खबरीलाल टीम
1 मार्च से आधिकारिक रूप से देश में ठंड के सीजन की विदाई मान ली जाती है और धीरे-धीरे गर्मी अपनी दस्तक देने लगती है। लेकिन इस साल स्थिति सामान्य नहीं है। मौसम विज्ञानियों और भारतीय मौसम विभाग (IMD) की मानें तो मार्च का मौसम 2026 (March Weather Forecast 2026) कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकता है। मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही पूरे उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। IMD के ताजा अपडेट के अनुसार, इस साल मार्च अब तक के सबसे गर्म महीनों की सूची में शीर्ष पर शामिल हो सकता है।READ ALSO:-अमेरिका-इजराइल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत: यूपी में भड़का आक्रोश, सीएम योगी ने जारी किया हाई अलर्ट, लखनऊ से लेकर मेरठ तक मातम

 

उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में अधिकतम (Maximum) और न्यूनतम (Minimum) तापमान के सामान्य से काफी अधिक रहने की प्रबल संभावना जताई गई है। पिछले साल यानी 2025 में मार्च महीने में कई जिलों में तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार पारा 2025 के मुकाबले भी 3 से 4 डिग्री अधिक रह सकता है।

 

ऐसे में हर किसी के मन में यह बड़ा सवाल है कि आने वाले दिनों में गर्मी कितनी ज्यादा बढ़ेगी? इस भीषण गर्मी का आम जनजीवन और विशेष रूप से किसानों की लहलहाती रबी फसलों (गेहूं, सरसों आदि) पर कितना विनाशकारी असर पड़ेगा? इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम मौसम के हर पहलू, विशेषज्ञों की राय और IMD की चेतावनियों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
1. अब तक कैसा रहा मौसम: सर्दियों ने क्यों किया निराश?

 

मार्च का मौसम 2026 कितना गर्म होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार सर्दियां भी अपने पूरे शबाब पर नहीं आ सकीं। दिसंबर और जनवरी के महीनों में औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किए गए, जिसके कारण लोगों को 'एक्सट्रीम' (कड़ाके की) ठंड का सामना नहीं करना पड़ा।

 

नोएडा स्थित निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी 'स्काईमेट वेदर' (Skymet Weather) के प्रमुख मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, "उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में पिछले दो वर्षों के मुकाबले इस बार काफी कम ठंड पड़ी है। इसका सबसे बड़ा कारण 'ला-नीना' (La-Niña) का सक्रिय न होना रहा, जिसकी वजह से तापमान में वह गिरावट दर्ज नहीं की गई जो आमतौर पर जनवरी के महीने में होती है।"

 

लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने भी इसी तथ्य की पुष्टि की है। उन्होंने बताया, "इस बार पूरे प्रदेश में सर्दियों के मौसम के दौरान 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) की सक्रियता बेहद कम रही। जब पश्चिमी विक्षोभ मजबूत नहीं होते, तो पहाड़ों पर बर्फबारी कम होती है और मैदानी इलाकों में बारिश नहीं होती। यही कारण है कि इस बार ठंड के सीजन में बारिश भी सामान्य से काफी कम हुई है।"

 

फरवरी में ही टूट गए गर्मी के रिकॉर्ड

सर्दी की कमी का सीधा असर फरवरी के तापमान पर दिखा। वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश के अनुसार, यूपी में फरवरी 2026 में सबसे गर्म दिन के दौरान अधिकतम तापमान लगभग 29 से 31 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। यह एक सामान्य फरवरी के तापमान से खतरनाक रूप से अधिक था।

 

  • कानपुर का हाल: 23 फरवरी 2026 को कानपुर में पारा 29.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। मौसम विभाग ने इसे इस सीजन का सबसे गर्म दिन घोषित किया, क्योंकि फरवरी में आमतौर पर इतनी भीषण गर्मी दर्ज नहीं की जाती है।
  • वाराणसी का रिकॉर्ड: इसी तरह 24 फरवरी को धार्मिक नगरी वाराणसी में अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिसने मार्च जैसी गर्मी का एहसास फरवरी में ही करा दिया।

 

2. मार्च का मौसम 2026: क्या कहती है IMD और विशेषज्ञों की भविष्यवाणी?

सभी संकेतों और उपग्रह डेटा का विश्लेषण करने के बाद, यह स्पष्ट हो गया है कि मार्च का मौसम 2026 प्रचंड गर्मी लेकर आ रहा है। मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के अनुसार, फरवरी में ठंड कम रहने का सीधा मतलब यह है कि इस बार गर्मी न केवल जल्दी आएगी, बल्कि काफी तीखी भी होगी।

 

तापमान में भारी उछाल के आसार

मौसम एक्सपर्ट्स के अनुसार, पूरे यूपी और उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहने के आसार हैं। परेशानी की बात यह है कि केवल दिन का अधिकतम तापमान ही नहीं, बल्कि रात का न्यूनतम तापमान भी औसत से ज्यादा रहेगा। इसका मतलब है कि लोगों को दिन की चिलचिलाती धूप के साथ-साथ रात में भी गर्माहट और उमस का सामना करना पड़ेगा।

 

अल नीनो (El Niño) का बढ़ता खतरा

महेश पलावत ने एक और चिंताजनक जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' (El Niño) की स्थिति धीरे-धीरे विकसित हो रही है। जब भी अल नीनो सक्रिय होता है, भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है और आगामी मानसून (Monsoon) कमजोर पड़ने लगता है। इसका अर्थ यह है कि अप्रैल और मई के महीनों में भी तेज लू (Heatwave) जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं, जो भीषण जल संकट को जन्म दे सकती हैं।

 

क्या बारिश से मिलेगी राहत?

