खबरीलाल टीम
गाजियाबाद/मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में टीपीनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली बीए की छात्रा ललिता गौतम की निर्मम हत्या का मामला अब प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। बेटी को न्याय दिलाने के लिए दर-दर भटक रहे पीड़ित परिवार ने शनिवार सुबह गाजियाबाद स्थित लोक निर्माण विभाग (PWD) गेस्ट हाउस में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक अहम और भावुक मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री ने इस संवेदनशील मामले में खुद संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे तौर पर सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं।READ ALSO:-रिश्तों का कत्ल: मेरठ में खौफनाक साजिश, 20 लाख के बीमे के लिए पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को सांप से डसवाया

 

CM योगी ने परिवार की सुनी व्यथा, 25 मिनट तक चली गहन बातचीत

शनिवार की सुबह जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद के दौरे पर थे, तब मेरठ के प्रभारी मंत्री असीम अरुण पीड़ित परिवार को लेकर सीएम से मिलने PWD गेस्ट हाउस पहुंचे। इस दौरान मेरठ के एमएलसी (MLC) धर्मेंद्र भारद्वाज भी परिवार के साथ मौजूद रहे।

 

मुख्यमंत्री और ललिता गौतम के परिवार (पिता और चाचा) के बीच लगभग 25 मिनट तक लंबी और गहन बातचीत हुई। इस दौरान:

 

  • घटनाक्रम की पूरी जानकारी ली: सीएम योगी ने एक अभिभावक की तरह पीड़ित परिवार से पूरी घटना की विस्तार से जानकारी ली और उनकी हर व्यथा को ध्यान से सुना।
  • कार्रवाई से संतुष्टि पर सवाल: मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर परिवार से पूछा कि क्या वे अब तक पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और जांच से संतुष्ट हैं या नहीं?
  • अधिकारियों से लिया फीडबैक: मीटिंग के दौरान ही सीएम योगी ने मेरठ मंडल के कमिश्नर और डीआईजी (DIG) कलानिधि नैथानी से पुलिस की अब तक की गई जांच और आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा।

 

मुख्यमंत्री कोष से 5 लाख की सहायता और आवास का ऐलान

पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति और उनके दर्द को समझते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा दिल दिखाते हुए त्वरित सहायता की घोषणा की।

 

  • सीएम योगी ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि मृतका ललिता के पिता और चाचा को तत्काल प्रभाव से सरकारी योजना के तहत आवास (मकान) मुहैया कराया जाए।
  • इसके साथ ही, मुख्यमंत्री राहत कोष (CM Fund) से पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने की भी घोषणा की गई।
  • सीएम ने परिवार को आश्वस्त करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि "इस जघन्य हत्याकांड में शामिल कोई भी दोषी किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पूरी तरह से आपके साथ खड़ी है।"

 

राजनीतिक गलियारों में भी गरमाया मुद्दा: अखिलेश यादव ने कसा था तंज

ललिता गौतम हत्याकांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि विपक्ष ने इसे लेकर सरकार और यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर जमकर निशाना साधा है। सीएम योगी से मुलाकात से ठीक पहले, 11 जुलाई को ललिता गौतम के परिवार ने समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी।

अखिलेश यादव ने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा था कि उनकी बेटी को हर हाल में न्याय मिलेगा। उन्होंने वादा किया कि यदि सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अखिलेश ने अपनी तरफ से परिवार को 2 लाख रुपये का चेक भी सौंपा था।

 

SSP मेरठ पर अखिलेश का सीधा प्रहार: इस दौरान अखिलेश यादव ने मेरठ के एसएसपी (SSP) अविनाश पांडेय पर तीखा तंज कसा था। उन्होंने हाल ही में हुए लाठीचार्ज और थप्पड़ कांड का जिक्र करते हुए कहा, "जिस पुलिस से आम जनता न्याय की उम्मीद करती है, आज उसी के बड़े अधिकारी अन्याय और अहंकार के थप्पड़ जनता के गाल पर सरेआम मार रहे हैं। यह वायरल वीडियो यूपी पुलिस की गरिमा और छवि को खंडित कर रहा है। ऐसे कृत्यों से आम जनता के प्रति संवेदनशील रहने वाले अन्य पुलिसकर्मी भी खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं।"

