मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं और विशेषकर मेरठवासियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। पिछले कई महीनों से गले की फांस बने 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' (Smart Prepaid Meter) के झंझट से अब शहर और देहात की जनता को मुक्ति मिलने जा रही है। उपभोक्ताओं के भारी विरोध, प्रदर्शनों और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और पावर कारपोरेशन (UPPCL) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।READ ALSO:-LPG Gas Price Rumor Busted: क्या सच में 990 रुपये का हो गया है घरेलू रसोई गैस सिलेंडर? सोशल मीडिया के इस बड़े भ्रम की जानिए पूरी सच्चाई!
मेरठ महानगर और देहात इलाकों में लगाए गए सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को अब वापस पोस्टपेड (Postpaid) प्रणाली में बदला जा रहा है। यानी अब जनता को पहले से रिचार्ज कराने की चिंता नहीं सताएगी, बल्कि पहले की तरह महीने के अंत में बिल आएगा और उसे जमा करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इस प्रक्रिया का बकायदा शुभारंभ हो चुका है और ऊर्जा भवन (मुख्यालय) से मेरठ के उपभोक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर कनेक्शन पोस्टपेड होने के मैसेज (SMS) भी धड़ाधड़ आने शुरू हो गए हैं।
आइए, पश्चिमी यूपी के इस अहम मुद्दे को और विभाग की नई बिलिंग प्रणाली को विस्तार से समझते हैं।
आंकड़ों की जुबानी: मेरठ में कितने मीटरों पर हुआ बदलाव?
मेरठ जिले में ऊर्जा निगम द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान काफी जोर-शोर से चलाया गया था। विभाग का लक्ष्य बिजली चोरी रोकना और राजस्व वसूली को शत-प्रतिशत करना था। इसी कड़ी में शहर से लेकर गांव तक बड़े पैमाने पर प्रीपेड कनेक्शन बांटे गए थे।
विद्युत विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मेरठ में कुल दो लाख आठ हजार (2,08,000) स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए थे:
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मेरठ महानगर (City Area): शहरी क्षेत्रों में कुल एक लाख आठ हजार (1,08,000) स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड पर सेट किया गया था।
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मेरठ देहात (Rural Area): ग्रामीण क्षेत्रों में कुल एक लाख (1,00,000) प्रीपेड मीटर लगाए गए थे।
अब शासन के सख्त आदेश के बाद इन सभी 2,08,000 कनेक्शनों के सिस्टम में तकनीकी बदलाव कर उन्हें वापस पोस्टपेड श्रेणी (Postpaid Category) में माइग्रेट (Migrate) किया जा रहा है।
क्यों उठी विरोध की चिंगारी? (क्या था पूरा विवाद)
स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर मेरठ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में भारी जनाक्रोश देखने को मिल रहा था। व्यापारी वर्ग, किसान और आम घरेलू उपभोक्ताओं ने सड़कों पर उतरकर इन मीटरों का कड़ा विरोध किया था। इसके पीछे कई गंभीर व्यावहारिक और तकनीकी कारण थे:
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बैलेंस खत्म होते ही बत्ती गुल: प्रीपेड मीटर में मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज कराना पड़ता था। रात-बिरात या छुट्टियों के दिन अगर मीटर का बैलेंस माइनस (Negative) में चला जाता था, तो बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कट जाती थी, जिससे परिवारों को भारी परेशानी होती थी।
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तेज बिलिंग की शिकायतें: उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि पुराने सामान्य मीटरों के मुकाबले इन स्मार्ट प्रीपेड मीटरों में बिजली की खपत बहुत तेजी से दर्ज हो रही थी, जिससे उनका मासिक खर्च दोगुना तक बढ़ गया था।
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रिचार्ज में तकनीकी खामी: कई बार उपभोक्ता ऑनलाइन रिचार्ज कर देते थे, लेकिन बैंक से पैसे कटने के बाद भी मीटर अपडेट नहीं होता था और घंटों तक बिजली कटी रहती थी।
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सर्वर डाउन की समस्या: विद्युत निगम का सर्वर डाउन रहने पर उपभोक्ताओं को हेल्पडेस्क और बिलिंग काउंटरों के चक्कर काटने पड़ते थे।
इन्हीं चौतरफा विरोधों और आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जनहित में इन मीटरों को पोस्टपेड करने का आदेश पारित किया है।