हालांकि, मौसम विभाग का यह भी अनुमान है कि मार्च के अंत तक पश्चिमी यूपी और आसपास के कुछ इलाकों में 'प्री-मानसून' (Pre-Monsoon) गतिविधियों की स्थिति बन सकती है। इसके तहत कुछ इलाकों में हल्की आंधी या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का साफ कहना है कि इस हल्की बारिश से तापमान में किसी बड़ी या स्थायी गिरावट की उम्मीद करना बेमानी होगा।

 

लखनऊ मौसम केंद्र के वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि पूर्वी यूपी में हीट वेव (लू) की स्थिति सामान्य से अधिक रहने की भारी आशंका है। ऐसे में दिन के समय तेज धूप और गर्म थपेड़े वाली हवाएं चल सकती हैं, जो सीधे तौर पर आम जनजीवन, मवेशियों और फसलों को झुलसा सकती हैं।

 

3. मार्च के पहले हफ्ते से ही बदल जाएगा मौसम

बीएचयू (BHU) के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि लोगों को गर्मी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उनके अनुसार, "मार्च के पहले हफ्ते से ही मौसम पूरी तरह करवट लेने लगेगा और भीषण गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा।"

 

दिन और रात, दोनों के तापमान में तेजी से और लगातार बढ़ोतरी होगी। मार्च के आखिरी हफ्ते तक यूपी के कई बड़े जिलों (जैसे आगरा, प्रयागराज, झांसी, बांदा) में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकता है, जो अप्रैल मध्य जैसी गर्मी का एहसास कराएगा।

 

IMD की आधिकारिक चेतावनी और रेड अलर्ट

देश के सर्वोच्च मौसम संगठन भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने एक विशेष बुलेटिन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि मार्च के पहले ही सप्ताह में उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तेज गर्मी पड़ सकती है।

 

  • तापमान में वृद्धि: IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में अगले 7 दिनों के दौरान दिन का तापमान धीरे-धीरे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। कुल मिलाकर अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की प्रबल संभावना है।
  • यूपी और अन्य राज्यों पर सीधा असर: यूपी के ज्यादातर जिलों में तापमान पहले से ही सामान्य से 3 से 5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। आने वाले दिनों में लखनऊ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज और पश्चिमी यूपी के शहरों (मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर) में गर्मी और बेतहाशा बढ़ने के आसार हैं।
  • पहाड़ी राज्य भी नहीं रहेंगे अछूते: मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के निचले मैदानी इलाकों (जैसे देहरादून, हल्द्वानी) में भी तापमान में लगातार वृद्धि देखने को मिलेगी।

 

4. मार्च में कैसी रहेगी बारिश की स्थिति?

गर्मी के इस भीषण पूर्वानुमान के बीच किसानों और आम लोगों की नजरें आसमान पर टिकी हैं। बारिश को लेकर मौसम विभाग ने जो डेटा जारी किया है, वह मिला-जुला है।

 

IMD के मुताबिक, मार्च 2026 में पूरे देश के स्तर पर औसतन 'सामान्य' बारिश होने की संभावना है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में पूरे देश में औसतन करीब 30 मिलीमीटर (mm) बारिश होती है। इस बार भी राष्ट्रीय स्तर पर बारिश इसी आंकड़े के आसपास रहने की उम्मीद है।

 

क्षेत्रीय असमानता (Regional Variation):

  • देश के कई हिस्सों में सामान्य या उससे थोड़ी ज्यादा बारिश हो सकती है।
  • लेकिन, पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) और उत्तर-पश्चिम व पूर्व-मध्य भारत के कुछ प्रमुख इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
  • कुछ ऐसे शुष्क इलाके भी हैं (जैसे पश्चिमी राजस्थान और बुंदेलखंड), जहां मार्च में वैसे भी बहुत कम बारिश होती है, इसलिए वहां मौसम के पैटर्न में कोई खास बदलाव नहीं दिखेगा और वे पूरी तरह सूखे की चपेट में रहेंगे।

 

5. कृषि संकट: मौसम विभाग ने जताई फसलों को लेकर गहरी चिंता

मार्च का मौसम 2026 केवल इंसानों के लिए पसीने छुड़ाने वाला नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) के लिए भी एक बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। भारतीय मौसम विभाग और कृषि वैज्ञानिकों ने मार्च में सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका को देखते हुए रबी फसलों (विशेषकर गेहूं और सरसों) को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है।

 

