खबरीलाल टीम
नौचंदी मेला मेरठ (Nauchandi Mela Meerut) केवल एक साधारण मेला नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश और पूरे भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता, सांप्रदायिक सौहार्द और 'गंगा-जमुनी तहजीब' की एक जीती-जागती मिसाल है। सदियों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा का आगाज इस वर्ष 15 मार्च 2026 को पूरी भव्यता और उत्साह के साथ होने जा रहा है। जिला पंचायत प्रशासन ने इसके लिए अपनी कमर कस ली है और मेला मैदान को सजाने-संवारने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। प्रवेश द्वार से लेकर महापुरुषों की प्रतिमाओं तक के रंग-रोगन का काम जोरों पर है। हालांकि, जहां एक ओर भव्यता की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर मेला मैदान में टूटे पड़े बिजली के खंभे और जमीन पर झूलते नंगे तार प्रशासनिक लापरवाही की कहानी भी बयां कर रहे हैं, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।READ ALSO:-मेरठ में रसोई गैस का 'हाहाकार': सर्वर ठप, गलियों में बंट रहे सिलिंडर; कालाबाजारी रोकने को DSO की टीमें मैदान में, FIR का अल्टीमेटम!

 

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम नौचंदी मेला मेरठ के ऐतिहासिक महत्व, 15 मार्च को होने वाले भव्य उद्घाटन समारोह की रूपरेखा, एक करोड़ रुपये के बजट के आवंटन, और मेले से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियों व नागरिक चिंताओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

 

नौचंदी मेला मेरठ: गंगा-जमुनी तहजीब का ऐतिहासिक प्रतीक

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले मेरठ शहर में लगने वाला नौचंदी मेला अपनी अनूठी मान्यताओं और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह एक ऐसा अद्भुत स्थान है जहां धर्म, कला, संस्कृति और व्यापार का एक बेहतरीन संगम देखने को मिलता है।

 

बालेमियां की मजार और मां चंडी का पौराणिक मंदिर

इस मेले की सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक और आध्यात्मिक संरचना है। नौचंदी मेला मैदान में एक सड़क के एक तरफ हजरत बालेमियां की ऐतिहासिक मजार (Bale Miyan ki Mazar) स्थित है, तो ठीक उसके सामने दूसरी तरफ मां चंडी देवी का पौराणिक और सिद्ध मंदिर (Chandi Devi Temple) स्थापित है।

 

  • अद्भुत सामंजस्य: जब मंदिर में शंख और घड़ियाल बजते हैं, तो उसी समय मजार से अजान की पवित्र आवाज गूंजती है। यह ध्वनि संगम यहां आने वाले हर इंसान को धर्म और जाति के बंधनों से ऊपर उठकर इंसानियत और प्रेम का संदेश देता है।
  • परंपरा: यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मां चंडी के दर्शन करता है और बालेमियां की मजार पर चादर चढ़ाता है, उसकी हर मन्नत पूरी होती है।

 

15 मार्च 2026 को होगा भव्य उद्घाटन: समारोह की रूपरेखा

हर साल होली के बाद पड़ने वाले दूसरे रविवार से इस मेले की अनौपचारिक शुरुआत हो जाती है। इस बार प्रशासन ने नौचंदी मेला मेरठ के विधिवत उद्घाटन के लिए 15 मार्च की तारीख तय की है।

 

उद्घाटन समारोह हमेशा की तरह बहुत ही भव्य, प्रतीकात्मक और शांति का संदेश देने वाला होगा:

 

  1. कबूतर और गुब्बारे उड़ाना: शहर के प्रमुख गणमान्य नागरिकों, जन प्रतिनिधियों और आला प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में गणेश मंदिर गेट (Ganesh Temple Gate) से शांति के प्रतीक सफेद कबूतर और रंग-बिरंगे गुब्बारे आसमान में छोड़े जाएंगे। यह इस बात का प्रतीक है कि मेरठ का आसमान सभी के लिए खुला है और यहां सद्भाव की उड़ान को कोई रोक नहीं सकता।
  2. चुनरी और चादरपोशी: इसके बाद, सर्वधर्म समभाव की परंपरा का निर्वहन करते हुए, प्रशासनिक अमला सबसे पहले बालेमियां की मजार पर जाएगा और वहां अकीदत के साथ 'चादरपोशी' करेगा। इसके तुरंत बाद, सभी अधिकारी मां चंडी देवी के मंदिर में जाकर 'चुनरी' और नारियल अर्पित करेंगे तथा मेले की सफलता और शांतिपूर्ण समापन की प्रार्थना करेंगे।
  3. आधिकारिक घोषणा: 15 मार्च की शाम ठीक पांच बजे फीता काटकर मेले का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया जाएगा और आम जनता के लिए पटेल मंडप (Patel Mandap) से रंगारंग कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी।

