उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का वह रोंगटे खड़े कर देने वाला हत्याकांड, जिसे सुनकर आज भी लोगों की रूह कांप उठती है, अब अपने अंतिम और सबसे निर्णायक कानूनी पड़ाव पर पहुंच चुका है। 'नीला ड्रम कांड' के नाम से कुख्यात ब्रह्मपुरी के सौरभ हत्याकांड में मंगलवार को अदालत के भीतर भारी गहमागहमी देखने को मिली। अपने ही पति की बेरहमी से हत्या करने की मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को पूरे 13 महीने के लंबे अंतराल के बाद मेरठ की जिला अदालत में 'फिजिकल' रूप से पेश किया गया।READ ALSO:-छात्र राजनीति से लेकर यूपी के सत्ता शिखर तक का सफर: पूर्व मंत्री अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' के निधन पर मेरठ में उमड़ी आंखें, याद आया 80 के दशक का वो सुनहरा दौर
लंबे समय तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए चल रही पेशियों के बाद, जब इन दोनों आरोपियों को पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत की सीढ़ियां चढ़ते देखा गया, तो कचहरी परिसर में एक अजीब सा सन्नाटा और तनाव छा गया। इस केस ने न केवल मेरठ, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अदालत कक्ष के अंदर क्या हुआ? मुस्कान ने जज के तीखे सवालों का क्या जवाब दिया? और क्यों इन दोनों आरोपियों को 13 महीने तक कोर्ट में शारीरिक रूप से पेश नहीं किया जा सका? आइए, इस सनसनीखेज मामले के हर एक पहलू और कोर्ट रूम के अंदर की पूरी कहानी को विस्तार से जानते हैं।
कटघरे में मुस्कान: गोद में बेटी 'राधा' और होठों पर सिर्फ 'नहीं'
मंगलवार को जब जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुपम कुमार की अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो सभी की निगाहें मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी पर टिकी थीं। मुस्कान अपनी दुधमुंही बच्ची, जिसका नाम 'राधा' बताया गया है, को गोद में लिए हुए कटघरे में खड़ी थी। एक तरफ मासूम बच्ची का चेहरा था और दूसरी तरफ एक खौफनाक कत्ल की साजिश रचने वाली मां। यह दृश्य अपने आप में कई मनोवैज्ञानिक सवाल खड़े कर रहा था।
अदालत में नए आपराधिक कानून, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 353 एवं 351 (जो कि पहले सीआरपीसी की धारा 313 हुआ करती थी) के तहत कार्यवाही चल रही थी। इस प्रक्रिया के अंतर्गत, अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सभी सबूतों और 22 गवाहों के बयानों को आधार बनाकर जज सीधे आरोपियों से सवाल पूछते हैं।
जब न्यायालय ने मुस्कान से घटनाक्रम, साजिश और सबूतों को लेकर 15 से अधिक तीखे सवाल पूछे, तो कोर्ट रूम का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। अपने बचाव में मुस्कान ने एक रटी-रटाई रणनीति अपनाई। उसने अदालत द्वारा पूछे गए ज्यादातर सवालों के जवाब सिर्फ "नहीं" में दिए।
मुस्कान के प्रमुख इनकार:
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नीला ड्रम: जब उससे पूछा गया कि हत्या के बाद लाश के टुकड़े छिपाने के लिए बाजार से नीला ड्रम किसने खरीदा? तो मुस्कान ने साफ इनकार करते हुए कहा, "मैंने कोई नीला ड्रम नहीं खरीदा।"
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बेहोशी की दवा: सौरभ को खाने में नशे की गोलियां देने के सवाल पर मुस्कान ने कहा, "मैंने किसी मेडिकल स्टोर से कोई बेहोश करने वाली या नशे की दवा नहीं खरीदी थी और न ही सौरभ को दी थी।"
मुस्कान की यह 'इनकार की रणनीति' कानूनी जानकारों के अनुसार एक आम बचाव का तरीका है, लेकिन अभियोजन पक्ष के पास मौजूद पुख्ता सबूतों, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के सामने यह इनकार कितना टिक पाएगा, यह अदालत का अंतिम फैसला तय करेगा।
फ्लैशबैक: आखिर 13 महीने तक कोर्ट में क्यों नहीं हुई मुस्कान और साहिल की पेशी?
