बिजनौर (06 अप्रैल 2026): पुलिस का काम अपराध और अपराधियों की तह तक जाना होता है, लेकिन जब रक्षक ही लापरवाही की सारी हदें पार कर दें, तो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना लाजमी है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां पुलिस अधिकारियों ने एक संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय आतंकी की 'AK-47' राइफल को महज एक 'खिलौना' और 'हैंड ग्रेनेड' (बम) को 'परफ्यूम की बोतल' मानकर उसे न केवल छोड़ दिया, बल्कि आधिकारिक तौर पर उसे 'क्लीन चिट' (Clean Chit) भी दे दी।READ ALSO:-नूरपुर पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी: मेले से बाइक चुराकर पुर्जे-पुर्जे करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
इस घोर लापरवाही का पर्दाफाश तब हुआ जब उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। मामले की गंभीरता और पुलिस महकमे की किरकिरी होने के बाद, बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक झा ने कड़ा एक्शन लेते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष (इंस्पेक्टर) सत्येंद्र सिंह मलिक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इसके साथ ही, बिना जांच-पड़ताल के फाइनल रिपोर्ट पर मुहर लगाने वाले क्षेत्राधिकारी (CO) नितेश प्रताप सिंह को भी उनके पद से हटाकर पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया है।

फ्लैशबैक: नवंबर 2025 का वह वायरल वीडियो जिसने उड़ाई थी नींद
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें पिछले साल यानी नवंबर 2025 से जुड़ी हैं। बिजनौर जिले का रहने वाला एक युवक 'मैजुल' रोजगार के सिलसिले में साउथ अफ्रीका में सैलून का काम करता है। नवंबर में मैजुल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। यह एक इंस्टाग्राम वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग थी, जिसमें मैजुल के साथ तीन अन्य लोग भी जुड़े हुए थे।

इस वीडियो कॉल में मेरठ का रहने वाला और वर्तमान में दुबई में बसा 'आकिब खान' भी शामिल था। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता था कि आकिब खान खुलेआम एक घातक AK-47 असॉल्ट राइफल और एक हैंड ग्रेनेड का प्रदर्शन कर रहा था। हथियारों के इस खुले प्रदर्शन वाले वीडियो के वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।
मामले का संज्ञान लेते हुए 23 नवंबर 2025 को बिजनौर के नजीबाबाद थाने में मैजुल, आकिब और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
इंस्पेक्टर की 'अंधी जांच': खिलौना और परफ्यूम की थ्योरी
मुकदमा दर्ज होने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले की विवेचना (Investigation) नजीबाबाद के तत्कालीन थानाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह मलिक को सौंपी गई। जांच के दौरान इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह ने साउथ अफ्रीका में बैठे मैजुल से संपर्क साधा। मैजुल ने चालाकी दिखाते हुए वीडियो कॉल के जरिए ही इंस्पेक्टर की बात दुबई में बैठे संदिग्ध आकिब खान से करवा दी।
यहीं से पुलिस की सबसे बड़ी और हास्यास्पद लापरवाही शुरू हुई। पुलिस पूछताछ में आकिब ने बड़ी ही आसानी से इंस्पेक्टर को अपनी बातों के जाल में उलझा लिया। आकिब ने दावा किया कि वीडियो में जिसे AK-47 राइफल समझा जा रहा है, वह असल में महज एक प्लास्टिक का 'खिलौना' है। जब हैंड ग्रेनेड के बारे में पूछा गया, तो उसने हंसते हुए कह दिया कि वह बम नहीं, बल्कि बम के आकार वाली एक 'परफ्यूम की बोतल' (Perfume Bottle) है।
हैरानी की बात यह रही कि नजीबाबाद पुलिस के इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह मलिक ने बिना किसी फॉरेंसिक जांच, बिना इंटरपोल की मदद या बिना किसी खुफिया सत्यापन के, आकिब की इस मनगढ़ंत कहानी पर पूरी तरह से भरोसा कर लिया। उन्होंने अपनी केस डायरी में इसे 'खिलौना' करार देते हुए मामले में 'फाइनल रिपोर्ट' (FR) लगा दी और आकिब व मैजुल को पूरी तरह से 'क्लीन चिट' दे दी।
CO की भी घोर लापरवाही: बिना क्रॉस-चेक किए लगाई मुहर
पुलिसिया लापरवाही का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। जब किसी गंभीर मामले में फाइनल रिपोर्ट (FR) लगती है, तो उसकी समीक्षा करने की जिम्मेदारी क्षेत्राधिकारी (CO) की होती है। लेकिन तत्कालीन CO नितेश प्रताप सिंह ने भी अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया। उन्होंने इंस्पेक्टर द्वारा पेश की गई इस 'खिलौना थ्योरी' को बिना कोई सवाल पूछे, बिना क्रॉस-चेकिंग (Cross-checking) किए, आंख मूंदकर स्वीकृत कर लिया।
2 अप्रैल 2026: यूपी ATS का क्रैकडाउन और खुली पुलिस की पोल
बिजनौर पुलिस भले ही इस फाइल को बंद कर गहरी नींद में सो गई थी, लेकिन देश की खुफिया एजेंसियां और यूपी एटीएस (UP ATS) चुप नहीं बैठी थीं। 2 अप्रैल 2026 को यूपी एटीएस ने लखनऊ में एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए एक खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया।
