उत्तर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की सूरत बदलने का बीड़ा उठाया है। अक्सर अपनी बदहाली और अव्यवस्था के लिए चर्चा में रहने वाले बस अड्डे अब जल्द ही हाईटेक और चकाचक नजर आएंगे।READ ALSO:-बिजनौर: नए साल की रात 'धर्मांतरण' का खेल? घनुवाला में खेत के बीचों-बीच मिला 'क्रॉस' और मोमबत्तियां; भड़के ग्रामीणों ने घेरा थाना, पुलिस छावनी बना गांव
परिवहन मंत्री ने प्रदेश के सभी बस स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि निगम का उद्देश्य सिर्फ बसों का संचालन नहीं, बल्कि यात्रियों को एक बेहतर और सुखद अनुभव प्रदान करना है। गौरतलब है कि यूपी रोडवेज वर्तमान में प्रदेश के 280 बस स्टेशनों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 55 करोड़ यात्रियों को अपनी सेवाएं देता है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार अब वक्त की मांग बन गया है।
1. 'सिटिजन फर्स्ट इनिशिएटिव': यात्री ही भगवान
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने 'सिटिजन फर्स्ट इनिशिएटिव' (Citizen First Initiative) के तहत अधिकारियों को काम करने के निर्देश दिए हैं। इसका सीधा मतलब है कि हर फैसले के केंद्र में 'नागरिक' यानी 'यात्री' होगा।
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स्वागत और सहायता: अब यात्रियों को बस अड्डे में घुसते ही भटकना नहीं पड़ेगा। मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक बस स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक 'यात्री सहायता डेस्क' (Help Desk) अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
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सूचना का अधिकार: प्रवेश द्वार पर ही स्पष्ट और बड़े अक्षरों में किराया सूची, बसों की समय सारिणी (Time Table), और प्लेटफॉर्म की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।
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शिकायत निवारण: अगर यात्रा के दौरान कोई असुविधा होती है, तो उसके लिए 'शिकायत एवं राहत डेस्क' की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यात्री अपनी बात तुरंत सक्षम अधिकारी तक पहुंचा सकें।
2. तकनीक का तड़का: अब नहीं पूछना पड़ेगा 'बस कब आएगी?'
अक्सर बस अड्डों पर यात्रियों को यह पता करने के लिए पूछताछ खिड़की पर लंबी लाइन लगानी पड़ती है कि उनकी बस कब आएगी। इस समस्या को खत्म करने के लिए परिवहन मंत्री ने डिजिटल क्रांति का रास्ता अपनाया है।
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रियल टाइम ट्रैकिंग: सभी बस स्टेशनों पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड (Digital Display Boards) लगाए जाएंगे। ये बोर्ड रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट की तर्ज पर काम करेंगे।
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GPS से निगरानी: जीपीएस (GPS) तकनीक के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन ट्रैक की जाएगी। बस के आगमन (Arrival) और प्रस्थान (Departure) का समय स्वचालित रूप से डिस्प्ले बोर्ड पर अपडेट होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा और असमंजस की स्थिति खत्म होगी।
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साइन बोर्ड्स: हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में रूट, प्लेटफॉर्म नंबर, टिकट काउंटर, शौचालय और निकास द्वार (Exit) की जानकारी देने वाले रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि रात के समय भी यात्रियों को कोई परेशानी न हो।
3. आराम का पूरा ख्याल: 'ए' श्रेणी स्टेशनों पर AC वेटिंग रूम
लंबे सफर और बसों के इंतजार में यात्रियों को होने वाली थकान को देखते हुए वेटिंग रूम्स के कायाकल्प का आदेश दिया गया है।
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श्रेणीवार सुविधाएं: परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के 'ए' श्रेणी (Class A) के बस स्टेशनों पर वातानुकूलित (AC) और नॉन-एसी (Non-AC) दोनों प्रकार के वेटिंग रूम बनाए जाएंगे।