 

एक करोड़ रुपये का बजट और जिला पंचायत की तैयारियां

नौचंदी मेले के आयोजन का पूरा जिम्मा मेरठ जिला पंचायत (Zila Panchayat Meerut) के कंधों पर होता है। इस वर्ष के मेले को और अधिक भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला पंचायत प्रशासन ने एक करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट जारी किया है।

 

बजट जारी होने के साथ ही मेला मैदान में हलचल तेज हो गई है। अमर उजाला टीम ने बुधवार को जब मेला मैदान का जमीनी जायजा लिया, तो वहां युद्ध स्तर पर काम होता मिला:
  • सफाई और रंगाई-पुताई: पूरे मेला परिसर में 30 से 40 कर्मचारी लगातार सफाई और रंग-रोगन के काम में जुटे हुए हैं। मुख्य प्रवेश द्वारों को आकर्षक रंगों से रंगा जा रहा है।
  • महापुरुषों की प्रतिमाएं: मेला मैदान के विभिन्न चौराहों पर स्थापित महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं को साफ करके उन पर नया रंग-रोगन किया जा रहा है ताकि वे अपने पूरे गौरव के साथ चमक सकें।
  • पटेल मंडप का जीर्णोद्धार: मेले का हृदय कहे जाने वाले 'पटेल मंडप' की पुताई और मरम्मत का काम भी तेजी से चल रहा है। यहीं पर सभी प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
  • दुकानों का आवंटन: अपर मुख्य अधिकारी (जिला पंचायत) वीएस कुशवाहा ने जानकारी दी है कि मेला मैदान पर विकास कार्य पूरी रफ्तार से चल रहे हैं और दुकानों के आवंटन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगले तीन से चार दिनों के भीतर बुनियादी ढांचे का अधिकांश काम पूरा कर लिया जाएगा।

 

प्रशासनिक लापरवाही: झूलते तार और टूटे खंभे दे रहे हादसों को न्योता

एक ओर जहां नौचंदी मेला मेरठ के लिए एक करोड़ रुपये का बजट पास हुआ है और जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी भी सामने आ रही है। मेला एक ऐसा स्थान है जहां लाखों की संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही एक बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है।

 

बिजली विभाग की अनदेखी

मैदान के निरीक्षण के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि नौचंदी मेला मैदान में जगह-जगह बिजली के पुराने खंभे टूटे पड़े हैं। सबसे खतरनाक स्थिति यह है कि कई जगहों पर हाई-टेंशन और लो-टेंशन बिजली के तार जमीन को छूते हुए झूल रहे हैं।

 

  • दुर्घटना का खतरा: मेले के दौरान जब यहां हजारों की भीड़ होगी, अस्थायी दुकानें लगेंगी और रात के समय रोशनी की भारी मांग होगी, तब ये नंगे और झूलते तार किसी भी समय बड़े 'शॉर्ट-सर्किट' (Short-circuit) या करंट लगने की घटना का कारण बन सकते हैं।
  • स्थानीय निवासियों की चिंता: स्थानीय निवासी और मेले के नियमित दर्शक राकेश शर्मा ने प्रशासन की इस घोर लापरवाही पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका स्पष्ट कहना है कि मेला खत्म होने के बाद पूरा नौचंदी मैदान बेसहारा छोड़ दिया जाता है। साल भर यहां कोई मेंटेनेंस नहीं होता और अब जब मेला सिर पर है, तब भी बिजली विभाग के अधिकारी इन तारों को दुरुस्त करने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।

 

प्रशासन को चाहिए कि वह 15 मार्च से पहले विद्युत सुरक्षा निदेशालय (Directorate of Electrical Safety) की एक टीम से पूरे मेला परिसर का ऑडिट कराए और सभी जर्जर तारों व खंभों को तुरंत बदलवाए।

 

पटेल मंडप: देशभक्ति, धर्म और संस्कृति का महामंच

नौचंदी मेला मेरठ का एक अभिन्न अंग है 'पटेल मंडप'। यह वह ऐतिहासिक मंच है जहां से कला और संस्कृति की अविरल धारा बहती है। एक महीने से अधिक समय तक चलने वाले इस मेले में हर शाम पटेल मंडप में कुछ नया और अद्भुत होता है।

