खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जनपद बिजनौर से एक बेहद सनसनीखेज और समाज को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। प्रधानी के चुनाव (Panchayat Election) की रंजिश इंसान को किस हद तक अंधा कर सकती है, इसका जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण थाना नूरपुर क्षेत्र के ग्राम चांगीपुर में देखने को मिला है। यहां के वर्तमान ग्राम प्रधान ने अपने राजनीतिक विरोधी को फंसाने के लिए न केवल एक बेजुबान गोवंश की हत्या करवाई, बल्कि इलाके का साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की भी पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी।
 
लेकिन, बिजनौर पुलिस की पैनी नजर, स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम और त्वरित कार्रवाई ने इस पूरी साजिश पर पानी फेर दिया। पुलिस मुठभेड़ (Police Encounter) में एक आरोपी को गोली लगी है, जबकि साजिश के मास्टरमाइंड ग्राम प्रधान समेत कुल 5 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरी खौफनाक साजिश की 'इनसाइड स्टोरी'।
 
खेत में मिले गोवंश के अवशेष, गांव में फैल गया था तनाव
इस पूरे खौफनाक नाटक की शुरुआत 18 जून 2026 की सुबह हुई। नूरपुर थाने के अंतर्गत आने वाले ग्राम चांगीपुर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गांव के ही रहने वाले रामअवतार के गन्ने के खेत में एक गोवंशीय बछड़े के अवशेष बरामद हुए। यह खबर जंगल में आग की तरह फैली।
 
धार्मिक रूप से बेहद संवेदनशील मामला होने के कारण स्थानीय हिंदू संगठन मौके पर पहुंच गए और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। पुलिस ने भी मामले की नजाकत को समझते हुए बिना किसी देरी के मु0अ0सं0 224/2026 धारा 3/5/8 उ0प्र0 गोवध निवारण अधिनियम के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और अपराधियों की धरपकड़ के लिए टीमें लगा दी गईं।
 
पुलिस एनकाउंटर: जब अंधेरे में गूंजी गोलियों की तड़तड़ाहट
नूरपुर पुलिस लगातार अपराधियों की तलाश में दबिश दे रही थी। इसी बीच, दिनांक 20 और 21 जून 2026 की मध्य रात्रि को पुलिस को मुखबिर से एक बेहद पुख्ता सूचना मिली कि गौकशी की घटना को अंजाम देने वाले अपराधी इलाके में ही छिपे हुए हैं।
 
सूचना पाते ही थाना नूरपुर पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी कर ली। पुलिस को देखते ही बदमाशों ने भागने का प्रयास किया और फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी और आत्मरक्षार्थ कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। इस मुठभेड़ में फैजान उर्फ सोनू (पुत्र फारूख उर्फ पप्पू, निवासी ग्राम चांगीपुर) पैर में गोली लगने से घायल होकर गिर पड़ा, जिसे पुलिस ने तुरंत दबोच लिया। हालांकि, रात के घने अंधेरे और गन्ने के खेतों का फायदा उठाकर फैजान के दो अन्य साथी (जुबेर और सलमान) मौके से फरार होने में कामयाब रहे। घायल फैजान को तुरंत सीएचसी नूरपुर में भर्ती कराया गया।
 

पूछताछ में खुली पोल: प्रधानी चुनाव और पुरानी रंजिश का कॉकटेल

अस्पताल में जब घायल फैजान उर्फ सोनू से पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने जो कहानी बताई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यह गौकशी किसी मांस के व्यापार के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से एक 'पॉलिटिकल और रिवेंज मर्डर' की साजिश थी।
 
फैजान ने कबूला कि गांव के वर्तमान प्रधान जगपाल (पुत्र रोहताश) की गांव के ही रहने वाले हसन (पुत्र जाशम अली) के साथ गहरी राजनीतिक और प्रधानी चुनाव की दुश्मनी चल रही है। हसन इलाके का एक नामी हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर पहले से ही चोरी और लूट के कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इसके अलावा, इस साजिश में शामिल फारूख उर्फ पप्पू (फैजान का पिता) भी हसन से खून की रंजिश रखता था। दरअसल, वर्ष 2024 में हसन ने फारूख की बेटी को अगवा कर लिया था (भगा ले गया था), जिसके चलते अमरोहा के थाना मंडी धनौरा में हसन के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। आगामी प्रधानी चुनाव में हसन का दबदबा खत्म करने और उसे गौवध जैसे गैर-जमानती और सख्त कानून वाले अपराध में फंसाकर जेल में सड़ाने के लिए प्रधान जगपाल और फारूख ने हाथ मिला लिया।
 

साजिश का 'ब्लूप्रिंट': ऐसे रची गई थी चक्रव्यूह की रचना

अपने दुश्मन को फंसाने के लिए आरोपियों ने महीनों पहले से एक फूलप्रूफ प्लान बनाया था:
 
