उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और राजस्व इतिहास में कर चोरी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की खुफिया सूचना पर की गई एक हाई-प्रोफाइल छापेमारी के बाद, मेरठ की विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने ₹218.40 करोड़ के विशालकाय कर अपवंचन (Tax Evasion) के मामले में तीन मुख्य अभियुक्तों को 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।READ ALSO:-भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: नए 'रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम' से अब 1 मिनट में बुक होंगे 1.25 लाख टिकट, तत्काल यात्रियों को मिलेगी भारी राहत
यह पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 (HSNS Act 2025) के तहत दर्ज किया गया है। पकड़े गए आरोपियों में मुख्य सरगना रचित गुप्ता, उसका मुख्य सहयोगी मनोज शाहू और मशीनों का संचालन देखने वाला उमेश शामिल है। इस पूरे सिंडिकेट का जाल बदायूं से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ था, जो बिना किसी पंजीकरण और सरकारी टैक्स चुकाए, हर महीने करोड़ों रुपये का अवैध टर्नओवर खड़ा कर रहा था।
इंटेलिजेंस इनपुट और आधी रात को छापेमारी की इनसाइड स्टोरी
इस पूरे ऑपरेशन की नींव जून 2026 के अंतिम सप्ताह में पड़ी, जब गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट के प्रवर्तन और जांच विंग को एक गोपनीय और बेहद सटीक इनपुट प्राप्त हुआ। सूचना यह थी कि बदायूं के पॉश इलाके 'आवास विकास' के एक घर में बड़े पैमाने पर बिना किसी लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से पान मसाला और गुटखा बनाने की हाई-टेक फैक्ट्रियां संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा, डेटागंज के ग्राम सराय पिपरिया में स्थित 'मैसर्स रजनी राजी एडिबल ऑयल' नामक पंजीकृत प्रतिष्ठान की आड़ में भी इस अवैध धंधे को संरक्षण दिया जा रहा था।
इस गुप्त सूचना को पुख्ता करने के बाद, विवेचक नितिन कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया। 30 जून 2026 की रात से लेकर 1 जुलाई 2026 की सुबह तक, टीम ने बदायूं के बी-636, आवास विकास स्थित रचित गुप्ता के आवास और अन्य अघोषित ठिकानों पर एक साथ योजनाबद्ध तरीके से धावा बोल दिया।
मुख्य जब्ती का विवरण: छापेमारी के दौरान अधिकारियों को एक रिहायशी मकान के भीतर से 12 अत्यधिक आधुनिक एफ़एफएस (Form-Fill-Seal) ऑटोमैटिक मशीनें चलती हुई मिलीं, जो प्रति मिनट हजारों की संख्या में पान मसाले के पाउच तैयार कर रही थीं। इसके साथ ही मौके से 410 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कटी हुई प्रतिबंधित सुपारी बरामद की गई।
ब्रांडेड गुटखा कंपनियों के नाम पर चल रहा था नकली साम्राज्य
अ canधानियों द्वारा की गई सघन जांच में यह बात सामने आई कि यह सिंडिकेट न केवल टैक्स की चोरी कर रहा था, बल्कि देश की नामचीन और प्रतिष्ठित पान मसाला कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर नकली माल भी बाजार में खपा रहा था। मौके पर सर्च ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में गगन, शिखर, गोल्ड मोहर, दिलबाग, एस-7, और जीजी-7 (GG-7) जैसे अत्यधिक लोकप्रिय ब्रांडों के हूबहू दिखने वाले तैयार माल, जाली बारकोड, और भारी मात्रा में प्रिंटेड पैकिंग मटेरियल बरामद किए गए।
जांच दल के अनुसार, इन नकली पाउचों को इस बारीकी से तैयार किया जाता था कि आम उपभोक्ता असली और नकली के बीच अंतर समझ ही न पाए। यह अवैध फैक्ट्री सीधे तौर पर सरकार के राजस्व को तो चूना लगा ही रही थी, साथ ही साथ बिना किसी क्वालिटी चेक के अमानक सामग्री का उपयोग कर लाखों लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रही थी।
₹218.40 करोड़ की कर चोरी का गणित और वित्तीय विश्लेषण
इस पूरे मामले की गंभीरता इसकी कर चोरी की राशि से स्पष्ट होती है। विवेचक द्वारा अदालत में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, इन आरोपियों ने फरवरी 2026 से लेकर जून 2026 तक यानी मात्र 5 महीनों के भीतर ही ₹218.40 करोड़ की कर देनदारी (Cess Liability) की चोरी की थी। इस राजस्व हानि का आकलन 'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस एक्ट 2025' (HSNS Act 2025) की अनुसूची-2 के कड़े प्रावधानों के तहत किया गया है।
अधिकारियों ने जब्त की गई प्रत्येक मशीन की उत्पादन क्षमता और प्रति माह तैयार किए जाने वाले पाउच के औसत भार का वैज्ञानिक पद्धति से मूल्यांकन किया। गणना में पाया गया कि ये 12 मशीनें बिना रुके दिन-रात चल रही थीं और इनसे उत्पादित माल को बिना किसी बिल, ई-वे बिल या सरकारी पंजीकरण के सीधे खुले बाजार में नकद में बेचा जा रहा था। यह उत्तर प्रदेश के इतिहास में पान मसाला सेक्टर में पकड़ा गया अब तक का सबसे बड़ा समानांतर अवैध आर्थिक नेटवर्क है।
आरोपियों का प्रोफाइल और अपराध में उनकी भूमिका
|
क्र.सं.
