खबरीलाल टीम
मेरठ (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेस्क/खबरीलाल): मेरठ (Meerut) शहर की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है। रैपिड रेल (RRTS) और मेट्रो के बाद अब शहर के बस अड्डों को भी विश्वस्तरीय बनाने की कवायद शुरू हो गई है। गढ़ रोड स्थित पुराने और जर्जर हो चुके सोहराबगेट रोडवेज बस अड्डे (Sohrabgate Roadways Bus Stand) के दिन अब लदने वाले हैं। उत्तर प्रदेश सरकार और परिवहन निगम ने इसे 'हवाई अड्डे' (Airport) की तर्ज पर विकसित करने का रास्ता साफ कर दिया है।READ ALSO:-Bijnor Horror: इंसानियत शर्मसार! 'जूते उतारकर मुंह पर मारे, पैरों में गिराकर मांगवाई माफी'... बिजनौर में वाल्मीकि युवक के साथ हैवानियत का वीडियो देख कांप जाएगी रूह

 

फरवरी महीने से इस ऐतिहासिक बस अड्डे पर बुलडोजर गरजने लगेगा और एक नई, आधुनिक इमारत की नींव रखी जाएगी। लेकिन, विकास की इस बड़ी खबर के बीच एक बड़ी चुनौती भी सामने आ गई है—शिफ्टिंग (Shifting)। अगले 2 साल तक यात्रियों को बस पकड़ने के लिए कहां जाना होगा? जिस जमीन पर अस्थायी बस अड्डा बनना है, वहां फिलहाल गोभी और गेहूं की फसल क्यों लहलहा रही है? और शहर के बीचों-बीच से बस अड्डा हटने पर ट्रैफिक का क्या हाल होगा?

 

'खबरीलाल' की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए मेरठ के इस बड़े प्रोजेक्ट का पूरा ब्लू-प्रिंट (Blueprint) और आम जनता से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।

 

'एयरपोर्ट' जैसा बस अड्डा - क्या है पीपीपी मॉडल?

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रमुख बस अड्डों को आधुनिक बनाने के लिए पीपीपी मॉडल (Public-Private Partnership) अपनाया है। सोहराबगेट बस अड्डा इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा है।

 

कैसा होगा नया सोहराबगेट बस अड्डा?

पुराने ढांचे को पूरी तरह गिराकर यहां एक मल्टी-स्टोरी कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा।

 

  1. एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं: यात्रियों के लिए एसी वेटिंग लाउंज, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, आधुनिक टॉयलेट्स, और लिफ्ट-एस्केलेटर की सुविधा होगी।
  2. शॉपिंग और फूड: बस अड्डे के अंदर ही शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, फूड कोर्ट और एटीएम की सुविधा होगी, ठीक वैसे ही जैसे एयरपोर्ट पर होती है।
  3. होटल/डॉर्मिटरी: दूरदराज से आने वाले यात्रियों के रुकने के लिए यहां होटल या डॉर्मिटरी की व्यवस्था भी हो सकती है।
  4. निर्माण कंपनी: इसके निर्माण का ठेका एक बड़ी प्राइवेट कंपनी को सौंप दिया गया है। कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है कि वह निर्धारित समय में इसे वर्ल्ड-क्लास फैसिलिटी में बदले।

 

डेडलाइन: 2 साल का इंतजार

एआरएम (ARM) राजीव कुमार के मुताबिक, कंपनी को साइट हैंडओवर करने के बाद निर्माण कार्य में लगभग 2 साल का समय लगेगा। यानी 2026 की शुरुआत में मेरठ वासियों को यह तोहफा मिल सकता है।

 

फरवरी से होगी टूट-फूट, शुरू हुई विदाई की तैयारी

परिवहन निगम के अधिकारियों ने अपनी कमर कस ली है। सोहराबगेट डिपो से सामान समेटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

 

  • फरवरी में एक्शन: फरवरी माह में बस अड्डे की पुरानी बिल्डिंग को गिराने (Demolition) का काम शुरू हो जाएगा।
  • कंपनी को हैंडओवर: अगले दो महीनों के भीतर पूरी जमीन खाली करके निर्माण कंपनी को सौंप दी जाएगी ताकि वे अपना काम शुरू कर सकें।

 