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अन्य स्टेशन: अन्य श्रेणियों के बस स्टेशनों पर भी उच्च गुणवत्ता वाले नॉन-एसी वेटिंग रूम अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे।
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बुनियादी ढांचा: वेटिंग रूम और यात्री शेड में बैठने के लिए टूटी-फूटी बेंचों की जगह आरामदायक कुर्सियां लगाई जाएंगी। इसके अलावा, पर्याप्त पंखे और एलईडी लाइटों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी ताकि गर्मी और अंधेरे में यात्रियों को परेशान न होना पड़े।
4. समावेशी परिवहन: दिव्यांगजनों के लिए विशेष संवेदनशीलता
परिवहन मंत्री ने विशेष जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक परिवहन पर सबका समान अधिकार है। इसलिए, बस स्टेशनों को 'दिव्यांग-अनुकूल' (Disabled-Friendly) बनाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
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रैम्प और व्हीलचेयर: बस स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों पर रैम्प बनाए जाएंगे ताकि व्हीलचेयर आसानी से आ-जा सके। स्टेशनों पर व्हीलचेयर की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
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विशेष शौचालय: दिव्यांग यात्रियों के लिए पश्चिमी शैली (Western Style) के विशेष शौचालय बनाए जाएंगे, जिनमें रेलिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं होंगी।
5. सुरक्षा सर्वोपरि: पुलिस सहायता और फर्स्ट एड
बस स्टेशनों पर सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहा है, खासकर महिला यात्रियों के लिए। इसे ध्यान में रखते हुए दयाशंकर सिंह ने सुरक्षा मानकों को सख्त करने के निर्देश दिए हैं।
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पुलिस बूथ: हर बस स्टेशन परिसर में पुलिस सहायता केंद्र (Police Help Desk) के लिए एक निर्धारित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा, जहां पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।
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प्राथमिक चिकित्सा: सफर के दौरान या स्टेशन पर किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल मदद के लिए फर्स्ट एड बॉक्स (First Aid) और जरूरी दवाइयां अनिवार्य रूप से रखी जाएंगी।
6. स्वच्छता अभियान: गंदगी पर 'जीरो टॉलरेंस'
'स्वच्छ भारत मिशन' के तर्ज पर यूपी के बस अड्डों को चमकाने का प्लान तैयार किया गया है। परिवहन मंत्री ने साफ-सफाई को लेकर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है।
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शौचालय की सफाई: शौचालयों में 24 घंटे पानी, साबुन और हैंड सैनिटाइजर की व्यवस्था करनी होगी। गंदगी मिलने पर संबंधित अधिकारी और सफाई एजेंसी पर कार्रवाई की जाएगी।
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कचरा प्रबंधन (Waste Management): सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग एकत्र करने के लिए रंगीन डस्टबिन रखे जाएंगे।
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नियमित धुलाई: बस स्टेशन परिसर की नियमित रूप से सफाई और धुलाई सुनिश्चित की जाएगी। कूड़ा निस्तारण के लिए वाहनों का प्रयोग किया जाएगा ताकि कचरे के ढेर न लगें।
यूपी परिवहन का बदलता चेहरा
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के ये निर्देश अगर धरातल पर पूरी ईमानदारी से उतरते हैं, तो यह यूपी रोडवेज के इतिहास में एक बड़ा बदलाव होगा। 55 करोड़ यात्रियों के लिए यह किसी सौगात से कम नहीं है। अब तक बदबूदार शौचालय, टूटी कुर्सियां और सूचना के अभाव से जूझते यात्रियों को अब एक सम्मानजनक और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिल सकेगा।
मंत्री ने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों (RMs) और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों (ARMs) को निर्देश दिए हैं कि वे इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करें और नियमित रूप से स्टेशनों का निरीक्षण करें। अब देखना यह होगा कि ये सुविधाएं यात्रियों को कब तक मिलनी शुरू होती हैं।