खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से इस वक्त की सबसे संवेदनशील और बड़ी मेरठ न्यूज़ सामने आ रही है। टीपीनगर थाना क्षेत्र की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड का मामला अब बेहद उग्र रूप धारण कर चुका है। 8 जुलाई (बुधवार) को मेरठ कलेक्ट्रेट और कमिश्नरी चौराहे पर हुए अभूतपूर्व बवाल, पथराव और लाठीचार्ज के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पैतृक गांव थिरौट को पूरी तरह से सील कर दिया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया है और किसी भी बाहरी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।READ ALSO:-नवाबी शहर में पर्यटन का 'हाई-टेक' तड़का: यूपी में पहली बार चलेंगे 'डबल डेकर फूड ट्रक', AR/VR के रोमांच के साथ परोसा जाएगा 'वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन' का स्वाद

 

इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। आज की ताज़ा मेरठ न्यूज़ के अनुसार, जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए 30 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, वहीं दूसरी तरफ नगीना सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी पीड़ित परिवार से मुलाकात करने मेरठ पहुंच रहे हैं।

 

कलेक्ट्रेट पर कैसे भड़का था हिंसक बवाल?

मामले की गंभीरता को समझने के लिए हमें 8 जुलाई (बुधवार) को हुए घटनाक्रम पर नजर डालनी होगी। बीए तृतीय वर्ष की छात्रा ललिता गौतम को न्याय दिलाने और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर दलित समाज, सामाजिक संगठनों और कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट के बाहर एक महापंचायत बुलाई गई थी। शुरुआत में इस प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक अनुमति ली गई थी और सब कुछ शांतिपूर्ण चल रहा था।

 

लेकिन देखते ही देखते आंदोलन का रुख बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों और मेरठ न्यूज़ सूत्रों के मुताबिक, मेरठ के स्थानीय निवासियों के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और अमरोहा जैसे पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में बाहरी युवक वहां पहुंचने लगे। भीड़ के अनियंत्रित होते ही पुलिस ने एहतियात के तौर पर कलेक्ट्रेट का मुख्य द्वार (मेन गेट) बंद कर दिया। इस बात से नाराज प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए, जिससे दिल्ली रोड और कमिश्नरी चौराहे पर मीलों लंबा जाम लग गया। जाम में दो आपातकालीन एम्बुलेंस भी फंस गईं, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।

 

एसएसपी का सख्त रुख और लाठीचार्ज की कार्रवाई

स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब बेकाबू भीड़ ने जिलाधिकारी (DM) कार्यालय का मुख्य द्वार तोड़ने और जबरन परिसर के भीतर घुसने का प्रयास किया। मौके पर उपस्थित एडीएम सिटी, एसपी देहात अभिजीत कुमार और एसपी ट्रैफिक राकेश कुमार ने लाउड हेलर से प्रदर्शनकारियों को बार-बार समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी।

 

इसी बीच मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उग्र प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। आरोप है कि एसएसपी ने प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों को थप्पड़ मारे और पुलिस वैन के अंदर घुसकर उपद्रवियों की पिटाई की। आखिरकार पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ना पड़ा। इस हिंसक झड़प में महिला पुलिसकर्मियों सहित कुल 11 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गुरुवार को 7 मुख्य आरोपियों को जेल भेज दिया है। (External link: source URL - भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर कानूनी धाराएं)

 

थिरौट गांव सील: छावनी में तब्दील हुआ इलाका

बुधवार के भीषण बवाल के बाद पुलिस प्रशासन कोई नया जोखिम नहीं उठाना चाहता। ताजा मेरठ न्यूज़ के मुताबिक, ललिता गौतम के गांव थिरौट की सभी सीमाओं पर कंक्रीट की बैरिकेडिंग कर दी गई है। गांव के प्रवेश द्वारों पर प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) और भारी संख्या में स्थानीय पुलिस बल तैनात है।

 