यह वक्त मेरठ के लिए थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि एक चलते-फिरते बस अड्डे को शिफ्ट करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

 

नया ठिकाना - हापुड़ रोड (बिजली बंबा बाईपास)

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगले 2 साल तक बसें कहां से चलेंगी? इसके लिए प्रशासन ने हापुड़ रोड (Hapur Road) को चुना है।

 

लोकेशन डिकोड (Location Decode):

  • स्थान: हापुड़ रोड पर, बिजली बंबा पुलिस चौकी के ठीक सामने।
  • लैंडमार्क: बिजलीघर के पीछे वाली खाली जमीन।
  • जमीन का मालिकाना हक: यह जमीन मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की लोहियानगर योजना का हिस्सा है, जिसे परिवहन निगम ने किराए पर लिया है।

 

तैयारियां जोरों पर:

अस्थायी बस अड्डे (Temporary Bus Stand) को चालू करने के लिए अधिकारी दिन-रात एक कर रहे हैं।

 

  1. सर्वे पूरा: परिवहन निगम के अधिकारियों ने जमीन का सर्वे कर लिया है।
  2. इंफ्रास्ट्रक्चर: इसी महीने (जनवरी) वहां चारदीवारी (Boundary Wall) बनाने और टीन शेड डालने का काम शुरू हो जाएगा।
  3. यात्री सुविधाएं: यात्रियों के बैठने के लिए बेंच, पीने का पानी और टिकट काउंटर के लिए अस्थायी केबिन बनाए जाएंगे।

 

गोभी और गेहूं का 'रोड़ा' - प्रशासन सख्त

अस्थायी बस अड्डे की राह में एक अजीबोगरीब बाधा आ गई है। जिस जमीन को एमडीए से किराए पर लिया गया है, वहां फिलहाल बसें नहीं, बल्कि फसलें खड़ी हैं।

 

अवैध कब्जा और खेती

हापुड़ रोड पर चयनित जमीन पर किसी स्थानीय व्यक्ति ने मनमर्जी से गोभी और गेहूं की फसल बो रखी है। सरकारी जमीन पर यह अवैध कब्जा अब अधिकारियों के गले की फांस बन गया है।

 

प्रशासन का अल्टीमेटम: परिवहन निगम और एमडीए ने संबंधित 'किसान' (कब्जेदार) को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।

 

"जमीन तुरंत खाली की जाए। यह सरकारी संपत्ति है और इसे बस अड्डे के लिए आवंटित किया गया है। अगर शीघ्र जमीन खाली नहीं की गई, तो फसलों पर ट्रैक्टर चलवा दिया जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी होगी।"

 

अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में यह जमीन पूरी तरह समतल करा ली जाएगी।

 

यात्रियों की परेशानी और 'जुगाड़' (Route Analysis)

सोहराबगेट बस अड्डा शहर के बीच (गढ़ रोड) पर स्थित है, जिससे यात्रियों को यहां पहुंचने में आसानी होती थी। लेकिन हापुड़ रोड (बिजली बंबा) शहर के बाहरी हिस्से में पड़ता है।

 

200 बसों का संचालन

सोहराबगेट डिपो से रोजाना लगभग 200 बसें चलती हैं। ये बसें प्रमुख रूप से निम्नलिखित रूटों को कवर करती हैं:

 

  • लखनऊ (राजधानी सेवा)
  • मुरादाबाद
  • आगरा
  • बुलंदशहर
  • हापुड़
  • राजस्थान (जयपुर/अजमेर)

 

यात्रियों की कमी का डर

अधिकारियों को डर है कि बस अड्डा शहर से दूर (बाईपास पर) शिफ्ट होने से यात्रियों की संख्या में गिरावट आ सकती है। यात्री ऑटो या ई-रिक्शा लेकर इतनी दूर जाने से कतरा सकते हैं और प्राइवेट बसों का रुख कर सकते हैं।

 

समाधान: नौचंदी और पुराना अड्डा

इस समस्या से निपटने के लिए परिवहन निगम ने एक 'मास्टर प्लान' बनाया है:

 

