खबरीलाल टीम
बिजनौर (Local News): समाज में तेजी से बदलते पारिवारिक मूल्यों, भागदौड़ भरी जिंदगी और एकल परिवारों (Nuclear Families) के बढ़ते चलन के बीच, अक्सर घर के बुजुर्गों को उपेक्षा, अकेलेपन और प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। जीवन के अंतिम पड़ाव (सांध्यकाल) में उन्हें सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का अहसास कराने के उद्देश्य से आज बिजनौर जिले के ग्राम ठाक-जट में एक विशेष 'विधिक साक्षरता शिविर' (Legal Literacy Camp) का भव्य और सफल आयोजन किया गया।READ ALSO:-बिजनौर में 'मौत' बनकर खेतों में घूम रहा गुलदार: दिनदहाड़े 2 किसानों पर किया जानलेवा हमला, खून से लाल हुई खेत की मिट्टी

 

यह महत्वपूर्ण आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ (State Legal Services Authority, Lucknow) द्वारा जारी किए गए 'माह अप्रैल 2026 के एक्शन प्लान' के कड़े निर्देशों के अनुपालन में किया गया। इस शिविर का मुख्य विषय 'वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी और सामाजिक अधिकार' था। शिविर में गांव के दर्जनों बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कानून की उन बारीकियों को समझा, जो बेसहारा महसूस कर रहे बुजुर्गों को एक बड़ी कानूनी ढाल प्रदान करती हैं।

 

स्व-अर्जित बनाम पैतृक संपत्ति: क्या हैं बुजुर्गों के असली अधिकार?

शिविर को संबोधित करते हुए पैरा लीगल वॉलंटियर (P.L.V.) जयवीर सिंह ने उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों को संपत्ति से जुड़े उनके अधिकारों के बारे में विस्तार से और बेहद सरल देहाती भाषा में जानकारी दी। अक्सर देखने में आता है कि बुजुर्ग अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई बच्चों के नाम कर देते हैं और बाद में बच्चे उन्हें ही घर से निकाल देते हैं या दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर देते हैं।

 

इस गंभीर विषय पर पी.एल.वी. जयवीर सिंह ने दो अहम कानूनी पहलू स्पष्ट किए:

  • स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired Property): यदि किसी बुजुर्ग (माता या पिता) ने अपनी मेहनत की कमाई से कोई घर, जमीन या संपत्ति खरीदी है, तो उस पर उनका शत-प्रतिशत (पूर्ण) अधिकार होता है। वे अपने जीवित रहते हुए उस संपत्ति को अपनी मर्जी से किसी को भी बेच सकते हैं, किसी बाहरी व्यक्ति या संस्था को गिफ्ट (दान) कर सकते हैं, या अपनी कई संतानों में से केवल उसी एक संतान के नाम कर सकते हैं जो उनकी बुढ़ापे में सच्ची सेवा करती है। इसमें किसी अन्य वारिस (बेटे या बेटी) का कोई कानूनी दखल या दावा नहीं चल सकता।
  • दाद-इलाही/पैतृक संपत्ति (Ancestral Property): इसके विपरीत, जो संपत्ति पुश्तैनी (दाद-इलाही) है, यानी जो उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है, उसे मनमाने ढंग से बेचने या किसी एक को देने के नियम थोड़े अलग और सीमित हैं। पैतृक संपत्ति की समाप्ति या बंटवारे में बुजुर्गों के पास स्व-अर्जित संपत्ति जितने निरंकुश अधिकार नहीं होते हैं, क्योंकि उसमें जन्म से ही अन्य वारिसों (बच्चों) का भी कानूनी हिस्सा बन जाता है।

 

बहु-बेटे द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर क्या करें बुजुर्ग?

शिविर में समाज की उस सबसे कड़वी सच्चाई पर भी खुलकर बात की गई जहाँ बुढ़ापे में बहु-बेटे अपने ही माता-पिता को बोझ समझने लगते हैं और उन्हें शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। पी.एल.वी. ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम' (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act) के तहत मिलने वाले 'ब्रह्मास्त्र' जैसे अधिकारों से ग्रामीणों को अवगत कराया:

 

