मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का दिल कहे जाने वाले 'सेंट्रल मार्केट' (Central Market) में इस वक्त हाहाकार मचा हुआ है। बरसों से जमे-जमाए व्यापारियों के सिर पर अचानक बर्बादी का पहाड़ टूट पड़ा है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के एक बेहद सख्त आदेश के बाद आज यानी मंगलवार (7 अप्रैल) सुबह से ही सेंट्रल मार्केट और उसके आसपास के इलाकों में 44 व्यावसायिक संपत्तियों को सील करने की एक बहुत बड़ी और खौफनाक कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।READ ALSO:-मौत के मुंह से वापस लौटे मासूम: अपहरणकर्ताओं की खौफनाक साजिश का दर्दनाक अंत, खौफनाक सड़क हादसे में 3 किडनैपर्स की मौत!
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में आदेश दिया था कि आवासीय (Residential) भूखंडों पर धड़ल्ले से चल रहे कमर्शियल प्रतिष्ठानों, जिनमें बड़े नर्सिंग होम और नामी स्कूल तक शामिल हैं, उन पर तुरंत ताला जड़ा जाए। इस फरमान के आते ही पूरे मेरठ शहर, विशेषकर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की नींदें उड़ गईं। रात भर सड़कों पर हंगामा चलता रहा, पुलिस के बूटों की थाप गूंजती रही और मंगलवार की सुबह होते-होते व्यापारियों का गुस्सा एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील हो गया। 'खबरीलाल' (Khabreelal) की इस खास रिपोर्ट में आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर मेरठ का सबसे पॉश मार्केट आज छावनी में कैसे तब्दील हो गया।
दहल उठा सेंट्रल मार्केट: रात भर हंगामा और सुबह छाती पीटकर रोए व्यापारी
सोमवार शाम जैसे ही सीलिंग की खबर मार्केट में आग की तरह फैली, व्यापारियों में हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल (Police Force) और प्रशासन की गाड़ियां रात में ही सेंट्रल मार्केट में गश्त करने लगीं। पूरी रात व्यापारी खौफ के साये में जगे रहे। मंगलवार सुबह होते ही सैकड़ों की संख्या में व्यापारी अपने घरों से निकलकर सेंट्रल मार्केट की सड़कों पर इकट्ठा हो गए।
प्रशासनिक बुलडोजर और सीलिंग दस्ते को देखते ही व्यापारियों के सब्र का बांध टूट गया। 'कोशिश' संस्था के कार्यकर्ताओं ने अजय सिटी के नेतृत्व में सड़क के बीचों-बीच एक भावुक कर देने वाला 'लघु नाटक' (Street Play) पेश किया। इस नाटक के जरिए उन्होंने अपनी खून-पसीने की कमाई लुटने और परिवारों के बर्बाद होने का दर्द बयां किया। नाटक इतना मार्मिक था कि जैसे ही यह शुरू हुआ, वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की भीड़ भावुक हो उठी। कई व्यापारी अपनी दुकानों को छिनता देख छाती पीट-पीट कर रोने लगे। उनका कहना था कि प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई ने उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया है।
सत्ता के खिलाफ फूटा भारी आक्रोश: गूंजे 'योगी जी वापस जाओ' के नारे
सीलिंग की इस कार्रवाई ने अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। अपने रोजगार को छिनता देख मेरठ के व्यापारियों का गुस्सा सीधे तौर पर राज्य सरकार पर फूट पड़ा है। सेंट्रल मार्केट में एक जगह एकजुट हुए हजारों व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर हुंकार भरी।
गुस्साए व्यापारियों ने खुलेआम नारेबाजी करते हुए कहा, "जो सरकार निकम्मी है, वो सरकार बदलनी है!" माहौल तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब भीड़ में शामिल कुछ व्यापारियों ने सीधे मुख्यमंत्री को निशाने पर लेते हुए "योगी जी वापस जाओ" के नारे लगाने शुरू कर दिए। व्यापारियों का स्पष्ट आरोप है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन उनकी रोजी-रोटी बचाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं। इसी हंगामे के बीच जब LDM (लोकल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के अधिकारी मौके पर कार्रवाई के लिए पहुंचे, तो उग्र व्यापारियों ने उन्हें घेर लिया और भारी विरोध के चलते अधिकारियों को उल्टे पांव बैरंग वापस लौटना पड़ा।
आखिर क्या है पूरा मामला? जानिए 27 जनवरी से लेकर अब तक की इनसाइड स्टोरी
मेरठ के इस सबसे बड़े विवाद की जड़ें कुछ महीने पहले से जुड़ी हुई हैं। इस पूरे मामले को बारीकी से समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा:
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27 जनवरी 2026 का वो आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के 80 ऐसे भूखंड स्वामियों को लेकर एक सख्त आदेश जारी किया था, जिन्होंने आवासीय (Residential) प्लॉट लेकर वहां अवैध रूप से व्यावसायिक (Commercial) गतिविधियां शुरू कर दी थीं। कोर्ट ने इन सभी निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे और 'आवास विकास परिषद' (Awas Vikas Parishad) से इस पूरे मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।
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अधिकारियों की लापरवाही: हैरानी की बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद, आवास विकास के अधिकारी समय पर वह विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में जमा ही नहीं कर पाए।
