खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के लाखों प्राइवेट कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 'दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम 1962' में 63 साल बाद बड़ा बदलाव करते हुए इसे केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रखकर अब पूरे उत्तर प्रदेश में लागू कर दिया गया है। यूपी प्राइवेट कर्मचारी नया कानून (UP Private Employee Naya Kanoon) कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा, निश्चित काम के घंटे और उचित सुविधाओं का अधिकार दिलाएगा।Read Also:-मेरठ: बिजली बिल में बंपर राहत! पश्चिमांचल विद्युत निगम लाया 'छूट योजना', ऑनलाइन पंजीकरण पर मिलेगा 25% तक का डिस्काउंट

 

निजी क्षेत्र में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कर्मचारी निश्चित घंटों से ज्यादा काम तो नहीं कर रहे हैं, या उनके साथ कोई अन्याय तो नहीं हो रहा है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों को कानूनी कवच प्रदान करना है।

 

किन प्रतिष्ठानों पर लागू होगा यह नया कानून?

श्रम मंत्री अनिल राजभर के अनुसार, यह संशोधित कानून उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा, जहां कम से कम 20 कर्मचारी कार्यरत हैं। 20 से कम कर्मचारियों वाले छोटे प्रतिष्ठानों पर यह कानून लागू करना स्वैच्छिक (ऐच्छिक) रहेगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से छोटे व्यवसायों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

 

इस अधिनियम का दायरा बढ़ाते हुए इसमें अब क्लिनिक, पॉलीक्लिनिक, डिलीवरी होम, आर्किटेक्ट, टैक्स सलाहकार, टेक्निकल सलाहकार, सेवा प्रदाता (Service Providers) और सर्विस सेंटर जैसे कई नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी शामिल कर लिया गया है। इन सभी जगहों पर कार्यरत कर्मचारियों को अब सुरक्षित माहौल, तय काम के घंटे और छुट्टियां मिलेंगी।
 
 

काम के घंटे और ओवरटाइम के नए नियम

यूपी प्राइवेट कर्मचारी नया कानून में काम के घंटों और ओवरटाइम की सीमाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो कर्मचारियों को लचीलापन और बेहतर भुगतान सुनिश्चित करते हैं:

 

  • दैनिक कार्य अवधि: प्रतिदिन काम की अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 9 घंटे कर दी गई है।
  • साप्ताहिक कार्य सीमा: सप्ताह में कुल काम के घंटे अभी भी 48 घंटे ही रहेंगे, इसमें कोई बदलाव नहीं है।
  • अधिकतम कार्य: अब किसी भी कर्मचारी से एक दिन में अधिकतम 11 घंटे ही काम कराया जा सकता है, जबकि पहले यह सीमा 10 घंटे थी।
  • ओवरटाइम सीमा: ओवरटाइम की सीमा को 3 महीने में 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दिया गया है।
  • ओवरटाइम भुगतान: अगर कोई कर्मचारी ओवरटाइम करता है, तो उसे हर घंटे के लिए उसकी सामान्य प्रति घंटे की सैलरी से 2 गुना पैसा दिया जाएगा।

 

महिलाओं और कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान

इस संशोधन में महिला कर्मचारियों और अन्य श्रमिकों के लिए कई कर्मचारी-हितैषी प्रावधान जोड़े गए हैं:

 

  1. महिलाओं की नाइट शिफ्ट: महिलाओं के लिए रात की शिफ्ट के समय में बदलाव किया गया है। पहले यह रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक मानी जाती थी, अब इसे बदलकर शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक कर दिया गया है।
  2. बैठने की व्यवस्था: जहां कर्मचारी दिनभर खड़े होकर काम करते हैं, वहां नियोक्ता को अब बैठने की व्यवस्था (Sitting Arrangement) करना अनिवार्य होगा।
  3. नियुक्ति पत्र: अब हर नियोक्ता को हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना अनिवार्य होगा, जिससे नौकरी का रिकॉर्ड साफ रहेगा।
  4. सुधार नोटिस: किसी भी कानूनी कार्रवाई से 15 दिन पहले नियोक्ता को सुधार का नोटिस देना आवश्यक होगा, जिससे वह गलती को सुधार सके।

 

जुर्माने के नियमों को किया गया सख्त

कर्मचारियों के शोषण को रोकने के लिए, यूपी प्राइवेट कर्मचारी नया कानून के तहत सजा के प्रावधानों को बहुत सख्त कर दिया गया है।
उल्लंघन
पुराना जुर्माना
नया जुर्माना
पहली गलती
₹100 से ₹500 तक
₹2,000 तक
दूसरी बार गलती
₹100 से ₹500 तक
₹10,000 तक
 
यह बढ़ी हुई जुर्माना राशि नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में मदद करेगी।

 

शिकायत और जांच प्रक्रिया

श्रम प्रवर्तन अधिकारी (LEO) अब केंद्रीय निरीक्षण प्रणाली (CIS) के नियमों के अनुसार रैंडम तरीके से जांच करेंगे। शिकायत मिलने पर LEO बिना CIS की लिस्ट के भी सीधी जांच कर सकते हैं। सहायक श्रम आयुक्त सुमित कुमार के मुताबिक, वर्कर अपनी शिकायत IGRS पोर्टल, स्थानीय श्रम कार्यालय, लेबर कोर्ट या श्रम विभाग की हेल्पलाइन (1800 1805160) पर दर्ज कर सकते हैं।

 

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम 1962' में किए गए संशोधन से अब पूरे प्रदेश के 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले बड़े प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा मिल सकेगी। यूपी प्राइवेट कर्मचारी नया कानून ने काम के घंटे, ओवरटाइम की सीमा बढ़ाकर (144 घंटे/3 माह) और जुर्माना राशि को 10 हजार रुपए तक करके कर्मचारियों के अधिकार और हितों को मजबूत किया है। यह कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और कर्मचारी सुरक्षा, दोनों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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