नया सिम कार्ड और भाड़े के अपराधी: घटना को अंजाम देने के लिए मुख्य आरोपी फैजान ने एक फर्जी नाम से नया सिम कार्ड चालू किया। इसके बाद उसने मुरादाबाद के बाजपुर इलाके से अपने दो पेशेवर आपराधिक साथियों (जुबेर और सलमान) को इस काम के लिए सुपारी देकर गांव बुलाया।
 
गोवंश की व्यवस्था: गांव के ही रहने वाले ब्रह्मपाल उर्फ संता (पुत्र जगराम) को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह कहीं से एक गोवंशीय बछड़े का इंतजाम करे।
 
रात के अंधेरे में हत्या: 17 और 18 जून 2026 की दरमियानी रात को फैजान, जुबेर और सलमान ने मिलकर वर्तमान प्रधान जगपाल के ही खेत में उस बेजुबान बछड़े की निर्मम हत्या (गौकशी) कर दी।
 
सबूतों को प्लांट करना: हत्या के बाद बछड़े के अवशेषों को एक प्लास्टिक के बोरे में भरा गया और उसे गांव के ही रामअवतार के गन्ने के खेत में जानबूझकर फेंक दिया गया। वारदात के तुरंत बाद वह नया सिम कार्ड तोड़कर फेंक दिया गया ताकि पुलिस लोकेशन ट्रेस न कर सके।
 

सुबह का ड्रामा: निर्दोष को फंसाने की आखिरी चाल

अगली सुबह, प्लान के मुताबिक रामअवतार ने प्रधान जगपाल को खेत में अवशेष मिलने की झूठी जानकारी दी। प्रधान ने तुरंत रामअवतार को नूरपुर पुलिस को फोन करने को कहा। पुलिस के पहुंचने से पहले ही प्रधान जगपाल ने इलाके के कुछ हिंदू संगठनों को भड़का कर वहां इकट्ठा कर लिया।
 
भीड़ के सामने प्रधान ने बड़ी चालाकी से सारा इल्जाम अपने दुश्मन हसन और उसके दो साथियों (शमीम और शफीक) पर मढ़ दिया। उनका मकसद था कि पुलिस भीड़ के दबाव में आकर बिना जांच किए हसन को गिरफ्तार कर ले। लेकिन पुलिस ने जल्दबाजी नहीं की। पुलिस की सर्विलांस टीम ने जब इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस (Call Detail Records) खंगाले, तो सारा दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
 

सलाखों के पीछे पहुंचे ये 5 शातिर दिमाग (Arrested Accused)

थाना नूरपुर पुलिस की शानदार तफ्तीश के बाद निम्नलिखित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है (ये सभी ग्राम चांगीपुर, थाना नूरपुर के निवासी हैं):
  • फैजान उर्फ सोनू (पुत्र फारूख) - मुठभेड़ में घायल शूटर।
  • जगपाल (पुत्र रोहताश) - मास्टरमाइंड और वर्तमान ग्राम प्रधान।
  • किरणपाल उर्फ लाला (पुत्र रोहताश) - प्रधान का सगा भाई और साजिशकर्ता।
  • रामअवतार (पुत्र मुरारी) - खेत का मालिक जिसने झूठी सूचना दी।
  • ब्रह्मपाल उर्फ संता (पुत्र जगराम) - गोवंश उपलब्ध कराने वाला आरोपी।
 

इन 3 आरोपियों की तलाश में पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश

इस मामले में 3 आरोपी अभी भी वांछित (Wanted) चल रहे हैं:
 
जुबेर (निवासी ग्राम बगियापुर, थाना छजलैट, मुरादाबाद)
सलमान (निवासी ग्राम बगियापुर, थाना छजलैट, मुरादाबाद)
फारूख उर्फ पप्पू (फैजान का पिता, निवासी चांगीपुर, बिजनौर)
 

हथियारों की बरामदगी:

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी फैजान के पास से एक अवैध 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस, एक चापड़, एक तेज धार वाली छुरी, लकड़ी का गुटका और रस्सियां बरामद की हैं। ज्ञात हो कि फरार आरोपी जुबेर पर पहले से ही पॉक्सो एक्ट, मारपीट और चोरी के कई मुकदमे दर्ज हैं।
 

कानून के लंबे हाथ

बिजनौर के थाना नूरपुर पुलिस टीम (जिसमें थानाध्यक्ष श्री प्रवेज कुमार, उ.नि. रोहित कुमार, हे.का. मोहनस्वरूप, का. मोहित कुमार और अंकित कुमार शामिल थे) ने इस घटना का खुलासा कर न केवल एक निर्दोष को जेल जाने से बचाया है, बल्कि इलाके में एक बड़ा साम्प्रदायिक दंगा होने से भी रोक लिया। यह घटना इस बात की कड़ी चेतावनी है कि राजनीतिक रंजिश निकालने के लिए कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों का अंजाम केवल सलाखें और पुलिस की गोलियां ही होती हैं। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
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