  1. भरण-पोषण (Maintenance) का अधिकार: यदि माता-पिता अपना खर्च स्वयं उठाने में असमर्थ हैं और उनके बच्चे (बेटा या बेटी) कमाने योग्य होने के बावजूद उन्हें दवा-पानी और भोजन के लिए आर्थिक मदद नहीं दे रहे हैं, तो बुजुर्ग भरण-पोषण ट्रिब्यूनल (SDM कोर्ट) में शिकायत दर्ज कराकर अपने बच्चों से हर महीने गुजारा भत्ता (Maintenance Allowance) की कानूनी मांग कर सकते हैं। यह बच्चों का कानूनी कर्तव्य है, कोई अहसान नहीं।
  2. संपत्ति वापस लेने का अधिकार (शर्त का उल्लंघन): यह इस कानून का सबसे ताकतवर हिस्सा है। पीएलवी जयवीर सिंह ने बताया कि यदि किसी बुजुर्ग ने अपनी संपत्ति अपनी संतान या किसी अन्य व्यक्ति को इस 'शर्त' (Condition) पर ट्रांसफर (गिफ्ट डीड) कर दी है कि वे भविष्य में उनकी देखभाल और बुनियादी जरूरतें पूरी करेंगे, और बाद में वे ऐसा करने से मुकर जाते हैं या दुर्व्यवहार करते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बुजुर्ग कानूनी रूप से उस संपत्ति के ट्रांसफर को अदालत के माध्यम से शून्य (रद्द) करवाकर अपनी संपत्ति वापस ले सकते हैं।
  3. बेदखली (Eviction) का अधिकार: यदि बुजुर्ग अपने ही बनाए घर में रह रहे हैं और उनकी संतान या बहू उनके साथ दुर्व्यवहार, मारपीट या मानसिक प्रताड़ना करती है, तो कानून वरिष्ठ नागरिकों को यह असीमित शक्ति देता है कि वे पुलिस और प्रशासन की मदद से ऐसी नालायक संतानों को अपनी संपत्ति से तुरंत बेदखल (घर से बाहर) कर सकते हैं। सेवा न करने वाली संतान का माता-पिता के घर पर कोई अधिकार नहीं है।

 

सरकारी कल्याणकारी योजनाएं: वृद्धावस्था पेंशन और 70+ आयुष्मान कार्ड

कानूनी अधिकारों के साथ-साथ, शिविर में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण के लिए चलाई जा रही अहम सरकारी योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी गई ताकि वे किसी पर आर्थिक या शारीरिक रूप से मोहताज न रहें:

 

  • वृद्धावस्था पेंशन (Old Age Pension): 60 वर्ष से अधिक आयु के गरीब और बेसहारा बुजुर्गों को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हर महीने सम्मानजनक पेंशन दी जाती है। शिविर में बताया गया कि इस पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करना है, जन सेवा केंद्र (CSC) की मदद कैसे लेनी है और इसके लिए आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र जैसे कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं।
  • आयुष्मान कार्ड (70+ आयु वर्ग के लिए): स्वास्थ्य के मोर्चे पर राहत देते हुए बताया गया कि भारत सरकार की नई पहल के तहत, अब 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों (चाहे उनकी पारिवारिक आय कुछ भी हो) को 'आयुष्मान भारत योजना' के दायरे में लाया गया है। इसके जरिए वे हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त और उच्च स्तरीय मेडिकल इलाज देश के किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में करा सकते हैं।

 

शिविर में रही इन स्वयंसेवकों की प्रमुख उपस्थिति

ग्राम ठाक-जट (बिजनौर) में आयोजित इस अत्यंत महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक विधिक साक्षरता शिविर को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन और कानूनी स्वयंसेवकों की अहम भूमिका रही। शिविर के दौरान पी.एल.वी. जयवीर सिंह के कुशल मार्गदर्शन के अलावा पी.एल.वी. राजीव कुमार, अभिषेक कुमार, नितिन, अक्षय सिंह, जागें, जयसिंह और योगेन्द्र कुमार सहित अन्य पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम के अंत में इन सभी स्वयंसेवकों ने एक 'ओपन सेशन' रखा, जिसमें गांव के बुजुर्गों की व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याएं भी सुनीं और उन्हें उचित कानूनी समाधान के रास्ते सुझाए। ग्राम ठाक-जट के निवासियों और वरिष्ठ नागरिकों ने प्राधिकरण की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के शिविरों से न केवल बुजुर्गों में आत्मविश्वास पैदा होगा, बल्कि समाज में उनके प्रति एक सकारात्मक डर और सम्मान का भाव भी दोबारा स्थापित होगा।
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