लखनऊ (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति (Chancellor) आनंदीबेन पटेल हमेशा अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 24वें दीक्षांत समारोह में उनका यही अंदाज एक बार फिर देखने को मिला।
समारोह में जहां एक ओर उन्होंने 62,537 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां बांटी, वहीं दूसरी ओर मंच से युवाओं, सरकारी शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसी खरी-खोटी सुनाई, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। राज्यपाल ने छात्रों को जीवन के असली मायने समझाए, तो वहीं विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की बखिया उधेड़ कर रख दी।
"लव मैरिज का विरोध नहीं, लेकिन पढ़ाई के दौरान पराक्रम से बचें"
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं में बढ़ते भटकाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा, "कभी-कभी लड़के-लड़कियां घर से भाग जाते हैं। पढ़ाई के दौरान लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती हैं और कइयों को बच्चा भी हो जाता है। बाद में ना तो वो जोड़े उस बच्चे को अपनाते हैं और ना ही उनके घरवाले। क्या आप जानते हैं कि उस बच्चे की जिम्मेदारी किस पर जाती है? वह जिम्मेदारी सीधे सरकार पर आ जाती है। इसलिए मेरा आपसे आग्रह है कि ऐसा 'पराक्रम' आप लोग मत करिए। अपनी पढ़ाई के दौरान इन पराक्रमों से दूर रहिए।"

राज्यपाल ने अपनी बात को संतुलित करते हुए कहा कि वह प्रेम विवाह (Love Marriage) के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मैं लव मैरिज के खिलाफ नहीं हूं, आप करिए लव मैरिज। अगर आपको उनसे प्रेम है और उनको आपसे प्रेम है, तो खुशी-खुशी शादी करिए। लेकिन मेरी एक शर्त है— शादी तभी करिए जब आप दोनों पूरी तरह से आत्मनिर्भर (Independent) हो जाएं। पहले अपना करियर बनाएं, फिर घर बसाएं।"
उन्होंने अपना खुद का उदाहरण देते हुए बताया, "मेरा बेटा भी पढ़ाई के लिए बेंगलुरु गया था। मैंने उससे साफ कह दिया था कि अगर वहां कोई लड़की पसंद आए तो बेझिझक बता देना, हम शादी करा देंगे। लेकिन उसे कोई पसंद ही नहीं आई। कहने का तात्पर्य यह है कि प्राथमिकता हमेशा आपका करियर होना चाहिए।"
राजभवन की अनोखी पहल: 10-12 बच्चियों का संवारा जा रहा भविष्य
भटके हुए युवाओं की गलतियों का शिकार होने वाले मासूम बच्चों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने एक भावुक जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों को उनके माता-पिता छोड़ देते हैं, उनकी कोई गलती नहीं होती। उन्होंने कहा, "पैदा होने में उन मासूमों की कोई गलती नहीं थी। किसी ने जवानी में गलती कर दी, तो क्या उन बच्चों को जिंदगी भर कोई अपनाए ही नहीं? क्या उन्हें कोई पाले ही नहीं? इसलिए राजभवन और AKTU के सहयोग से ऐसी 10-12 बच्चियों को पढ़ाया जा रहा है। उन्हें लाने-ले जाने के लिए राजभवन से गाड़ी जाती है। मैं AKTU के प्रोफेसरों को बधाई देती हूं कि उन्होंने समाज के ठुकराए ऐसे बच्चों का हाथ पकड़ा है। ये बच्चियां शिक्षित होकर जरूर आत्मनिर्भर बनेंगी।"

निर्माण विभाग पर फूटा गुस्सा: "टंकी में बंदर नहाते हैं, हॉस्टल से चूहे निकलते हैं"
राज्यपाल के भाषण का सबसे तीखा हिस्सा वह था, जब उन्होंने विश्वविद्यालयों के निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों का जिक्र किया। उन्होंने सीधे तौर पर निर्माण विभाग (Construction Department) और इंजीनियरों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए।
उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "मैंने कई यूनिवर्सिटी और गर्ल्स हॉस्टल विजिट किए हैं, और वहां की कमियां देखकर निराशा होती है। हॉस्टल के कमरों में कोई खिड़की नहीं है, बुक्स रखने के लिए कोई जगह नहीं है। अलमारी खोली तो अंदर से चूहा निकल कर भागा। तीसरी मंजिल पर जो पानी की टंकी रखी है, उस पर ढक्कन तक नहीं है; बंदर उसमें नहाते हैं और बच्चे वही पानी पीते हैं। मेस की हालत यह है कि छत पर एक-एक फुट के पौधे उग आए हैं, जिन्हें मैंने अपने PSO से उखाड़ने को कहा। आप लोग चेक ही नहीं करते कि मेस में कौन सा मसाला आ रहा है, कहीं वह एक्सपायरी डेट का तो नहीं है?"
