खबरीलाल टीम
उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की संपत्तियों पर 'बुलडोजर एक्शन' लगातार जारी है। इसी कड़ी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ में शनिवार की सुबह एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। मेरठ के पॉश और भीड़भाड़ वाले इलाके शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भारी पुलिस बल के साथ आवास विकास (Awas Vikas Parishad) की टीम बुलडोजर लेकर पहुंच गई। प्रशासन के निशाने पर था हिस्ट्रीशीटर अमित मिरिंडा और पुनीत मिरिंडा का मकान। यह कार्रवाई अनाधिकृत निर्माण और 'सेटबैक' (Setback Action) नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई है।Read also:-मेरठ में बिजली संकट से हाहाकार: आक्रोशित भीड़ ने किया दिल्ली-मेरठ हाईवे जाम, पुलिस की मौजूदगी में मिली थी चेतावनी!

 

इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर मेरठ के इस सबसे व्यस्त बाजार में अचानक बुलडोजर क्यों गरजा, इसके पीछे के कानूनी कारण क्या हैं, और स्थानीय जनता का इस पर क्या रुख है।

 

शनिवार की सुबह और बुलडोजर की धमक

शनिवार की सुबह शास्त्रीनगर के सेक्टर 9 स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के लिए एक आम सुबह नहीं थी। सुबह लगभग 11:30 बजे इलाके में भारी पुलिस बल और पीएसी (PAC) की गाड़ियां सायरन बजाते हुए दाखिल हुईं। उनके पीछे-पीछे दो पीली जेसीबी (JCB) मशीनें थीं, जिन्हें देखकर पूरे बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

 

प्रशासन का सीधा लक्ष्य हिस्ट्रीशीटर पुनीत मिरिंडा और अमित मिरिंडा का दो मंजिला मकान था। जानकारी के मुताबिक, यह मकान लगभग 150 गज के प्लॉट पर बना हुआ है। आवास विकास परिषद के अधिकारियों का कहना है कि इस मकान में 'सेटबैक' नियमों का खुला उल्लंघन किया गया था। नियमों के अनुसार, किसी भी निर्माण में आगे और पीछे कुछ जगह (सेटबैक) छोड़ना अनिवार्य होता है। हालांकि, मकान मालिक द्वारा पीछे की तरफ दीवार तोड़कर कुछ बदलाव किए गए थे, इसके बावजूद आगे का हिस्सा अनाधिकृत रूप से बना हुआ था। इसी अवैध हिस्से को जमींदोज करने के लिए आज की यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

 

छावनी में तब्दील हुआ सेंट्रल मार्केट

बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के बवाल या कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी की थी। कार्रवाई स्थल को चारों ओर से बैरिकेडिंग करके सील कर दिया गया था। मौके पर नौचंदी थाने की पूरी फोर्स के साथ-साथ पीएसी (Provincial Armed Constabulary) के जवानों को तैनात किया गया था।

 

अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) अभिषेक राज के नेतृत्व में आवास विकास की टीम ने यह कमान संभाली। अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी ने मकान के आगे के हिस्से को पूरी तरह से ढहा दिया। ईंटें और कंक्रीट का मलबा सड़क पर बिखर गया और इलाके में धूल का गुबार छा गया। इस दौरान वहां मौजूद भीड़ को पुलिस ने सख्ती से पीछे हटा दिया ताकि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।

 

"एक मिनट का समय नहीं मिलेगा": अधिकारियों की सख्ती और व्यापारियों की नोकझोंक

प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से उन दुकानदारों में भारी रोष और दहशत फैल गई, जिनकी दुकानें इस अवैध निर्माण के हिस्से में या उसके आसपास चल रही थीं। जब बुलडोजर ने अपना काम शुरू करने की तैयारी की, तो वहां मौजूद दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों ने अधिशासी अभियंता अभिषेक राज से अपना सामान सुरक्षित निकालने के लिए कुछ मोहलत मांगी।

 

लेकिन आवास विकास के अधिकारियों का रुख बेहद सख्त था। अधिशासी अभियंता ने दुकानदारों की अपील को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें पहले ही कानूनी नोटिस दिया जा चुका है, इसलिए अब किसी को भी अपनी दुकान खाली करने के लिए "एक मिनट का भी अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा।" इस बात को लेकर अधिकारियों और दुकानदारों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हालांकि, भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण व्यापारी ज्यादा विरोध नहीं कर सके और उन्हें मजबूरी में कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इस पूरी घटना के दौरान अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने मीडिया के सवालों से दूरी बनाए रखी। उन्होंने साफ कहा, "मुझे इस मामले में मीडिया को ब्रीफ करने का कोई अधिकार नहीं है।"

 

भेदभाव के गंभीर आरोप: "अमीरों को छोड़ा, गरीबों को तोड़ा"

जैसे ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने जोर पकड़ा, स्थानीय लोगों और छोटे व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। मेडिकल स्टोर चलाने वाले स्थानीय नागरिक मसरूर अली ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है।

 

