मथुरा (Khabreelal.com विशेष रिपोर्ट): कान्हा की नगरी मथुरा और श्री गिरिराज महाराज की तलहटी गोवर्धन का नाम सुनते ही हर कृष्ण भक्त का हृदय श्रद्धा और उल्लास से भर उठता है। यूं तो ब्रज भूमि में साल भर उत्सवों और मेलों का दौर चलता रहता है, लेकिन गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गोवर्धन में लगने वाले 'मुड़िया पूर्णिमा मेले' (Mudiya Purnima Mela) का महत्व अपने आप में अद्वितीय है। इसे ब्रज का सबसे बड़ा मेला या 'आस्था का कुंभ' भी कहा जाता है। इस वर्ष यह विश्व प्रसिद्ध मेला 23 जुलाई से 30 जुलाई तक आयोजित होने जा रहा है।READ ALSO:-मेरठ कलेक्ट्रेट पर 'खाकी' का तांडव: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे दलितों पर चटकाई लाठियां, शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने CM से शिकायत की चेतावनी दी
मेले में देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु गोवर्धन पहुंचकर गिरिराज जी की सात कोसी परिक्रमा (21 किलोमीटर) लगाते हैं। बीते वर्ष इस मेले में लगभग डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई थी, और इस बार प्रशासन को उम्मीद है कि यह आंकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा। इतने विशाल जनसैलाब को सुरक्षित और सुगम तरीके से गोवर्धन तक पहुंचाने और वापस लाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) और भारतीय रेलवे ने अपनी कमर कस ली है। दोनों ही विभागों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक 'मेगा प्लान' तैयार किया है।
यूपी रोडवेज का मास्टर प्लान: बेड़े में शामिल होंगी 1100 बसें मुड़िया मेले के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। श्रद्धालुओं को गोवर्धन पहुंचने और परिक्रमा पूरी करने के बाद वापस लौटने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए यूपी रोडवेज ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
ईटीवी भारत से विशेष बातचीत के दौरान आगरा परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) बीपी अग्रवाल ने परिवहन निगम की तैयारियों का पूरा खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी मुड़िया पूर्णिमा मेले को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। मथुरा और गोवर्धन में आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी सुविधा को देखते हुए रोडवेज ने इस बार 1100 बसों का एक विशाल बेड़ा तैयार किया है। इनमें से 1000 बसें लगातार श्रद्धालुओं को ढोने का काम करेंगी, जबकि 100 रोडवेज बसों को इमरजेंसी या अतिरिक्त भीड़ बढ़ने की स्थिति के लिए रिजर्व (Reserve) में रखा जाएगा।
कहां से आएंगी बसें और कैसे होगा संचालन? इतनी बड़ी संख्या में बसों का प्रबंध केवल मथुरा या आगरा डिपो से संभव नहीं है। क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि इस महाआयोजन के लिए आगरा परिक्षेत्र (Agra Region) की 250 रोडवेज बसें लगाई जाएंगी, जबकि उत्तर प्रदेश के अन्य छह प्रमुख परिक्षेत्रों से 750 बसें मुड़िया मेले के लिए मंगवाई जा रही हैं।
प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए, जिन छह परिक्षेत्रों से बसें आ रही हैं, वहां के एक-एक सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (ARM) भी मेला ड्यूटी के लिए विशेष तौर पर मथुरा बुलाए गए हैं। सुरक्षा और लगातार संचालन सुनिश्चित करने के लिए हर बस पर दो-दो चालकों (Drivers) की तैनाती की जाएगी, ताकि थकान के कारण कोई दुर्घटना न हो। मेले के दौरान परिवहन निगम के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी 24 घंटे 'राउंड द क्लॉक' रहेगी।