इंजीनियरिंग के छात्रों के सामने खोला खराब डिजाइनिंग का कच्चा चिट्ठा
चूंकि यह एक तकनीकी विश्वविद्यालय (Technical University) का समारोह था, इसलिए राज्यपाल ने डिजाइनिंग की खामियों को भी मंच से उठाया:
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क्लासरूम और हॉस्टल: "एक क्लासरूम में ब्लैकबोर्ड इतना ऊंचा लगा था कि बच्चे वहां तक पहुंच ही नहीं सकते। हॉस्टल के टॉप फ्लोर पर पंखा इतनी नीची छत पर लगा है कि उसमें सिर लड़ रहा है। जिसने लगाया उसे नहीं दिखा, लेकिन आपको तो देखना चाहिए। 200 बच्चों के हॉस्टल की मेस में बर्तन धोने का एरिया सिर्फ एक घर के वाशिंग एरिया जितना छोटा है।"
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लाइब्रेरी और एडमिन ब्लॉक: "एक जगह एडमिन ब्लॉक के कॉर्नर पर 2 मंजिल की लाइब्रेरी बना दी गई है। हॉस्टल वहां से 2 किलोमीटर दूर है। भला 1-2 किलोमीटर दूर जाकर बच्चे कैसे पढ़ेंगे? क्या राज्य सरकार ने जो बजट दिया है, उसे सिर्फ आंख बंद करके खर्च कर देना है? एक एक्टिविटी रूम के लिए 3-3 बड़े हॉल क्यों बना दिए गए? आपकी निर्माण विभाग की ऐसी दशा देखकर कभी-कभी लगता है कि कहीं ये अधिकारी फर्जी डिग्री पाकर तो भर्ती नहीं हो गए हैं।"
सरकारी शिक्षकों को आईना: 83 में से 49 मेडल प्राइवेट वालों को
राज्यपाल ने शिक्षा के गिरते सरकारी स्तर पर भी गहरी चोट की। उन्होंने मंच से आंकड़े पेश करते हुए बताया कि दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वाले कुल 83 छात्रों में से 49 छात्र प्राइवेट कॉलेजों से हैं।
उन्होंने सरकारी शिक्षकों से अपील करते हुए कहा, "प्राइवेट कॉलेज के बच्चे भारी भरकम फीस भी भर रहे हैं और आपसे ज्यादा अच्छे नंबर भी ला रहे हैं। मैं सरकारी अध्यापकों से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि आप मेहनत करिए। सरकार आपको अच्छी सैलरी देती है, तो आप भी बच्चों को सही ढंग से सिखाइए, ताकि गवर्नमेंट कॉलेजों की गरिमा लौट सके।"
भारत की बढ़ती ताकत: "हम डरने वाले नहीं, डराने वाले भी नहीं"
युवाओं में राष्ट्रीय गौरव की भावना भरते हुए राज्यपाल ने भारत की रक्षा प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "DRDO के वैज्ञानिक आज क्रूज मिसाइल बना रहे हैं। पहले आसपास के देश हमें डराते थे, लेकिन अब हम डरने वाले नहीं हैं, और न ही हम किसी को डराने वाले हैं। पहले हम सारी मिसाइलें और तोपें विदेशों से मंगाते थे, लेकिन आज हम उन्हें विदेशों को बेच रहे हैं। हाल ही में INS दूनागिरी सहित 3 पूर्णतः स्वदेशी युद्धपोत सेना को सौंपे गए हैं। आप युवाओं का सपना होना चाहिए कि आप भी इस स्वदेशी क्रांति में अपना योगदान दें। तकनीक के सिर्फ उपभोक्ता (Consumer) मत बनिए, बल्कि इसके सृजनकर्ता (Creator) बनिए।"
IOCL चेयरमैन के 3 सबक: जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनें
इस भव्य समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी भी मौजूद रहे, जिनकी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ से ही हुई है। उन्होंने इंजीनियरिंग के छात्रों को सफलता के तीन अहम सबक (Lessons) दिए:
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थिंक, अप्लाई एंड सॉल्व (Think, Apply & Solve): योग्यता यह नहीं है कि हम क्या जानते हैं, बल्कि यह है कि हम अपने ज्ञान का इस्तेमाल समस्याओं को सुलझाने में कैसे करते हैं।
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क्रिएट वैल्यू (Create Value): हमेशा सोचें कि आप अपने काम से क्या वैल्यू जोड़ सकते हैं। उन्होंने चेन्नई के एक ऑटो ड्राइवर का उदाहरण दिया, जिसने अपने ऑटो में वाई-फाई, मैगजीन, टीवी और फ्री स्नैक्स रखकर अपनी सर्विस की वैल्यू बढ़ा दी।
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क्षमता, चरित्र और विश्वास (Capacity, Character, and Trust): डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
साहनी ने कहा, "आज देश को केवल डिग्री होल्डर नहीं, बल्कि प्रॉब्लम सॉल्वर (Problem Solver) चाहिए। हमें जॉब सीकर्स के साथ-साथ जॉब क्रिएटर्स (Job Creators) और एथिकल लीडर्स (Ethical Leaders) की जरूरत है। याद रखें, कॉलेज हमें सिखाता है कि काम 'कैसे' करना है, लेकिन वह काम 'क्यों' करना है, यह जवाब आपको खुद तलाशना होगा।"
अंत में, राज्यपाल ने सभी 62,537 डिग्री धारकों (जिनमें 18,000 छात्र और 44,000 छात्राएं शामिल थीं) और स्टार्टअप्स के लिए अवार्ड पाने वाले 5 उद्यमी छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। तकनीकी शिक्षा में छात्राओं की इतनी बड़ी संख्या को देखकर उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण का एक सुखद संकेत बताया।