लखनऊ/कानपुर: उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ धार्मिक पोस्टर विवाद अब "I Love Muhammad" के जवाब में "I Love Mahadev" अभियान के रूप में तेजी से पूरे देश में फैल चुका है। यह विवाद कानपुर की एक स्थानीय घटना से शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर एक बड़े पोस्टर वॉर (Poster War) में बदल गया है, जिसमें अब तक 24 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।READ ALSO:-लखनऊ में 9वीं के छात्र पर FIR, स्कूल से भी सस्पेंड; सोशल मीडिया पर धर्म विशेष पर की थी आपत्तिजनक पोस्ट
विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कानपुर के रावतपुर गाँव में बारावफात (ईद मिलाद-उन-नबी) के जुलूस के दौरान हुई।
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मुस्लिम पक्ष: जुलूस के रास्ते में "आई लव मुहम्मद" का एक लाइट बोर्ड लगाया गया था, जिसे मुस्लिम समुदाय पैगंबर के प्रति अपनी भक्ति की अभिव्यक्ति बता रहा था।
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हिंदू पक्ष: स्थानीय हिंदू समूहों ने इस पर आपत्ति जताई और इसे एक "नई परंपरा" करार दिया, क्योंकि ऐसे लाइट बोर्ड आमतौर पर रामनवमी जैसे हिंदू त्योहारों में इस्तेमाल किए जाते हैं।
आरोपों के बढ़ने के साथ तनाव बढ़ गया। हिंदुओं ने पोस्टर फाड़ने का आरोप लगाया, जबकि मुसलमानों ने अकारण आक्रामकता का आरोप लगाया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर बोर्ड हटा दिया।
पुलिस कार्रवाई और बढ़ते जुलूस
9 सितंबर को, इस मामले में 24 व्यक्तियों (9 नामजद और 15 अज्ञात) के खिलाफ FIR दर्ज की गई, जिसमें दुश्मनी को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोप लगाए गए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामला केवल नारे तक ही सीमित नहीं था।
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विरोध: कई मुस्लिम संगठनों ने इस पुलिस कार्रवाई को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए आक्रोश व्यक्त किया।
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बढ़ी प्रतिक्रिया: इसके बाद, बरेली में इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने 19 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद लोगों से घरों पर "आई लव मुहम्मद" के पोस्टर लगाने का आग्रह किया। मुंबई, हैदराबाद, नागपुर और उत्तराखंड के काशीपुर जैसे शहरों में भी इसी समर्थन में जुलूस और रैलियाँ निकाली गईं, जिससे विवाद तेजी से फैला।
सोशल मीडिया पर 'आई लव महादेव' का जवाब
मुस्लिम समुदाय के अभियान के जवाब में, हिंदुओं ने ऑनलाइन एक जोशीला जवाबी अभियान शुरू कर दिया।
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ट्रेंडिंग हैशटैग: #ILoveMahadev और #ILoveRam जैसे हैशटैग सोशल साइट X पर छा गए हैं। हजारों लोगों ने भगवान शिव, राम, हनुमान और गणेश की तस्वीरें उत्साहपूर्ण घोषणाओं के साथ पोस्ट कीं।
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एकता का आह्वान: कई यूजर्स ने "हर हर महादेव" और "जय श्री राम" के नारों के साथ "सनातनी और हिंदू एकता दिखाने" का आह्वान किया।
राजनीतिक बयानबाजी और हिंदू संगठनों की चेतावनी
इस विवाद में अब राजनीतिक हस्तियाँ भी कूद पड़ी हैं:
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ओवैसी का समर्थन: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 'I Love Muhammad' के नारे का बचाव करते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित है और इसे कहना कोई अपराध नहीं है।
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नरेंद्रानंद सरस्वती का नेतृत्व: काशी के सुमेरु पीठाधीश्वर नरेंद्रानंद सरस्वती ने 'I Love Mahadev' अभियान की शुरुआत की। उन्होंने आरोप लगाया कि 'आई लव मोहम्मद' कैंपेन से एक समुदाय विशेष के लोग समाज को डराना और सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सौ करोड़ सनातनियों को डराने की कोशिश हुई तो "पहले रोका जाएगा और नहीं माने तो ठोका जाएगा।"
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मंत्री राजभर की धमकी: योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि 'क्रिया की प्रतिक्रिया तो होगी।' उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग एजेंडा चलाकर कानून-व्यवस्था को चुनौती देंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अब एक स्थानीय झड़प से निकलकर धार्मिक अभिव्यक्ति और भक्ति पर एक अखिल भारतीय प्रतियोगिता में बदल चुका है, जिस पर पुलिस और प्रशासन कड़ी नजर बनाए हुए हैं।