मेरठ/गाजियाबाद (24 मई, 2026): उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और आस-पास के क्षेत्रों में चल रहे काले कारोबार और टैक्स चोरी (Tax Evasion) के खिलाफ केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में अवैध रूप से संचालित हो रही एक पान मसाला और तंबाकू पैकिंग फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। इस छापेमारी में लगभग 14 करोड़ 56 लाख रुपये के भारी-भरकम जीएसटी (GST) और सेस (CESS) घोटाले का खुलासा हुआ है। मेरठ के न्यायालय सिविल जज (जूनियर डिवीजन) / त्वरित न्यायालय एवं रिमांड मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में मेरठ जिला कारागार भेज दिया है।READ ALSO:-बिजनौर में भयंकर हीटवेव (लू) का अलर्ट: 27 मई तक झुलसाने वाली गर्मी का प्रकोप! DM जसजीत कौर ने जारी की विस्तृत एडवाइजरी
इस बड़े आर्थिक अपराध ने जांच एजेंसियों और प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। यह मामला दर्शाता है कि किस तरह से सरकार की आँखों में धूल झोंककर बिना किसी रजिस्ट्रेशन के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, छापेमारी की कार्रवाई और न्यायालय के फैसले को विस्तार से समझते हैं।
कैसे हुआ इस बड़े आर्थिक अपराध का खुलासा?
कमिश्नरेट CGST गाजियाबाद की इंटेलिजेंस टीम को पिछले कुछ समय से गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र के आस-पास रिहायशी और गैर-व्यावसायिक संपत्तियों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर कर अपवंचन (Tax Evasion) किया जा रहा है। सूचना थी कि कुछ लोग बिना किसी सरकारी पंजीकरण (GST Registration) के, अनरजिस्टर्ड मशीनों का उपयोग करके कच्चे माल से पान मसाले के पाउच और तंबाकू तैयार कर रहे हैं और उन्हें ब्लैक मार्केट में खपा रहे हैं।
इस पक्की सूचना के आधार पर, CGST विभाग के अधीक्षक (Superintendent) श्री प्रशांत मोहन शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
साहिबाबाद के 'विन्द्रावन गार्डन' में रेड
दिनांक 22 मई, 2026 को शाम करीब 6:00 बजे CGST की टीम ने पूरे दलबल के साथ मकान संख्या 17ए, विन्द्रावन गार्डन, साहिबाबाद (गाजियाबाद) पर अचानक छापेमारी (Search Operation) की। टीम जब परिसर के अंदर दाखिल हुई, तो वहाँ चल रहे अवैध कारोबार को देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। बाहर से शांत दिखने वाले इस मकान के अंदर एक पूरी फैक्ट्री संचालित की जा रही थी।
"बिना किसी लाइसेंस और बिना किसी जीएसटी भुगतान के, यह अवैध फैक्ट्री रातों-रात बाजार में लाखों रुपये का माल सप्लाई कर रही थी, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुँच रहा था।"
छापेमारी में क्या-क्या हुआ बरामद? (Recovery & Seizure)
विभागीय अधिकारियों ने मौके पर ही जब्ती की कार्रवाई शुरू की और एक विस्तृत पंचनामा (Seizure Memo) तैयार किया। सर्च ऑपरेशन के दौरान परिसर से निम्नलिखित चीजें भारी मात्रा में बरामद हुईं:
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तैयार माल: भारी मात्रा में 'सिटी' (City) ब्रांड का पान मसाला और 'ए० जे० 07' (AJ 07) ब्रांड का जर्दा पैकिंग तंबाकू।
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मशीनरी: मौके पर दो अत्याधुनिक पाउच पैकिंग मशीनें और एक सीलिंग मशीन पाई गई, जो बिना किसी सरकारी रिकॉर्ड के चल रही थीं।
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कच्चा माल (Raw Material): फैक्ट्री के गोदाम में पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला भारी मात्रा में कच्चा माल (सुपारी, कत्था, तंबाकू के पत्ते और प्लास्टिक रोल्स) बरामद किया गया।
इस जब्ती ने स्पष्ट कर दिया कि यह कोई छोटा-मोटा कारोबार नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित सिंडिकेट था जो प्रतिदिन सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहा था।
कौन हैं 14 करोड़ की टैक्स चोरी के मुख्य आरोपी?
CGST टीम की कार्रवाई के बाद इस काले कारोबार के पीछे के दो मुख्य सूत्रधारों को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी दिल्ली के निवासी हैं और आपस में पार्टनरशिप में यह अवैध फैक्ट्री चला रहे थे।
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क्र.सं.
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आरोपी का नाम
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पिता का नाम
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निवासी (पता)
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1.
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संचित सेठ
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प्रवीन सेठ
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देहली जल बोर्ड लाल क्वाटर एफ-1/5, थाना कृष्णा नगर, पूर्वी दिल्ली
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2.
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मोहसिन खान
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अय्युब अली
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मकान नं. 30 यू/जी/एफ पूर्वी एनक्लेव, थाना लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली
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गिरफ्तारी का विवरण:
सर्च की कार्रवाई समाप्त होने के बाद अधिकारियों ने दोनों आरोपियों को 23 मई 2026 को पेश होने के लिए स्पॉट समन (Spot Summon) जारी किया था। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों ने खुद ही विभागीय अधिकारियों के साथ चलने की पेशकश की। इसके बाद, सी.जी.एस.टी. भवन (हापुड़ चुंगी, गाजियाबाद) में उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए गए। पूछताछ के बाद, 23 मई 2026 को दोपहर 1:35 बजे संचित सेठ को और 1:40 बजे मोहसिन खान को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
न्यायालय में पेशी: अभियोजन बनाम बचाव पक्ष
गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर, 23 मई 2026 की शाम 6:00 बजे दोनों आरोपियों को मेरठ स्थित न्यायालय सिविल जज (जू०डी०) त्वरित न्यायालय / रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। (वाद संख्या: 2117/2026)।
अभियोजन (CGST विभाग) की दलीलें:
विवेचक श्री प्रशांत मोहन शर्मा ने न्यायालय को बताया कि दोनों आरोपियों ने एच.एस.एन. (HSN) एक्ट की धारा-13 और अन्य प्रावधानों के तहत अपने बयानों में यह स्वीकार किया है कि वे पार्टनर हैं और अनरजिस्टर्ड मशीनों से काम कर रहे थे। विभाग ने कमिश्नर द्वारा जारी 'रीजन टू बिलीव' (Reason to Believe), रिकवरी मीमो, पंचनामे और सभी संबंधित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए। विशेष अभियोजन अधिकारी (Special Public Prosecutor) श्री लक्ष्य कुमार सिंह और उनकी सहयोगी अधिवक्ता श्रीमती वंदना सिंह ने तर्क दिया कि यह 14 करोड़ 56 लाख रुपये का एक गंभीर आर्थिक अपराध (Economic Offence) है, इसलिए विस्तृत पूछताछ और आगे की रिकवरी के लिए आरोपियों की 14 दिन की रिमांड मंजूर की जानी चाहिए।
बचाव पक्ष (Defense) का तर्क:
आरोपियों के विद्वान अधिवक्ताओं ने रिमांड का कड़ा विरोध किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि:
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आरोपियों को दुर्भावनापूर्ण तरीके और रंजिशन (निजी दुश्मनी) इस झूठे मामले में फंसाया गया है।
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वे समाज के न्यायप्रिय और शांतिपूर्ण नागरिक हैं, और उनकी यह गिरफ्तारी पूरी तरह से अवैध है।
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आरोपियों से लिए गए बयान दबाव में लिए गए हो सकते हैं और वे कानूनी रूप से ग्राह्य (Admissible) नहीं हैं।
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यह अपराध 7 वर्ष से कम सजा के प्रावधान वाला है और पत्रावली पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे सीधे तौर पर अपराध साबित होता हो। इसलिए रिमांड की याचिका को खारिज कर उन्हें जमानत दी जाए।
न्यायालय का सख्त रुख और अंतिम आदेश (Court Order)
रिमांड मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनी और पत्रावली (केस डायरी) में उपलब्ध सभी प्रपत्रों और साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन किया।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि:
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समस्त प्रपत्रों के अवलोकन से यह साफ पता चलता है कि अभियुक्तगण पर लगभग 14 करोड़ 56 लाख रुपये के भारी कर अपवंचन का गंभीर आरोप है।
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गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी ढांचे के भीतर की गई है। गिरफ्तारी के पश्चात अरेस्ट मेमो और कारण सहित सभी दस्तावेजों की प्रतियां 23.05.2026 को ही आरोपियों को उपलब्ध करा दी गई थीं।
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प्रकरण की विवेचना अभी प्रचलित (Ongoing) है और आगे की जांच में इस सिंडिकेट से जुड़े कई नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
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न्यायालय की टिप्पणी: "अभियुक्तगण द्वारा एक अत्यंत गंभीर आर्थिक अपराध कारित किया गया है। इस प्रारंभिक स्तर पर विभाग की ओर से जो साक्ष्य पत्रावली पर प्रस्तुत किए गए हैं, उनके आधार पर अभियुक्तगण का रिमांड उपरोक्त धाराओं में स्वीकार किया जाना पूर्णतया न्यायसंगत और न्यायोचित प्रतीत होता है।"
अंतिम फैसला:
न्यायालय ने बचाव पक्ष की सभी दलीलों को खारिज करते हुए अपना फैसला सुनाया। आदेश के अनुसार, दोनों अभियुक्तों (संचित सेठ और मोहसिन खान) का धारा 187 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (B.N.S.S.) के तहत वारंट बनाकर उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार, मेरठ भेज दिया गया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 05 जून 2026 को मुकर्रर की गई है, जहाँ दोनों आरोपियों को जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (V.C.) के माध्यम से न्यायालय में पेश किया जाएगा।
काले कारोबारियों के लिए एक कड़ा संदेश
गाजियाबाद CGST और मेरठ न्यायालय की यह सख्त कार्रवाई उन सभी कर चोरों के लिए एक खुली चेतावनी है जो अवैध फैक्ट्रियां चलाकर देश के राजस्व को नुकसान पहुँचा रहे हैं। 14.56 करोड़ रुपये की यह चोरी केवल सरकार का नुकसान नहीं है, बल्कि देश के विकास कार्यों में लगने वाले पैसे की लूट है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी इस बात की भी गहराई से पड़ताल करेगी कि इस अवैध पान मसाले और तंबाकू को किन-किन डीलरों और बाजारों में सप्लाई किया जाता था, जिसके बाद कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
अस्वीकरण: यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध प्रेस विज्ञप्तियों, विशेष अभियोजन अधिकारी और आरोपी के वकील द्वारा प्रस्तुत तर्कों, तथा वैध न्यायालय आदेशों पर आधारित है।