धर्मनगरी हरिद्वार में इन दिनों अवैध प्लाटिंग और बिना नक्शा पास कराए बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का खेल जोरों पर है। लेकिन हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) भी ऐसे बिल्डरों और निर्माणकर्ताओं पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। प्राधिकरण की टीम लगातार शहर के अलग-अलग हिस्सों में औचक निरीक्षण कर रही है और जहां भी नियमों की अनदेखी मिल रही है, वहां सीधे सीलिंग (Sealing) और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।READ ALSO:-बिजनौर: महिला डॉक्टर से अश्लील वीडियो और ब्लैकमेलिंग का मामला गरमाया, निष्कासित भाजपा नेता प्रभात यादव का पलटवार- "केशव चौधरी ने रची AI वीडियो की साजिश"
ताजा मामला हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित मोहल्ला मेहतान का है, जहां एक बड़े क्षेत्रफल में प्राधिकरण के नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से निर्माण कार्य किया जा रहा था। बार-बार नोटिस और चेतावनी देने के बावजूद जब निर्माणकर्ता ने काम नहीं रोका, तो आखिरकार प्राधिकरण की टीम को मौके पर जाकर सख्त एक्शन लेना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ज्वालापुर के घनी आबादी वाले क्षेत्र मोहल्ला मेहतान में श्री अमन मित्तल पुत्र श्री विपिन मित्तल द्वारा एक बड़े भूखंड पर निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस निर्माण के लिए प्राधिकरण से मानचित्र (नक्शा) तो स्वीकृत कराया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी।
जब प्राधिकरण के अवर अभियंता (Junior Engineer) और सुपरवाइजरों की टीम ने रूटीन चेकिंग के दौरान इस साइट का मुआयना किया, तो जांच में यह साफ तौर पर सामने आया कि जो निर्माण कार्य चल रहा है, वह पास कराए गए मानचित्र से पूरी तरह भिन्न (अलग) है।

नियमों की अनदेखी का दायरा: जांच टीम ने पाया कि निर्माणकर्ता द्वारा सेटबैक (Setback), ओपन स्पेस और अन्य मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। यह अवैध निर्माण लगभग 35x60 फीट (करीब 2100 वर्ग फुट) के एक बड़े और व्यावसायिक महत्व के क्षेत्रफल में किया जा रहा था। स्वीकृत नक्शे में जिस तरह का प्रावधान था, मौके पर निर्माण उसके बिल्कुल विपरीत दिशा और आकार में बढ़ता जा रहा था।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस बड़े पैमाने पर हो रहे अनाधिकृत निर्माण का तत्काल संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम (उत्तराखंड में लागू) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत नियमानुसार वाद योजित (मामला दर्ज) कर लिया।

बार-बार दी गई चेतावनी, लेकिन सिर चढ़कर बोल रही थी मनमानी
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात निर्माणकर्ता की हठधर्मिता थी। प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अचानक या बिना किसी पूर्व सूचना के नहीं की गई है।
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लगातार दिए गए निर्देश: स्थल पर अवैध निर्माण को लेकर अनाधिकृत निर्माणकर्ता को पहले भी कई बार काम रोकने के निरंतर निर्देश दिए गए थे।
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नोटिस की अनदेखी: प्राधिकरण द्वारा विधिवत रूप से काम बंद करने (Stop Work) का नोटिस भी थमाया गया था।
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धड़ल्ले से चलता रहा काम: इन तमाम चेतावनियों के बावजूद निर्माणकर्ता ने प्राधिकरण के निर्देशों को हल्के में लिया। स्थल पर निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया और मजदूरों को लगाकर दिन-रात लगातार काम जारी रखा गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो निर्माणकर्ता को किसी भी कानूनी कार्रवाई का कोई खौफ न हो।
HRDA की टीम ने लिया कड़ा एक्शन: जड़ दिया ताला
जब पानी सिर से ऊपर चला गया और निर्माणकर्ता ने काम रोकने से साफ इनकार कर दिया, तो प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम (Enforcement Squad) ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
प्राधिकरण के सक्षम अधिकारियों के आदेशानुसार, सीलिंग की टीम पूरे दलबल के साथ ज्वालापुर के मोहल्ला मेहतान स्थित उस साइट पर पहुंची। टीम ने वहां चल रहे काम को तत्काल प्रभाव से रुकवाया, मजदूरों को साइट से बाहर निकाला और पूरी इमारत के मुख्य द्वारों पर सरकारी सील लगाकर ताला जड़ दिया।
इसके साथ ही मौके पर उपस्थित अनाधिकृत निर्माणकर्ता और उनके प्रतिनिधियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया गया कि:
"भविष्य में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न किया जाए। यदि सील से छेड़छाड़ की गई या दोबारा चोरी-छिपे काम शुरू करने की कोशिश की गई, तो सीधे तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
क्यों जरूरी है स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण?
हरिद्वार एक भूकंप संभावित क्षेत्र (Seismic Zone 4) में आता है और यहां गंगा नदी के कारण जलभराव और ड्रेनेज की समस्याएं भी अक्सर देखने को मिलती हैं। ऐसे में विकास प्राधिकरण द्वारा नक्शा पास कराना सिर्फ एक कागजी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा एक अहम मुद्दा है।
प्राधिकरण के नियम क्या कहते हैं?
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सेटबैक का पालन: भवन के चारों ओर हवा, रोशनी और आपातकालीन स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के जाने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ना अनिवार्य है।
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भू-उपयोग (Land Use): आवासीय नक्शे पर व्यावसायिक (Commercial) निर्माण पूरी तरह से अवैध माना जाता है।
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पार्किंग व्यवस्था: बड़े क्षेत्रफल वाले भवनों में ग्राउंड फ्लोर या बेसमेंट में पार्किंग देना अनिवार्य है, ताकि सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा न हो।
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लोड बियरिंग क्षमता: पास किए गए नक्शे में यह तय होता है कि इमारत कितनी मंजिल तक सुरक्षित रूप से बन सकती है। नक्शे के विपरीत अतिरिक्त मंजिल बनाना जानलेवा हो सकता है।
अवैध निर्माणों के खिलाफ आगे भी जारी रहेगा अभियान
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि शहर के किसी भी कोने में अगर अवैध निर्माण, अवैध प्लाटिंग या नक्शे के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां पाई गईं, तो उस पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी।
अक्सर लोग थोड़ा पैसा बचाने या ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में सेटबैक कवर कर लेते हैं या अतिरिक्त मंजिल तान देते हैं। लेकिन जब प्राधिकरण का हथौड़ा चलता है या सीलिंग होती है, तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है।
आम जनता से अपील: प्राधिकरण ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रॉपर्टी, फ्लैट या दुकान को खरीदने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि वह रेरा (RERA) पंजीकृत है या नहीं और उसका नक्शा HRDA से विधिवत रूप से पास है या नहीं। बिना जांच-पड़ताल के खरीदी गई संपत्ति भविष्य में कानूनी पचड़ों में फंस सकती है।
ज्वालापुर की यह सीलिंग की कार्रवाई उन तमाम बिल्डरों और भू-माफियाओं के लिए एक कड़ा सबक है, जो सोचते हैं कि वे नियम-कानूनों को अपनी जेब में रखकर मनमानी कर सकते हैं। HRDA की टीम लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर रही है और आने वाले दिनों में ऐसी ही कई और बड़ी कार्रवाइयां देखने को मिल सकती हैं।