छह जोन में बंटा मेला क्षेत्र, 24 घंटे दौड़ेगी 'क्यूआरटी' (QRT) श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते अक्सर जाम और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे निपटने के लिए रोडवेज ने पूरे मेला क्षेत्र को व्यवस्था की दृष्टि से छह अलग-अलग जोन (Zones) में बांट दिया है। प्रत्येक जोन की कमान एक एआरएम (ARM) रैंक के अधिकारी के हाथों में रहेगी और उनके साथ आधा दर्जन से अधिक स्टाफ के लोग चौबीसों घंटे मुस्तैद रहेंगे।
इसके साथ ही, मेला क्षेत्र में किसी भी तरह की तकनीकी समस्या, बस के ब्रेकडाउन या भीषण जाम की स्थिति से तुरंत निपटने के लिए इंटरसेप्टर वाहन और त्वरित प्रतिक्रिया बल (QRT - Quick Response Team) की विशेष टीमें तैनात रहेंगी। सूचना मिलते ही ये टीमें तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालेंगी।
किराया और रूट प्लान: जानें कहां से मिलेगी बस श्रद्धालुओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उन्हें बस कहां से मिलेगी और रूट क्या होगा। रोडवेज प्रशासन ने इसे बेहद सरल और व्यवस्थित कर दिया है:
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बस मिलने का स्थान: ट्रेन से मथुरा जंक्शन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को गोवर्धन जाने के लिए रोडवेज बसें स्टेशन की 'सेकेंड एंट्री' (Second Entry) से आसानी से मिल जाएंगी।
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वापसी का स्थान: गिरिराज महाराज के दर्शन और परिक्रमा पूरी करने के बाद भक्तों को मथुरा वापस लाने वाली बसें उन्हें स्टेशन की 'धौली प्याऊ' की ओर स्थित 'थर्ड एंट्री' (Third Entry) पर उतारेंगी, ताकि आवाजाही में कोई टकराव न हो।
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रूट और किराया: इस साल मथुरा से गोवर्धन तक का एक तरफ का किराया मात्र 50 रुपये निर्धारित किया गया है। ट्रैफिक को वन-वे रखने के लिए मथुरा से गोवर्धन जाने वाली बसें 'अडींग' होकर जाएंगी, जबकि वापसी में सभी बसें 'सौंख' के रास्ते मथुरा लौटेंगी।
रेलवे का एक्शन प्लान: चलेंगी मेला स्पेशल ट्रेनें, बढ़ेंगे टिकट काउंटर यूपी रोडवेज के साथ-साथ भारतीय रेलवे ने भी मुड़िया पूर्णिमा मेले के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस साल श्रद्धालुओं की अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों का विस्तार मथुरा जंक्शन तक करेगा।
इसके अलावा, विभिन्न रूटों से श्रद्धालुओं को सीधे मथुरा लाने के लिए 'मेला स्पेशल ट्रेनें' (Mela Special Trains) भी चलाई जाएंगी। भीड़ के दबाव को कम करने के लिए मथुरा जंक्शन स्टेशन पर अतिरिक्त टिकट काउंटर (Extra Ticket Counters) खोले जा रहे हैं। स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रेलवे अधिकारियों की ड्यूटी 'राउंड द क्लॉक' (24x7) लगाई जाएगी। इसके साथ ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के जवानों की संख्या में भारी इजाफा किया जाएगा।
राजस्व का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद मुड़िया पूर्णिमा मेला न केवल आस्था का बड़ा केंद्र है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। यूपीएसआरटीसी (UPSRTC) के अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल रोडवेज की बसों ने मेले की अवधि में करीब पांच करोड़ रुपये का शानदार राजस्व अर्जित किया था। इस साल श्रद्धालुओं की संभावित वृद्धि को देखते हुए, परिवहन निगम को उम्मीद है कि राजस्व का यह आंकड़ा पिछले साल के रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ देगा।
मथुरा प्रशासन, यूपी रोडवेज और रेलवे की इन चाक-चौबंद तैयारियों को देखकर यह स्पष्ट है कि इस बार गोवर्धन में आने वाले श्रद्धालुओं को यातायात की बेहतरीन सुविधाएं मिलने वाली हैं। 23 से 30 जुलाई तक ब्रज भूमि एक बार फिर से 'राधे-राधे' और 'गिरिराज महाराज की जय' के जयकारों से गुंजायमान होने वाली है।