मेरठ, डिजिटल डेस्क।
विश्व के सबसे बड़े परीक्षा बोर्डों में से एक, 'उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद' (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं अब दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। परीक्षाओं की पवित्रता, पारदर्शिता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेरठ का शिक्षा विभाग 'एक्शन मोड' में आ गया है। नकल माफियाओं पर नकेल कसने और परीक्षाओं को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (डी.आई.ओ.) राजेश कुमार ने कमर कस ली है।READ ALSO:-CBSE का 'रेड अलर्ट': 10वीं के छात्र ध्यान दें, अब सही जवाब पर भी मिल सकता है 'अंडा'; विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में 'सेक्शन' की गलती पड़ेगी भारी, री-चेकिंग के रास्ते भी बंद
मंगलवार को मेरठ में एक हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के परीक्षा केंद्रों के भाग्य विधाता यानी केंद्र व्यवस्थापकों (Center Superintendents) को तलब किया गया। इस बैठक का माहौल सामान्य नहीं था; यह एक तरह की 'वॉर रूम ब्रीफिंग' थी, जहाँ स्पष्ट कर दिया गया कि "चूक की कोई गुंजाइश नहीं है।"
डी.आई.ओ. राजेश कुमार ने जिले के 98 केंद्र व्यवस्थापकों के साथ मैराथन बैठक की और सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिसे भेद पाना किसी भी नकल माफिया या शरारती तत्व के लिए असंभव होगा। स्ट्रांग रूम से लेकर परीक्षा हॉल तक, हर जगह 'तीसरी आँख' (CCTV) का पहरा होगा और वर्दीधारी जवानों की संगीनों के साये में प्रश्न पत्र सुरक्षित रहेंगे।

1. "मिशन नकल-विहीन परीक्षा": DIOS ने सेट किया एजेंडा
मंगलवार को आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं था, बल्कि जमीनी हकीकत को परखना और सख्त संदेश देना था। डी.आई.ओ. राजेश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूपी बोर्ड की साख सर्वोपरि है।
बैठक की बड़ी बातें:
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प्रतिभागी: जिले के 98 परीक्षा केंद्रों के व्यवस्थापक (CS)।
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विषय: 18 फरवरी से 12 मार्च तक चलने वाली परीक्षाओं की तैयारी।
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तेवर: बैठक से नदारद रहने वाले व्यवस्थापकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की शुरुआत। उनसे लिखित स्पष्टीकरण (Explanation) मांगा गया है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण सत्र से वे अनुपस्थित क्यों थे।
यह सख्ती बताती है कि प्रशासन इस बार किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। जो अधिकारी बैठक में नहीं आ सके, वे परीक्षा के दौरान क्या जिम्मेदारी निभाएंगे, इस पर सवालिया निशान लगाते हुए विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।

2. स्ट्रांग रूम या अभेद्य किला? सुरक्षा का 'ब्लूप्रिंट'
परीक्षा की सुचिता सबसे ज्यादा इस बात पर निर्भर करती है कि प्रश्न पत्र (Question Papers) कितने सुरक्षित हैं। पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों से सबक लेते हुए, इस बार मेरठ में 'स्ट्रांग रूम' (Strong Room) की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर ले जाया गया है।
24 घंटे सशस्त्र पुलिस का पहरा
डी.आई.ओ. ने निर्देश दिया है कि जिस कमरे में प्रश्न पत्र रखे जाएंगे, वह सामान्य कमरा नहीं होगा।
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सशस्त्र बल: वहां 24 घंटे, सातों दिन सशस्त्र पुलिस बल (Armed Police Force) की तैनाती अनिवार्य होगी। यह गार्ड्स शिफ्ट में काम करेंगे, लेकिन एक पल के लिए भी स्ट्रांग रूम की सुरक्षा राम-भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी।
