खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश का उन्नाव जिला, जो अक्सर राजनीति और साहित्य के लिए जाना जाता है, पिछले 48 घंटों से एक अलग वजह से सुर्खियों में है। वजह है—26 साल का एक यूट्यूबर, अनुराग द्विवेदी (Anurag Dwivedi)। एक ऐसा नाम, जो कुछ साल पहले तक उन्नाव की गलियों में पुरानी साइकिल पर घूमा करता था, लेकिन आज उसके गैराज में दुनिया की सबसे महंगी कारें शोभा बढ़ा रही थीं।READ ALSO:-यूपी में 'कोल्ड अटैक': 50 जिलों में रेड अलर्ट, कोहरे ने लगाया 'लॉकडाउन'; 12 करोड़ लोगों को फोन पर मिली चेतावनी, अगले 72 घंटे बेहद खतरनाक

 

लेकिन, "रातों-रात अमीर बनने" की यह कहानी बुधवार को तब एक नाटकीय मोड़ पर आ गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने अनुराग के घर और दफ्तरों पर दस्तक दी। यह छापा महज सामान्य पूछताछ नहीं थी, बल्कि यह मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करने की कवायद थी। जांच एजेंसी ने मौके से करोड़ों की लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं और परिवार के बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं।

 

साइकिल से लेम्बोर्गिनी तक: एक संदिग्ध सफर

अनुराग द्विवेदी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्नाव के नवाबगंज का रहने वाला यह युवक कुछ वर्ष पूर्व एक सामान्य मध्यमवर्गीय जीवन जी रहा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अनुराग को अक्सर साइकिल से आते-जाते देखा जाता था।

 

यूट्यूब और क्रिकेट फैंटेसी का खेल

अनुराग ने अपनी पहचान एक 'क्रिकेट एनालिस्ट' (Cricket Analyst) के तौर पर बनाई। उसने यूट्यूब और टेलीग्राम पर क्रिकेट मैचों की भविष्यवाणी (Predictions) और फैंटेसी टीम (Fantasy Teams) बनाने के टिप्स देने शुरू किए। देखते ही देखते उसके फॉलोअर्स लाखों में पहुंच गए।

 

  • लेकिन, ED की शुरुआती जांच बताती है कि मामला सिर्फ यूट्यूब वीडियो तक सीमित नहीं था।
  • आरोप है कि 'टिपिंग' की आड़ में सट्टेबाजी (Betting) और अवैध ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का प्रमोशन किया जा रहा था।
  • इसी कमाई से अनुराग ने देखते ही देखते उन्नाव में कई बीघा जमीन और लखनऊ की पॉश 'गोल्फ सिटी' में करोड़ों का लग्जरी फ्लैट खरीद लिया।

 

दुबई वाली शादी: वह गलती जिसने सब कुछ बदल दिया

कहते हैं कि 'पैसा बोलता है', लेकिन कभी-कभी पैसा चीखता है और मुसीबत को बुलावा देता है। अनुराग द्विवेदी के साथ भी यही हुआ।
22 नवंबर को अनुराग ने अपनी लखनऊ निवासी प्रेमिका से शादी रचाई। लेकिन यह शादी उन्नाव या लखनऊ के किसी बैंक्वेट हॉल में नहीं, बल्कि दुबई (Dubai) में एक लग्जरी क्रूज पर हुई।

 

  • शाही ठाठ: इस शादी में शामिल होने के लिए उन्नाव के नवाबगंज से करीब 100 रिश्तेदारों और दोस्तों को चार्टर्ड और फ्लाइट्स के जरिए दुबई ले जाया गया।
  • खर्च का हिसाब: आने-जाने, फाइव स्टार होटलों में रुकने और शादी के भव्य आयोजन का पूरा खर्च अनुराग ने उठाया।
  • सुराग: जब ये रिश्तेदार और दोस्त दुबई से वापस लौटे, तो उन्होंने अनुराग के 'सुल्तान' वाले ठाठ-बाट की कहानियां सुनानी शुरू कीं। यह चर्चा हवा की तरह फैली और अंततः खुफिया एजेंसियों और आयकर विभाग/ED के कानों तक जा पहुंची। जांच एजेंसियों को शक हुआ कि एक यूट्यूबर की घोषित आय (Declared Income) और इस शाही खर्च में जमीन-आसमान का अंतर है।

 

ED की रेड: क्या मिला, क्या गया?