एटीएस की टीम ने लखनऊ से 4 खूंखार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया, जिनके नाम हैं:
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साकिब उर्फ डेविल (सरगना)
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विकास गहलावत उर्फ रौनक
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लोकेश उर्फ बाबू उर्फ पपला पंडित
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अरबाब
गिरफ्तारी के दौरान एटीएस को इनके पास से संदिग्ध केमिकल से भरा एक कैन, 7 मोबाइल फोन, 24 भड़काऊ पंपलेट और आधार कार्ड बरामद हुए।
साकिब (डेविल) के कबूलनामे ने बिजनौर पुलिस के उड़ाए होश
एटीएस की कड़ी पूछताछ में इस गिरोह के मास्टरमाइंड 'साकिब उर्फ डेविल' ने जो राज उगले, उसने बिजनौर पुलिस की 'क्लीन चिट' के परखच्चे उड़ा दिए। साकिब ने एटीएस को बताया कि उसका सीधा संबंध दुबई में बैठे उसी 'आकिब खान' से है, जिसे बिजनौर पुलिस ने 'खिलौने वाला' बताकर छोड़ दिया था।
साकिब ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि दुबई में बैठा आकिब खान कोई मामूली कार ड्राइवर नहीं, बल्कि आतंकियों का एक प्रमुख स्लीपर सेल और रिक्रूटर है। आकिब ने ही साकिब (डेविल) का संपर्क पाकिस्तान में बैठे खूंखार आतंकी हैंडलर 'अबू बकर' (Abu Bakar) से करवाया था। इस खुलासे के बाद स्पष्ट हो गया कि वीडियो में नजर आ रही AK-47 और ग्रेनेड कोई खिलौना या परफ्यूम नहीं, बल्कि असली हथियार थे, जिन्हें किसी बड़ी वारदात के लिए जमा किया जा रहा था।
दुबई से आकिब की सफाई: "मुझे फंसाया जा रहा है"
यूपी एटीएस की रडार पर आते ही दुबई में बैठे आकिब खान में खलबली मच गई। अपनी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण (Extradition) के डर से आकिब ने दो दिन पहले अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर एक सफाई वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उसने खुद को एक मासूम नागरिक बताते हुए कहा, "मेरा किसी भी आतंकी संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। मैं पिछले तीन साल से दुबई में रहकर सिर्फ कार चलाने का काम कर रहा हूं। मुझे एक अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत झूठा फंसाया जा रहा है।" हालांकि, एटीएस के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और साकिब के बयानों के बाद आकिब की इस सफाई का कोई मोल नहीं रह गया है।
कई शहरों को दहलाने की थी खौफनाक साजिश
यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किए गए चारों आतंकियों को पुलिस रिमांड पर लेकर जब सख्ती से पूछताछ की, तो रोंगटे खड़े कर देने वाली खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ।
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सीरियल ब्लास्ट का प्लान: पूछताछ में सामने आया कि ये आतंकी लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में सिलसिलेवार धमाके (Serial Blasts) करने की फिराक में थे।
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पाकिस्तानी हैंडलर्स का सीधा कंट्रोल: आतंकियों के जब्त किए गए मोबाइल फोन से एटीएस को दर्जनों एनक्रिप्टेड 'ऑडियो क्लिप्स' बरामद हुई हैं। ये ऑडियो रिकॉर्डिंग पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर द्वारा साकिब को भेजी गई थीं।
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रेकी और एस्केप प्लान: इन ऑडियो क्लिप्स में धमाके से पहले की पूरी मूवमेंट (Movement), टारगेट की रेकी (Recce) करने के तरीके और विस्फोट को अंजाम देने के बाद पुलिस से बचकर प्रदेश से बाहर निकलने (Escape Plan) का पूरा खाका खींचा गया था। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने आतंकियों को सख्त निर्देश दिए थे कि धमाके के तुरंत बाद तबाही का वीडियो बनाकर उन्हें भेजा जाए।
SP अभिषेक झा का कड़ा एक्शन
यूपी एटीएस की रिपोर्ट और पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय से मिले कड़े निर्देशों के बाद, बिजनौर के एसपी अभिषेक झा ने रविवार को बड़ी विभागीय कार्रवाई की। राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर ऐसी अक्षम्य लापरवाही बरतने के आरोप में इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह मलिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और क्षेत्राधिकारी नितेश प्रताप सिंह को लाइन हाजिर कर उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) बैठा दी गई है।
यह पूरी घटना उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ा सबक है कि आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में सोशल मीडिया पर दिखने वाली चीजों और संदिग्धों की बातों पर बिना वैज्ञानिक और खुफिया जांच के विश्वास करना कितना घातक साबित हो सकता है। फिलहाल, यूपी एटीएस आकिब खान को दुबई से डिपोर्ट (Deport) कराकर भारत लाने की कानूनी प्रक्रियाओं में जुट गई है।