कैसे काम करेगा नया पोस्टपेड सिस्टम? (नियम और बिलिंग साइकिल)
पावर कारपोरेशन ने प्रीपेड से पोस्टपेड हुए इन लाखों कनेक्शनों के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी बिलिंग साइकिल (Billing Cycle) जारी की है, जिससे उपभोक्ताओं को काफी सहूलियत मिलेगी। नए नियमों के अनुसार:
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बिल जारी होने की तारीख: हर महीने की 10 तारीख को सभी पोस्टपेड उपभोक्ताओं का मासिक बिजली बिल जनरेट (Generate) किया जाएगा।
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बिल जमा करने का समय: उपभोक्ताओं को अपना बिजली बिल जमा करने के लिए पूरे 15 दिन का समय (Grace Period) दिया जाएगा।
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कनेक्शन कटने की मियाद: यदि कोई उपभोक्ता देय तिथि (Due Date) तक अपना बिल जमा नहीं कर पाता है, तो उसे एक सप्ताह (7 दिन) का अतिरिक्त समय मिलेगा। देय तिथि निकलने के एक सप्ताह बाद ही नियमानुसार कनेक्शन काटने (Disconnection) की कार्रवाई की जाएगी।
इस नई व्यवस्था से उन लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है, जिन्हें अचानक बिजली कटने का डर सताता रहता था।
उपभोक्ताओं में अभी भी है असमंजस: हेल्पडेस्क पर उमड़ रही भीड़
भले ही प्रक्रिया शुरू हो गई हो, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव के कारण सिस्टम में कुछ तकनीकी देरी भी देखने को मिल रही है, जिससे उपभोक्ताओं में असमंजस (Confusion) की स्थिति पैदा हो गई है।
जेल चुंगी कार्यालय पर भीड़: सोमवार को मेरठ के जेल चुंगी स्थित अधिशासी अभियंता (वाणिज्य प्रथम) के कार्यालय पर बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने मीटरों का स्टेटस जानने पहुंचे। लोग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनका मीटर सरकारी रिकॉर्ड में पोस्टपेड हुआ है या नहीं।
उपभोक्ता का अनुभव: सैनिक विहार (Sainik Vihar), कंकरखेड़ा के रहने वाले बिजली उपभोक्ता विजय मान ने अपनी समस्या साझा करते हुए बताया कि उनके नाम पर दो प्रीपेड कनेक्शन हैं। विभाग की ओर से उनके एक कनेक्शन को पोस्टपेड करने का मैसेज तो मोबाइल पर आ गया है, लेकिन दूसरे कनेक्शन के संबंध में अभी तक कोई मैसेज प्राप्त नहीं हुआ है। इसी तरह की उलझन को लेकर कई लोग रोजाना विद्युत विभाग की हेल्पडेस्क (Helpdesk) पर पूछताछ के लिए पहुंच रहे हैं।
विद्युत अधिकारियों का क्या कहना है?
सिस्टम में आ रही इस देरी और लोगों की उलझन पर मेरठ विद्युत विभाग के आला अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है।
मुख्य अभियंता वितरण (मेरठ प्रथम) रजनीकांत मिश्र और मुख्य अभियंता वितरण (मेरठ द्वितीय) गुरजीत सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि:
"प्रीपेड कनेक्शनों को पोस्टपेड में बदलने की यह पूरी प्रक्रिया लखनऊ स्थित मुख्यालय (Headquarters) स्तर से केंद्रीकृत (Centralized) तरीके से की जा रही है। चूंकि डाटाबेस बहुत बड़ा है (लगभग 2 लाख से अधिक उपभोक्ता), इसलिए सॉफ्टवेयर के माध्यम से बैच (Batches) में कनेक्शन माइग्रेट किए जा रहे हैं।"
अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें। जिनके मोबाइल पर अभी मैसेज नहीं आया है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। शीघ्र ही सर्वर के माध्यम से शत-प्रतिशत (100%) प्रीपेड कनेक्शनों को पोस्टपेड में बदल दिया जाएगा। उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली दफ्तर के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है, पूरी जानकारी उन्हें उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर स्वतः ही प्राप्त हो जाएगी।
मेरठ में 2 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटरों का पोस्टपेड में तब्दील होना प्रशासन का एक स्वागत योग्य कदम है। यह साबित करता है कि जब जनता की वाजिब समस्याओं को शासन तक सही ढंग से पहुंचाया जाता है, तो नीतियां भी बदलती हैं। इस फैसले से न केवल आम उपभोक्ताओं को मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि बिलिंग की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से चलेगी। हालांकि, पावर कारपोरेशन को अपनी सर्वर क्षमता और हेल्पडेस्क सेवाओं को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि तकनीकी बदलाव (Technical Migration) के इस दौर में उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।