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तीन दिन पहले तैयारी: प्रश्न पत्र परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से ठीक तीन दिन पहले स्ट्रांग रूम पूरी तरह से स्थापित और सुरक्षित हो जाना चाहिए।
प्रधानाचार्य कक्ष से अलग होगा स्ट्रांग रूम
एक बहुत ही महत्वपूर्ण और रणनीतिक बदलाव किया गया है। अक्सर देखा जाता था कि प्रधानाचार्य के कार्यालय में ही अलमारी में पेपर रख दिए जाते थे। डी.आई.ओ. राजेश कुमार ने इस परंपरा को खत्म करने का निर्देश दिया है।
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निर्देश: स्ट्रांग रूम प्रधानाचार्य के कक्ष से बिल्कुल अलग होगा।
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वजह: ताकि वहां हर किसी की आवाजाही न हो सके और गोपनीयता (Confidentiality) भंग न हो।
3. 'तीसरी आँख' की निगरानी: टेक्नोलॉजी का हाई-टेक पहरा
सिर्फ इंसानी पहरे पर भरोसा नहीं किया जा रहा है। यूपी बोर्ड परीक्षाओं को निष्पक्ष बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। डी.आई.ओ. ने सीसीटीवी और डीवीआर (DVR) को लेकर तकनीकी विनिर्देश (Specifications) जारी किए हैं।
30 दिन और 6 महीने का गणित
सीसीटीवी लगवाना ही काफी नहीं है, उसकी रिकॉर्डिंग कब तक सुरक्षित रखनी है, यह सबसे अहम है।
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30 दिन की लाइव रिकॉर्डिंग: स्ट्रांग रूम के अंदर और बाहर लगे कैमरों के डीवीआर (Digital Video Recorder) की क्षमता इतनी होनी चाहिए कि वह कम से कम 30 दिनों की लगातार रिकॉर्डिंग स्टोर कर सके। चूंकि परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक (करीब 22-23 दिन) चलेंगी, इसलिए 30 दिन का बैकअप अनिवार्य किया गया है ताकि पूरी परीक्षा अवधि कवर हो सके।
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6 महीने तक सुरक्षित रखना होगा डेटा: यह एक बहुत बड़ा आदेश है। डी.आई.ओ. ने कहा है कि प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं के स्ट्रांग रूम में पहुंचने से लेकर निकलने तक, और परीक्षा कक्षों (Exam Halls) की फुटेज को कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखना होगा।
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क्यों है यह जरूरी? अगर परीक्षा के बाद कोई शिकायत आती है, कोई आरटीआई (RTI) लगती है, या कोर्ट केस होता है, तो 6 महीने बाद भी प्रशासन के पास सबूत के तौर पर वीडियो फुटेज मौजूद होनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर इसे बोर्ड (परिषद) को उपलब्ध कराना होगा।
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4. स्टाफिंग में बड़ा बदलाव: 'अपनों' से दूरी, निष्पक्षता जरूरी
नकल अक्सर बाहर से नहीं, बल्कि अंदर के सिस्टम की मिलीभगत से होती है। इस 'नेक्सस' को तोड़ने के लिए डी.आई.ओ. ने कक्ष निरीक्षकों (Invigilators) की ड्यूटी को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं।
50 प्रतिशत स्टाफ बाहरी होगा
परीक्षा केंद्रों पर मनमानी नहीं चलेगी। डी.आई.ओ. के निर्देशानुसार:
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परीक्षा केंद्र पर तैनात होने वाले कुल कक्ष निरीक्षकों और स्टाफ में से कम से कम 50 प्रतिशत बाहरी विद्यालयों से नियुक्त किए जाएंगे।
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इसका सीधा मतलब है कि जिस स्कूल में सेंटर है, वहां के लोकल टीचरों का दबदबा नहीं चलेगा। आधे लोग बाहर के होंगे जो एक-दूसरे को नहीं जानते होंगे, जिससे नकल की सेटिंग करना नामुमकिन हो जाएगा।
