खबरीलाल टीम
नूरपुर / बिजनौर (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डेस्क - रिपोर्टर शकील अहमद): उत्तर प्रदेश का बिजनौर (Bijnor) जिला वैसे तो अपनी शांति और कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है, लेकिन इन दिनों जिले का नूरपुर (Noorpur) कस्बा एक अजीब से खौफ के साए में जी रहा है। यहाँ रात होते ही गलियों में सन्नाटा तो पसरता है, लेकिन उस सन्नाटे को चीरते हुए चोरों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय हो जाता है, जिसके सामने स्थानीय पुलिस पूरी तरह से नतमस्तक नज़र आ रही है।READ ALSO:-महा-मंथन: कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर मेरठ में 5 राज्यों की हाई-लेवल बैठक; हेलिकॉप्टर से निगहबानी, डीजे पर 12 फीट की लिमिट, कांवड़ रूट पर मीट-शराब बैन

 

नूरपुर कस्बे में चोरी की घटनाएं अब कोई छिटपुट वारदातें नहीं रह गई हैं, बल्कि यह एक 'सिलसिलेवार अपराध' (Serial Crime) का रूप ले चुकी हैं। ताजा मामला नूरपुर के रिहायशी इलाके 'मोहल्ला शहीद नगर' (Shaheed Nagar) से सामने आया है। यहाँ बीती रात अज्ञात और बेखौफ चोरों ने एक घर को अपना निशाना बनाया और बड़ी ही चालाकी से घर के अंदर घुसकर करीब ₹1 लाख की भारी-भरकम नकदी, सोने-चांदी के बेशकीमती जेवरात और एक मोबाइल फोन पर हाथ साफ कर दिया।

 

घटना के बाद से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है, तो वहीं पूरे मोहल्ले और कस्बे में दहशत (Panic) का माहौल है। लगातार हो रही इन वारदातों ने नूरपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली, उनकी रात्रि गश्त (Night Patrolling) और अपराध नियंत्रण के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। आइए, इस पूरी घटना, चोरों के काम करने के तरीके (Modus Operandi) और पुलिस की नाकामी का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

 

क्या है शहीद नगर का पूरा मामला? खौफनाक रात का वो मंजर

यह खौफनाक वाकया 20 और 21 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि का है। जानकारी के अनुसार, नूरपुर के मोहल्ला शहीद नगर निवासी शमशाद अहमद की पत्नी अजमत निशा (Azmat Nisha) अपने परिवार के साथ घर में सो रही थीं। गर्मी और उमस के कारण परिवार गहरी नींद में था, और उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि उनके घर की चौखट पर बर्बादी दस्तक दे चुकी है।

 

चोरों का घर में प्रवेश: रात के किसी पहर, जब पूरी दुनिया गहरी नींद के आगोश में थी, अज्ञात चोरों ने बड़ी ही सफाई से उनके मकान में सेंधमारी की। चोरों ने मुख्य द्वार या छत के रास्ते (छत फांदकर) घर में प्रवेश किया होगा, क्योंकि घर के अंदर सो रहे किसी भी सदस्य को आहट तक नहीं हुई। यह दर्शाता है कि चोर कितने शातिर (Professional) थे और उन्होंने वारदात को अंजाम देने से पहले घर की पूरी रेकी (Reconnaissance) की होगी।

 

सुबह खुला खौफनाक राज: 21 जुलाई 2026 की सुबह जब सूरज निकला, तो वह अजमत निशा के परिवार के लिए तबाही की खबर लेकर आया। सुबह करीब 6:30 बजे जब अजमत निशा की नींद खुली और वह अपनी दिनचर्या के लिए उठीं, तो घर के अंदर का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए और पैरों तले जमीन खिसक गई।

 

  • पूरे घर का सामान तितर-बितर पड़ा था।
  • कमरे में रखी अलमारी (Almirah) के ताले टूटे हुए थे और उसके दरवाजे खुले पड़े थे।
  • कपड़े और अन्य कीमती सामान रखने वाला लोहे का बड़ा संदूक (Trunk) भी टूटा हुआ था और सारा सामान फर्श पर बिखरा पड़ा था।

 

अजमत निशा की चीख निकल गई। उनकी आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य (नाती अदनान सहित) भी जाग गए। जब उन्होंने टूटी हुई अलमारी और संदूक की तलाशी ली, तो पता चला कि घर लुट चुका है।

 

लूट का ब्यौरा: जीवन भर की गाढ़ी कमाई ले उड़े चोर

मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अलमारी या संदूक में रखे पैसे और जेवर केवल वस्तुएं नहीं होते, बल्कि वे उनके जीवन भर की गाढ़ी कमाई, उनके बुढ़ापे का सहारा और किसी बुरे वक्त (Emergency) के लिए बचाई गई पूंजी होते हैं। चोरों ने अजमत निशा के उसी सहारे को लूट लिया।

