खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश पुलिस की टैगलाइन है- "सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा"। लेकिन जब पुलिस की वर्दी पहनने वाली एक महिला ही थाने के भीतर सुरक्षित और सम्मानित महसूस न करे, तो यह टैगलाइन बेमानी लगने लगती है। मेरठ के लालकुर्ती थाने में मंगलवार को जो घटा, वह न केवल अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है, बल्कि पुलिस विभाग के भीतर चल रहे 'सिविल पुलिस बनाम अन्य शाखाओं' (Civil Police vs Special Units) के शीत युद्ध का एक कुरूप चेहरा भी है।READ ALSO:-Meerut Cantt Makeover: बदल जाएगी मेरठ छावनी की तस्वीर! RRTC से मिले ₹57 करोड़ से होगा कायाकल्प; नई सड़कें, हाईटेक कूड़ा घर और अस्पताल को मिली हरी झंडी

 

मामला किसी अपराधी को पकड़ने या कानून व्यवस्था को संभालने का नहीं था। विवाद की जड़ थी- एक 'इलेक्ट्रिक स्कूटी' और बिजली का एक 'प्लग'। चंद रुपयों की बिजली बचाने के चक्कर में एक दरोगा (Sub-Inspector) ने अपनी ही विभाग की महिला हेड कॉन्स्टेबल (Head Constable) की गरिमा को ठेस पहुंचा दी। घंटों चले हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और अधिकारियों की दौड़-भाग के बाद यह मामला अब एसएसपी के दरबार तक पहुंच गया है।

 

1. घटनाक्रम: जब माल रोड पर थमी स्कूटी की रफ्तार

यह पूरा वाकया मंगलवार दोपहर का है। सीबीसीआईडी (CBCID - Crime Branch Crime Investigation Department) मेरठ में तैनात महिला हेड कॉन्स्टेबल मीनाक्षी किसी सरकारी या निजी कार्य से शहर में निकली थीं। वह अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार थीं।

 ये महिला हेड कॉन्स्टेबल मीनाक्षी हैं, जिन्होंने दरोगा पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। - Dainik Bhaskar

मेरठ का माल रोड (Mall Road) इलाका वीआईपी क्षेत्र माना जाता है। इसी दौरान मीनाक्षी की स्कूटी की बैटरी ने जवाब दे दिया। इलेक्ट्रिक वाहन चलाने वालों के लिए 'रेंज एंग्जायटी' (Range Anxiety) एक बड़ी समस्या है। सड़क के बीच में स्कूटी बंद होने पर मीनाक्षी ने इधर-उधर मदद की तलाश की। पास में ही लालकुर्ती थाना (Lalkurti Police Station) स्थित था।

 

चूंकि वह खुद पुलिस विभाग का एक जिम्मेदार हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें लगा कि थाना सबसे सुरक्षित जगह है जहाँ वह थोड़ी देर के लिए अपनी स्कूटी चार्ज कर सकती हैं। वह स्कूटी को पैदल खींचते हुए थाने के परिसर में ले गईं। थाने के एक कक्ष में बिजली का बोर्ड खाली देख, उन्होंने वहां मौजूद एक अन्य पुलिसकर्मी से मौखिक अनुमति ली और अपना चार्जर प्लग-इन कर दिया। उन्हें तनिक भी आभास नहीं था कि यह चार्जर थोड़ी ही देर में थाने के माहौल में 'ब्लास्ट' कर देगा।

 