 

  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: इस मंच से देश भर से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। राजस्थानी लोक नृत्य, ब्रज की होली, सूफी गायन और देशभक्ति से ओत-प्रोत नाटकों का मंचन दर्शकों के मन में अमिट छाप छोड़ता है।
  • अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरा: नौचंदी का कवि सम्मेलन और मुशायरा पूरे देश में विख्यात है। देश के नामचीन कवि और शायर यहां आकर अपनी रचनाएं पढ़ते हैं। यह मंच भाषाई सद्भाव का भी एक बड़ा केंद्र है, जहां हिंदी और उर्दू पूरी गर्मजोशी से गले मिलती हैं। इन प्रस्तुतियों के जरिए देशभक्ति, धर्म-कला-संस्कृति और आपसी भाईचारे का जो सशक्त संदेश दिया जाता है, वह इस मेले की आत्मा है।

 

आर्थिक दृष्टिकोण: हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को संजीवनी

यह ऐतिहासिक मेला केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक 'संजीवनी' का काम करता है।

 

  • देश भर के व्यापारी: कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के व्यापारी यहां अपना सामान बेचने आते हैं। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन, सहारनपुर का लकड़ी का काम, और खुर्जा की पॉटरी यहां की दुकानों की शोभा बढ़ाते हैं।
  • हलवा-पराठा और खजला: नौचंदी मेले का जिक्र हो और यहां के विश्व-प्रसिद्ध 'हलवा-पराठा' और 'खजले' (Khajla) की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। मेले के दौरान इन पारंपरिक मिठाइयों की सैकड़ों दुकानें सजती हैं, जो लोगों को अपने खास स्वाद के कारण दूर-दूर से खींच लाती हैं।
  • रोजगार के अवसर: यह मेला हजारों स्थानीय युवाओं, रिक्शा चालकों, कुलियों और छोटे दुकानदारों को एक महीने के लिए सीधा रोजगार उपलब्ध कराता है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा 'बूस्ट' देता है।

 

प्रशासन के लिए आगामी चुनौतियां (Challenges Ahead)

15 मार्च को भव्य उद्घाटन तो हो जाएगा, लेकिन अगले एक महीने तक इस मेले को सुचारू, सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से चलाना मेरठ पुलिस और जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा होगी।

 

  1. यातायात और पार्किंग प्रबंधन: मेले के दौरान शहर का ट्रैफिक कई गुना बढ़ जाता है। हापुड़ रोड और गढ़ रोड पर भारी जाम लगता है। प्रशासन को अस्थाई पार्किंग स्थलों का निर्माण और सुचारू ट्रैफिक डायवर्जन प्लान सख्ती से लागू करना होगा।
  2. कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा: असामाजिक तत्वों और मनचलों पर लगाम कसने के लिए मेला परिसर में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे, सादी वर्दी में पुलिसकर्मी और महिला पुलिस की गश्त सुनिश्चित करनी होगी। 'एंटी-रोमियो स्क्वॉड' को मेले के दौरान विशेष रूप से सक्रिय रहना होगा।
  3. स्वच्छता और पेयजल: लाखों लोगों की आवाजाही के कारण गंदगी होना स्वाभाविक है। ऐसे में 24 घंटे सफाई व्यवस्था, मोबाइल टॉयलेट्स और पीने के साफ पानी की व्यवस्था करना जिला पंचायत की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।

 

अंततः, नौचंदी मेला मेरठ सिर्फ मनोरंजन का एक साधन नहीं है; यह हमारी साझा विरासत, अनेकता में एकता और उस 'गंगा-जमुनी तहजीब' का उत्सव है जो भारतवर्ष की असली पहचान है। 15 मार्च 2026 को होने वाला इसका भव्य उद्घाटन एक बार फिर बालेमियां की अजान और मां चंडी के शंखनाद के साथ इंसानियत का पैगाम देगा। एक करोड़ रुपये का बजट मेले की भव्यता तो सुनिश्चित कर देगा, लेकिन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि टूटे खंभे और झूलते बिजली के तार जैसी लापरवाहियां इस खुशी के मौके पर किसी त्रासदी का कारण न बनें। मेले की सफलता केवल सजावट में नहीं, बल्कि वहां आने वाले प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम में छिपी है। उम्मीद है कि यह ऐतिहासिक मेला इस वर्ष भी अपने गौरवशाली अतीत की तरह शांति, सद्भाव और भाईचारे के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।
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