  1. सिटी पिक-अप पॉइंट्स: शहर के यात्रियों को सुविधा देने के लिए नौचंदी मैदान (Nauchandi Ground) और वर्तमान सोहराबगेट अड्डे के बाहर से 4-5 बसों का संचालन जारी रखा जा सकता है।
  2. शटल सर्विस: ये बसें यात्रियों को लेकर मुख्य (अस्थायी) बस अड्डे तक छोड़ सकती हैं या सीधे रूट पर निकल सकती हैं। यह फैसला यात्रियों को टूटने से बचाने के लिए लिया गया है।

 

मेंटेनेंस और फ्यूल का नया प्लान

बसें सिर्फ चलती नहीं, उन्हें रखरखाव और ईंधन की भी जरूरत होती है। सोहराबगेट डिपो टूटने के बाद वर्कशॉप भी खत्म हो जाएगी।

 

मेरठ डिपो बना सहारा:

  • वर्कशॉप: सोहराबगेट डिपो की सभी 200 बसों का रखरखाव (Maintenance) अब मेरठ डिपो (दिल्ली रोड) की वर्कशॉप में होगा।
  • जगह की उपलब्धता: एनसीआरटीसी (NCRTC) ने रैपिड रेल का काम पूरा होने के बाद मेरठ डिपो की काफी जमीन खाली कर दी है, जिसका इस्तेमाल अब पार्किंग और वर्कशॉप के लिए होगा।
  • डीजल: मेरठ डिपो परिसर में दो पेट्रोल पंप हैं। इनमें से एक पंप विशेष रूप से सोहराबगेट डिपो की बसों के लिए आरक्षित कर दिया जाएगा।

 

अधिकारियों का बयान और भविष्य की तस्वीर

सोहराबगेट डिपो के एआरएम (Assistant Regional Manager) राजीव कुमार ने 'खबरीलाल' से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की।

 

एआरएम राजीव कुमार ने कहा:

"एमडीए की लोहियानगर योजना की जमीन हापुड़ रोड से लगी हुई है, जिसे हमने किराए पर लिया है। वहां चारदीवारी और जनसुविधाओं के निर्माण के लिए मुख्यालय (लखनऊ) को पत्र भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा। हम कंपनी को 2 महीने के भीतर पुरानी जमीन खाली करके दे देंगे। लगभग 2 साल तक हमें अस्थायी व्यवस्था से काम चलाना होगा, लेकिन उसके बाद मेरठ को एक विश्वस्तरीय बस अड्डा मिलेगा।"

 

थोड़ा कष्ट, बड़ा लाभ

मेरठ के लोगों के लिए अगले 2 साल थोड़े कष्टदायी हो सकते हैं। हापुड़ रोड तक जाना, वहां की धूल और अस्थायी व्यवस्था से जूझना आसान नहीं होगा। लेकिन, यह 'विकास की कीमत' है। जब 2 साल बाद गढ़ रोड पर एक चमचमाता, एयर-कंडीशंड बस अड्डा खड़ा होगा, तो यह न केवल यात्रियों के लिए सुगम होगा, बल्कि मेरठ की 'स्मार्ट सिटी' छवि में चार चांद लगाएगा।
फिलहाल, सबकी नजरें उस 'गोभी और गेहूं' के खेत पर टिकी हैं, जिसे साफ करके बसों के लिए रास्ता बनाया जाना है।
(मेरठ के विकास और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी हर अपडेट के लिए जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ।)

 

FAQ: यात्रियों के मन में उठने वाले सवाल

प्रश्न 1: बस अड्डा कब से शिफ्ट होगा?
उत्तर: फरवरी 2026 से शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू होने की पूरी संभावना है।
प्रश्न 2: मुझे लखनऊ की बस अब कहां से मिलेगी?
उत्तर: शिफ्टिंग के बाद आपको हापुड़ रोड (बिजली बंबा पुलिस चौकी के सामने) जाना होगा। हालांकि, कुछ बसें नौचंदी ग्राउंड से भी मिल सकती हैं।
प्रश्न 3: क्या बसें कम हो जाएंगी?
उत्तर: नहीं, बसों की संख्या (200) वही रहेगी, बस उनका स्थान बदल जाएगा।
प्रश्न 4: नया बस अड्डा कब बनकर तैयार होगा?

 

उत्तर: निर्माण शुरू होने के लगभग 2 साल बाद, यानी 2028 तक इसके तैयार होने की उम्मीद है।
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