2. दरोगा की एंट्री और 'सरकारी बिजली' का तर्क

मीनाक्षी अभी स्कूटी चार्जिंग पर लगाकर राहत की सांस ले ही रही थीं कि तभी वहां थाने में तैनात दरोगा वीरेंद्र पाल सिंह आ गए। यह कमरा संभवतः उनके कार्यक्षेत्र या अधिकार क्षेत्र में आता था। एक महिला को (जो सादे कपड़ों में थी) सरकारी बिजली का इस्तेमाल करते देख दरोगा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दरोगा ने बेहद तल्ख लहजे में पूछा, "यह किसकी स्कूटी है और बिना परमिशन यहाँ प्लग किसने लगाया?" मीनाक्षी ने बहुत ही शालीनता से स्थिति समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि वह भी पुलिस विभाग का हिस्सा हैं और मजबूरी में यहाँ आई हैं। लेकिन आरोप है कि दरोगा ने उनकी एक न सुनी।

 

3. आरोप: "वर्दी के नशे में चूर थे दरोगा जी"

घटना के बाद थाने में जो तमाशा हुआ, उसने वहां मौजूद फरियादियों को भी हैरान कर दिया। महिला हेड कॉन्स्टेबल मीनाक्षी ने सीओ कैंट (CO Cantt) और मीडिया के सामने रोष प्रकट करते हुए जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं:

 

  • अभद्रता (Misbehavior): मीनाक्षी का कहना है, "मैंने उन्हें अपना परिचय दिया कि मैं CBCID में हेड कॉन्स्टेबल हूँ। लेकिन उन्होंने कहा- 'होगी अपने घर में, यहाँ मेरी मर्जी चलेगी'। उन्होंने मेरे साथ तू-तड़ाक और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया।"
  • शारीरिक आक्रामकता: सबसे गंभीर आरोप यह है कि गुस्से में आए दरोगा ने बोर्ड में लगे चार्जर को लात मारकर बाहर निकाल दिया और उसे जमीन पर फेंक दिया। यह हरकत न केवल एक महिला के प्रति असम्मानजनक थी, बल्कि एक सरकारी कर्मचारी के प्रति भी अनुचित थी।
  • परिचय की अनदेखी: मीनाक्षी का कहना है कि दरोगा यह जानते हुए भी बदसलूकी करते रहे कि सामने वाली महिला पुलिस फोर्स का ही हिस्सा है।

 

4. बचाव पक्ष: "पहचान का संकट और अनुशासन"

इस मामले में लालकुर्ती थाने के प्रभारी (SHO) हरेंद्र पाल सिंह की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। वह घटना के समय अपने मातहत दरोगा का बचाव करते नजर आए।

 

थानाध्यक्ष ने जो दलीलें पेश कीं, वे इस प्रकार हैं:

  • सादे कपड़े (Civil Dress): एसओ का कहना है कि महिला हेड कॉन्स्टेबल वर्दी में नहीं थीं। सादे कपड़ों में होने के कारण दरोगा उन्हें पहचान नहीं पाए।
  • रौब झाड़ना: एसओ ने आरोप लगाया कि जब दरोगा ने उनसे पूछताछ की, तो महिला ने विनम्रता से जवाब देने के बजाय 'CBCID का रौब' दिखाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि महिला की टोन (Tone) बहुत एग्रेसिव थी, जिससे दरोगा को गुस्सा आया।
  • अभद्रता से इनकार: थाना प्रभारी का दावा है कि दरोगा ने चार्जर नहीं फेंका और न ही कोई अभद्रता की। यह सिर्फ कहासुनी का मामला था जिसे महिला ने तूल दे दिया।

 

5. 'CBCID बनाम थाना पुलिस': जब थाने में जुटी भीड़

विवाद इतना बढ़ गया कि लालकुर्ती थाना 'पुलिस छावनी' में तब्दील हो गया। मीनाक्षी ने अपने विभाग (CBCID) के अधिकारियों और सहयोगियों को सूचित कर दिया। देखते ही देखते CBCID के कई कर्मचारी थाने पहुंच गए।

 

दूसरी तरफ, हंगामे की खबर पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंची। मामले की नजाकत को देखते हुए सीओ कैंट (CO Cantt) नवीना शुक्ला को तुरंत मौके पर भेजा गया। नवीना शुक्ला करीब दो घंटे तक थाने में मौजूद रहीं। उन्होंने बंद कमरे में दोनों पक्षों- मीनाक्षी और दरोगा वीरेंद्र पाल सिंह- को आमने-सामने बैठाकर बात की।