मसरूर अली का कहना था, "इस पूरे सेंट्रल मार्केट इलाके में चार-चार मंजिला बड़े-बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स धड़ल्ले से चल रहे हैं। उन पर प्रशासन का बुलडोजर कभी नहीं चलता। प्रशासन जानबूझकर एक भेदभावपूर्ण नीति के तहत हमारी छोटी दुकानों पर कार्रवाई कर रहा है। जो रसूखदार लोग अधिकारियों को मोटा पैसा खिला रहे हैं, उनकी दुकानों और अवैध इमारतों को छुआ तक नहीं जा रहा है। दूसरी ओर, जो आम आदमी ईमानदारी से मेहनत करके अपने परिवार का पेट पाल रहा है, उसके रोजगार को बेरहमी से ध्वस्त किया जा रहा है।"

 

यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि स्थानीय लोगों में प्रशासन की 'पिक एंड चूज' (चुन-चुन कर कार्रवाई करने की) नीति को लेकर भारी असंतोष पनप रहा है। लोगों का मानना है कि केवल कुछ चुनिंदा मकानों को निशाना बनाया जा रहा है जबकि बड़ी मछलियां अभी भी सुरक्षित हैं।

 

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश? (कानूनी पहलू)

इस पूरी कार्रवाई को महज एक सामान्य अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं माना जा सकता। इसके तार सीधे तौर पर देश की सर्वोच्च अदालत से जुड़े हुए हैं।

 

विदित हो कि शास्त्रीनगर का सेंट्रल मार्केट मूल रूप से एक आवासीय योजना (Residential Area) के तहत बसाया गया था। लेकिन समय के साथ-साथ इस आवासीय परिसर में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां (Commercial Activities) शुरू हो गईं और लोगों ने अपने घरों को दुकानों, शोरूम और कॉम्प्लेक्स में तब्दील कर लिया। यह मामला कई वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था।

 

8 अप्रैल का महत्वपूर्ण फैसला: इसी प्रकरण की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को एक बेहद कड़ा आदेश पारित किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आवासीय परिसरों में संचालित हो रही किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे सभी अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ सख्त ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई की जाए।

 

सुप्रीम कोर्ट के इस डंडे के बाद ही आवास विकास परिषद और मेरठ जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागे हैं और न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में यह सख्त कदम उठा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि वे केवल सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन कर रहे हैं और इसमें किसी के साथ कोई व्यक्तिगत रंजिश या भेदभाव नहीं है।

 

14 जुलाई की सुनवाई और व्यापारियों में खौफ का साया

इस समय सेंट्रल मार्केट और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। अब तक तीन मकानों पर बुलडोजर अपना काम कर चुका है और अधिशासी अभियंता के अनुसार यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

 

इस पूरे मामले से जुड़ी एक अहम तारीख 14 जुलाई है। सुप्रीम कोर्ट या संबंधित न्यायालय में इस प्रकरण को लेकर अगली सुनवाई 14 जुलाई को प्रस्तावित है। प्रभावित दुकानदारों और मकान मालिकों को उम्मीद थी कि 14 जुलाई तक प्रशासन कोई बड़ा कदम नहीं उठाएगा और उन्हें न्यायालय से कुछ राहत (Stay Order) मिल सकती है।

 

लेकिन सुनवाई से ठीक पहले शनिवार को हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। स्थानीय परिवारों और व्यापारियों के बीच गहरी संशय की स्थिति बनी हुई है। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि 14 जुलाई की सुनवाई से पहले ही कहीं उनके जीवन भर की कमाई से बनाए गए मकान और दुकानें मलबे में न बदल जाएं। हालांकि प्रशासन ने अभी तक किसी बहुत बड़े 'मास डिमोलिशन ड्राइव' (सामूहिक ध्वस्तीकरण अभियान) की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन आवास विकास परिषद कार्यालय के बाहर अधिकारियों की बढ़ती गतिविधियों और बैठकों के दौर ने लोगों की रातों की नींद हराम कर दी है।

 

आगे की राह
मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में हुई यह बुलडोजर कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन और 'रूल ऑफ लॉ' (कानून के शासन) को स्थापित करने का प्रशासनिक प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह उन छोटे व्यापारियों के लिए रोजी-रोटी का संकट भी है जो दशकों से यहां अपना व्यवसाय चला रहे हैं। हिस्ट्रीशीटर अमित मिरिंडा के मकान पर कार्रवाई करके प्रशासन ने अपराधियों को भी एक कड़ा संदेश देने की कोशिश की है कि अवैध संपत्तियों को बख्शा नहीं जाएगा।

 

अब सबकी निगाहें 14 जुलाई को होने वाली न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या न्यायालय व्यापारियों को कोई मोहलत देता है, या फिर मेरठ के सेंट्रल मार्केट में आने वाले दिनों में और भी बुलडोजर गरजते हुए दिखाई देंगे। तब तक, शास्त्रीनगर का यह इलाका खौफ, अनिश्चितता और प्रशासनिक सख्ती के बीच झूलता रहेगा।
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