सब्जेक्ट टीचर पर प्रतिबंध (Conflict of Interest)
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए 'हितों के टकराव' को रोका गया है।
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नियम: जिस दिन जिस विषय (Subject) की परीक्षा होगी, उस विषय के अध्यापक की ड्यूटी उस दिन कक्ष निरीक्षक या अवमोचक (Reliever) के रूप में नहीं लगाई जाएगी।
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उदाहरण: अगर 12वीं का गणित (Mathematics) का पेपर है, तो गणित के शिक्षक को परीक्षा हॉल में ड्यूटी नहीं दी जाएगी। ऐसा इसलिए ताकि वे छात्रों को इशारों में या बोलकर मदद न कर सकें।
बालिकाओं (Girls) के लिए विशेष नियम
यूपी बोर्ड में अक्सर लड़कियों को उनके ही स्कूल में सेंटर (Self-Center) की सुविधा मिलती है। लेकिन इसका गलत फायदा न उठाया जाए, इसके लिए भी डी.आई.ओ. ने पेच कस दिए हैं।
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गाइडलाइन: जिन परीक्षा केंद्रों पर स्वयं उसी विद्यालय की छात्राएं परीक्षा दे रही हैं, उनके कक्ष (Room) में उसी विद्यालय के शिक्षकों की ड्यूटी कक्ष निरीक्षक के रूप में नहीं लगेगी।
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मिश्रित व्यवस्था पर भी लागू: यह नियम उन कमरों में भी लागू होगा जहां सेल्फ-सेंटर वाली छात्राओं को अन्य स्कूलों के छात्रों के साथ मिश्रित रूप से बैठाया गया है। वहां भी बाहरी शिक्षक ही निगरानी करेंगे।
5. तारीखों का ऐलान: 18 फरवरी से रणभेरी
बैठक में समय सारिणी को लेकर भी चर्चा हुई ताकि सभी व्यवस्थापक मानसिक रूप से तैयार हो जाएं।
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आरंभ: 18 फरवरी 2026
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समापन: 12 मार्च 2026
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चुनौती: करीब 22-24 दिनों तक चलने वाली इस प्रक्रिया में हर दिन, हर पाली (Shift) में एक जैसी मुस्तैदी बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
6. अनुपस्थितों पर गाज: प्रशासन का 'जीरो टॉलरेंस'
डी.आई.ओ. राजेश कुमार का सख्त रवैया बैठक की शुरुआत में ही दिख गया। जिले के 98 केंद्र व्यवस्थापकों को बुलाया गया था, लेकिन जो लोग नदारद रहे, उनकी अब खैर नहीं।
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स्पष्टीकरण तलब: अनुपस्थित व्यवस्थापकों से लिखित में जवाब मांगा गया है।
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संदेश: यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य में 'चलता है' वाला रवैया अब नहीं चलेगा। यह अनुशासनहीनता मानी जाएगी।
मेरठ में नकल का 'शटर डाउन'
मेरठ जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा बुलाई गई यह बैठक और जारी किए गए निर्देश साफ करते हैं कि यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 'डिजिटल' और 'फिजिकल' दोनों तरह की सुरक्षा के घेरे में होगी। एक तरफ जहां स्ट्रांग रूम को किले में तब्दील किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ टीचरों की ड्यूटी में रैंडमाइजेशन (Randomization) लाकर मानवीय मिलीभगत की संभावनाओं को खत्म किया जा रहा है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए यह राहत की खबर है कि जो बच्चे साल भर मेहनत करते हैं, उनके हक को कोई नकलची नहीं मार पाएगा। वहीं, नकल माफियाओं के लिए मेरठ प्रशासन का यह संदेश स्पष्ट है— "सुधर जाओ, वरना सीसीटीवी और पुलिस की नजर तुम पर है।"
(नोट: यह रिपोर्ट मेरठ जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा मंगलवार को ली गई बैठक और जारी किए गए आधिकारिक निर्देशों पर आधारित है।)