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक रोटियां सेकने वाले बाहरी तत्वों और भड़काऊ दुष्प्रचार करने वाले लोगों को गांव के भीतर जाने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। गांव के भीतर केवल स्थानीय निवासियों को ही पहचान पत्र देखने के बाद आने-जाने दिया जा रहा है। खुफिया विभाग (LIU) की टीमें भी सादे कपड़ों में गांव और आसपास के इलाकों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

 

मानवाधिकार आयोग पहुंचा पुलिस कार्रवाई का मामला

कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर और पुलिस वैन में प्रदर्शनकारियों की पिटाई का मामला अब कानूनी पचड़े में फंसता नजर आ रहा है। पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने इस पूरी घटना को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया है।

 

उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (UP Human Rights Commission) में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। अमिताभ ठाकुर का आरोप है कि पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों के साथ इस तरह की मारपीट गैर-कानूनी है। उन्होंने मांग की है कि घटना के सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (CCTV फुटेज और मीडिया वीडियो) सुरक्षित रखे जाएं और पूरे मामले की एक स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। (Internal link to related article: भारत में पुलिस कस्टडी और मानवाधिकारों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण नियम)

 

क्या था ललिता गौतम हत्याकांड?

इस पूरी मेरठ न्यूज़ की मुख्य वजह वह जघन्य हत्याकांड है जिसने पूरे दलित समाज को झकझोर कर रख दिया। टीपीनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली ललिता गौतम 15 मई को अपने घर से कॉलेज की परीक्षा देने के लिए निकली थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसी दिन थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी।

 

17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव उकसिया के एक गन्ने के खेत में ललिता का शव संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ था। परिजनों ने गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए भारी हंगामा किया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी अंकुश को गिरफ्तार कर लिया। अंकुश ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि पिछले 3 साल से उसकी ललिता से दोस्ती थी। उसे शक था कि ललिता किसी दूसरे युवक से बात करती है, इसी रंजिश और शक के चलते उसने अपने साथियों के साथ मिलकर ललिता की गला दबाकर हत्या कर दी थी। पुलिस सभी आरोपियों को जेल भेज चुकी है, लेकिन अब समाज की मांग है कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को फांसी दी जाए।

 

दिग्‍विजय भाटी का वीडियो और पुलिस का रवैया

इस मामले में नामजद आरोपी भारतीय किसान यूनियन अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी फिलहाल फरार चल रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि उन्हें इस राजनीतिक साजिश में झूठा फंसाया गया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में उनकी मौजूदगी के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस फरार चल रहे भीम आर्मी और अन्य संगठनों के नेताओं, जैसे रवि गौतम (जिन पर पहले से 4 केस दर्ज हैं) और दिग्विजय भाटी (जिन पर 9 केस दर्ज हैं) का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। 

 

निष्कर्ष के तौर पर, मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर उपजा यह विवाद अब कानून व्यवस्था के लिए एक परीक्षा बन चुका है। पुलिस द्वारा मुख्य आरोपियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है, ऐसे में न्याय की मांग के नाम पर कलेक्ट्रेट पर हिंसक प्रदर्शन करना और पुलिसकर्मियों पर हमला करना पूरी तरह अनुचित है। इस संवेदनशील मेरठ न्यूज़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा थिरौट गांव को सील करने का फैसला माहौल को शांत रखने के लिए जरूरी कदम है। उम्मीद है कि चंद्रशेखर आज़ाद और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहेगी और पुलिस जांच के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जाएगा। इस पूरे मामले की हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल के साथ जुड़े रहें।

 

मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए कलेक्ट्रेट बवाल के बाद पुलिस ने मृतका के गांव थिरौट को पूरी तरह सील कर दिया है। बाहरी लोगों और राजनीतिक दलों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने 13 नामजद और 50 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर 7 आरोपियों को जेल भेज दिया है। इस झड़प में 11 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने मामले को मानवाधिकार आयोग में उठाया है, जबकि आज कांग्रेस का 30 सदस्यीय दल और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ आ रहे हैं। पुलिस मुख्य आरोपी अंकुश को पहले ही हत्या के जुर्म में जेल भेज चुकी है।
विज्ञापन
dhss