Meerut Ground Report: उत्तर प्रदेश के शहरों को विश्वस्तरीय और स्मार्ट बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई योगी सरकार की महत्वाकांक्षी 'सीएम ग्रिड योजना' (CM Grid Scheme) का असर अब मेरठ में भी दिखने लगा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर की प्रमुख सड़कों को जाम-मुक्त बनाना, उनका चौड़ीकरण करना और सुंदर फुटपाथों के साथ शहर का कायाकल्प (City Rejuvenation) करना है। लेकिन, मेरठ शहर में इस योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों की धीमी गति (Slow Construction) ने स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है।
शहर के कई प्रमुख रास्तों को निर्माण कार्य के लिए खोद दिया गया है, जिससे जगह-जगह धूल, मिट्टी और गड्ढों का अंबार लग गया है। हालांकि, मेरठ नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों का लगातार यह दावा है कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे, लेकिन ईटीवी भारत (ETV Bharat) की ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग और रियलिटी चेक में एक अलग ही तस्वीर सामने आई है, जो मानसून से पहले शहरवासियों को डरा रही है।

मानसून की दस्तक और शहरवासियों का खौफ (Monsoon Threat)
जून का महीना बीतने को है और मानसून किसी भी वक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मेरठ में पूरी तरह से दस्तक दे सकता है। ऐसे में शहरवासियों को सबसे बड़ा डर यह सता रहा है कि विकास के नाम पर सड़कों पर जो गहरी खुदाई की गई है, वह बारिश के मौसम में उनके लिए जानलेवा नासूर न बन जाए।
सड़कों पर उड़ती धूल और जगह-जगह लगे निर्माण सामग्री के ढेरों ने राहगीरों का चलना दूभर कर दिया है। ट्रैफिक जाम अब शहर की दैनिक नियति बन गया है। लोगों का मानना है कि अगर बरसात से पहले नगर निगम के अधिकारियों ने कार्यदायी संस्था (Contractor Agencies) पर शिकंजा नहीं कसा और काम की रफ्तार नहीं बढ़ाई, तो बारिश के दिनों में इन रास्तों से निकलना किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा। अब तक खुदी सड़कों और बैरिकेडिंग की कमी के कारण शहर में कई छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं।
VIP इलाकों का भी बुरा हाल, जनप्रतिनिधि भी परेशान
काम की लेटलतीफी और लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वीआईपी (VIP) इलाके भी इससे अछूते नहीं हैं।
-
बागपत के नवनिर्वाचित सांसद राजकुमार सांगवान: इनके मेरठ स्थित आवास के ठीक सामने सड़क निर्माण और नाला निर्माण के कारण पूरी सड़क जर्जर हालत में पड़ी है।
-
एमएलसी अश्वनी त्यागी: इनके घर के नजदीक भी सड़क बुरी तरह टूटी पड़ी है, जिससे वीआईपी मूवमेंट में भी बाधा आ रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब महीनों से सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों के घरों के पास का काम ही पूरा नहीं हो पा रहा है, तो बाकी शहर के आम इलाकों का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
क्या कहते हैं नगर आयुक्त? (Official Statement of Municipal Commissioner)
जनता की इस नाराजगी और काम की धीमी गति के सवालों पर मेरठ के नगर आयुक्त (Nagar Ayukt) सौरभ गंगवार ने प्रशासनिक पक्ष रखा। उन्होंने आश्वस्त किया कि काम पूरी गुणवत्ता के साथ और निर्धारित फेजों के तहत किया जा रहा है। सीएम ग्रिड योजना के तहत मेरठ में सड़कों का चयन तीन अलग-अलग फेज (Phase 1, 2, 3) में किया गया है।
फेज-1 की स्थिति (Phase 1 Status)
-
सड़क: तेजगढ़ी से गांधी आश्रम (Tejgarhi to Gandhi Ashram)
-
प्रगति: इस रोड का लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
-