बुधवार तड़के जब उन्नाव और लखनऊ में ED की गाड़ियां रुकीं, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि कार्रवाई इतनी बड़ी होगी।

 

  1. 7 ठिकाने खंगाले: ED ने एक साथ अनुराग के 7 ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें उसका पैतृक घर, लखनऊ का फ्लैट और ऑफिस शामिल थे।
  2. गाड़ियां जब्त (Seized Assets): रेड के दौरान अधिकारियों की नजर अनुराग के कार कलेक्शन पर पड़ी। जांच एजेंसी ने मौके से लेम्बोर्गिनी (Lamborghini), बीएमडब्ल्यू (BMW), मर्सिडीज (Mercedes) और महिंद्रा थार (Thar) जैसी गाड़ियां जब्त कर ली हैं। बाजार में इन गाड़ियों की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
  3. दस्तावेज और गैजेट्स: कई डिजिटल डिवाइस, हार्ड डिस्क और संपत्ति के दस्तावेज (Property Documents) जांच एजेंसी अपने साथ ले गई है।

 

गायब है 'हीरो': छापेमारी के दौरान अनुराग द्विवेदी अपने किसी भी ठिकाने पर मौजूद नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि उसे शायद भनक लग गई थी या वह पहले से ही अंडरग्राउंड है।

 

जांच का दायरा: हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA)

ED की यह कार्रवाई 'मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम' (PMLA) के तहत की जा रही है। जांच के केंद्र में तीन प्रमुख बिंदु हैं:

 

1. आय का स्रोत (Source of Income)

एजेंसी यह जानना चाहती है कि यूट्यूब के 'व्यूज' और 'स्पॉन्सरशिप' से इतनी जल्दी 10 करोड़ की गाड़ियां और दुबई में निवेश कैसे संभव हुआ?
  • शक है कि क्रिकेट की आड़ में अवैध सट्टेबाजी ऐप्स और वेबसाइट्स से मोटा पैसा कमाया गया।
  • 'पेड टिपिंग' (Paid Tipping) के जरिए टेलीग्राम ग्रुप्स पर लाखों रुपये वसूले गए।

 

2. हवाला नेटवर्क (Hawala Network)

जांच में यह भी सामने आया है कि अनुराग ने अपनी काली कमाई को विदेश (विशेषकर दुबई) भेजने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया।

 

  • आरोप है कि भारत से पैसा अवैध तरीके से बाहर भेजा गया और फिर उसे 'विदेशी निवेश' या 'गिफ्ट' के रूप में वापस लाकर (Round Tripping) सफेद करने की कोशिश की गई।

 

3. बेनामी संपत्तियां

अनुराग ने पिछले दो सालों में उन्नाव और लखनऊ में जो संपत्तियां खरीदी हैं, उनके भुगतान के तरीके (Mode of Payment) की जांच की जा रही है। क्या ये संपत्तियां नकद (Cash) में खरीदी गईं? क्या इनमें परिवार के अन्य सदस्यों के नाम का इस्तेमाल (Benami Transactions) किया गया?

 

बैंक खाते फ्रीज, करीबी रडार पर

जांच एजेंसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुराग द्विवेदी और उसके परिवार के सभी प्रमुख बैंक खातों को सीज (Freeze) कर दिया है। अब न तो पैसा निकाला जा सकता है और न ही ट्रांसफर किया जा सकता है।

 

  • लेनदेन की जांच: ED पिछले 3-4 सालों के बैंक स्टेटमेंट खंगाल रही है। इसमें विदेश से आए फंड्स और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की तलाश की जा रही है।
  • सहयोगियों पर नजर: अनुराग अकेले इतना बड़ा नेटवर्क नहीं चला सकता था। उसके कंटेंट एडिटर्स, फाइनेंस मैनेजर्स और करीबी दोस्त भी अब ED की रडार पर हैं। आने वाले दिनों में उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है।

 

सोशल मीडिया और यूथ आइकन का स्याह पक्ष

अनुराग द्विवेदी की कहानी आज के दौर के 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स' की चमक-दमक के पीछे छिपे अंधेरे को उजागर करती है।

 

  • हजारों युवा अनुराग को अपना आदर्श मानते थे। उसकी सफलता देखकर वे भी फैंटेसी गेमिंग और शॉर्टकट से पैसा कमाने की राह पर चल पड़े थे।
  • अनुराग अक्सर अपने सोशल मीडिया पर अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल—महंगी घड़ियां, विदेश यात्राएं और सुपरकार्स—का प्रदर्शन (Show-off) करता था। यही 'प्रदर्शन' अंततः उसके लिए मुसीबत का सबब बन गया।

 

जांच एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह मामला सिर्फ अनुराग तक सीमित है या वह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट (International Betting Syndicate) का सिर्फ एक चेहरा (Frontman) है?

 

कानून के हाथ लंबे हैं

फिलहाल, 10 करोड़ की गाड़ियां धूल फांक रही हैं और करोड़ों की संपत्तियां जांच के घेरे में हैं। अनुराग द्विवेदी, जो कल तक सोशल मीडिया पर 'ज्ञान' देता था, आज कानून से भाग रहा है। यह घटनाक्रम एक बड़ा सबक है कि डिजिटल दुनिया में भी कमाई का जरिया पारदर्शी (Transparent) होना चाहिए। 'शॉर्टकट' से कमाई गई दौलत, चाहे वह लेम्बोर्गिनी ही क्यों न दिला दे, अंत में कानून की 'लाल बत्ती' के सामने रुक ही जाती है।

 

अब देखना यह होगा कि ED की जांच में और क्या-क्या खुलासे होते हैं और क्या अनुराग द्विवेदी जांच में सहयोग करने के लिए सामने आते हैं या नहीं।
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