 

चंद्रशेखर आजाद का 7 दिन का अल्टीमेटम

इससे पूर्व, 10 जुलाई को नगीना से नवनिर्वाचित सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी मेरठ पहुंचकर ललिता के परिजनों से मुलाकात की थी। सांसद चंद्रशेखर ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन के रवैये पर भारी नाराजगी जताते हुए प्रशासन को 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा था कि, "अगर 7 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिला और पुलिस का रवैया नहीं बदला, तो हम लखनऊ की सड़कों पर एक बड़ा जन-आंदोलन करेंगे। इतना ही नहीं, मैं मेरठ की इस बेटी का यह मुद्दा देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा के मानसून सत्र में भी पुरजोर तरीके से उठाऊंगा।"

 

क्या है पूरा घटनाक्रम? जानिए ललिता गौतम हत्याकांड की खौफनाक दास्तान

यह पूरी खौफनाक वारदात करीब दो महीने पहले शुरू हुई थी। टीपीनगर थाना क्षेत्र में रहने वाली और बीए (थर्ड ईयर) में पढ़ने वाली होनहार छात्रा ललिता गौतम 15 मई को अपनी परीक्षा देने के लिए घर से कॉलेज के लिए निकली थी। लेकिन परीक्षा खत्म होने के बाद वह वापस घर नहीं लौटी।

 

गुमशुदगी से लेकर हत्या तक का सफर:

  • 15 मई: ललिता के घर न लौटने पर परेशान परिजनों ने उसी दिन टीपीनगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
  • 17 मई: दो दिन की तलाश के बाद 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उकसिया गांव के एक गन्ने के खेत में ललिता का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
  • परिजनों का आरोप: शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि ललिता के साथ पहले सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने के लिए उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इसके बाद परिजनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया।

 

शक के चलते प्रेमी ने ही ली जान: पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर तुरंत 3 युवकों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर अपनी तफ्तीश तेज कर दी। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना पर पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश को धर दबोचा। पुलिस की कड़ी पूछताछ में अंकुश ने जो सच उगला, वह बेहद चौंकाने वाला था।

 

अंकुश ने अपना जुर्म कबूलते हुए बताया कि उसकी ललिता से पिछले 3 साल से गहरी दोस्ती (प्रेम प्रसंग) थी। लेकिन पिछले कुछ समय से उसे शक होने लगा था कि ललिता फोन पर किसी अन्य युवक से भी बातचीत करती है। इसी शक और जलन (Suspicion and Jealousy) के चलते दोनों के बीच कई बार तीखी बहस और झगड़ा हुआ था। इसी रंजिश को पाले हुए अंकुश ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक खौफनाक साजिश रची और गन्ने के खेत में ले जाकर ललिता को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस मामले में अंकुश के साथ-साथ उसके अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

 

8 जुलाई का वह प्रदर्शन और SSP का थप्पड़ कांड

मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद, न्याय की प्रक्रिया और कुछ अन्य मांगों को लेकर 8 जुलाई को पीड़ित परिजनों और स्थानीय लोगों ने मेरठ कलेक्ट्रेट के बाहर एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मेरठ के एसएसपी (SSP) अविनाश पांडेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

 

इसी दौरान हालात बिगड़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, आरोप है कि एसएसपी ने अपना आपा खो दिया और प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों को सरेआम थप्पड़ जड़ दिए। इस घटना के तुरंत बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया और उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर से खदेड़ दिया। इस थप्पड़ कांड और लाठीचार्ज के वीडियो ने पूरे प्रदेश में बवाल मचा दिया, जिसने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का एक बड़ा मौका दे दिया।

 

अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीधे हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि ललिता गौतम के परिवार को न केवल त्वरित न्याय मिलेगा, बल्कि पुलिस प्रशासन भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाते हुए दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाएगा। पूरे मेरठ की जनता की निगाहें अब इस मामले में होने वाली आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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