 

माहौल इतना तनावपूर्ण था कि सीओ को दोनों पक्षों को शांत कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। अंत में, CBCID की टीम अपनी महिला साथी को सम्मान के साथ वहां से लेकर रवाना हुई।

 

6. जांच का केंद्र: CCTV फुटेज

अब इस मामले में सब कुछ 'तीसरी आंख' यानी सीसीटीवी पर निर्भर है। दोनों पक्षों के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है।

 

  • मीनाक्षी की चुनौती: महिला कॉन्स्टेबल ने सीओ से साफ कहा है, "मैडम, आप थाने के कमरे का सीसीटीवी निकलवा लीजिए। अगर उसमें दरोगा चार्जर फेंकते और बदतमीजी करते न दिखें, तो मैं दोषी। लेकिन अगर वो गलत हैं, तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।"
  • पुलिस की चुप्पी: अभी तक पुलिस की तरफ से सीसीटीवी फुटेज को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि फुटेज सुरक्षित रख लिया गया है और यही जांच का मुख्य आधार होगा।

 

7. एसएसपी का कड़ा रुख

मामला अब जिले के पुलिस कप्तान एसएसपी डॉ. विपिन ताडा की मेज पर है। एसएसपी ने इस घटना को अनुशासनहीनता का गंभीर मामला माना है। उन्होंने सीओ कैंट से विस्तृत जांच रिपोर्ट (Detailed Inquiry Report) मांगी है। साथ ही, थाने की जनरल डायरी (GD) में इस घटना का तस्करा (Entry) दर्ज कर लिया गया है।

 

संभावित कार्रवाई:

  • यदि सीसीटीवी में दरोगा चार्जर फेंकते हुए पाए गए, तो उन पर निलंबन (Suspension) या लाइन हाजिर (Line Hazir) की कार्रवाई हो सकती है।
  • यदि महिला कॉन्स्टेबल की गलती पाई गई, तो उनके विभाग को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जा सकता है।

 

8. विश्लेषण: 'खाकी' के भीतर का अहंकार

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

 

  1. विभागों के बीच खाई: पुलिस की अलग-अलग विंग्स (Civil Police, CBCID, LIU, Traffic) के बीच तालमेल की कमी अक्सर देखने को मिलती है। थाने की पुलिस खुद को 'राजा' समझती है और दूसरों को कमतर।
  2. मानवीय दृष्टिकोण का अभाव: अगर कोई महिला (चाहे वह पुलिस हो या पब्लिक) मुसीबत में है और उसकी स्कूटी डिस्चार्ज है, तो क्या एक चार्जर लगाने देने से सरकार का खजाना खाली हो जाता? नियम अपनी जगह हैं, लेकिन पुलिसिंग में मानवीय संवेदना (Humanity) भी जरूरी है।
  3. महिला सम्मान का ढोंग: पुलिस विभाग 'मिशन शक्ति' के तहत महिलाओं के सम्मान की कसमें खाता है। लेकिन जब एक दरोगा अपनी ही सहकर्मी के साथ ऐसा व्यवहार कर सकता है, तो वह एक आम फरियादी महिला के साथ कैसा सुलूक करता होगा, यह सोचना भी डरावना है।

 

मेरठ के लालकुर्ती थाने की यह घटना एक 'केस स्टडी' है कि कैसे छोटा सा अहंकार (Ego) बड़ी शर्मिंदगी का कारण बन सकता है। चार्जर तो दोबारा लग जाएगा, बिजली भी आ जाएगी, लेकिन पुलिस की छवि पर जो दाग इस घटना ने लगाया है, उसे साफ होने में वक्त लगेगा। अब सबकी नजरें एसएसपी की कार्रवाई और सीसीटीवी के सच पर टिकी हैं।
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