देरी का कारण: नगर आयुक्त के अनुसार, इस काम की निर्धारित समय सीमा 31 मई थी। लेकिन अत्यधिक भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के कारण काम प्रभावित हुआ। इसके अलावा, बिजली विभाग से शटडाउन (Electric Shutdown) लेने में आ रही तकनीकी समस्याओं के कारण भी देरी हुई। हालांकि, उन्होंने दावा किया है कि इस महीने के अंत तक यह काम 100% पूरा कर लिया जाएगा।
फेज-2: शहर की 4 प्रमुख सड़कों का कायाकल्प (Phase 2 Status)
नगर आयुक्त ने बताया कि फेज-2 में शहर की चार प्रमुख और व्यस्त सड़कों को चुना गया है, जिनका काम प्रगति पर है:
|
सड़क का नाम (Road Name)
|
कार्य की स्थिति (Work Progress)
|
वर्तमान अपडेट (Current Update)
|
|---|---|---|
|
रंगोली रोड (Rangoli Road)
|
50% कार्य पूरा
|
मुख्य सड़क बन चुकी है, केवल फुटपाथ का निर्माण कार्य शेष है।
|
|
बच्चा पार्क रोड (Bachha Park)
|
कार्य जारी
|
बिजली अंडरग्राउंड करने का काम पूरा। फुटपाथ का काम शुरू, अगले डेढ़ महीने में पूरा होने का लक्ष्य।
|
|
साकेत से गांधी आश्रम रोड
|
30% कार्य पूरा
|
कार्य प्रगति पर है, निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का दावा।
|
|
शारदा रोड (Sharda Road)
|
25-30% कार्य पूरा
|
काम तीव्र गति से चल रहा है। निगम लगातार फॉलोअप ले रहा है।
|
अन्य प्रमुख प्रोजेक्ट्स:
इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर (Transport Nagar) में भी सीएम ग्रिड योजना के तहत तेजी से काम चल रहा है, जहां अब तक 40 प्रतिशत काम हो चुका है और फुटपाथ बनने शुरू हो गए हैं। वहीं, 'नई सड़क' के कायाकल्प का मास्टर प्लान भी तैयार है, जिसे 12 महीने की समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।
फेज-3 की रूपरेखा (Phase 3 Planning)
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने स्पष्ट किया कि फेज-1 और फेज-2 के सभी काम इसी वर्ष (2024) पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद फेज-3 के तहत 4 नई सड़कों को चिन्हित किया गया है, जिनके टेंडर निकाले जा चुके हैं। इनमें से कंकरखेड़ा रोड (Kankarkhera Road) के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है और जल्द ही वहां भी मशीनें गरजती नजर आएंगी।
मैनपावर की कमी उठा रही है गंभीर सवाल (Expert Opinion)
भले ही अधिकारी आंकड़ों में काम की प्रगति दिखा रहे हों, लेकिन जमीन पर मौजूद विशेषज्ञों की राय इससे इत्तेफाक नहीं रखती। शहर के जाने-माने सीनियर सिटीजन और आरटीआई एक्टिविस्ट (RTI Activist) संदीप चहल बताते हैं कि वह ठेकेदारों के काम की गति से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं।
चहल ने एक बड़ी खामी की ओर इशारा करते हुए कहा, "इन करोड़ों के प्रोजेक्ट्स में सबसे बड़ी समस्या कम मैनपावर (Manpower/Labour) का होना है। ठेकेदार पर्याप्त मजदूर नहीं लगा रहे हैं। अगर तुरंत मजदूरों और मशीनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो पहली ही भारी बारिश में शहर की व्यवस्था चरमरा जाएगी और शहरवासियों को भारी जलभराव व हादसों का सामना करना पड़ेगा।"
दावों और हकीकत के बीच पिसती जनता
मेरठ में सीएम ग्रिड योजना का उद्देश्य शहर को एक हाईटेक और खूबसूरत लुक देना है, जो भविष्य के लिए एक बेहतरीन कदम है। अंडरग्राउंड वायरिंग, चौड़ी सड़कें और खूबसूरत फुटपाथ बनने के बाद निश्चित ही मेरठ का स्वरूप बदलेगा। लेकिन, वर्तमान में 'निर्माण के दर्द' को कम करने के लिए प्रशासनिक मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करना बहुत जरूरी है।
अगर मानसून से पहले गड्ढे नहीं भरे गए और जल निकासी (Drainage) का उचित प्रबंध नहीं किया गया, तो करोड़ों रुपये की यह योजना जनता के लिए सहूलियत से ज्यादा एक बड़ी मुसीबत साबित होगी। अब देखना यह है कि नगर निगम के अधिकारी अपने दावों पर कितने खरे उतरते हैं और कार्यदायी संस्थाओं से किस सख्ती से काम निकलवाते हैं।