|
अभियुक्त का नाम व विवरण
|
सिंडिकेट में मुख्य भूमिका और कार्य
|
गिरफ्तारी का समय (01.07.2026)
|
|---|---|---|---|
|
1
|
रचित गुप्ता (पुत्र राजीव गुप्ता, निवासी: आवास विकास, बदायूं)
|
किंगपिन/मास्टरमाइंड। मशीनों का प्रबंधन, कच्चे माल की आपूर्ति और अवैध वित्तीय लेनदेन का पूर्ण नियंत्रण।
|
दोपहर 01:55 बजे
|
|
2
|
मनोज शाहू (पुत्र स्व. नन्दकिशोर, निवासी: पटियाली सराय के पास, बदायूं)
|
सह-प्रबंधक। फैक्ट्री संचालन में रचित का प्रत्यक्ष सहयोग और तैयार माल को बाजार में खपाने की जिम्मेदारी।
|
दोपहर 02:15 बजे
|
|
3
|
उमेश (पुत्र प्रेमपाल, निवासी: अदौली उझहानी, बदायूं)
|
तकनीकी संचालक। 12 हाई-टेक एफ़एफएस मशीनों का रखरखाव, पैकिंग प्रक्रिया और लेबर मैनेजमेंट।
|
दोपहर 02:30 बजे
|
कानूनी शिकंजा: बेहद गंभीर और अजमानतीय धाराओं में मुकदमा
गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट के निर्देश पर विवेचक नितिन कुमार सिंह ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सभी अभियुक्तों के खिलाफ नई दंड प्रक्रिया संहिता यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187(3) के तहत वारंट तैयार किया गया। इसके साथ ही मुख्य मुकदमा HSNS Act 2025 की धारा 18(1)(a), 18(1)(b), 18(1)(c), और 19(1)(a) के तहत दर्ज किया गया।
जब्त किए गए माल की भारी मात्रा, आरोपियों के इकबालिया बयान (दिनांक 01.07.2026) और मौके से मिले पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे अपराध को 'संज्ञेय और अजमानतीय' (Cognizable and Non-Bailable) श्रेणी में रखा गया है, जिसके कारण आरोपियों को कोर्ट से तत्काल कोई राहत नहीं मिल सकी।
कोर्ट रूम ड्रामा: बचाव पक्ष की दलीलें बनाम सरकारी वकील के अकाट्य साक्ष्य
02 जुलाई 2026 को जब तीनों आरोपियों को मेरठ की विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, तो कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था। बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं ने आरोपियों को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। बचाव पक्ष की ओर से मुख्य तर्क यह दिया गया कि "आरोपियों को पूरी तरह से झूठा फंसाया गया है। उनके निवास स्थान से कोई भी मशीन चलती हुई हालत में नहीं पाई गई थी और न ही उनके द्वारा किसी प्रकार के माल का निर्माण किया गया था। संबंधित विभाग द्वारा उन्हें गिरफ्तारी से पहले कोई आवश्यक कागजात या नोटिस उपलब्ध नहीं कराए गए थे।"
इसके जवाब में सरकारी अभियोजक अभियोजन (DGGI) पक्ष के विशेष लोक अभियोजक (Special PP) लक्ष्य कुमार सिंह और उनकी सहयोगी अधिवक्ता श्रीमती वंदना सिंह ने अदालत के समक्ष केस डायरी, अरेस्ट मेमो, जामा तलाशी रिपोर्ट, रीजन टू बिलीव (गिरफ्तारी के ठोस कारण), ग्राउंड ऑफ अरेस्ट और मौके पर तैयार किया गया विस्तृत पंचनामा प्रस्तुत किया। सरकारी पक्ष ने यह भी साबित किया कि गिरफ्तारी के नियमों का पूर्ण पालन करते हुए, अरेस्ट मेमो तैयार करने से दो घंटे पूर्व ही आरोपियों के सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों को इसकी लिखित सूचना दे दी गई थी।
अदालत का अंतिम आदेश: 14 दिनों की न्यायिक रिमांड स्वीकृत
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद बचाव पक्ष के तर्कों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से माना कि विवेचक द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रपत्रों, कच्चे और पक्के माल के सैंपलों, मशीनों के पंचनामे और स्वतंत्र गवाहों के बयानों से यह साफ झलकता है कि आरोपी बिना किसी वैध लाइसेंस के एक समानांतर अवैध आर्थिक साम्राज्य चला रहे थे।
न्यायालय ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को तर्कसंगत और न्यायोचित पाते हुए जांच एजेंसी की 14 दिनों की न्यायिक रिमांड की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया। कोर्ट के आदेश के बाद तीनों मास्टरमाइंडों को कड़ी सुरक्षा के बीच 16 जुलाई 2026 तक के लिए जिला कारागार, मेरठ भेज दिया गया है।
अवैध गुटखा सिंडिकेट पर सरकार का कड़ा संदेश
मेरठ कोर्ट का यह ऐतिहासिक रिमांड आदेश और गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की यह त्वरित कार्रवाई उत्तर प्रदेश में सक्रिय तमाम आर्थिक अपराधियों और अवैध सिंडिकेट्स के लिए एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश है। राज्य सरकार अब कर चोरी और नकली उत्पादों के निर्माण को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। फिलहाल, पुलिस और कर विभाग की टीमें इस बात की जांच कर रही हैं कि इस ₹218 करोड़ के घोटाले के पीछे क्या कुछ सफेदपोश लोग या बड़ी कंपनियों के अंदरूनी सूत्र भी शामिल थे? आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता है।
अस्वीकरण: यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध प्रेस विज्ञप्तियों, विशेष अभियोजन अधिकारी और आरोपी के वकील द्वारा प्रस्तुत तर्कों, तथा वैध न्यायालय आदेशों पर आधारित है।