हरिद्वार/देहरादून: सावन (Sawan) का पवित्र महीना शुरू होने वाला है और इसके साथ ही देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक— 'कांवड़ यात्रा' (Kanwar Yatra 2026)— का भी शंखनाद हो जाएगा। हर साल की तरह इस बार भी करोड़ों की संख्या में शिवभक्त कांवड़िए गंगाजल लेने हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचेंगे।READ ALSO:-रठ में सनसनीखेज वारदात: एमसीसी अस्पताल में ड्यूटी पर गई नर्स की संदिग्ध मौत, परिजनों का आरोप- "उसे जबरन जहर देकर मारा गया"
इस महाआयोजन को सकुशल और सुरक्षित संपन्न कराने के लिए उत्तराखंड की भाजपा (BJP) सरकार ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार ने देशभर के कांवड़ियों और पड़ोसी राज्यों के लिए एक बड़ा और अहम आदेश जारी किया है। सुरक्षा और सुगम यातायात के मद्देनजर इस बार कांवड़ियों को नवनिर्मित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
हरिद्वार में हुआ अंतरराज्यीय महामंथन: एक्सप्रेसवे पर रोक का फैसला
बीते दिन धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा रणनीति को लेकर एक उच्च स्तरीय अंतरराज्यीय समन्वय बैठक (Inter-State Coordination Meeting) बुलाई गई थी। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक का सबसे बड़ा फैसला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर रहा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
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किसी भी सूरत में कांवड़ियों को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर चढ़ने या उस पर यात्रा करने की अनुमति न दी जाए।
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इस नियम का कड़ाई से पालन दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि एक्सप्रेसवे पर कोई दुर्घटना या जाम की स्थिति न बने और कांवड़ियों की सुरक्षा खतरे में न पड़े।
कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए 'रियल टाइम को-ऑर्डिनेशन'
करोड़ों शिवभक्तों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए बैठक में कई अहम रणनीतियां तय की गईं:
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रियल टाइम को-ऑर्डिनेशन (Real-Time Coordination): सभी पड़ोसी राज्यों की पुलिस के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए एक रियल टाइम सिस्टम विकसित किया जाएगा।
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बॉर्डर पर बैरियर और चेकपोस्ट: उत्तराखंड की सीमाओं (Borders) पर पड़ोसी राज्यों (विशेषकर यूपी और हरियाणा) की पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त चेकपोस्ट और बैरियर बनाए जाएंगे।
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भीड़ नियंत्रण: इस बार सड़कों पर अनावश्यक भीड़ नहीं लगने दी जाएगी। ट्रैफिक डायवर्जन प्लान पहले से ही लागू कर दिया जाएगा।
केंद्रीय एजेंसियों ने भी मिलाया हाथ
यह आयोजन इतना विशाल होता है कि राज्य पुलिस अकेले इसे नहीं संभाल सकती। इसलिए, इस समन्वय बैठक में ITBP, SSB, CRPF, RPF, NDRF (आपदा प्रबंधन) और भारतीय रेलवे सहित कई केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
मुख्य सचिव ने सभी एजेंसियों से अपील की कि यात्रा शुरू होने से पहले सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल और विशेषकर आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया जाए। रेलवे अधिकारियों को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष ट्रेनें (Special Trains) चलाने और उनका शेड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए गए।
अफवाहों पर लगाम: सोशल मीडिया और साइबर सेल रहेंगे एक्टिव
कांवड़ यात्रा के दौरान अक्सर छोटी सी अफवाह भी कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव ने सभी राज्यों को सोशल मीडिया (Social Media) पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
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लोगों को किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना या अफवाहों से बचाने के लिए सभी राज्यों के सोशल मीडिया सेल और साइबर सेल (Cyber Cell) मिलकर काम करेंगे।
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कानून व्यवस्था और खुफिया तंत्र का जिम्मा पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) अभिनव कुमार और गृह सचिव शैलेश बगौली को सौंपा गया है।
कब से बढ़ेगी भीड़? जानिए कांवड़ यात्रा का अहम शेड्यूल
हरिद्वार के जिलाधिकारी (DM) मयूर दीक्षित ने बैठक में कांवड़ यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों और तिथियों की जानकारी दी, जिसके आधार पर फोर्स की तैनाती की जाएगी:
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31 जुलाई से 4 अगस्त तक: इस अवधि में पंचक रहेगा, जिसके कारण हरिद्वार में कांवड़ियों की भीड़ सामान्य रहेगी।
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5 अगस्त से: पंचक समाप्त होते ही 5 अगस्त से हरिद्वार और कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होने लगेगी।
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8 अगस्त से 'डाक कांवड़': सबसे ज्यादा सतर्कता 8 अगस्त से बरतनी होगी, क्योंकि इस दिन से वाहनों और तेज डीजे के साथ चलने वाली 'डाक कांवड़' (Dak Kanwar) की शुरुआत हो जाएगी। इसके लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा।