मेरठ, उत्तर प्रदेश — मेरठ में एनसीआरटीसी के बेगमपुल मेट्रो स्टेशन के बाहर गंदे पानी की निकासी न होने के कारण स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्टेशन निर्माण के दौरान डाली गई अस्थाई पाइपलाइन महीनों से चोक पड़ी है, जिसके कारण हल्की सी बारिश में भी यहां जलभराव हो जाता है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बावजूद, अफसर इस समस्या को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं, क्योंकि उनका पूरा ध्यान 30 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे से पहले काम पूरा करने पर केंद्रित है।READ ALSO:-UP में मां-बाप को सताया तो संपत्ति से होंगे बेदखल, योगी सरकार ला रही नया कानून; विरासत पर भी पड़ेगा असर
चोक पाइपलाइन बनी समस्या की जड़
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बेगमपुल मेट्रो स्टेशन का काम शुरू हुआ था, तभी गंदे पानी की निकासी के लिए यह पाइपलाइन डाली गई थी। काम आगे बढ़ने के साथ-साथ इस पाइपलाइन की सफाई या रखरखाव पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते यह पूरी तरह से चोक हो गई।
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सड़क के नीचे दबी पाइपलाइन: अधिकारियों की लापरवाही के कारण, इस चोक पड़ी पाइपलाइन के ऊपर सड़क का निर्माण कर दिया गया है। अब यह पाइपलाइन सड़क के काफी नीचे दब गई है और पानी की निकासी नहीं कर पा रही है।
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घरों में घुसा गंदा पानी: कोठी नंबर 81 में रहने वाले मनोज कुमार ने बताया कि हल्की बारिश में ही उनके घरों में गंदा पानी भर जाता है, जिससे उन्हें घर में कैद होकर रहना पड़ता है।
घरों में दरार और कारोबार प्रभावित
जलभराव की इस समस्या ने आस-पास के घरों और स्थानीय कारोबार को भी बुरी तरह प्रभावित किया है:
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घरों में दरारें: कोठी नंबर 81 के क्वार्टरों की स्थिति जलभराव के कारण खराब होती चली गई है। एक क्वार्टर तो नीचे धंसने लगा, जिससे वहां रहने वाले परिवारों को जाना पड़ा। अब बचे हुए मकानों में भी निर्माण कार्य की मशीनों से होने वाले कंपन (वाइब्रेशन) और जलभराव के कारण दरारें आ गई हैं।
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कारोबार पर असर: मेट्रो स्टेशन से कुछ ही दूरी पर स्थित एक पेट्रोल पंप के मैनेजर तेजपाल सिंह ने बताया कि बारिश के दौरान पंप पर डेढ़ फुट तक पानी भर जाता है। निकासी की व्यवस्था न होने के कारण ग्राहक पंप पर आना पसंद नहीं करते, जिससे उनका कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो जाता है।
स्थानीय निवासियों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, जिन्होंने निरीक्षण और समाधान का भरोसा तो दिया, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस उपेक्षा से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है।
अधिकारियों की बेरुखी:
निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, जिन्होंने सिर्फ निरीक्षण का आश्वासन दिया, लेकिन कोई समाधान नहीं किया। स्थानीय लोगों को लगता है कि अधिकारी अब केवल प्रधानमंत्री के संभावित दौरे के लिए काम पूरा करने पर ध्यान दे रहे हैं और उनकी जलभराव की समस्या को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया है।