 

चोरी गए सामान की सूची (Inventory of Stolen Goods):

  1. नकदी (Cash): संदूक में रखे हुए पूरे ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) नकद गायब थे। परिवार ने यह पैसा किसी जरूरी काम या घर के खर्च के लिए जोड़ कर रखा था।
  2. चांदी के आभूषण: एक जोड़ी भारी चांदी की पायल (Silver Anklets), जिनकी कीमत हजारों में थी।
  3. सोने के आभूषण: एक जोड़ी सोने के कुंडल (Gold Earrings), जो महिलाओं के लिए एक बड़ा भावनात्मक और आर्थिक निवेश होता है।
  4. इलेक्ट्रॉनिक्स: पीड़िता अजमत निशा के नाती (धेवते) 'अदनान' का एक कीमती स्मार्टफोन (Mobile Phone) भी चोर जाते-जाते अपने साथ ले गए।

 

इस भारी नुकसान के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़िता अजमत निशा ने तुरंत अपने पड़ोसियों को सूचना दी और फिर थाना नूरपुर पुलिस को इस घटना की जानकारी दी गई।

 

पुलिस की कार्रवाई: सिर्फ 'जांच' का रटा-रटाया आश्वासन

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। नूरपुर थाने से पुलिस की एक टीम तुरंत मौका-ए-वारदात (Crime Scene) पर पहुंची। पुलिस ने घर का मुआयना किया, टूटे हुए तालों और संदूक की तस्वीरें लीं और परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए।

 

पीड़िता अजमत निशा ने अज्ञात चोरों के खिलाफ नूरपुर थाने में लिखित तहरीर (FIR Application) देकर मुकदमा दर्ज करने और चोरों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की गुहार लगाई है।
पुलिस का क्या कहना है? हर बार की तरह पुलिस ने इस बार भी वही रटा-रटाया बयान दिया है। नूरपुर पुलिस का कहना है कि:

 

  • मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
  • फॉरेंसिक टीम (Forensic Team) को भी साक्ष्य (Fingerprints) जुटाने के लिए बुलाया जा सकता है।
  • आसपास की दुकानों, गलियों और चौराहों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
  • मुखबिर तंत्र (Informers) को सक्रिय कर दिया गया है और जल्द ही इस चोरी का खुलासा (Case Solved) कर लिया जाएगा।

 

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस के ये वादे सिर्फ हवा-हवाई साबित होते हैं, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में हुई चोरियों का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।

 

सिलसिलेवार चोरियां (Serial Thefts): नूरपुर में एक ही गिरोह का है हाथ?

शहीद नगर की यह घटना कोई इकलौती या अलग-थलग घटना नहीं है। अगर हम पिछले 24 से 48 घंटों के क्राइम ग्राफ (Crime Graph) पर नज़र डालें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि नूरपुर में चोरों का कोई एक बड़ा और संगठित गिरोह (Organized Gang) सक्रिय हो चुका है, जिसे पुलिस का कोई खौफ नहीं है।

 

घटना 1: कबाड़ की दुकान में दीवार काटकर लाखों की चोरी शहीद नगर की वारदात से ठीक एक दिन पहले, यानी 20 जुलाई की रात को नूरपुर के धामपुर मार्ग पर स्थित एक बड़ी कबाड़ (Scrap) की दुकान को चोरों ने निशाना बनाया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि चोरों ने दुकान के शटर का ताला तोड़ने के बजाय, दुकान की पक्की दीवार में सेंधमारी (दीवार काटकर) की थी। दीवार तोड़ने में काफी समय और आवाज लगती है। मुख्य मार्ग पर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना साफ दर्शाता है कि उस रात उस मार्ग पर पुलिस की कोई गश्त (Patrol) नहीं थी। चोर यहां से लाखों रुपये का बेशकीमती माल (तांबा, पीतल आदि) मोटरगाड़ी में लादकर ले गए।

 

घटना 2: कबीर नगर में सरदार ओमकार सिंह के घर डाका इसी दौरान, नूरपुर के ही एक अन्य पॉश इलाके 'कबीर नगर' में भी चोरों ने धावा बोला। यहां निवासी सरदार ओमकार सिंह के घर के ताले तोड़कर चोरों ने घर में रखा लाखों रुपये का कीमती सामान चुरा लिया। इतना ही नहीं, चोरों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे घर में खड़ी उनकी स्कूटी (Scooty / Two-wheeler) भी अपने साथ उड़ा ले गए। वाहन चोरी और घर में चोरी का यह कॉकटेल साबित करता है कि चोर कई लोगों की संख्या में आ रहे हैं और पूरी प्लानिंग के साथ घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

 

पीड़ितों का दर्द: "हम तो लुट गए, पुलिस कुछ नहीं कर रही"

