मुकाबले एक-चौथाई से भी कम वजन (मात्र 186 किलोग्राम) का है।

 

रोमन टेलीस्कोप की मुख्य विशेषताएं:

  • विशाल दृश्य क्षेत्र: रोमन का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र इसका दृश्य क्षेत्र (Field of View) है, जो हबल टेलीस्कोप से कम से कम 100 गुना बड़ा है। इसका मतलब है कि यह एक ही तस्वीर में ब्रह्मांड के एक बहुत बड़े हिस्से को कैप्चर कर सकता है।
  • तेज डेटा कलेक्शन: यह हबल की तुलना में सैकड़ों गुना तेजी से डेटा एकत्र करेगा। अपने 5 साल के प्राथमिक मिशन के दौरान यह कुल 20,000 टेराबाइट्स (20 पेटाबाइट्स) डेटा इकट्ठा करेगा।
  • ओपन डेटा पॉलिसी: खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नासा इस टेलीस्कोप से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़े दुनिया भर के लोगों और वैज्ञानिकों के लिए तुरंत और निःशुल्क उपलब्ध कराएगा।

 

रोमन टेलीस्कोप के दो प्रमुख और शक्तिशाली उपकरण (Key Instruments)

रोमन स्पेस टेलीस्कोप ब्रह्मांड की गहराइयों को नापने के लिए मुख्य रूप से दो अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर निर्भर करेगा:

 

  1. वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट (Wide Field Instrument - WFI): यह एक विशाल 300-मेगापिक्सेल का इन्फ्रारेड (Infrared) कैमरा है। इसमें 16.8 मिलियन पिक्सल वाले 18 अत्यधिक संवेदनशील डिटेक्टर लगे हैं। यह कैमरा वैज्ञानिकों को समय में बहुत पीछे तक देखने में सक्षम बनाएगा, जिससे वे ब्रह्मांड के प्रारंभिक चरणों और उसके विस्तार (Expansion) के इतिहास को समझ सकेंगे। रोमन की प्रत्येक छवि अंतरिक्ष के एक ऐसे हिस्से को कैप्चर करेगी जो आसमान में दिखने वाले पूर्ण चंद्रमा के आकार से लगभग 1.5 गुना बड़ा होगा।
  2. कोरोनोग्राफ उपकरण (Coronagraph Instrument): यह एक्सोप्लैनेट (सौर मंडल के बाहर के ग्रह) को खोजने की अब तक की सबसे उन्नत तकनीक है। कोरोनोग्राफ तारों से आने वाली तेज चकाचौंध (Starlight) को ब्लॉक कर देता है, जिससे खगोलविदों को उन तारों की परिक्रमा कर रहे बेहद धुंधले और छोटे ग्रहों की स्पष्ट और सीधी छवियां (Direct Imaging) देखने में मदद मिलती है। यह उन ग्रहों को भी देख सकेगा जो अपने तारे की तुलना में लगभग एक अरब गुना कम चमकीले हैं।

 

इस महा-मिशन के मुख्य वैज्ञानिक लक्ष्य (Scientific Goals)

नासा के रोमन स्पेस टेलीस्कोप को ब्रह्मांड की कुछ सबसे जटिल गुत्थियों को सुलझाने के लिए डिजाइन किया गया है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस मिशन के प्रमुख लक्ष्यों को इस प्रकार स्पष्ट किया:

 

  • डार्क एनर्जी और डार्क मैटर की खोज: ब्रह्मांड का 95% हिस्सा डार्क एनर्जी और डार्क मैटर से बना है, जिसे हम देख नहीं सकते। रोमन टेलीस्कोप अरबों आकाशगंगाओं का मानचित्रण (Mapping) करके यह पता लगाएगा कि ब्रह्मांड का विस्तार किस अदृश्य शक्ति के कारण लगातार तेज हो रहा है।
  • लाखों नए ग्रहों (Exoplanets) की तलाश: मिशन के पहले पांच वर्षों में, यह वेधशाला हमारे सौर मंडल से परे 100,000 से अधिक नए ग्रहों की खोज करेगी। यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि क्या उन ग्रहों पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं।
  • ब्रह्मांड का भविष्य: क्या ब्रह्मांड हमेशा के लिए फैलता रहेगा या एक दिन इसका अंत हो जाएगा? रोमन का विस्तृत और गहरा सर्वेक्षण इन सवालों के वैज्ञानिक जवाब तलाशने में मदद करेगा।

 

कक्षा और कार्यप्रणाली: L2 पॉइंट (Lagrange Point 2) का महत्व

रोमन टेलीस्कोप पृथ्वी की परिक्रमा नहीं करेगा। इसके सटीक मापन को संभव बनाने के लिए, इसे पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर (930,000 मील) दूर द्वितीय सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु (L2 Point) पर स्थापित किया जाएगा।

 

  • गुरुत्वाकर्षण का संतुलन: L2 पॉइंट अंतरिक्ष का वह खास स्थान है जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल इस प्रकार संतुलित होता है कि अंतरिक्ष यान बहुत कम ईंधन खर्च किए स्थिर रह सकता है। (नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप भी इसी क्षेत्र में मौजूद है)।
  • तापमान नियंत्रण: रोमन का बैरल जैसा आकार और छह पैनलों वाली 'सोलर एरे सन शील्ड' सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा से आने वाली अवांछित गर्मी को रोकेगी। इन्फ्रारेड उपकरणों को काम करने के लिए बेहद ठंडे तापमान की आवश्यकता होती है, और यह सन शील्ड उपकरणों को ठंडा रखने में मदद करेगी।

 

कौन थीं डॉ. नैन्सी ग्रेस रोमन?

इस ऐतिहासिक मिशन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री (Chief Astronomer) डॉ. नैन्सी ग्रेस रोमन (1925-2018) के सम्मान में रखा गया है। विज्ञान जगत में उन्हें "हबल अंतरिक्ष दूरबीन की जननी" (Mother of Hubble) के नाम से जाना जाता है। उन्होंने ही पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर अंतरिक्ष-आधारित वेधशालाओं के निर्माण की परिकल्पना की थी। नासा के 'ग्रेट ऑब्जर्वेटरीज' कार्यक्रम (जिसमें हबल, चंद्रा एक्स-रे और स्पिट्जर टेलीस्कोप शामिल थे) के पीछे डॉ. रोमन का ही सशक्त नेतृत्व था।

 

13 लाख लोगों के नाम अंतरिक्ष में (Public Participation)

इस मिशन की एक और खास बात यह है कि यह आम जनता को अंतरिक्ष से जोड़ रहा है। नासा के आमंत्रण पर दुनिया भर से लगभग 13 लाख से अधिक लोगों ने एक मेमोरी कार्ड में अपने नाम दर्ज कराए हैं, जो इस टेलीस्कोप के साथ अंतरिक्ष में जाएंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने भी अपना नाम इस ऐतिहासिक मेमोरी कार्ड में दर्ज कराया है।

 

नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप केवल एक मशीन नहीं है; यह मानवता की उस अंतहीन जिज्ञासा का प्रतीक है जो यह जानना चाहती है कि हम कहां से आए हैं और इस अनंत ब्रह्मांड में हमारा स्थान क्या है। 30 अगस्त 2026 को जब फाल्कन हेवी रॉकेट आग उगलते हुए अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरेगा, तो वह अपने साथ न केवल उन्नत तकनीक, बल्कि पूरी मानव जाति की उम्मीदें भी लेकर जाएगा। नासा को उम्मीद है कि 2027 की शुरुआत तक रोमन की पहली आश्चर्यजनक तस्वीरें दुनिया के सामने आ जाएंगी।
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