खबरीलाल टीम
मेरठ का शांत और हरियाली से भरा कैंट (छावनी) इलाका पिछले 48 घंटों से दहशत के साये में जी रहा है। रविवार रात गांधीबाग (Gandhi Bagh) के पास घने जंगल में एक संदिग्ध परछाई—जिसे तेंदुआ (Leopard) बताया जा रहा है—देखे जाने के बाद से ही वन विभाग (Forest Department) और स्थानीय प्रशासन के हाथ-पाँव फूले हुए हैं।READ ALSO:-यूपी में 'मौत' बनकर उतरा कोहरा: 30 जिलों में 'ज़ीरो विजिबिलिटी' का सायरन; सड़कों पर बिछी लाशें, हवाई और रेल सेवा ध्वस्त

 

हवा में घुली सिहरन और झाड़ियों में होती हल्की सी सरसराहट भी अब लोगों को डराने लगी है। वन विभाग ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए इलाके को एक छावनी में तब्दील कर दिया है, लेकिन चालाक शिकारी अभी भी पकड़ से बाहर है। वन विभाग की टीम डीएफओ वंदना फोगाट और एसडीओ अंशु चावला के नेतृत्व में दिन-रात 'ऑपरेशन लेपर्ड' (Operation Leopard) चला रही है।

 

आइए, ख़बरीलाल की इस विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि पिछले 48 घंटों में मेरठ के जंगलों में क्या-क्या हुआ, कैसे बुना जा रहा है तेंदुए को पकड़ने का जाल, और विशेषज्ञों का इस पर क्या कहना है।

 

रविवार की वो रात और दहशत का सायरन

कहानी की शुरुआत रविवार की देर रात हुई। मेरठ कैंट, जो अपनी हरियाली और कम आबादी वाले शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, अचानक खौफ का केंद्र बन गया। गांधीबाग के पास स्थित जंगलनुमा इलाके से गुजर रहे कुछ राहगीरों और स्थानीय निवासियों ने एक बड़े जानवर को झाड़ियों में हलचल करते देखा। उसकी कद-काठी और चाल-ढाल तेंदुए जैसी थी।

 

सूचना जंगल की आग की तरह फैली और कुछ ही देर में वन विभाग के कंट्रोल रूम की घंटियां बजने लगीं। मेरठ में तेंदुए की आमद कोई नई बात नहीं है, लेकिन गांधीबाग जैसा इलाका, जहाँ शाम को लोग अक्सर टहलने और समय बिताने आते हैं, वहाँ तेंदुए की मौजूदगी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की गश्ती दल (Patrolling Team) मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक वह रहस्यमयी जीव अंधेरे में कहीं ओझल हो चुका था।

 

'ऑपरेशन चक्रव्यूह' - वन विभाग की रणनीति

तेंदुए की पुष्टि और उसे पकड़ने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। डीएफओ (DFO) वंदना फोगाट खुद इस ऑपरेशन की निगरानी कर रही हैं। पिछले दो दिनों में विभाग ने गांधीबाग के जंगलों में एक तरह का 'चक्रव्यूह' रचा है।

 

1. 48 घंटे का नॉन-स्टॉप कॉम्बिंग ऑपरेशन

सोमवार सुबह से लेकर बुधवार शाम तक, वन विभाग की टीमों ने एक पल भी चैन की सांस नहीं ली है।

 

  • सघन तलाशी (Intensive Combing): वन कर्मियों की कई टीमें लाठियों, टॉर्च और सुरक्षा उपकरणों से लैस होकर जंगल का चप्पा-चप्पा छान रही हैं।
  • सैन्य सहयोग: चूंकि यह मामला कैंट (छावनी) क्षेत्र का है, इसलिए वन विभाग ने सैन्य कर्मियों के साथ समन्वय स्थापित किया है। सेना के जवानों और वन रक्षकों ने मिलकर संयुक्त रूप से गश्त (Joint Patrolling) की है।

 

2. 'बकरी' बनी चारा (The Live Bait)

तेंदुए जैसे शिकारी को बाहर निकालने के लिए वन विभाग ने पारंपरिक और सबसे कारगर तरीका अपनाया है—'लाइव बेट' यानी जीवित चारा।

 

  • जंगल के उस हिस्से में जहाँ तेंदुए के होने की सबसे अधिक संभावना है, एक लोहे का मजबूत पिंजरा (Cage) लगाया गया है।
  • पिंजरे के अंदर एक कंपार्टमेंट में बकरी बांधी गई है। बकरी की आवाज और गंध तेंदुए को आकर्षित करने के लिए सबसे बड़ा हथियार मानी जाती है। हालांकि, पिंजरा इस तरह डिजाइन किया गया है कि तेंदुआ फंस जाए लेकिन बकरी को नुकसान न पहुँचा सके (सुरक्षित पार्टीशन के साथ)।

 

3. तीसरी आँख का पहरा (Trap Cameras)

इंसानी आँखें धोखा खा सकती हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी नहीं। डीएफओ वंदना फोगाट के निर्देश पर संदिग्ध रास्तों (Trails) पर मोशन सेंसर वाले ट्रैप कैमरे (Trap Cameras) लगाए गए हैं।

 

  • ये कैमरे इंफ्रारेड तकनीक से लैस हैं, जो रात के घने अंधेरे में भी जानवर की तस्वीर कैद कर सकते हैं।
  • बुधवार को इन कैमरों के डेटा की जांच की गई। एसडीओ अंशु चावला ने बताया कि सैकड़ों तस्वीरें स्कैन करने के बाद भी अभी तक तेंदुए की कोई तस्वीर सामने नहीं आई है। नीलगाय, कुत्ते और अन्य छोटे जानवर तो दिखे, लेकिन 'बिग कैट' अभी भी कैमरों को चकमा दे रहा है।

 

बुधवार का अपडेट - सुराग की तलाश में खाली हाथ

बुधवार का दिन वन विभाग के लिए काफी महत्वपूर्ण था, लेकिन शाम होते-होते निराशा ही हाथ लगी।

 

  • फुटमार्क (Pugmarks) नदारद: किसी भी जंगली जानवर की पुष्टि का सबसे बड़ा वैज्ञानिक आधार उसके पंजों के निशान (Pugmarks) होते हैं। वन विभाग के एक्सपर्ट्स ने मिट्टी, कीचड़ और जल स्रोतों के पास पंजों के निशान तलाशने की कोशिश की। लेकिन जमीन सूखी होने या पत्तों से ढकी होने के कारण अभी तक कोई स्पष्ट 'पगमार्क' नहीं मिला है जो तेंदुए की मौजूदगी पर अंतिम मुहर लगा सके।
  • डीएफओ का बयान: डीएफओ वंदना फोगाट ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया, "हम किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रहे हैं। सूचना मिली है, इसलिए हम हाई अलर्ट पर हैं। फिलहाल हमारे कैमरों में या पिंजरे के आसपास कोई गतिविधि नहीं दिखी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम ढिलाई बरतेंगे। ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जाते।"

 

मेरठ कैंट ही क्यों बनता है तेंदुए का ठिकाना? (विश्लेषण)

मेरठ के लोगों के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर तेंदुआ बार-बार कैंट इलाके में ही क्यों आता है? ख़बरीलाल ने वन्यजीव विशेषज्ञों से बात कर इसके कारणों को समझा:

 

  1. हरियाली और कनेक्टिंग कॉरिडोर: मेरठ कैंट का इलाका बहुत हरा-भरा है और यहाँ मानवीय दखल (शोर-शराबा/निर्माण) शहर के बाकी हिस्सों के मुकाबले कम है। यह हस्तिनापुर वाइल्डलाइफ सेंचुरी और गंगा के खादर क्षेत्रों से जुड़ा हुआ एक प्राकृतिक कॉरिडोर बनाता है।
  2. आसान शिकार की उपलब्धता: कैंट क्षेत्र में आवारा कुत्तों, सुअरों और बंदरों की संख्या काफी है। तेंदुए जैसे जानवर को जंगल में शिकार के लिए दौड़ने के बजाय यहाँ आसानी से भोजन (Easy Prey) मिल जाता है।
  3. छिपने की जगह: गांधीबाग और उसके आसपास की पुरानी कोठियों के खंडहर, घनी झाड़ियाँ और बड़े नाले तेंदुए को दिन में छिपने (Camouflage) के लिए बेहतरीन जगह मुहैया कराते हैं।

 

वन विभाग की चुनौती - तेंदुआ या अफवाह?

रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती "पुष्टि" करना होता है। कई बार रात के अंधेरे में लोग बड़े जंगली बिल्ले (Fishing Cat) या लकड़बग्घे (Hyena) को तेंदुआ समझ लेते हैं।
  • भ्रम की स्थिति: वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि जब तक पंजों के निशान नहीं मिलते या तेंदुआ कैमरे में नहीं आता, तब तक यह कहना मुश्किल है कि वह वहीं है या आगे बढ़ चुका है।
  • तेंदुए का स्वभाव: तेंदुआ बाघ (Tiger) की तरह एक जगह नहीं टिकता। वह एक रात में 20 से 30 किलोमीटर तक चल सकता है। संभव है कि वह रविवार रात वहाँ था और अब किसी और इलाके (जैसे आबूलेन या मवाना रोड के खेतों) की तरफ निकल गया हो। फिर भी, एहतियात के तौर पर वन विभाग कोई रिस्क नहीं लेना चाहता।

 

क्या करें, क्या न करें? (जनहित में जारी गाइडलाइन)

जब तक वन विभाग की तरफ से 'ऑल क्लियर' का सिग्नल नहीं मिलता, मेरठ कैंट और गांधीबाग के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

 

ये सावधानियां बहुत जरूरी हैं:

  1. अकेले न निकलें: सुबह और शाम के वक्त (Dawn and Dusk) तेंदुआ सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोग अकेले न जाएं, समूहों (Groups) में निकलें।
  2. बच्चों का ध्यान रखें: बच्चों को घर के बाहर या पार्क में अकेले खेलने न भेजें, खासकर शाम के समय।
  3. पालतू जानवरों की सुरक्षा: अपने पालतू कुत्तों को रात में घर के अंदर ही रखें। जंजीर से बंधा कुत्ता तेंदुए के लिए सबसे आसान शिकार होता है।
  4. तेज रोशनी और शोर: अगर रात में घर के बाहर कोई हलचल महसूस हो, तो बाहर निकलने के बजाय खिड़की से टॉर्च की तेज रोशनी डालें या शोर मचाएं। जंगली जानवर अक्सर शोर से डरते हैं।
  5. अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर पुरानी वीडियो या फोटो शेयर कर दहशत न फैलाएं। केवल आधिकारिक सूचनाओं पर विश्वास करें।

 

इमरजेंसी नंबर: यदि आपको अपने आसपास तेंदुआ या कोई संदिग्ध जानवर दिखाई दे, तो उसे छेड़ें नहीं, न ही उसके पास जाने की कोशिश करें। तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम (112) या वन विभाग के स्थानीय कार्यालय को सूचित करें।

 

पूर्व की घटनाएं - जब मेरठ में तेंदुए ने मचाया था कोहराम

मेरठ का तेंदुओं से पुराना नाता रहा है। इतिहास गवाह है कि यहाँ कई बार तेंदुए रिहायशी इलाकों में घुस चुके हैं।

 

  • कंकरखेड़ा का खौफ: कुछ साल पहले कंकरखेड़ा क्षेत्र में एक तेंदुआ घर के अंदर घुस गया था, जिसे पकड़ने में वन विभाग को कई दिनों तक मशक्कत करनी पड़ी थी।
  • सदर बाजार की घटना: एक बार सदर बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में एक शोरूम के पास तेंदुआ देखा गया था, जिसने पूरे शहर की रफ्तार रोक दी थी।

 

ये घटनाएं बताती हैं कि हमें वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व (Co-existence) की आदत डालनी होगी, लेकिन सतर्कता के साथ।

 

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

फिलहाल, गांधीबाग में वन विभाग का डेरा जमा हुआ है। पिंजरे में बंधी बकरी की आवाज जंगल के सन्नाटे को तोड़ रही है, और दर्जनों आँखें कैमरों की स्क्रीन पर गड़ी हैं। तेंदुआ गिरफ्त में आएगा या यह सिर्फ एक राहगीर का वहम था, यह आने वाले 24 घंटे में साफ हो जाएगा।

 

लेकिन तब तक, ख़बरीलाल की आपसे अपील है कि दहशत में न आएं, बल्कि सतर्क रहें। वन विभाग अपना काम मुस्तैदी से कर रहा है। प्रशासन का सहयोग करें और सुरक्षित रहें।
इस खबर पर हमारी नजर लगातार बनी हुई है। जैसे ही कोई नया अपडेट या तस्वीर सामने आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
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