इस हत्याकांड की सुनवाई में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मुख्य आरोपियों को पूरे 13 महीने तक कोर्ट में शारीरिक रूप से (Physically) पेश क्यों नहीं किया गया? इसके पीछे एक बहुत बड़ा बवाल और जनाक्रोश छिपा हुआ है।
दरअसल, सौरभ की हत्या इतनी नृशंस और क्रूर थी (सीने में चाकू मारना और लाश के 4 टुकड़े करना) कि मेरठ के आम नागरिकों और खासकर वकीलों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा उबल रहा था। गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद, जब 19 मार्च 2025 को पुलिस मुस्कान और साहिल को रिमांड या पेशी के लिए मेरठ कचहरी लेकर आई थी, तो वहां वकीलों और भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा था।
अदालत परिसर में ही आक्रोशित वकीलों ने पुलिस घेरे को तोड़ते हुए प्रेमी साहिल शुक्ला की जमकर पिटाई कर दी थी। इस मारपीट और हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया था। पुलिस के लिए आरोपियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई थी।
इसी घटना (19 मार्च के बवाल) को देखते हुए पुलिस प्रशासन और न्यायालय ने यह निर्णय लिया कि भविष्य में किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए दोनों हत्यारोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के जरिए सीधे जेल से ही कराई जाएगी। यही कारण है कि पूरे 13 महीने तक दोनों आरोपी कोर्ट नहीं आए। अब, जब अंतिम बहस और धारा 351 के तहत सीधे सवाल-जवाब की कानूनी अनिवार्यता सामने आई, तब जाकर पुलिस ने बेहद कड़ी सुरक्षा और सीक्रेसी (गोपनीयता) के बीच मंगलवार को इन्हें कोर्ट में पेश किया।
कानूनी पेंच और अदालत की कार्यवाही: क्या कहते हैं सरकारी वकील?
इस हाई-प्रोफाइल केस की पैरवी सरकार की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी - क्रिमिनल) कृष्ण कुमार चौबे कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया को अदालत की कार्यवाही की विस्तृत जानकारी दी।
डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि यह मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुपम कुमार की अदालत में विचाराधीन है। इस केस को पुलिस और अभियोजन पक्ष ने पूरी मजबूती के साथ लड़ा है। अब तक अभियोजन की ओर से कुल 22 अहम गवाहों ने अदालत में अपने बयान दर्ज कराए हैं, जिनमें पुलिस अधिकारी, फॉरेंसिक एक्सपर्ट, डॉक्टर और सौरभ के परिवार वाले शामिल हैं। इन 22 गवाहियों ने इस हत्याकांड की एक-एक कड़ी को आपस में जोड़ दिया है।
BNSS की धारा 351 की कार्यवाही: न्यायालय में अभियोजन के गवाहों के बयान पूरे होने के बाद, अब बचाव पक्ष (मुस्कान और साहिल) को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। इसी के तहत मंगलवार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 351 की कार्यवाही पूरी की गई। अदालत ने गवाहों के बयानों और पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों (Evidence) को आधार बनाकर दोनों आरोपियों से 15-15 से अधिक सवाल पूछे, ताकि वे अपनी सफाई दे सकें।
क्या होगा अगला कदम? कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, इस पूछताछ के बाद अदालत आरोपियों से पूछेगी कि क्या वे अपने बचाव (Defense) में कोई गवाह या नया साक्ष्य पेश करना चाहते हैं? यदि मुस्कान और साहिल अपनी सफाई में कोई मजबूत गवाह या साक्ष्य पेश नहीं कर पाते हैं, तो अदालत में सीधे 'अंतिम बहस' (Final Arguments) का दौर शुरू हो जाएगा। अभियोजन और बचाव पक्ष के वकील अपनी-अपनी अंतिम दलीलें रखेंगे।
3 मार्च 2025 की वह काली रात: कैसे रची गई थी मौत की पटकथा?