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धरना और बीच का रास्ता: अधिकारियों की इस सुस्ती के बीच, अपनी दुकानें टूटने के डर से व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया। तब बैकफुट पर आए आवास विकास ने एक बीच का रास्ता निकाला। उन्होंने उन 80 भूखंड स्वामियों को एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि व्यापारी 36 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 'संबंध शुल्क' (Compounding Fee) जमा कराकर अपने आवासीय प्लॉट को कानूनी तौर पर कमर्शियल में बदल सकते हैं।
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व्यापारियों की ईमानदारी: इसके साथ ही 'सेटबैक' (Setback) की कार्रवाई के तहत व्यापारियों को अपनी दुकानें थोड़ी पीछे हटानी थीं। डरे हुए व्यापारियों ने आवास विकास की इस शर्त को तुरंत मान लिया। कई व्यापारियों ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर वह भारी-भरकम शुल्क जमा कर दिया और खुद ही अपने शटर और दीवारें तोड़कर दुकानों को पीछे कर लिया था।
6 अप्रैल का वो 'हंटर': सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर से मांगा जवाब और दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
व्यापारियों को लगा था कि शुल्क जमा करने के बाद अब उनकी दुकानें सुरक्षित हैं। लेकिन सोमवार, 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिर से सुनवाई की और इस बार कोर्ट का रुख पहले से भी ज्यादा सख्त था।
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के पूर्व कमिश्नर ऋषिकेश भास्कर यशोद (Rishikesh Bhaskar Yashod) से सीधे तौर पर जवाब तलब कर लिया कि आखिर ध्वस्तीकरण (Demolition) को रोकने के आदेश क्यों और किसके कहने पर दिए गए? इसके साथ ही, कोर्ट ने बिना कोई रियायत बरते अगले 24 घंटे के अंदर उन 44 चिह्नित संपत्तियों को तुरंत सील करने का फरमान सुना दिया। कोर्ट के इस आदेश ने पूरे प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए और रातों-रात फोर्स बुलाकर आज मंगलवार सुबह से सीलिंग की ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी गहराया सीलिंग का साया: MPS स्कूल में बच्चों की छुट्टी
इस सीलिंग अभियान की जद में सिर्फ कपड़े, राशन या जूतों की दुकानें नहीं हैं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े बड़े संस्थान भी आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के रडार पर वो सभी संपत्तियां हैं जो आवासीय नक्शे पर पास हुईं लेकिन वहां व्यावसायिक काम हो रहा है।
इसी के तहत सेंट्रल मार्केट स्थित जाने-माने 'MPS स्कूल' (MPS School) और कई बड़े नर्सिंग होम भी सीलिंग की चपेट में आ गए हैं। हालात की गंभीरता और प्रशासनिक कार्रवाई के तनाव को देखते हुए आज MPS स्कूल प्रबंधन ने तुरंत प्रभाव से स्कूल में बच्चों की छुट्टी कर दी है। अभिभावकों में भी इस बात को लेकर भारी दहशत है कि बीच सत्र में यदि स्कूल सील हो गया, तो उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा। वहीं नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को भी आनन-फानन में दूसरी जगह शिफ्ट करने की नौबत आ गई है।
खौफ का चरम: अपनी ही दुकानों को ईंटों से चुनवा रहे हैं व्यापारी
मेरठ के सेंट्रल मार्केट में इस वक्त खौफ और बेबसी का ऐसा मिला-जुला मंजर है जो शायद ही पहले कभी देखा गया हो। प्रशासनिक कार्रवाई और सीलिंग की मुहर से बचने के लिए कई व्यापारी अब 'देसी जुगाड़' और खौफनाक कदम उठा रहे हैं।
मार्केट के कई हिस्सों में देखा जा रहा है कि व्यापारी सीलिंग टीम के पहुंचने से पहले ही खुद रातों-रात मिस्त्री बुलाकर अपने शटर के ठीक बाहर ईंटों की पक्की दीवार चुनवा रहे हैं। उनका मानना है कि अगर शटर के बाहर पक्की दीवार बन जाएगी, तो प्रशासन को सील लगाने की जगह ही नहीं मिलेगी या वे इसे बंद संपत्ति मानकर आगे बढ़ जाएंगे। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वीडियोग्राफी हो रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की नाफरमानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आगे क्या? मेरठ के व्यापारिक भविष्य पर लटकी तलवार
मेरठ का यह सेंट्रल मार्केट हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का इकलौता साधन है। करोड़ों रुपये का व्यापार हर दिन यहां से होता है। आज 44 दुकानों पर लगे ताले ने सिर्फ शटर बंद नहीं किए हैं, बल्कि हजारों लोगों के भविष्य पर भी ताला जड़ दिया है।
व्यापारियों का कहना है कि जब उन्होंने 'आवास विकास' को 36 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क चुका दिया था, तो फिर आज उन्हें सड़क पर क्यों फेंका जा रहा है? क्या इसमें आवास विकास के अधिकारियों की गलती नहीं है जिन्होंने उन्हें गुमराह किया?
फिलहाल, मेरठ पुलिस-प्रशासन भारी फोर्स के साथ मार्केट में डटा हुआ है। शहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण है और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या व्यापारियों के इस भारी विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार इस मामले में कोई हस्तक्षेप करेगी या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आगे मेरठ का यह ऐतिहासिक बाजार हमेशा के लिए सन्नाटे में तब्दील हो जाएगा। पल-पल की अपडेट के लिए जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ।