दिल्ली से सटे गाजियाबाद (Ghaziabad) में अपराध और अपराधियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस का 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में शनिवार देर रात गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र में पुलिस और शातिर ड्रग तस्करों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ (Police Encounter) हो गई। इस खौफनाक एनकाउंटर में पुलिस ने अपनी जान पर खेलकर तीन खूंखार तस्करों को गिरफ्तार किया है। अपराधियों के पास से भारी मात्रा में ड्रग्स (नशीला पदार्थ) और अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई एनसीआर (NCR) में फैले ड्रग्स के काले कारोबार पर पुलिस की एक बहुत बड़ी चोट मानी जा रही है।READ ALSO:-बड़ा बदलाव! 1 अप्रैल 2027 से पेट्रोल-डीजल कारें खरीदना होगा महंगा, EV और हाइब्रिड पर होगी बंपर बचत, जानिए सरकार का नया मास्टरप्लान
आइए, इस पूरी पुलिस कार्रवाई, मुठभेड़ की खौफनाक रात और इस ड्रग्स सिंडिकेट के काले चिट्ठे को विस्तार से समझते हैं।
आधी रात का वक्त और खुफिया इनपुट: कैसे बिछाया गया जाल?
एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में पिछले कुछ समय से नशे के कारोबारियों की गतिविधियां बढ़ने की सूचनाएं मिल रही थीं। गाजियाबाद पुलिस लगातार इन तस्करों की धरपकड़ के लिए जाल बिछा रही थी। इसी बीच शनिवार की रात पुलिस को एक बड़ी कामयाबी का सुराग मिला।
एसीपी (कोतवाली) उपासना पांडे ने इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार रात करीब 2 बजे का वक्त था। विजयनगर पुलिस और सर्विलांस टीम (Surveillance Team) की संयुक्त गश्त चल रही थी, तभी मुखबिर से एक बेहद पुख्ता और खुफिया सूचना मिली। सूचना यह थी कि एक बिना नंबर प्लेट की स्कूटी पर सवार होकर तीन संदिग्ध तस्कर भारी मात्रा में ड्रग्स की खेप लेकर किसी बड़ी डिलीवरी के लिए जा रहे हैं।
इस इनपुट के मिलते ही पुलिस की टीमें पूरी तरह से अलर्ट हो गईं। रणनीति के तहत इंदिरापुरम से हिंडन बैराज (Hindon Barrage) जाने वाले सुनसान और संवेदनशील मार्ग पर सघन चेकिंग अभियान (Barricading and Checking) शुरू कर दिया गया।
पुश्ता रोड पर फिल्मी स्टाइल में हुआ एनकाउंटर
रात के सन्नाटे में हिंडन बैराज के पास पुलिस की कई टीमें सादे और वर्दी दोनों लिबासों में तैनात थीं। कुछ ही देर में पुलिस को इंदिरापुरम की तरफ से एक तेज रफ्तार स्कूटी आती हुई दिखाई दी, जिस पर तीन लोग सवार थे। मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत टॉर्च और बैरिकेड्स के सहारे उस संदिग्ध स्कूटी को रुकने का इशारा किया।
लेकिन पुलिस को सामने देखते ही तस्करों के होश उड़ गए। रुकने की बजाय, उन्होंने स्कूटी की रफ्तार और तेज कर दी और पुलिस को चकमा देते हुए पुश्ता रोड (Pushta Road) की ओर भागने का प्रयास किया।
खौफनाक मंजर और गोलियों की तड़तड़ाहट:
जब विजयनगर पुलिस ने जान की परवाह न करते हुए तस्करों का पीछा करना शुरू किया, तो हड़बड़ाहट और तेज रफ्तार के कारण तस्करों की स्कूटी अनियंत्रित होकर सड़क पर बुरी तरह फिसल गई। स्कूटी गिरते ही तीनों अपराधी अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। खुद को चारों तरफ से घिरता देख, उन्होंने अपनी कमर से अवैध तमंचे निकाल लिए और सीधे पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग (Firing on Police) शुरू कर दी।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई और अपराधियों का पतन
तस्करों द्वारा की गई इस अचानक फायरिंग से पुलिस टीम बाल-बाल बची। इसके बाद यूपी पुलिस ने अपने चिर-परिचित अंदाज में मोर्चा संभाला। पुलिस ने अपराधियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन जब वे नहीं माने और लगातार गोलियां चलाते रहे, तो पुलिस को भी आत्मरक्षा (Self Defense) में अपनी सर्विस रिवॉल्वर से जवाबी फायरिंग करनी पड़ी।
रात के अंधेरे में गोलियों की इस क्रॉस फायरिंग में पुलिस की गोलियां सीधे अपराधियों के पैरों को चीरती हुई निकल गईं:
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मास्टरमाइंड अनस (Anas): पुलिस की सटीक जवाबी कार्रवाई में इस गैंग के सरगना अनस के दोनों पैरों में गोली लगी और वह वहीं ढेर हो गया।
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दिलशाद (Dilshad): इसके दूसरे साथी दिलशाद के एक पैर में गोली लगी और वह भी भागने में नाकाम रहा।
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असलम (Aslam): गैंग का तीसरा साथी असलम अंधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस के जांबाज जवानों ने उसे कई किलोमीटर तक दौड़ाकर (Foot Chase) दबोच लिया।
मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर ली और घायल अनस और दिलशाद को आनन-फानन में इलाज के लिए गाजियाबाद के जिला अस्पताल (District Hospital) में कड़ी सुरक्षा के बीच भर्ती कराया गया है।
बरामदगी का विवरण: 21 किलो मौत का सामान और हथियार
इस पूरे ऑपरेशन के बाद जब पुलिस ने आरोपियों की स्कूटी और उनकी तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए। एनसीआर के युवाओं की रगों में घोलने के लिए यह मौत का भारी भरकम सामान ले जाया जा रहा था।
घटनास्थल से पुलिस को निम्नलिखित चीजें बरामद हुई हैं:
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क्र.सं.
