खबरीलाल टीम
मेरठ (लोकल न्यूज़ डेस्क): उत्तर प्रदेश में 'बुलडोजर' अब अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का सबसे बड़ा और प्रभावी हथियार बन चुका है। इसी कड़ी में पश्चिमी यूपी के प्रमुख शहर मेरठ (Meerut) के शास्त्रीनगर (Shastri Nagar) इलाके में आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) का महा-अभियान जोरों पर है। दशकों से मकानों और दुकानों के आगे 'सेटबैक' (नक्शे के विपरीत खाली छोड़ी जाने वाली जगह) पर किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए सोमवार को लगातार तीसरे दिन भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर एक्शन मोड में नजर आया।READ ALSO:-मेरठ में 100 की स्पीड, थार-इनोवा की रेस और 'मौत' का खेल: रईसजादे ने 7 पुलिसकर्मियों को रौंदा, हवा में 5 फीट उछले जवान, सामने आया खौफनाक CCTV

 

इस कार्रवाई ने जहां एक ओर अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा दिया है, वहीं स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी रोष और आक्रोश पैदा कर दिया है। यह सिर्फ एक अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश की सर्वोच्च अदालत की वह सख्त डेडलाइन है, जिसने अधिकारियों की नींद उड़ा रखी है। आइए, मेरठ में चल रहे इस हाई-वोल्टेज ड्रामे को विस्तार से समझते हैं।

 

तीसरे दिन का एक्शन: भारी पुलिस बल, बहस और फिर चला पीला पंजा

सोमवार की सुबह होते ही शास्त्रीनगर के चिन्हित इलाकों में एक बार फिर पुलिस की सायरन बजती गाड़ियां और आवास विकास के भारी-भरकम बुलडोजर (JCB) पहुंच गए। जैसे ही अधिकारियों ने सेटबैक पर बने अवैध छज्जों, बाउंड्री वॉल और दुकानों के आगे किए गए पक्के निर्माण को तोड़ना शुरू किया, वहां हड़कंप मच गया।

 

कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

  • दुकानदारों और अधिकारियों में तीखी नोकझोंक: कार्रवाई शुरू होते ही कई मकान मालिक और दुकानदार अपनी संपत्तियों के कागज लेकर सड़क पर आ गए। उन्होंने अधिकारियों की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और इसे अन्यायपूर्ण बताया। कई जगह अधिकारियों और जनता के बीच तीखी बहस भी हुई।
  • पुलिस का सख्त पहरा: प्रशासन इस बात को लेकर पहले से सतर्क था कि विरोध हिंसक रूप ले सकता है। इसलिए अभियान में भारी संख्या में पीएसी (PAC) और स्थानीय पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस की इसी सख्ती के चलते विरोध करने वाले लोग पीछे हटने को मजबूर हुए और अभियान बिना किसी बड़ी बाधा के जारी रहा।
  • रविवार की कार्रवाई का असर: इससे पहले रविवार (छुट्टी के दिन) को भी आवास विकास की टीम ने कोई ढील नहीं दी थी और 15 से अधिक बड़े भूखंडों पर कार्रवाई करते हुए उनके अवैध सेटबैक जमींदोज कर दिए थे। जिन लोगों ने खुद अपना अतिक्रमण हटाने का लिखित आश्वासन दिया, उन्हें थोड़ा अतिरिक्त समय दिया गया है।

 

क्या है यह 'सेटबैक' और क्यों हो रही है कार्रवाई?

कई लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर लोग अपने ही खरीदे हुए मकानों के आगे क्यों टूट-फूट का शिकार हो रहे हैं?

 

नगर नियोजन (Urban Planning) के नियमों के तहत जब आवास विकास कोई कॉलोनी बसाता है, तो प्रत्येक प्लॉट के आगे, पीछे या साइड में एक निश्चित खाली जगह छोड़नी अनिवार्य होती है, जिसे तकनीकी भाषा में 'सेटबैक' (Setback) कहा जाता है। यह जगह हवा, रोशनी, और आपातकालीन स्थितियों (जैसे फायर ब्रिगेड के आने-जाने) के लिए छोड़ी जाती है। लेकिन समय के साथ, शास्त्रीनगर के निवासियों ने इस खाली जगह पर पक्की दुकानें, रैंप, कमरे और ऊंची बाउंड्री वॉल बना लीं। नियम के विरुद्ध हुए इसी पक्के निर्माण को अब सुप्रीम कोर्ट के डंडे के बाद तोड़ा जा रहा है।

 