'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' (Terminal Heat Stress) का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी के अंत और मार्च का समय गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए सबसे संवेदनशील (Critical) होता है। यह वह समय होता है जब पौधों में 'दाना भरने' (Grain Filling) और पकने की प्रक्रिया चल रही होती है। ऐसे में तापमान में होने वाली कोई भी असामान्य वृद्धि (जिसे कृषि विज्ञान में टर्मिनल हीट स्ट्रेस कहा जाता है) फसलों की प्राकृतिक वृद्धि प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

 

अधिक गर्मी और गर्म हवाओं के कारण दाने पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते, वे समय से पहले सूख जाते हैं और सिकुड़ जाते हैं। इससे दानों का वजन कम हो जाता है, जिसका सीधा असर प्रति एकड़ कुल उत्पादन (Yield) के घटने के रूप में सामने आता है। मार्च में लगातार बढ़ती यह गर्मी कुल राष्ट्रीय पैदावार को काफी कम कर सकती है, जबकि कुछ महीने पहले तक सरकार और किसान रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद जता रहे थे।

 

80 प्रतिशत उत्पादन वाले राज्यों पर सबसे बड़ा खतरा

अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत के पांच प्रमुख राज्य—पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश—देश के कुल गेहूं और सरसों उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का भारी-भरकम योगदान देते हैं।

 

मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि इन राज्यों के कई हिस्सों में मार्च के दौरान अधिकतम तापमान सामान्य से 7 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है। ऐसे में अगर तापमान में इतनी तेज और अचानक बढ़ोतरी होती है, तो इन राज्यों में फसलें झुलस सकती हैं और इसका व्यापक असर राष्ट्रीय स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन और महंगाई (Food Inflation) पर भी देखने को मिल सकता है।

 

बीएचयू (BHU) के कृषि वैज्ञानिक की राय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर पी.के. सिंह इस स्थिति का बारीकी से विश्लेषण करते हैं। उनके अनुसार, "मार्च का महीना रबी की फसल (जिसमें गेहूं, जौ, चना, मटर और सरसों शामिल हैं) के लिए 'गोल्डन पीरियड' माना जाता है। लेकिन, इस बार सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने की प्रबल संभावना ने देश भर के किसानों की रातों की नींद और चिंता बढ़ा दी है।"

 

प्रोफेसर सिंह आगे बताते हैं, "मौसम विभाग के स्पष्ट आंकड़ों के अनुसार, तापमान औसत से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है। गेहूं इस समय दाना बनने (Milking Stage) और पकने (Dough Stage) की अंतिम अवस्था में है। समय से पहले तेज गर्मी पड़ने पर फसल जल्दी पकने (Forced Maturity) को मजबूर हो जाती है। इससे दानों का आकार छोटा और हल्का रह जाता है। सरसों की फसल भी अपने अंतिम चरण में है और चना तथा अन्य दलहनी फसलों पर भी इस अत्यधिक गर्मी का सीधा प्रतिकूल असर पड़ने की भारी आशंका है।"

 

निष्कर्ष के तौर पर यह स्पष्ट है कि मार्च का मौसम 2026 अपने साथ कई बड़ी चुनौतियां लेकर आ रहा है। कमजोर सर्दियों और फरवरी में ही रिकॉर्ड तोड़ते तापमान ने यह साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की एक खौफनाक हकीकत है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के स्पष्ट पूर्वानुमान बता रहे हैं कि उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत को झुलसाने वाली गर्मी, लू के थपेड़ों और गर्म रातों के लिए तैयार रहना होगा। सबसे बड़ा संकट देश के अन्नदाता किसानों पर है, जिनकी महीनों की मेहनत अत्यधिक तापमान के कारण खेतों में ही झुलस सकती है। सरकार, कृषि विभागों और आम जनता को इस संभावित हीटवेव और कृषि संकट से निपटने के लिए अभी से आपातकालीन योजनाएं और सिंचाई के उचित प्रबंध करने होंगे।

 

क्या आप चाहते हैं कि मैं आपको कृषि विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उन विशेष सिंचाई और छिड़काव (Foliar Spray) के तरीकों के बारे में विस्तार से बताऊं, जिनसे किसान अपनी गेहूं और सरसों की फसल को इस जानलेवा गर्मी से बचा सकते हैं?

 

Short Summary: 1 मार्च 2026 से ठंड की आधिकारिक विदाई के साथ ही मौसम विभाग (IMD) ने पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की है। इस साल मार्च अब तक के सबसे गर्म महीनों में शामिल हो सकता है, जहां अधिकतम तापमान सामान्य से 3-5 डिग्री (और कुछ जगह 7 डिग्री) तक अधिक रहने का अनुमान है। फरवरी में ही कानपुर और वाराणसी में तापमान 30 डिग्री के पार जा चुका है। अल नीनो के प्रभाव और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण बढ़ती इस गर्मी का सबसे बुरा असर गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों पर पड़ेगा। तापमान बढ़ने से फसलें समय से पहले पक सकती हैं और दाने सिकुड़ सकते हैं, जिससे पंजाब, यूपी और हरियाणा जैसे राज्यों में बंपर पैदावार की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है।
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