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बरामद सामग्री का नाम
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विवरण
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1
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अवैध ड्रग्स (Narcotics)
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कुल 21 किलोग्राम (भारी मात्रा में गांजा/अन्य नशीले पदार्थ)
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2
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वाहन
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बिना नंबर प्लेट की एक तेज रफ्तार स्कूटी
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3
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हथियार (Weapons)
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2 अवैध देसी तमंचे (जिनसे पुलिस पर फायरिंग की गई)
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4
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कारतूस
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4 खाली खोखे (फायर किए गए कारतूस) और कुछ जिंदा कारतूस
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छत्तीसगढ़ से एनसीआर तक फैला है नशे का यह इंटरनेशनल नेक्सस
गिरफ्तारी के बाद पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अपराधियों ने कबूल किया है कि उनके पास से बरामद की गई 21 किलो ड्रग्स की यह खेप छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से तस्करी करके लाई गई थी।
सप्लाई चेन का पर्दाफाश:
यह गिरोह बहुत ही शातिराना तरीके से काम करता था। ये लोग दूसरे राज्यों (विशेषकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के रास्ते) से थोक के भाव में सस्ते दामों पर ड्रग्स की बड़ी खेप लाते थे। इसके बाद इस खेप को छोटी-छोटी पुड़ियों में बांटकर दिल्ली, गाजियाबाद, हापुड़ और नोएडा समेत पूरे एनसीआर (Delhi-NCR) के विभिन्न इलाकों में ऑन-डिमांड (मांग के अनुसार) सप्लाई करते थे। इनका मुख्य निशाना कॉलेज जाने वाले युवा, पीजी में रहने वाले छात्र और रेव पार्टियां होती थीं।
कौन हैं ये अपराधी? (मुख्य आरोपी पर दर्ज हैं 18 मुक़दमे)
पुलिस की तफ्तीश में इन अपराधियों का लंबा चौड़ा आपराधिक इतिहास (Criminal History) सामने आया है, जो यह साबित करता है कि ये कोई छोटे-मोटे अपराधी नहीं, बल्कि पेशेवर क्रिमिनल हैं।
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अनस (गैंग लीडर): यह गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत अर्थला पीर के पास का निवासी है। एसीपी कोतवाली के मुताबिक, अनस इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। इसके ऊपर लूट, छिनैती और आर्म्स एक्ट के 18 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं। यह शातिर अपराधी पहले चेन स्नेचिंग (चेन लूट) के बड़े मामलों में भी जेल की हवा खा चुका है और जेल से छूटने के बाद इसने ड्रग्स का बड़ा सिंडिकेट बना लिया।
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दिलशाद और असलम (सहयोगी): ये दोनों आरोपी गाजियाबाद के टीलामोड़ थाना क्षेत्र के फारुखनगर इलाके के रहने वाले हैं। ये अनस के इशारों पर काम करते थे और माल की डिलीवरी का जिम्मा संभालते थे।
आगे की जांच: पुलिस के रडार पर हैं 'सफेदपोश' तस्कर
भले ही पुलिस ने इन तीन गुर्गों को पकड़ लिया है, लेकिन गाजियाबाद पुलिस इसे अपनी अंतिम जीत नहीं मान रही है। एसीपी उपासना पांडे और उनकी सर्विलांस टीम अब इस मामले की जड़ तक पहुंचने में जुट गई है।
पुलिस अब मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर अपनी जांच केंद्रित कर रही है:
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फंडिंग और सोर्स: छत्तीसगढ़ में बैठा वह कौन सा बड़ा माफिया है, जो इतनी भारी मात्रा में ड्रग्स एनसीआर में भेज रहा है?
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लोकल डिस्ट्रीब्यूटर्स: एनसीआर के किन-किन इलाकों, पबों या कॉलेजों में यह खेप सप्लाई होने वाली थी? इनके स्थानीय पेडलर्स कौन हैं?
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संपत्ति की जब्ती: ड्रग्स के इस काले कारोबार से इन अपराधियों ने जो अकूत संपत्ति बनाई है, उसे चिन्हित कर एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत कुर्क (Seize) करने की तैयारी की जा रही है।
गाजियाबाद पुलिस की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई ने एनसीआर के बड़े ड्रग्स नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। आधी रात को अपनी जान जोखिम में डालकर 21 किलो ड्रग्स पकड़ना और पुलिस पर गोली चलाने वाले अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाना, उत्तर प्रदेश पुलिस के मजबूत इरादों को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस की रडार में और कौन-कौन से सफेदपोश चेहरे बेनकाब होते हैं।