'सुप्रीम' डेडलाइन: 14 जुलाई को देनी है रिपोर्ट

आवास विकास परिषद की इस ताबड़तोड़ और आक्रामक कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का एक सख्त आदेश है। इस पूरे प्रकरण से जुड़े जनहित के एक मामले में 14 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई प्रस्तावित है। इस दिन आवास विकास परिषद को अदालत के समक्ष एक हलफनामा (Compliance Report) प्रस्तुत करना है, जिसमें यह बताना होगा कि उन्होंने शास्त्रीनगर में कितने प्रतिशत सेटबैक को अवैध कब्जों से मुक्त करा लिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना से बचने और अपनी नौकरी बचाने के लिए विभागीय अधिकारियों ने बुलडोजर की स्पीड बढ़ा दी है। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि जिन्होंने अब तक खुद अपना सेटबैक नहीं तोड़ा है, उनका निर्माण विभाग अपने खर्च पर तोड़ेगा और बाद में हर्जाना भी वसूलेगा।

 

अधिकारियों का क्या कहना है?

आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) अभिषेक राज इस पूरे अभियान को लीड कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्थिति को स्पष्ट किया।

 

"यह कोई अचानक की गई कार्रवाई नहीं है। हमने इस अभियान से जुड़ी कुल 860 संपत्तियों को चिन्हित किया था। सभी संबंधित संपत्ति स्वामियों को महीनों पहले ही विधिवत नोटिस (Notices) जारी किए जा चुके थे। उन्हें स्वयं अपना सेटबैक खाली करने के लिए पर्याप्त और अतिरिक्त समय दिया गया था। कई लोगों ने खुद हटाया भी है, लेकिन जिन्होंने नोटिस की अनदेखी की, अब उन पर बुलडोजर चल रहा है। जब तक सभी 860 चिन्हित स्थानों पर सेटबैक पूरी तरह खाली नहीं करा लिया जाता, तब तक हमारा यह अभियान लगातार जारी रहेगा।" - अभिषेक राज, अधिशासी अभियंता

 

महिलाओं का अनोखा विरोध: सड़क पर धरना और 'सुंदरकांड' का पाठ

बुलडोजर की इस दहशत के बीच, शास्त्रीनगर के सेक्टर-2, सेक्टर-3 और सेक्टर-4 का नजारा बिल्कुल अलग है। यहां की महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, लेकिन उनका तरीका हिंसक नहीं, बल्कि पूरी तरह से आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण है।

 

  • अनिश्चितकालीन धरना: प्रभावित मकानों की महिलाएं अपने घरों से बाहर निकलकर तंबू लगाकर धरने पर बैठ गई हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि उन्होंने जीवन भर की गाढ़ी कमाई से यह घर बनाए हैं और वे किसी भी कीमत पर अपना सेटबैक नहीं छोड़ेंगी।
  • सुंदरकांड का आयोजन: प्रशासन को सद्बुद्धि देने और भगवान से न्याय की गुहार लगाने के लिए महिलाओं ने सोमवार से धरनास्थल पर ही लगातार एक सप्ताह तक 'सुंदरकांड' (Sunderkand Path) का पाठ शुरू कर दिया है।
  • महिलाओं का दर्द: प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है, "हम कोई गुंडे या माफिया नहीं हैं कि हमारे घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। हमने दशकों से यहां जीवन बिताया है। जब यह निर्माण हो रहा था, तब आवास विकास के अधिकारी कहां सो रहे थे? अब अचानक सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर हमारे आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। जब तक हमें न्याय नहीं मिलता, हमारा यह शांतिपूर्ण आंदोलन और सुंदरकांड का पाठ जारी रहेगा।"

 

आगे क्या होगा? (भविष्य की रूपरेखा)

शास्त्रीनगर का यह मामला अब प्रशासन के नियम बनाम जनता की भावनाओं का एक बड़ा टकराव बन चुका है। एक तरफ आवास विकास के सामने 14 जुलाई की वह 'लक्ष्मण रेखा' है, जिसे पार करने पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार तय है। वहीं दूसरी तरफ, उन सैकड़ों परिवारों का दर्द है जिनकी जीवन भर की पूंजी आंखों के सामने मलबे में तब्दील हो रही है।

 

आने वाले दिन शास्त्रीनगर के लिए बेहद तनावपूर्ण साबित होने वाले हैं। देखना यह है कि क्या महिलाओं का सुंदरकांड पाठ और उनका आंदोलन प्रशासन का दिल पिघला पाएगा, या फिर 860 संपत्तियों का आंकड़ा पूरा करने के लिए बुलडोजर अपनी इसी रफ्तार से गरजता रहेगा? पूरे मेरठ शहर की निगाहें अब 14 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उससे पहले शास्त्रीनगर की सड़कों पर चल रहे इस महा-संग्राम पर टिकी हुई हैं।
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