इन वारदातों के बाद जब मीडिया ने पीड़ितों से बात की, तो उनका दर्द और पुलिस के प्रति उनका गुस्सा साफ झलक रहा था।

 

  • बाइट: अदनान (पीड़िता अजमत निशा का धेवता): अदनान ने काफी मायूसी भरे स्वर में कहा, "हम लोग रात को आराम से सो रहे थे। हमें कुछ पता ही नहीं चला कि चोर कब घर में घुसे। सुबह उठकर देखा तो नानी का संदूक टूटा पड़ा था। मेरा फोन भी गायब था, जिसमें मेरा सारा जरूरी डेटा था। पुलिस आई है और पूछताछ कर रही है, लेकिन हमें हमारा सामान वापस चाहिए।"
  • बाइट: अजमत निशा (पीड़िता): रोते हुए अजमत निशा ने कहा, "बेटे, मेरी तो जिंदगी भर की पूंजी चली गई। एक लाख रुपये नकद रखे थे, मेरी पायल और कुंडल सब ले गए। हम गरीब लोग कैसे पैसा जोड़ते हैं, यह हम ही जानते हैं। अब तो रात को सोने में भी डर लगता है कि कहीं चोर हमें मार न डालें। सरकार और पुलिस से मेरी यही मांग है कि मेरे चोर पकड़े जाएं और मेरा पैसा मुझे वापस मिले।"

 

पुलिस की नाकामी और प्रशासन पर उठते 5 बड़े सवाल

नूरपुर कस्बे में एक के बाद एक हो रही इन चोरियों ने कानून-व्यवस्था (Law and Order) को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय जनता और व्यापार मंडल अब पुलिस की कार्यप्रणाली से बेहद खफा हैं। पब्लिक के मन में कुछ वाजिब सवाल उठ रहे हैं:

 

  1. रात्रि गश्त (Night Patrolling) कहां है? जब रात के समय पुलिस की पीआरवी (PRV 112) और चीता मोबाइल (Cheetah Mobile) को गश्त करनी होती है, तो वे मुख्य मार्गों और मोहल्लों से क्यों नदारद रहते हैं?
  2. पिकेट (Picket Duty) का क्या हुआ? सर्दियों में चोरी रोकने के लिए पिकेट लगाई जाती है, लेकिन गर्मियों में जब लोग छतों या खुले में सोते हैं, तब पुलिस पिकेट क्यों गायब हो जाती है?
  3. खुफिया तंत्र (Intelligence) की विफलता: जब कोई बाहरी गिरोह या स्थानीय अपराधी सक्रिय होता है, तो पुलिस के मुखबिरों (Informers) को इसकी भनक क्यों नहीं लगती?
  4. सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की बदहाली: शहर के कई चौराहों पर लगे 'स्मार्ट सिटी' या पुलिस के कैमरे खराब पड़े हैं। अगर वे सही हों, तो अपराधियों को भागते समय आसानी से ट्रेस किया जा सकता है।
  5. पुराने अपराधियों की निगरानी (Monitoring of History Sheeters): क्या पुलिस ने चोरी के मामलों में जेल से छूटे पुराने अपराधियों की हाजिरी या निगरानी करनी बंद कर दी है?

 

नूरपुर की जनता में आक्रोश, बड़े आंदोलन की चेतावनी

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से नूरपुर के आम नागरिकों, महिलाओं और व्यापारियों में भारी भय (Fear) और असुरक्षा (Insecurity) का माहौल पैदा हो गया है। लोग रात-रात भर जागकर अपने घरों की रखवाली करने को मजबूर हैं।

 

स्थानीय निवासियों, सभासदों और व्यापार मंडल के नेताओं ने नूरपुर पुलिस और बिजनौर के उच्चाधिकारियों (SP Bijnor) से स्पष्ट मांग की है कि:

 

  • रात्रि गश्त को तत्काल प्रभाव से बढ़ाया जाए।
  • लापरवाह पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई (Action) की जाए।
  • जल्द से जल्द इन चोरियों का पर्दाफाश कर अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए और माल की बरामदगी (Recovery) हो।

 

यदि पुलिस अगले कुछ दिनों में इन चोरियों का खुलासा नहीं कर पाती है, तो स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव करने और सड़कों पर उतरकर बड़ा विरोध प्रदर्शन (Protest) करने की चेतावनी दी है।

 

फिलहाल, थाना नूरपुर पुलिस इस मामले में हाथ-पैर मार रही है। देखना यह होगा कि लगातार हो रही चोरी की इन दुस्साहसिक घटनाओं पर पुलिस कब तक और कैसे अंकुश लगा पाती है, और अजमत निशा जैसे दर्जनों पीड़ितों को न्याय (Justice) दिलाने में कितनी सफल होती है। (खबरीलाल न्यूज़ नेटवर्क के लिए शकील अहमद की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट)
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