जो लोग इस खौफनाक वारदात को भूल गए हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि मुस्कान और साहिल पर क्या आरोप हैं। मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ ने परिवार की मर्जी के खिलाफ अपनी पड़ोसन मुस्कान रस्तोगी से लव मैरिज की थी। शादी के बाद सौरभ लंदन में नौकरी करने चला गया। इसी बीच, मुस्कान के अपने पुराने प्रेमी साहिल शुक्ला से अवैध संबंध दोबारा बन गए।
हत्या की साजिश: मुस्कान का जन्मदिन मनाने के लिए सौरभ लंदन से छुट्टी लेकर मेरठ (ब्रह्मपुरी) आया हुआ था। सौरभ का आना साहिल और मुस्कान के रास्ते का कांटा बन गया। पुलिस चार्जशीट के अनुसार, 3 मार्च 2025 की रात को इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम दिया गया। (पूर्व की जानकारी के अनुसार यह घटना 4 मार्च को बताई गई थी, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में 3 मार्च की रात से ही साजिश शुरू हो गई थी)।
नीला ड्रम और लाश के टुकड़े: मुस्कान ने रात के खाने में सौरभ को बेहोशी/नशे की भारी दवा मिला दी। जब सौरभ गहरी नींद में सो गया, तो मुस्कान ने साहिल को घर बुला लिया। दोनों ने मिलकर सोते हुए सौरभ के सीने में चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए, लाश के टुकड़े किए गए और बाजार से खरीदा गया एक बड़ा नीला ड्रम लाकर उसमें लाश को भरकर घर में ही छिपा दिया गया।
कुछ दिनों बाद जब सौरभ के भाई को अनहोनी की आशंका हुई और पुलिस ने ब्रह्मपुरी स्थित उस घर की तलाशी ली, तो नीले ड्रम से सौरभ की सड़ी-गली लाश बरामद हुई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया और पर्याप्त सबूतों के साथ कोर्ट में आरोप पत्र (Charge-sheet) दाखिल कर दिया था।
क्या इसी महीने आएगा 'नीले ड्रम कांड' का बहुप्रतीक्षित फैसला?
मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की नजरें इस केस के फैसले पर टिकी हुई हैं। जिस बेदर्दी से सौरभ की हत्या की गई और जिस तरह से मुस्कान आज अदालत में अपनी दुधमुंही बेटी राधा का सहारा लेकर सहानुभूति बटोरने और झूठ बोलने की कोशिश कर रही है, उसने मृतक के परिवार के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।
अदालत की तेजी और कानूनी प्रक्रिया के वर्तमान चरण को देखते हुए, डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे ने संकेत दिया है कि यदि बचाव पक्ष की ओर से कोई अनावश्यक देरी नहीं की जाती है, तो इसी माह (मई 2026 तक) इस सनसनीखेज मामले में अंतिम फैसला (Judgment) आ सकता है।
अब देखना यह है कि मुस्कान के "मैंने नहीं खरीदा..." वाले सफेद झूठ और गवाहों के पुख्ता बयानों के बीच तराजू का पलड़ा किस ओर झुकता है। क्या मेरठ की अदालत इस 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (Rarest of Rare) कृत्य के लिए मुस्कान और साहिल को फांसी के फंदे तक पहुंचाएगी, या उन्हें उम्रकैद की सजा मिलेगी? इंसाफ की इस घड़ी का सौरभ का बूढ़ा परिवार और पूरा समाज बेसब्री से इंतजार कर रहा है।